मध्य प्रदेश की नज़र कमलनाथ पर

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कमलनाथ – भारतीय राजनीति का एक चमकता सितारा

ज़मीन से जुड़े हुए नेताओं की जब कभी बात होती है तो कमलनाथ का नाम सबसे आगे आता है। भारतीय राजनीति में खासकर मध्य प्रदेश के जनमानस के लिए कमलनाथ का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री की भूमिका में कमलनाथ न केवल देश के विकास में महत्वपूर्ण और बेहद सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि अपने संसदीय चुनाव क्षेत्र छिंदवाड़ा का नाम भी रोशन कर

रहे हैं। ये श्री कमलनाथ के प्रयासों का ही नतीजा है कि राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी छिंदवाड़ा विकास की एक मिसाल बन कर उभरा है।

जीवन परिचय

1946 का साल था जब देश आज़ाद होने के लिए तैयार हो रहा था, तभी उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर में एक किलकारी गूंजी थी। ये किलकारी थी श्री कमलनाथ की। तब कौन जानता था कि कानपुर का ये लाल मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा की तकदीर बदलने के लिए आया है। देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई करने वाले श्री कमलनाथ ने कोलकाता के सेंट ज़ेवियर कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की। अच्छी पढ़ाई, उज्जवल भविष्य - लेकिन श्री कमलनाथ के अंदर एक बेचैनी सी थी, आम आदमी का दर्द उन्हें सोचने पर मजबूर करता था कि आखिर कैसे वो उनकी तकलीफ़ दूर कर सकते हैं। यही बेचैनी उन्हें छिंदवाड़ा खींच लाई और महज़ 34 साल की उम्र में वह अपनी कर्मभूमि छिंदवाड़ा से जीत कर पहली बार लोकसभा पहुंच गए। इस जीत ने श्री कमलनाथ को छिंदवाड़ा का लाल, उनका सरताज बना दिया।

राजनीतिक करियर

1980 में छिंदवाड़ा की जनता ने जब श्री कमलनाथ को 7वीं लोकसभा में भेजा, तो फिर उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। विकास के, आम आदमी का दर्द बांटने के जो सपने उनके दिल में बस रहे थे उन्हें सच करने की चाबी उनके हाथ में आ गई थी और यहीं से शुरू हुई एक 34 साल के युवक की छिंदवाड़ा के मसीहा बनने की कहानी। श्री कमलनाथ की योग्यता और काम के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें कई महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे गए जिनमें उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क और परिवहन मंत्रालय प्रमुख हैं। श्री कमलनाथ जी की छवि बेहद ईमानदार नेता की रही है और बात करने का उनका सलीका और मर्यादित व्यवहार उन्हें बाकी नेताओं से अलग खड़ा करता है। यही वजह है कि उन्हें 2012 में संसदीय कार्य मंत्रालय की ज़िम्मेदारी भी सौंप दी गई। श्री कमलनाथ के विपक्षी दलों से मधुर संबंधों का ही ये नतीजा है कि कई बार मुश्किल परिस्थितियों में यूपीए सरकार संसद में कई महत्वपूर्ण बिल पास करा पाई है। श्री कमलनाथ कांग्रेस के महासचिव भी रहे हैं।


छिंदवाड़ा के नाथ- कमलनाथ

1979 तक छिंदवाड़ा बेरोज़गारी और ग़रीबी से कराह था। तब एक दिन जनता ने श्री कमलनाथ को रिकॉर्ड मतों से जिता कर लोकसभा में भेजा। श्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा की जनता के अभूतपूर्व प्रेम और विश्वास का मान ही नहीं रखा, बल्कि छिंदवाड़ा की तकदीर ही बदल कर रख दी। उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की नींव रखी, आम आदमी को मूलभूत सुविधाएं दिलाईं, नौजवानों को नौकरियां दिलाईं और बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए अच्छे स्कूलों की नींव रखी।

छिंदवाड़ा में दक्षता विकास केंद्र

श्री कमलनाथ उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं जो वक्त से पहले भविष्य की नब्ज़ पकड़ लेते हैं। युवाओं को सही दिशा देने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए उन्होंने छिंदवाड़ा में कई वोकेशनल कोर्सेज़ के लिए सेंटर खोले हैं। श्री कमलनाथ का मानना है कि महज़ औपचारिक शिक्षा काफी नहीं है। ज़रूरत है लोगों को ऐसे कामों और कलाओं में दक्ष बनाने की जो उन्हें आजीवन मदद करें। यही वजह है कि जो छिंदवाड़ा कभी पिछड़ा हुआ था आज वहां NIIT, CII, FDDI, IL&FS जैसे संस्थान छात्रों को ट्रेनिंग दे रहे हैं, उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं। ये श्री कमलनाथ की कोशिशों का ही नतीजा है कि छिंदवाड़ा के युवा दूसरे राज्यों में भी अपनी प्रतिभा और कला का लोहा मनवा रहे हैं। आज हर बड़ा संस्थान छिंदवाड़ा में अपना केंद्र खोलने के लिए लालायित रहता है और तमाम बड़ी कंपनियां यहां से छात्रों को चुनने के लिए तत्पर रहती हैं।

आदिवासी और ग़रीब लोग

तीन दशकों से भी ज्यादा समय से छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व कर रहे श्री कमलनाथ भले ही आज राजनीति के शिखर पर हैं लेकिन उनकी निगाहें हमेशा जमीन पर रहीं, उन गरीबों के दर्द से भीगती रहीं जिनकी सुनवाई कहीं नहीं होती। श्री कमलनाथ ने उन आदिवासियों को भी उतना ही सम्मान दिया जिन्हें दूसरे नेता चुनाव जीतने के बाद अपना वोट बैंक मान कर पांच सालों के लिए भूल जाते हैं। श्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में आदिवासियों और गरीब तबकों के विकास पर पूरा ध्यान दिया और उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने में कामयाबी पाई। मूल रूप से छिंदवाड़ा एक आदिवासी इलाका माना जाता है जिसमें गोंड, प्रधान, भारिया और कोरकू जैसे जनजातियां प्रमुख हैं। श्री कमलनाथ आदिवासियों के बिखरे हुए समाज तक विकास की लहर को ले गए और काफी हद तक उन्हें आत्मनिर्भर बना चुके हैं। अगर आज छिंदवाड़ा का आदिवासी समाज खुश है, तरक्की की राह पर है और किसी भी मायने में मुख्य धारा से पिछड़ा हुआ नहीं है, तो इसका श्रेय सिर्फ श्री कमलनाथ को ही जाता है।


आर्थिक विकास पर जोर

श्री कमलनाथ का देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर हमेशा ज़ोर रहा है। 2011 में स्विटज़रलैंड में विश्व आर्थिक फ़ोरम में श्री कमलनाथ ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वहां उन्होंने विकासशील देशों की अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में सीधी पहुंच की वकालत की। उनका मानना था कि अगर ऐसा हुआ तो किसान अपना माल बिना किसी बिचौलिए के बेच पायेंगे और ज़्यादा मुनाफ़ा कमा पायेंगे।

अपनी किताब ‘India’s Century’ में श्री कमलनाथ ने विश्व स्तर पर भारत के वाणिज्य विकास की संभावनाओं का विस्तार से ज़िक्र किया है। उन्होंने 2014 में डावोस में हुए विश्व इकॉनॉमिक फ़ोरम में भी शिरकत की है।

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