09/02/2022
अनेक जन्मों में दुष्कृत कर्मों के करने के कारण हम अपने मन की मूल स्थिति को नहीं जान पाते। अकेला मन कैसा है नहीं जान पाते।हम संसार में लगाए रखते हैं या तर्क बुद्धि से अपने को क्षमा करते रहते हैं।आओ हम निर्दयी बन कर मन को अकेला छोड़ने का अभ्यास करें। धन्यवाद ओइम् जी