आरक्षण मुक्त भारत

Directions Website

आरक्षण मुक्त भारत भारत को आरक्षण से मुक्त बनाना
(1)

क्या बोलती पब्लिक इनका भ्रम टूटेगा की अभी भी तैयारी है see....
29/10/2026

क्या बोलती पब्लिक इनका भ्रम टूटेगा की अभी भी तैयारी है see....

अब बताओ मित्रों वैसे कारण क्या रहा होगा see....
29/10/2026

अब बताओ मित्रों वैसे कारण क्या रहा होगा see....

कुछ चुनावों में हार के बाद अब इनकी भी आंखे खुलने लगी है see.....
29/10/2026

कुछ चुनावों में हार के बाद अब इनकी भी आंखे खुलने लगी है see.....

28/10/2026

MLC चुनावों में BJP की कई जगह हुई करारी हार के पीछे क्या कारण है
(A)
(B) जनता की नाराजगी
(C) विरोधियों का बढ़ता प्रभाव

22/10/2026

सवर्ण आयोग अब देश की मांग है
और आपकी जरूरत

22/10/2026

वीर सावरकर को अपना आदर्श मानने बाली भाजपा अब नहीं रही

18/10/2026

घटना सचमे चिंतनीय हैं
आज की जनरेशन के बारे में सोचता हूं तो मेरी रूह कांप जाती है
मौका मिले तो इस बारे में सोचिएगा जरूर

मेरी उम्र 75 साल है और मैं उत्तरप्रदेश सरकार से रिटायर्ड कर्मचारी हूं...

2 बेटे 2 बेटियों के साथ मेरा भरा परिवार है बेटियों की शादी हो गई है और मेरे बेटे एक पुणे में और एक बैंगलोर में कंपनी में अच्छी नौकरी करते हैं
साधारण तौर पर देखा जाए तो मैं एक सफल इंसान हूं
लेकिन मेरी रूह कांप गई जब मैने खुद को भी एक भीड़ का हिस्सा पाया ।

कुछ दिन पहले मेरे समधी की मृत्यु हुई 70 साल की उम्र में सुबह 5 बजे मेरे घर खबर आई
तो मैं और मेरी पत्नी जल्दी से गए ।

मेरे समधी भी एक अच्छे और संपन्न परिवार से थे वो आपस में 5 भाई थे सभी के 2 2 बेटे और बेटियां थी

पर समधी के केवल एक लड़का था और 2 बेटियां
जब हम वहां पहुंचे तो पाया कुल 60 70 लोग आस पास खड़े हैं

बॉडी की अंतिम तैयारी चल रही थी, क्यों की अंत्यष्टि स्थल घर से काफी दूर था तो एक गाड़ी की गई

जब गाड़ी में जाने की बात आई तो समधी का बेटा मैं और उनके चाचा का छोटा बेटा और एक दोस्त गाड़ी में बैठे

वहां पहुंचने पर 4 लोगो को आवश्यकता थी जो पार्थिव शरीर को सड़क से उठा कर घाट तक ले जा सकें
गाड़ी वाला बोलता है जल्दी करो और जगह जाना है तो उसका हिसाब करके उसे छोड़ा गया ।

अब जब लोगो को फोन किया गया तो कुछ ने उठाया कुछ ने बोला अभी जाम में फसे हैं

वहां सिर्फ 3 लोग थे और एक मैं जो की बुजुर्ग होने के कारण कंधा देने में असमर्थ था ।
कुछ देर इंतजार करने पर एक लड़के को 1000 रुपया देके घाट तक ले आया गया क्यों की 3 लोग पार्थिव शरीर नही उठा सकते थे ।

कुछ समय बाद बाकी लोग भी घाट आना शुरू हुए और जो घर पर 60 लोग थे
वहां आते आते सिर्फ 9 लोग बचे थे,
अब अंतिमसंस्कार का ठेका घाट पर दिया गया

और उसके बाद सभी घर को चल दिए

जो बात मुझे सबसे ज्यादा झंकझोर दी वो समधी की मृत्यु नही थी बल्कि ये की इतना भरा परिवार होते हुए भी सिर्फ 9 लोग घाट तक आए
किराए का कंधा दिया गया

उनके बेटे के अलावा उनके भाई थे जो सभी लगभग 70 से 80 साल के थे

लेकिन उन भाइयों के बेटे कोई मुंबई में कोई पुणे में था
लेकिन किसी ने अपने चाचा के अंतिम समय में आना से ज्यादा जरूरी ऑफिस का काम करना समझा

सभी संपन्न है पैसे वाले हैं भारत की किसी भी कोने में यदि हवाई जहाज से आए तो 3 घंटे से ज्यादा नही लगता।

लेकिन किसी ने भी आना जरूरी नही समझा स्थिति ऐसी है की कंधा देने वाला नही है कोई भी ।

ये बात मुझे अंदर से खाई जा रही है की इस जमाने में लोग पैसे के लिए इतना ज्यादा आतुर हैं की उनके लिए सिर्फ और सिर्फ काम जरूरी है
तरक्की पाने के चक्कर में लोग परिवार को भूल रहे हैं
मुझे याद है जब हमारे समय में किसी की मृत्यु होती थी तो कोई कितना भी जरूरी काम करे उसे छोड़ कर अंतिमसंस्कर में शामिल होता था ।

घर के बेटे और बेटियां इसी बहाने 13 दिन तक घर में रहते थे जिससे लोगो को मानसिक तौर पर सपोर्ट मिलता था ।

लेकिन आज के समय मे ये सब भूल गए हैं की हमारा अस्तित्व हमारे परिवार से है ।

ये बात मुझे अंदर से खाई जा रही थी की क्या आज का यही सत्य है हम सिर्फ नाम के लिए परिवार हैं...
और ये सिर्फ एक 75 वर्षीय बुजुर्ग का ही नज़रिया नहीं, मैं स्वयं भी इसका प्रमाण हूं,,, एक नहीं अनेक ऐसी घटनाये देखी हैं मैंने, जहाँ भरा पूरा परिवार होते हुए भी अंतिम संस्कार को चार कंधे नहीं मिलते और श्मशान भूमि पर 10 लोग नहीं होते... 😥
हाँ यदि कोई नामचीन व्यक्ति खत्म हो जाए तो उपस्थिति दर्शाने को हज़ारो में लोग उमड़ पड़ते हैं... 😏

क्या ये सब सिर्फ मेरे मन का वहम है आप जरूर बताइएगा ???

साभार अमित कंचन

बात तो पते की है see....
15/10/2026

बात तो पते की है see....

धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रहार see...
15/10/2026

धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रहार see...

ये फ़ैसले कुछ देश हित में भी होने चाहिए see...
13/10/2026

ये फ़ैसले कुछ देश हित में भी होने चाहिए see...

Address

Bhopal

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when आरक्षण मुक्त भारत posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share