Rastra Sevika Samiti Greater Noida West & Noida

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हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं!
06/09/2023

हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।
हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं!

चंद्रयान-3 को विदा करने वाली इसरो (ISRO) वैज्ञानिक एन वलारमथी (N Valarmathi) का दो सितंबर की शाम को हार्ट अटैक के कारण च...
04/09/2023

चंद्रयान-3 को विदा करने वाली इसरो (ISRO) वैज्ञानिक एन वलारमथी (N Valarmathi) का दो सितंबर की शाम को हार्ट अटैक के कारण चैनी में निधन हो गया।

भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की लॉन्चिंग के समय काउंटडाउन की आवाज वलारमथी की ही थी।

वह देश के पहले स्वदेशी रडार इमेजिंग सेटेलाइट RISAT की परियोजना निदेशक भी थीं।

प्रभु उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

"संवर्धिनी"-चिंतन भारतीय स्त्री का"बुरहानपुर में इस कार्यक्रम के अंतर्गत उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता श्रीमती शालिनी रतो...
04/09/2023

"संवर्धिनी"-चिंतन भारतीय स्त्री का"
बुरहानपुर में इस कार्यक्रम के अंतर्गत

उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता श्रीमती शालिनी रतोरीया ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत सदैव से विश्वगुरू के रूप में जाना जाता रहा है, इसका श्रेय यहां की पारिवारिक व्यवस्था को जाता है जो आज भी विश्व की सर्वश्रेष्ठ पारिवारिक व्यवस्था है। भारतीय सभ्यता में स्त्री को जो अनिवार्य स्थान दिया गया है उसका दूसरा कोई उदाहरण विश्व की किसी भी सभ्यता में नही दिखाई देता। विश्व की अनेक सभ्यताओं में जहां स्त्री को भोग विलास की वस्तु मात्र समझा जाता है वही हमारी सभ्यता में स्त्री को देवी का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। ईश्वर प्रदत्त भावुकता के कारण नारी त्याग एवं बलिदान के लिए सदैव सहज प्रवृत्त रहती है, इनकी कहानियों से हमारा इतिहास भरा पड़ा है। वर्तमान में भारत को विश्व में प्राप्त महत्वपूर्ण स्थान से हटाने के ध्येय से हमारी पारिवारिक व्यवस्था को तहस नहस करने के लिए भारतीय स्त्री के बारे में षड्यंत्र पूर्वक कई भ्रामक विचार फैलाए जा रहे है, जिसके दुष्परिणाम समाज में व्याप्त विभिन्न बुराइयों के रूप में सामने आ रहे है। इन्ही सब भ्रांतियों को दूर कर स्त्री को समाज में उसका उचित स्थान प्राप्त हो ताकि वह राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सके।
सर्वांगीण विकास के लिए उसके सभी सभी घटकों का विकास आवश्यक है। नारी सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक होने के साथ ही सनातन संस्कृति एवं परंपराओं की संवाहक होती हैं। आदिकाल से भारतीय संस्कृति में उनको काफी ऊंचा स्थान हासिल है। रानी लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, अहिल्या एवं सावित्री जैसी अनेक नारियों ने अपनी क्षमता के बूते समय-समय पर इसको प्रमाणित करने का कार्य किया है। इस समृद्ध एवं गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

यह स्त्री ही है, जिसके कारण समाज में जीवन मूल्य तथा संस्कारों के बीज सुरक्षित हैं। इन जीवन मूल्यों व संस्कारों की वजह से भारत का सारा जग सम्मान करता है। नारी जब संस्कारों का संवर्धन करने में अग्रसर है, तो निश्चय ही उसका स्थान सर्वोपरि है। इसलिए नारी जाति का गौरव अपने-आप में अधिक है।
हिंदवी साम्राज्य की स्थापना करके विदेशी आक्रांताओं को धूलधूसरित करने वाले वीर शिवाजी की माता जीजाबाई ने भी अपना मातृत्व धर्म निभाते हुए अपने बेटे शिवाजी को स्वदेश प्रेम के संस्कार दिए थे।माता जीजाबाई ने अनेक कष्ट सहे अपने पति से वियोग का दुख भी झेला किंतु शिवाजी के लालन-पालन में कोई कमी नहीं आने दी। वे सदा ही अपने पुत्र को वीर व धर्म परायण बनाने का पाठ पढ़ाती थी वह पुत्र को महाभारत और रामायण आदि ग्रंथों की प्रेरक गाथा सुनाती ताकि पुत्र को वीरोचित संस्कार मिल सकें। उनकी वर्षों की तपस्या फलीभूत हुई और महाराज शिवाजी हिंदू राज्य की स्थापना करने में सफल हुए यदि उन्हें जीजाबाई जैसी माँ ना मिली होती तो वे कदाचित यह सब ना कर पाते।

समापन सत्र की वक्ता सुश्री शोभा ताई पैठणकर ने कहा कि आज हम सभी को अपने जीवन में उनके उत्कृष्ट आदर्शों के पद चिन्हों पर चलते हुए भारत को पुनः उसी सर्वोच्च स्थान पर प्रतिस्थापित करना है जो प्राचीन काल में संपूर्ण विश्व में विश्व गुरु के रूप में था। देश के विकास में महिलाओं की भूमिका का महत्वपूर्ण विषय पर चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा आज वर्तमान में अशिक्षा महिलाओं की उन्नति में बहुत बाधक है। शिक्षित महिला एक परिवार ही नहीं कई परिवारों को एक सही दिशा दे सकती है।

शिक्षित महिला ही देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभा सकती है। आज प्रत्येक महिला को शिक्षित होना अति आवश्यक है। समाज जीवन के हर क्षेत्र में महिला अग्रणी भूमिका निभा रही है। चाहे रक्षा क्षेत्र में हो, अंतरिक्ष के वैज्ञानिक क्षेत्र में हो, व्यवसाय में हो, देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में हो और आज देश की सर्वोच्च स्थान पर भी मातृशक्ति विराजमान है।

इस आयोजन में सम्पूर्ण नगर के विभिन्न स्थानों से नगर की मातृशक्ति ने सहभागिता की |

4 सितंबर पुण्य तिथि //हिंदी साहित्य के प्रख्यात लेखक  धर्मवीर भारती।*हिन्दी साहित्य के प्रख्यात लेखक धर्मवीर भारती का जन...
04/09/2023

4 सितंबर पुण्य तिथि //हिंदी साहित्य के प्रख्यात लेखक धर्मवीर भारती।

*हिन्दी साहित्य के प्रख्यात लेखक धर्मवीर भारती का जन्म इलाहाबाद शहर के अतर सुइया मोहल्ले में 25 दिसम्बर 1926 ई० को हुआ इनके पिता चिरंजीव लाल वर्मा तथा माता श्री मति चंदा देवी थी ! परिवार का माहौल पूर्णरूप से आर्य समाज में ढला हुआ था जिसके कारण धर्मवीर भारती के ऊपर धार्मिकता का गहरा प्रभाव पड़ा इनकी प्रारम्भिक शिक्षा इलाहाबाद के डी० ए० वी० कालेज एवं उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सम्पन्न हुई, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही आपने डॉ० धीरेन्द वर्मा के निर्देशन में शोध कार्य कर के पी-एच० डी० की उपाधि ली !

शोध के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साहित्य माहौल एवं देश में हो रही विभिन्न प्रकार की राजनितिक गतिविधियों का आपके ऊपर बहुत ही क्रन्तिकारी प्रभाव पड़ा इन सब कारणों में एक कारण यह भी था कि इनके बाल्यकाल में ही इनके पिता का निधन हो गया जिस कारण इन्हे बहुत अधिक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, अपने आर्थिक विकास के लिये मार्क्स के सिद्धांत को आदर्श मानते थे किन्तु यह भी इनके लिए बहुत कारगार सिद्ध नहीं हुआ ! कुछ दिनों तक आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद को सुशोभित किया सन 1959 ई० से 1987 ई० तक आपने उस दौर की प्रशिद्ध पत्रिका “धर्म युग” जो की मुंबई से प्रकाशित होती थी, का संपादन किया भारती जी को केवल दो प्रकार के शौक थे यात्रा और अध्यापन, आजीवन काल तक अपने इन दो शौक को जिन्दा रखा !

सन 1972 ई० में भारत सरकार ने इन्हे “पद्मश्री” की उपाधि से अलंकृत किया भारती जी की रचनाओं में काव्य, कथा तथा नाटक का समावेश मिलता है ! इनकी कविताओं में रागतत्व की रमणीयता के साथ बौधिक उत्कर्ष की आभा दर्शनीय है ! भाषा के प्रयोग में सरलता, सजीवता और आत्मीयता का पुरजोर संकलन है ।*

धर्मवीर भारती जी एक प्रतिभाशाली कवि,कथाकार एवं नाटककार थे ! अपने द्वारा रचित कहानियों और उपन्यासों में इन्होने सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्यायों को उठाते हुए बड़े ही जीवन्त रूप में प्रस्तुत किया है, अपनी भाषा में परिमार्जित खड़ी बोली का प्रयोग किया साहित्य में इनके इतने अधिक योगदान के कारण साहित्य जगत की विभिन्न प्रकार की पुरस्कारों से नवाजा गया, इनकी लेखन शैली इतनी खुबसूरत थी की जिस भी साहित्यिक विधा को इनका स्पर्श हुआ वह विधा अमर हो गयी ! “गुनाहों का देवता” जैसा सशक्त उपन्यास लिखकर इन्होने अपनी लेखनी का बखुबी परिचय हिन्दी साहित्य को दिया !

*रचनायें –*
इनकी लेखनी में हिन्दी साहित्य की कहानी निबंध, एकाकी, उपन्यास, नाटक, आलोचना , संपादन एवं काव्य क्षेत्र में विभिन्न पुस्तकों की रचना किये ! अपनी रचनाओं में भावात्मक, समीक्षात्मक, वर्णात्मक शैलियों का प्रयोग करके इन्हे और अधिक रुचिकर बना देते थे !

*उल्लेखनीय कृतियाँ *
“अनुप्रिया, “गुनाहों का देवता”, “ठण्डा लोहा”, “अन्धायुग”, “सात गीतवर्ष”, “सूरज का सातवाँ घोड़ा”, “मानस मूल्य”, “साहित्य”, “नदी प्यासी”, “कहनी- अनकहनी”, “ठेले पर हिमालय”, “परयान्ति”, “देशान्तर”

*उल्लेखनीय सम्मान –*
*1972 ई०- पद्मश्री*
*1984 ई०- सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार*
*1988 ई०- सर्वश्रेष्ठ नाटककार पुरस्कार*
*1989ई० – संगीत नाटक अकादमी*
*1989ई०- राजेंद्र प्रसाद सम्मान*
*1989ई०- भारत भारती सम्मान*
*1994ई०- महाराष्ट्र गौरव*
*1994ई०- कौड़िय न्यास*
*1994ई०- व्यास सम्मान*

साहित्य का अनूठा लेखक 4 सितम्बर 1997 ई० को इस संसार से विदा हो गया।

साभार अखंड सनातन समिति

 #दक्षिण_के_सेनापति           यादवराव जोशी__3 सितम्बर--जन्म-दिवस__दक्षिण भारत में संघ कार्य का विस्तार करने वाले श्री या...
03/09/2023

#दक्षिण_के_सेनापति यादवराव जोशी
__3 सितम्बर--जन्म-दिवस__

दक्षिण भारत में संघ कार्य का विस्तार करने वाले श्री यादव कृष्ण जोशी का जन्म अनंत चतुर्दशी (3 सितम्बर, 1914) को नागपुर के एक वेदपाठी परिवार में हुआ था। वे अपने माता-पिता के एकमात्र पुत्र थे। उनके पिता श्री कृष्ण गोविन्द जोशी एक साधारण पुजारी थे। अतः यादवराव को बालपन से ही संघर्ष एवं अभावों भरा जीवन बिताने की आदत हो गयी।

यादवराव का डा. हेडगेवार से बहुत निकट सम्बन्ध थे। वे डा. जी के घर पर ही रहते थे। एक बार डा. जी बहुत उदास मन से मोहिते के बाड़े की शाखा पर आये। उन्होंने सबको एकत्र कर कहा कि ब्रिटिश शासन ने वीर सावरकर की नजरबन्दी दो वर्ष के लिए बढ़ा दी है। अतः सब लोग तुरन्त प्रार्थना कर शांत रहते हुए घर जाएंगे। इस घटना का यादवराव के मन पर बहुत प्रभाव पड़ा। वे पूरी तरह डा. जी के भक्त बन गये।

यादवराव एक श्रेष्ठ शास्त्रीय गायक थे। उन्हें संगीत का ‘बाल भास्कर’ कहा जाता था। उनके संगीत गुरू श्री शंकरराव प्रवर्तक उन्हें प्यार से बुटली भट्ट (छोटू पंडित) कहते थे। डा. हेडगेवार की उनसे पहली भेंट 20 जनवरी, 1927 को एक संगीत कार्यक्रम में ही हुई थी।

वहां आये संगीत सम्राट सवाई गंधर्व ने उनके गायन की बहुत प्रशंसा की थी; पर फिर यादवराव ने संघ कार्य को ही जीवन का संगीत बना लिया। 1940 से संघ में संस्कृत प्रार्थना का चलन हुआ। इसका पहला गायन संघ शिक्षा वर्ग में यादवराव ने ही किया था। संघ के अनेक गीतों के स्वर भी उन्होंने बनाये थे।

एम.ए. तथा कानून की परीक्षा उत्तीर्ण कर यादवराव को प्रचारक के नाते झांसी भेजा गया। वहां वे तीन-चार मास ही रहे कि डा. जी का स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया। अतः उन्हें डा. जी की देखभाल के लिए नागपुर बुला लिया गया। 1941 में उन्हें कर्नाटक प्रांत प्रचारक बनाया गया।

इसके बाद वे दक्षिण क्षेत्र प्रचारक, अ.भा.बौद्धिक प्रमुख, प्रचार प्रमुख, सेवा प्रमुख तथा 1977 से 84 तक सह सरकार्यवाह रहे। दक्षिण में पुस्तक प्रकाशन, सेवा, संस्कृत प्रचार आदि के पीछे उनकी ही प्रेरणा थी। ‘राष्ट्रोत्थान साहित्य परिषद’ द्वारा ‘भारत भारती’ पुस्तक माला के अन्तर्गत बच्चों के लिए लगभग 500 छोटी पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। यह बहुत लोकप्रिय प्रकल्प है।

छोटे कद वाले यादवराव का जीवन बहुत सादगीपूर्ण था। वे प्रातःकालीन अल्पाहार नहीं करते थे। भोजन में भी एक दाल या सब्जी ही लेते थे। कमीज और धोती उनका प्रिय वेष था; पर उनके भाषण मन-मस्तिष्क को झकझोर देते थे। एक राजनेता ने उनकी तुलना सेना के जनरल से की थी।

उनके नेतृत्व में कर्नाटक में कई बड़े कार्यक्रम हुए। 1948 तथा 62 में बंगलौर में क्रमशः आठ तथा दस हजार गणवेशधारी तरुणों का शिविर, 1972 में विशाल घोष शिविर, 1982 में बंगलौर में 23,000 संख्या का हिन्दू सम्मेलन, 1969 में उडुपी में वि.हि.परिषद का प्रथम प्रांतीय सम्मेलन, 1983 में धर्मस्थान में वि.हि.परिषद का द्वितीय प्रांतीय सम्मेलन, जिसमें 70,000 प्रतिनिधि तथा एक लाख पर्यवेक्षक शामिल हुए। विवेकानंद केन्द्र की स्थापना तथा मीनाक्षीपुरम् कांड के बाद हुए जनजागरण में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

1987-88 वे विदेश प्रवास पर गये। केन्या के एक समारोह में वहां के मेयर ने जब उन्हें आदरणीय अतिथि कहा, तो यादवराव बोले, मैं अतिथि नहीं आपका भाई हूं। उनका मत था कि भारतवासी जहां भी रहें, वहां की उन्नति में योगदान देना चाहिए। क्योंकि हिन्दू पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं।

जीवन के संध्याकाल में वे अस्थि कैंसर से पीड़ित हो गये। 20 अगस्त, 1992 को बंगलौर संघ कार्यालय में ही उन्होंने अपनी जीवन यात्रा पूर्ण की।

एक बार स्वामी विवेकानंद की मनोनीत शिष्या भगिनी निवेदिता ने कहा था-यदि सभी हिंदू मिलकर प्रतिदिन प्रात: सायं केवल १० मिनट ...
03/09/2023

एक बार स्वामी विवेकानंद की मनोनीत शिष्या भगिनी निवेदिता ने कहा था-

यदि सभी हिंदू मिलकर प्रतिदिन प्रात: सायं केवल १० मिनट सामूहिक प्रार्थना किया करें, तो केवल इतना करने से ही हिंदू-समाज अपराजेय बन जाएगा!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दैनंदिन शाखा के द्वारा, उस समर्पित महान आत्मा के उत्कट भावपूर्ण स्वप्न के साकार होने के पूर्व-लक्षण प्रकट होने लगे हैं।

अपने पुनीत राष्ट्र के चरणों में समर्पित एव अनुशासित, राष्ट्रव्यापी सूत्रबद्ध, भ्रातृभाव के पुनर्निर्माण के सतत मौन, अथक तथा नित्य चलनेवाले कार्य, अर्थात् शाखा के परम आह्वान को हम सब सुनें और तदर्थ उठकर खड़े हों, यही आज की आवश्यकता है।

- श्री गुरुजी समग्र: खंड-11:पृष्ठ-400

02/09/2023
Best wishes to all the scientists of ISRO - Indian Space Research Organisation for Solar Mission   आय एस आर ओ च्या सर्व ...
02/09/2023

Best wishes to all the scientists of ISRO - Indian Space Research Organisation for Solar Mission



आय एस आर ओ च्या सर्व वैज्ञानिकांना आदित्य एल १ मिशन साठी खुप खुप शुभेच्छा

संघ की शाखा से खेलते- खेलते, हम भारत माता की सेवा में समर्पित हो गए।
02/09/2023

संघ की शाखा से खेलते- खेलते, हम भारत माता की सेवा में समर्पित हो गए।

श्री नरकेसरी प्रकाशन संस्था, नागपुर के भव्य नवीन भवन 'मधुकर भवन' का शुभारंभ
01/09/2023

श्री नरकेसरी प्रकाशन संस्था, नागपुर के भव्य नवीन भवन 'मधुकर भवन' का शुभारंभ

आदि-अनादि काल से भगवा ध्वज की छाया में ही राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हो पाई है – मुकुल कानितकर जी
01/09/2023

आदि-अनादि काल से भगवा ध्वज की छाया में ही राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हो पाई है – मुकुल कानितकर जी

31 अगस्त/जन्म-दिवसवात्सल्य की प्रतिमूर्ति उषाताई चाटी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से नारी वर्ग में राष्ट्र सेविका...
01/09/2023

31 अगस्त/जन्म-दिवस

वात्सल्य की प्रतिमूर्ति उषाताई चाटी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से नारी वर्ग में राष्ट्र सेविका समिति नामक संगठन चलता है। इसकी तीसरी प्रमुख संचालिका वंदनीया उषाताई चाटी का जन्म भंडारा (महाराष्ट्र) के फणसे परिवार में 31 अगस्त, 1927 (गणेश चतुर्थी) को हुआ था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भंडारा के मनरो हाई स्कूल में हुई। वहां श्रीमती नानी कोलते समिति की शाखा लगाती थीं। उसी में उषाजी ने जाना प्रारम्भ किया। मधुर कंठ की धनी उषाजी धीरे-धीरे समिति से एकाकार हो गयीं। इसी दौरान उन्होंने बी.ए और बी.टी. की डिग्री भी प्राप्त की।

1948 में उनका विवाह नागपुर में एक स्वयंसेवक श्री गुणवंत चाटी (बाबा) से हुआ। उषाजी ने भंडारा की जकातदार कन्याशाला में और विवाह के बाद नागपुर की हिन्दू मुलींची शाला में पढ़ाया। भूगोल और मराठी उनके प्रिय विषय थे। छात्राओं के विकास एवं उन्हें अच्छा वक्ता बनाने के लिए उन्होंने ‘वाग्मिता विकास समिति’ बनायी, जिसकी 30 साल तक वे अध्यक्ष रहीं। श्री गुणवंत चाटी 1948 में संघ के प्रतिबंध काल में सत्याग्रह कर जेल गये थे। उषाजी कुछ समय पूर्व ही घर में सबसे बड़ी बहू बनकर आयी थीं। उस कठिन परिस्थिति में धैर्यपूर्वक उन्होंने पूरे परिवार को संभाला।

सामाजिक कामों में रुचि होने के चलते परिवार और अध्यापन में संतुलन बनाते हुए वे क्रमशः समिति में सक्रिय होने लगीं। पहले उन्हें नागपुर नगर कार्यवाह और फिर विदर्भ प्रांत कार्यवाह का काम दिया गया। इससे उनका प्रवास का क्रम प्रारम्भ हो गया। अब वे सबके लिए उषाताई हो गयीं। उनका कंठ बहुत मधुर था। वे आकाशवाणी नागपुर से कार्यक्रम भी देती थीं। 1970 में समिति में उन्हें अखिल भारतीय गीत प्रमुख की जिम्मेदारी दी गयी। 1975 में देश में आपातकाल लगने पर उषाताई ने सत्याग्रह कर इसका विरोध किया। अतः उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। उन्होंने अपने प्रेमपूर्ण व्यवहार से वहां बंदी महिलाओं को धैर्य बंधाया और कष्ट सहने की मानसिकता निर्माण की।

आपातकाल के बाद 1977 में उन्हें उ.प्र. जैसे बड़े राज्य में संगठन विस्तार पर ध्यान देने को कहा गया। सब कामों में सामंजस्य बैठाते हुए उन्होंने कई बार उ.प्र. का सघन प्रवास किया। 1982 में पति के निधन के बाद उन्होंने पूरा समय समिति के काम में ही लगा दिया। वे घर की बजाय अब समिति के कार्यालय (अहल्या मंदिर) में ही रहने लगीं। वहां वनवासी बालिकाओं का एक छात्रावास भी चलता है। उन दिनों ताई आप्टे राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका थीं। उन्होंने उषाताई को समिति में सह प्रमुख संचालिका की जिम्मेदारी दी। 1991 से वे विश्व हिन्दू परिषद की केन्द्रीय बैठकों में भी जाती थीं। 1994 में ताई आप्टे के निधन के बाद वे समिति की प्रमुख संचालिका बनीं।

2005 में नागपुर के पास खापरी में उनके नेतृत्व में दस हजार सेविकाओं का एक भव्य कार्यक्रम हुआ। प्रवास के दौरान समस्याग्रस्त क्षेत्रों में कई बार पुलिस की गाड़ी या सेना के ट्रक पर भी उन्हें यात्रा करनी पड़ी; पर उन्होंने कभी इसकी चिंता नहीं की। वृद्धावस्था में उन्हें कई रोगों ने घेर लिया। इनमें घुटने का दर्द विशेष था। फिर भी उन्होंने अपना प्रवास कभी स्थगित नहीं किया। अपनी सहयोगी एवं युवा कार्यकर्ताओं पर उन्हें बहुत विश्वास था। वे खुलकर उनकी प्रशंसा करती थीं तथा बहुत सहजता से उन्हें काम सौंप देती थीं। वे सब भी पूरी ताकत लगाकर उसे पूरा करती थीं। सेविकाओं के आग्रह पर वृद्धावस्था में भी वे गीत गाने में संकोच नहीं करती थीं।

उषाताई को देश की अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया। कई पुरस्कारों के साथ कुछ धनराशि भी मिलती थी। वह सारी राशि वे ‘संघमित्रा सेवा संस्थान’ को दे देती थीं। 17 अगस्त, 2017 को त्याग, प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति वंदनीय उषाताई चाटी का निधन समिति के नागपुर कार्यालय में ही हुआ।
***जिज्ञासा***

Talks of mind of Manipur...A terrifying video goes viral at two months old and suddenly there is a tsunami in all of our...
31/08/2023

Talks of mind of Manipur...

A terrifying video goes viral at two months old and suddenly there is a tsunami in all of our feelings, if you don't get shocked after watching that video, he is a demon not a person. But if you are shocked by that video, make it 1,000 many, because the history of Manipur has been so violent. But almost the first time you have expressed feelings about this.

To know about the current fire in Manipur, that fire has started since 03 May 23, which is not completely extinguished till I am writing this article. There are two types of reasons for any such big event.

A] Historical causes
B] The reasons for the then

In order to understand the incident from the root, first we should understand the historical reasons.
When we are understanding the historical causes of a major event, we should understand the three factors, which are as follows.

a) History (History)
b) Geography ( Geography )
c)Demography (Demographic)

"First we understand history... "

There are three main castes in Manipur, Kuki, Naga and Maiti. These three castes also have their own numerous sub-races. One special thing is that all three castes are tribal only, no one is golden in this. The history of which the natives are of the Maiti tribe, is more than 2,000 years old at this place. Maiti caste has ruled here, according to one belief, they are mentioned in Mahabharata era as well. There is also a matter of marriage of a king's daughter to Arjun. (So most of the people also claim to be descendants of Arjuna). ) Their original religion was also their own, also their own fierce culture which the name of religion was 'Sanamahi', those who went ahead mixed with eternal religion while maintaining their cultural years. The 'cookie' tribe people are native from Burma (Myanmar) and residing in the hilly areas of here. When naga people also come from neighboring states and settled. In these three castes, presently the Maiti people follow Hindu religion while the remaining two castes follow Christian religion.

In the English era, there were agreements between these three castes to protect each other, often worked together. But the British encouraged Naga and Kookies and also converted their religion. Currently, these two tribes have a big backbone of the Christian missionaries. So it's not even that nagas and cookies haven't fought against Sam. They have also fought a lot of fierce fights against Sam. E. S. The 1994 riots were very frightening. It happened between naga and kookie.

"Now understand you with Geography (Geography) and Demography (Demography) ... "

Current Manipur is divided into main two parts. One hill section and another valley section. This hill department is 89% stake of whole Manipur while valley department is 11% stake of entire Manipur. 95% to 99% of the population in this hill section is Naga and Kookies while 95% to 99 % of the population in the Valley section. The root of the problem is here that Maitis 55% to 58% have only 11% land (which is not fully usable) while Naga and Kookie who are 35% to 38% have 89% land. Would you say what's wrong with this? Maiti people buy land etc in hilly areas? This is the only big problem. E. S. Article 371(C) (Manipur Land Act) was implemented in hilly areas when the Land Reform Act was brought in 1960. This article is also like Article 370 in J&K. But this only applies to the land that no non-tribal land in the hilly area can buy. When Naga and Kuki can buy land in the valley area, then anyone from whole India can buy. So even the maitis are demanding to include themselves in tribals.

Another very serious change that the currently nagas and cookies are not in their original nature or culture. Currently they are completely converted to Christianity. Understand this matter from one figure or e. S. In 1901 Christians in Manipur were not in proportion that now it is 40%, such a big change is worrisome. Not only this, but the number of these people has suddenly increased in the past few days which is naturally not possible. This is the reason why Kuki people from Myanmar are coming to India as refugees in large scale. That is also being opposed by the Maiti people. One of the allegations of the Maiti people is that the refugees coming in being naga and kookie are doing illegal activities, doing o***m business as well as there are many terrorist groups armed with weapons. (These people get weapons from China and Myanmar. ) Not only that, the only highway of Manipur has been closed hundreds of times by these groups. Opposite cookies say maiti people are already rich, they are the ones who dominate the state government so why do these people need ST reservation?

"Understand the situation after independence... "

At the time of independence, these three castes had different demands.

1 Naga caste: India's Northern states + Myanmar + Bangladesh together wanted a different country of all the nagas.
2 cookie tribe: They wanted a different state of cookies in the Eastern states, not a separate country.
3 Maiti: They wanted differently about how their culture was safe on the same land.

Not only was the appropriate demand considered but it was declared a union state instead of a full state, AME. S. Until 1972. It was union ruled. (Meaning there is no attempt to convince or convince people. ) One mistake in this was that Naga and Cookie were considered ST while Maiti was considered OBC. Thus Maiti people lost the right to buy land in the mountain.

To control the state, the then Prime Minister Jawahar Lal Nehru applied AFSPA that means the whole state was controlled by the Indian Army, not only this but whenever the Congress state came in Manipur, this AFSPA was made more and more strict. (Irom Chanu Sharmila fasted for 16 years in opposition of the same law. )Can Congress explain this why a state was under army rule for 60 years? Is this not the failure of those people?

"Situation after Modi government in the center and BJP government in the state came. "

First talk about AFSPA only, after Modi government came, not only did they explain to various groups and put weapons with them, but according to one report 80% violence was reduced. That is why Modi government withdrew AFSPA law leaving four districts. After the Modi government came, a large scale of development works have been started there, some areas where railways have reached for the first time since independence. After the BJP government came in the state, immediate proceedings started against the terrorists, the o***m fields of those people were destroyed. What caused these people to provoke.

"Now we come on the then reasons... "

1 E. S. In 2012, the people of Maiti community made a petition in the High Court and demand that we also be included in the tribe. There was a verdict on this matter last April-2023 directing the state government to ask the central government about how to include Maiti people in the tribes?
2 A youth group conducts a large rally run by Christian missionaries as part of this response. (Although including any gender into a tribe is a long process. ) The people gathered there are victims of rumors and attack dead bodies, burn their homes too. As part of his reaction the maitis also attacks in return.
As part of the reaction of the 3 state government's stance against o***m farmers and proclaimers, cookie militant groups also included who were armed with weapons like AK47.
4 Apart from this, the state government brought a law that talked about preserving forest land. Where there was an entire illegal village evacuated which belonged to cookie people, so cookies alleged that currently CM is Maiti is taking our revenge.
5 situations were created that cookie people didn't know that this time Maiti people would react such a horrible reaction. So if you look at the stats the damage cookies have done more.
6 Maiti people have also demanded NRC for the past many days, so that manifestation can be stopped in the state.

"What is the situation currently? "

1 currently there are more than 60,000 people homeless.
2 300+ churches and 90+ temples have been burnt.
3 unofficial 300+ people have been killed (children and women have been the main target. )
4 Rahul Gandhi visited Manipur, arranged to attack a gr***de, which the army failed.
5 There people live in herd, means where there is maiti there is no cookie and where there is kookie there is no maiti for each other there is no feeling.
6 cookies don't trust the government (this work is being done by terrorists) currently the army is doing their job.
7 Indian government has taken everything in their own hands by implementing Article 355.
All are safe in 8 relief camps even pregnant women are giving birth to babies. (All health services are being provided by the central government. )
9 People of Naga community are neutral in this whole fight. No reaction from them.
All the accused of 10 videos that went viral have been arrested.

These people portrayed the victim community as a criminal for years just because of one video. Both the victim sisters get justice and those monsters get severe punishment, as well as all demands of the Maiti community get justice. The talk of Modi government is about how difficult it would be if one of the patients are in the fourth stage of cancer? This is the current situation of this government. Of course people who created this fourth stage which was solved before or second stage of cancer are very responsible.

Note: We are all such that we express our grief only if there is a video of the crime, otherwise for us there is only one figure of victim crime.

31/08/2023

रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ__

भाई का प्यार
बहन का दुलार
राखी में समाहित
प्रेम का सार।

बहन का भाई ही
सारा संसार
बचपन से जुड़े
सात्विक प्यार।

भाई की उपस्थिति ही
सबसे बड़ा उपाहार
उर आंगन अह्लादित
पावन राखी का त्योहार।

बहनों ने बाँधी राखी
सैनिकों के कलाई पर
मातृभूमि को रक्षा में
जो सजग सदा सीमा पर

बहन की रक्षा माँ की रक्षा
करते सदा मानवता की रक्षा
अमर्त्य वीर भारत की संतान
यह प्रेम की धागा करेगी रक्षा
___यमुना तिवारी व्यथित
31 08 2023

नागपुर - 30 अगस्त, 2023रक्षाबंधन के अवसर पर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मुख्यालय (महल) में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी तथा...
30/08/2023

नागपुर - 30 अगस्त, 2023

रक्षाबंधन के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मुख्यालय (महल) में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी तथा अ. भा. कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जी जोशी (भय्याजी जोशी) भारत तिब्बत सहयोग मूवमेंट से जुड़ी बहनों ने रक्षा सूत्र बांधा l

"रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर, मन में निश्चय करें कि स्नेह की सच्ची अनुभूति लेकर कंधे से कंधा मिलाकर अपने वास्तविक बंधुत्...
30/08/2023

"रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर, मन में निश्चय करें कि स्नेह की सच्ची अनुभूति लेकर कंधे से कंधा मिलाकर अपने वास्तविक बंधुत्व का भाव उत्पन्न कर शुद्ध पवित्र एकात्मक जीवन उत्पन्न करेंगे. यही आज के पुण्य पर्व पर अपने लिए आह्वान तथा संदेश है।” - श्री गुरुजी

रक्षा बंधन पर स्वयंसेवक परम पवित्र भगवा ध्वज को रक्षा सूत्र बांध कर धर्मो रक्षति रक्षितः के संकल्प का स्मरण करते हैं।

गायत्री कुंज, हरिद्वार - 28 अगस्त देव संस्कृति विश्वविद्यालय व्याख्यान माला
30/08/2023

गायत्री कुंज, हरिद्वार - 28 अगस्त

देव संस्कृति विश्वविद्यालय व्याख्यान माला

RSS Sarsanghchalak Dr Mohan Bhagwat Ji cordially met Former President Shri Ram Nath Kovind at his residence.
30/08/2023

RSS Sarsanghchalak Dr Mohan Bhagwat Ji cordially met Former President Shri Ram Nath Kovind at his residence.

Kozhikode - Kashmiri terrorists lost support since the abrogation of Article 370. कोझिकोड - अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ...
30/08/2023

Kozhikode - Kashmiri terrorists lost support since the abrogation of Article 370.

कोझिकोड - अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीरी आतंकियों को समर्थन मिलना बंद हो गया है।

शोक संदेशगुरु और पंथ की सेवा में सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले सचखंड श्री दरबार साहिब के पूर्व मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगत...
29/08/2023

शोक संदेश

गुरु और पंथ की सेवा में सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले सचखंड श्री दरबार साहिब के पूर्व मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह जी के निधन का समाचार पा कर अतीव दुःख हुआ।
ज्ञानी जगतार सिंह जी ने अखंड पाठी व ग्रंथी के नाते कई वर्ष सेवा निभाने के बाद श्री दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी के रूप में गुरु और पंथ की अपार सेवा की। ज्ञानी जी का सम्पूर्ण जीवन गुरु और पंथ की सेवा में समर्पित रहा जो हम सब के लिए अनुकरणीय है। उनकी पवित्र जोत अखण्ड ज्योति में समा गई। गुरु महाराज जी दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवारजनों को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें, हम ऐसी प्रार्थना करते हैं।

दत्तात्रेय होसबाले
सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

 #रक्षासूत्रयात्रा -२७ अगस्त- #राष्ट्रसेविकासमितिसंवादप्रांतमेरठ  #गाजियाबादविभाग  #नोएडाविभाग द्वारा अमृतसर में सर्वप्र...
29/08/2023

#रक्षासूत्रयात्रा -
२७ अगस्त-

#राष्ट्रसेविकासमितिसंवादप्रांतमेरठ
#गाजियाबादविभाग
#नोएडाविभाग

द्वारा अमृतसर में सर्वप्रथम दर्शन-

जलियाँवाला बाग हत्याकांड-

"१३ अप्रैल १९१९ में भारत के ब्रिटिश शासन में मौलिक घटना।"

पंजाब प्रांत के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ (बैसाखी के दिन) हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें 400 से अधिक भाई, बहन एवं बच्चे शहीद हुए।

अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में शहीदों की सूची है। जलियांवाला बाग में भी शहीदों की सूची है।

यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था, तो वह घटना यह जघन्य हत्याकांड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी।

ब्रिटिश सरकार की क्रूरता गोलियों के निशान के रूप में बाग की दीवारों पर आज तक मौजूद हैं। बताया जाता है कि करीब १६५० राउंड फायर किए गए थे।

जलियांवाला बाग में मरने वालों में कितने अपनी मां के सीने से चिपके दुधमुंहे बच्चे, जीवन की संध्या बेला में देश की आजादी का सपना देख रहे बूढ़े लोग और देश के लिए सर्वस्व लुटाने को तैयार युवा सभी मौजूद थे। इस घटना में कितने लोग जख्मी हुए और इलाज के दौरान कितनों ने अपना दम तोड दिया, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।

शहीदों के खून से लाल हुई यह भूमि अब किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है।

और

ऐसे तीर्थ स्थल के दर्शन करने के बाद #राष्ट्रसेविकासमितिसंवादप्रांतमेरठ की बहनों की भावनाओं से यही आवाज निकली कि -

"आज हम स्वतंत्र चल सके
क्योंकि स्वतंत्रता की सड़कें तो इन्होंने अपने बलिदानों से ही बनाई..!"

जलियांवाला बाग के सभी शहीद हुए देवतुल्यको को #राष्ट्र सेविका समिति संवाद-प्रांत मेरठ की ओर से शत्-शत् नमन।

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

अखंड भारत संकल्प दिवस नहीं, प्रयास दिवस मनाएं – सुरेश सोनी जीसुरेश सोनी जी ने कहा कि इजरायल के लोग 1800 साल तक कई देशों ...
22/08/2023

अखंड भारत संकल्प दिवस नहीं, प्रयास दिवस मनाएं – सुरेश सोनी जी

सुरेश सोनी जी ने कहा कि इजरायल के लोग 1800 साल तक कई देशों में भटकते रहे, लेकिन वह अपने देश को नहीं भूले. वह जब भी आपस में मिलते तो यही कहते थे कि हमारी अगली मुलाकात यरुशलम में होगी. हमारे देश भारत का बंटवारा 1947 में हुआ. इतने समय में भी हमारे लोगों को यह नहीं पता कि पाकिस्तान में हमारे कौन-कौन से प्रांत गए हैं.

पर्यावरण जन चेतना यात्रा
22/08/2023

पर्यावरण जन चेतना यात्रा

22/08/2023

*स्वयंसेवक की संघ और शाखा के प्रति श्रद्धा भाव जब एक स्वयंसेवक 45 वर्ष बाद शाखा आए....*

सावन मास की शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के आभूषण नाग देव की पूजा की जाती है...
21/08/2023

सावन मास की शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के आभूषण नाग देव की पूजा की जाती है. महाकाल की नगरी उज्जैन को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इस शहर की गली- गली में मंदिर है. लेकिन नागचंद्रेश्वर मंदिर की आभा बेहद निराली है. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि मंदिर के कपाट सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही खुलते हैं
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी (Nag Panchami 2023) का त्योहार मनाया जाता है. तिथि के मुताबिक इस बार नाग पंचमी 21अगस्त को पड़ रही है. नाग पंचमी के दिन स्त्रियां नाग देवता की पूजा करती हैं सनातन धर्म में सर्प को पूज्यनीय माना गया है. नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है और उन्हें गाय के दूध से स्नान कराया जाता है. माना जाता है कि जो लोग नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ ही भगवान शिव की पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं, उनके जीवन से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है. साथ ही राहु और केतु की अशुभता भी दूर होती है।

महाकाल की नगरी उज्जैन को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इस शहर की हर गली में एक ना एक मंदिर जरूर है. उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे भाग में नागचंद्रेश्वर मंदिर है. नागचंद्रेश्वर मंदिर का अपना अलग महत्व है. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए ही खुलते हैं. नागचंद्रेश्वर मंदिर की क्या खास बात है यह भी जान लेते हैं।

नेपाल से लाई गई थी प्रतिमा

भगवान नागचंद्रेश्वर की मूर्ति काफी पुरानी है और इसे नेपाल से लाया गया था. नागचंद्रेश्वर मंदिर में जो अद्भुत प्रतिमा विराजमान है उसके बारे में कहा जाता है कि वह 11वीं शताब्दी की है. इस प्रतिमा में शिव-पार्वती अपने पूरे परिवार के साथ आसन पर बैठे हुए हैं और उनके ऊपर सांप फन फैलाकर बैठा हुआ है. बताया जाता है कि इस प्रतिमा को नेपाल से लाया गया था. उज्जैन के अलावा कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है. यह दुनिया भर का एकमात्र मंदिर है जिसमें भगवान शिव अपने परिवार के साथ सांपों की शय्या पर विराजमान हैं।

त्रिकाल पूजा की है परंपरा

मान्याताओं के मुताबिक, भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है. त्रिकाल पूजा का मतलब तीन अलग-अलग समय पर पूजा. पहली पूजा मध्यरात्रि में महानिर्वाणी होती है, दूसरी पूजा नागपंचमी के दिन दोपहर में शासन द्वारा की जाती है और तीसरी पूजा नागपंचमी की शाम को भगवान महाकाल की पूजा के बाद मंदिर समिति करती है. इसके बाद रात 12 बजे वापिस से एक साल के लिए बंद हो जाएंगे।

पौराणिक कथा

मान्यताओं के मुताबिक, सांपों के राजा तक्षक ने भगवान शिव को मनाने के लिए तपस्या की थी जिससे भोलेनाथ प्रसन्न हुए और सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया. वरदान के बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया. लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही इच्छा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो.इसलिए यही प्रथा चलती आ रही है कि सिर्फ नागपंचमी के दिन ही उनके दर्शन होते हैं. बाकी समय परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है. दर्शन को उपलब्ध होते हैं. शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है।

#नागचंद्रेश्वर #उज्जैन #महाकाल

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