26/08/2026
खबर चलाने वाले बेदाग, शेयर करने वाले पर FIR क्यों?
अम्बेडकरनगर के प्रतियोगी छात्र और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाले छोटे भाई मुकेश वर्मा जी के खिलाफ UPPSC द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना फैलाने के आरोप में FIR कराई गई है।
लेकिन सवाल यह है कि अगर मुकेश वर्मा जी ने वही खबर भारत समाचार सहित अन्य मीडिया संस्थानों में प्रकाशित/प्रसारित खबरों के आधार पर साझा की थी, तो फिर कार्रवाई का पैमाना सिर्फ एक प्रतियोगी छात्र तक क्यों सीमित है?
अगर खबर गलत थी तो सबसे पहले उस खबर को प्रकाशित करने वाली न्यूज एजेंसी से सवाल होना चाहिए।
अगर खबर सही थी तो उसे साझा करने वाले छात्र पर FIR क्यों?
कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए—चाहे वह कोई बड़ा मीडिया संस्थान हो या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाला एक युवा।
और सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या किसी खबर को साझा करने से पहले हर आम नागरिक को आधिकारिक विभागीय सत्यापन कराना अनिवार्य है?
मुकेश वर्मा जी कुर्मी समाज से आने वाले एक युवा प्रतियोगी छात्र हैं, लेकिन इस मुद्दे को केवल जाति के चश्मे से नहीं, बल्कि न्याय और समान कार्रवाई के सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए।
गलत सूचना फैलाने वाला कोई भी हो, कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन कार्रवाई की तलवार सिर्फ कमजोर और आम नागरिक पर ही क्यों?
UPPSC को स्पष्ट करना चाहिए कि—
जिस खबर के आधार पर मुकेश वर्मा ने पोस्ट की, उस मूल खबर के प्रकाशक/प्रसारक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
यही सवाल आज हर प्रतियोगी छात्र और जागरूक नागरिक पूछ रहा है।