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'रामायण रिसर्च काउंसिल' के बारे में एवं आधार चिंतनः

‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ नई दिल्ली में ट्रस्ट के रूप में एक पंजीकृत संस्था है जिसका गठन वर्ष 2020 में हुआ है। काउंसिल के संस्थापक श्री कुमार सुशांत हैं। श्री सुशांत काउंसिल के महासचिव भी हैं। वर्तमान में काउंसिल के अध्यक्ष श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी सांदीपेंद्र जी महाराज हैं, जो नलखेड़ा (मप्र) स्थित मां बगलामुखी मंदिर प्रांगण के सं

त हैं।
काउंसिल का उद्देश्य हमारे देश के सांस्कृतिक मूल्यों का संवर्धन करना है।

काउंसिल का मानना है कि प्रभु श्रीराम और श्रीभगवती सीताजी का जीवन एक आदर्श प्रेरणा-स्रोत है जिनका अनुसरण कर तथा पदचिन्हों पर चलकर हम अपने जीवन को सफल, सार्थक और अनुशासित बना सकते हैं।
भगवान श्रीराम और माता सीताजी ऐसे विषय हैं जिन पर अध्ययन से किसी परिवार, समाज, राज्य, देश और विश्व में शांति, सद्भाव और सफल सुनीति का विकास संभव हो सकता है। यही वो विषय हैं जिनको हम अपने घर और समाज में जितना प्रसारित करेंगे, हमारे बच्चे उतने संस्कारवान होंगे। हमारा घर और समाज में उतनी ही शांति और उन्नति होगी।
प्रभु श्रीरामचंद्रजी ने जहां स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में हर पुरुष को समाज में जीने हेतु मर्यादा सिखाई, वहीं माता सीताजी भारतीय संस्कृति के लिए एक आदर्श नारी की प्रतीक हैं जिनसे विश्व की मातृशक्तियां प्रेरित हो सकती हैं।
जीवन में कितना भी धन कमा लें, सनातन संस्कार में परिवारजनों के द्वारा श्रीराम-नाम का नाम और ध्यान करते ही हमारा जन्म होता है और हमारी अंतिम यात्रा भी श्रीराम-नाम सत्य के साथ ही संपन्न होती है। इसलिए हमारे पूर्वज और घर के बड़े श्रीराम-नाम को महामंत्र और जीवन की पूंजी मानते हैं। केवल श्रीराम का नाम ही साथ जाता है, शेष सब यहीं धरा रह जाता है।
काउंसिल का चिंतन है कि यही वे विषय हैं जिनका अधिक से अधिक प्रसार कर हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसी अवधारणा और संरचना को एक नया पंख दे सकते हैं।
काउंसिल के परमाध्यक्ष पवनसुत श्रीहनुमान जी महाराज हैं।
काउंसिल साहित्य एवं शोध के संकलन पर विशेष रूप से कार्य करती है। काउंसिल निम्न साहित्य पर कार्य कर चुकी है-

1) अयोध्या में श्रीराम मंदिर संघर्ष पर आधारित 1250 पृष्ठों का एक ग्रंथ ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’ हिन्दी भाषा में पूर्ण हो चुका है। काउंसिल वर्ष 2018 से इस कार्य कर रही थी। इस ग्रंथ हेतु वर्ष 2021 में काउंसिल के महासचिव श्री कुमार सुशांत को मा. प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो चुका है।

2) माता सीताजी की आराधना एवं भक्ति पर आधारित पुस्तक ‘श्रीभगवती सीता- महाशक्ति साधना’ वर्ष 2023 में जानकी नवमी के पवित्र अवसर पर नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है।

3) सनातन विचार को प्रसार करने वाली पुस्तक ‘सनातन संग भारत’, जिसका विमोचन बागेश्वर सरकार आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी की उपस्थिति में पद्मविभूषण जगदगुरु पूज्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज, पटना (बिहार) के गांधी मैदान में 06 जुलाई 2025 को ‘सनातन महाकुंभ’ आयोजन में कर चुके हैं।

4) वर्ष 2025 में आयोजित महाकुंभ में अधिकांश प्रमुख गतिविधियों को चित्र सहित सम्मिलित कर वृहद साहित्य ‘महाकुंभ का महामंथन’ को कॉफीटेबल बुक के रूप में तैयार किया गया है।

5) वैदेहीनंदन पंडित वेदांत जी महाराज (11 वर्षीय) द्वारा बालमन को सांस्कृतिक विचारों से जोड़ने वाले पद्य ‘वेदांत पुष्प’ को तैयार किया गया है।

6) बच्चों में संस्कृति, संस्कार, अनुशासन व नैतिक संवर्धन हेतु काउंसिल ने पुस्तक ‘मानस-ज्ञान’ को तैयार किया है। इस पुस्तक के ही आधार पर काउंसिल की एक टीम ‘रामायण मंच’ प्रकल्प के माध्यम से बच्चों को संस्कारित करती रही है।

7) लोक परंपराओं को दर्शाता पद्य ‘अवधि लोकगीतों में सीता-राम’ को जनमानस हेतु तैयार किया है।

इसके साथ ही,

8) संस्कृति एवं लोक परंपराओं पर आधारित देवभाषा संस्कृत में पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का पिछले दो वर्षों से नियमित प्रकाशन किया जा रहा है।

9) वहीं, संस्कृत भाषा के प्रसार के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण हेतु 60 दिनों के कोर्स पर आधारित एक पुस्तिका ‘देवभाषा संस्कृत सीखें’ को भी तैयार किया गया है तथा जगह-जगह ‘देवभाषा संस्कृत-कार्यशाला’ का भी आयोजन किया जाता रहा है।

-: काउंसिल के अंतर्गत निम्न प्रकल्प संचालित किए जाते हैं :-

1. श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र को विकसित करने हेतु कार्य

• हम माता सीताजी के जीवनदर्शन को श्रीभगवती के रूप में अधिकाधिक प्रसार करना चाहते हैं। इस निमित्त मां सीतीजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी (बिहार) में मां सीता का भव्य मंदिर निर्माण करना प्रस्तावित है। यह केवल एक मंदिर ही नहीं होगा, बल्कि विश्व की नारी समाज के लिए एक प्रेरणा का केंद्र बन सके, ऐसा संकल्प है।
• संकल्प है कि 51 शक्तिपीठों से मिट्टी, जल एवं ज्योत लाकर, उन शक्तिपीठों के उन्हीं छवि को यहां छोटे-स्वरूप में स्थापित किया जाना है, ताकि इनकी परिक्रमा से सभी शक्तिपीठों की परिक्रमा पूर्ण हो सके।
• सीतामढ़ी क्षेत्र को पर्यटन, सांस्कृतिक एवं शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना उद्देश्य है।
• हाल में बिहार सरकार अंतर्गत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने सीतामढ़ी में काउंसिल के प्रयास एवं निःस्वार्थ सेवा-भाव को देखते हुए सीतामढ़ी में 833 वर्ष पुराने अति प्राचीन मठ श्रीराम-जानकी स्थान (राघोपुर बखरी स्थित) को जीर्णोद्धार करने एवं मठ की लगभग 12 एकड़ भूमि पर मां सीताजी का भव्य मंदिर निर्माण करने का संकल्प है।
• सीतामढ़ी में काउंसिल के इस पवित्र कार्य हेतु अयोध्या में श्रीरामलला के मंदिर निर्माण के लगे आर्किटेक्ट श्री आशीष सोमपुरा को ही जिम्मेदारी प्रदान की गई है, ताकि जिन हाथों से अयोध्या में कार्य हो रहा है, उन्हीं के द्वारा यहां भी कार्य संपादित हो।
• काउंसिल ने सीतामढ़ी में मां सीताजी के इस कार्य को मातृ-शक्तियों के नेतृत्व में क्रियान्वित करवाने का संकल्प लिया है। इस हेतु ‘सीता सखी समिति’ गठित की गई है।
• इस प्रकल्प से उद्देश्य है कि मां सीताजी का संबंध जिन स्थलों से भी है, उनको हम तीर्थ-क्षेत्र के रूप में विकसित कर सकें।
• हम मां सीताजी का मंदिर ही नहीं, बल्कि मां सीताजी के जीवन-आदर्शों को विश्व-स्तर पर ले जाने के लिए एक पुस्तक ‘श्रीभगवती सीता- महाशक्ति साधना’ भी तैयार कर चुके हैं। इसे कई भाषाओं में तैयार कर अब विश्व-स्तर पर ले जाने की तैयारी की जा रही है।

1. अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला के लिए मंदिर संघर्ष पर ग्रंथ ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’-

काउंसिल ने अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला के मंदिर के लिए 500 वर्षों के संघर्ष पर आधारित ग्रंथ ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’ का लेखन किया है। वर्ष 2018 से इस ग्रंथ पर शोध-कार्य चल रहा था। यह ग्रंथ हिन्दी भाषा में तैयार है तथा अंग्रेजी भाषा में अनुवाद का कार्य चल रहा है।
मा. प्रधानमंत्री जी आ. श्री नरेंद्र मोदी जी का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने वर्ष 2021 में इस ग्रंथ हेतु अपना मार्गर्शन प्रदान किया था।
यह ग्रंथ 1250 से अधिक पृष्ठों का है तथा हिन्दी के अलावा 10 अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद होना है। ग्रंथ का 21 से अधिक देशों में विमोचन किया जाना है तथा संयुक्त राष्ट्र के कई देशों में डिजिटल रूप से प्रसार होना प्रस्तावित है। ग्रंथ में अयोध्या की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता से लेकर मंदिर-संघर्ष के कानूनी, राजनीतिक, सामाजिक... कई सारे पहलुओं को शामिल किया गया है। ग्रंथ में मां सीताजी एवं प्रभु श्रीराम के मानव-कल्याण संदेशों को विस्तार से शामिल किया गया है। इस ग्रंथ में संकलन एवं शोध-कार्यों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के 250 से अधिक विद्वानों के आलेखों को भी शामिल किया गया है।
काउंसिल ने ग्रंथ प्रकाशन समिति गठित कर इसका वैश्विक स्तर पर प्रसार करने का संकल्प लिया है।

2. रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन को जीवंत रखने के लिए पहल पीएम के नाम देशभर से धन्यवाद-पत्रों को संग्रह कर रही है काउंसिलः नाम होगा- ‘अ लेटर टू नरेंद्र मोदी’-

वर्ष 2022 में अयोध्या में श्रीरामललला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन राममय क्षण को सदैव जीवंत रखने के लिए 'रामायण रिसर्च काउंसिल' एक पहल कर रही है। काउंसिल देश में विभिन्न क्षेत्र के लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम धन्यवाद-पत्रों को लिखवा रही है और उन पत्रों को संकलित कर एक ‘पत्र-ग्रंथ’ तैयार कर रही है। ‘ए लेटर टू नरेंद्र मोदी’ नाम के इस ग्रंथ में नरेंद्र मोदी के नाम 11,111 धन्यवाद पत्रों को संकलित करने का संकल्प है। इसके प्रकाशन के उपरांत हम इसे मा. प्रधानमंत्री के संज्ञान में देंगे और प्रधानमंत्री संग्रहालय में इसे रखवाने हेतु आग्रह भी करेंगे।
पत्रों के चयन एवं सकारात्मकता हेतु दो कमेटियां भी गठित की गई हैं। हमारे समाज के हर वर्गों की ओर से- अर्थात्- एक कामगार से लेकर ब्यूरोक्रेट, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, खेल, वैश्विक, राजनीतिक, स्वास्थ्य समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले महानुभावों के पत्र आ सकें, इसके लिए टीम सतत कार्य कर रही है।

3. संस्कृत भाषा के प्रसार हेतु ‘रामायण वार्ता’-
संस्कृत भाषा के प्रसार हेतु पंजीकृत पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का संस्कृत में प्रकाशन एवं प्रसार। इसमें साक्षात्कार, रामायण, लोक-कला-संस्कृति साहित्य, मंदिर, ऐतिहासिक धरोहर, विश्व, राष्ट्र-निर्माण, वैदिक ज्ञान से संबंधित कई रोचक विषयों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। इस कार्य में पटना आईआईटी एक नोडल संस्था है जो विश्वभर के अधिकांश सनातनियों के हाथों में इसके डिजिटल प्रारूप को पहुंचाने हेतु कार्य कर रही है।

इसके अंतर्गत निम्न और कार्य किए जाते हैं।

• संस्कृत भाषा में न्यूज़ वेबसाइट www.ramayanvarta.com का संचालन एवं प्रसार।
• Ramayan Varta का यू-ट्यूब चैनल भी हिन्दी-संस्कृत द्वि-भाषा में संचालित है जो साक्षात्कार, संस्कृत व संस्कृति-संबंधी सूचना, ऐतिहासिक धरोहर, लोक-संस्कृति तथा ज्ञानवर्धक विषयों की जानकारी पर आधारित है।
• संस्कृत भाषा के प्रति आमजन में जागरूकता हेतु 60 दिनों का एक कोर्स ‘देवभाषा संस्कृत सीखें’ डिवेलप किया गया है। इसे टेक्स्ट और डिजिटल दोनों प्रारूप में तैयार किया गया है जिसके माध्यम से हम संस्कृत के प्रसार हेतु कार्यशाला भी आयोजित करते हैं।

4. छोटे बच्चों में संस्कार के संवर्धन हेतु ‘रामायण मंच’-

आज हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती है। चुनौती है इस डिजिटल और आधुनिक युग में अपने घर के बच्चों को आपत्तिजनक विषयों से बचाने की। एक कटु सत्य है कि बच्चों को स्कूलों में शिक्षा तो मिल रही है, लेकिन उनमें संस्कार और अनुशासन का लोप होता जा रहा है। उनमें धैर्य की कमी होती जा रही है।
ऐसे में छोटे बच्चों को अनुशासन, संस्कार, धैर्य के साथ कुशल विचार, सांस्कृतिक भावना एवं नैतिक ज्ञान के प्रसार हेतु उन्हें काउंसिल के तत्त्वावधान में तैयार ‘मानस-ज्ञान’ से अवगत कराते हैं।
डिजिटल रूप से अनुशासन और संस्कारपूर्ण विषयों को हमारे प्रशिक्षक संतों के माध्यम से सिखाने का प्रयत्न करते हैं। इस दौरान श्रीरामचरितमानस की उनकी पसंदीदा चौपाई को उन्हें याद करवाते हैं। बच्चों द्वारा वाचन करते हुए वीडियोज़ को रिकॉर्ड कर उसे ‘रामायण मंच’ नाम के यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से प्रसार करते हैं। ऐसे बच्चों के वीडियो प्रसारित होने से दूसरे बच्चे एवं अभिभावकों में प्रतिस्पर्धी भावना का प्रसार होता है। इससे कई घरों में श्रीरामचरितमानस का घरों में न केवल रखना, बल्कि अध्ययन शुरू होना भी देखा गया है। इसके लिए एक शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रारंभ किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए आप www.ramayanresearchcouncil.com पर विजिट कर सकते हैं।

17/05/2026

जय सीता राम।

जय सीता राम।
17/05/2026

जय सीता राम।

जय सीता राम।
17/05/2026

जय सीता राम।

देशभर में श्रीजानकी कथा के संकल्प हेतु पूजन प्रारंभ। काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के मा. अध्यक्ष आदरणीय श्री Ajay Bhatt ज...
16/05/2026

देशभर में श्रीजानकी कथा के संकल्प हेतु पूजन प्रारंभ। काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के मा. अध्यक्ष आदरणीय श्री Ajay Bhatt जी (उत्तराखंड से माननीय सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री) इस संकल्प हेतु सपत्नीक पूजा पर हैं।
व्यासपीठ तैयार।
थोड़ी ही देर में पहली श्रीजानकी कथा की विधिवत शुरूआत होगी।
जय सीता राम।

आज का दिन रामायण रिसर्च काउंसिल के लिए बहुत ही महत्वपूर्व है। काउंसिल ने बीते 11 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूश...
16/05/2026

आज का दिन रामायण रिसर्च काउंसिल के लिए बहुत ही महत्वपूर्व है।
काउंसिल ने बीते 11 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रेस वार्ता कर तय किया था कि काउंसिल पूरे देशभर में श्रीजानकी कथा का आयोजन कर श्रीजानकी जी के प्रेरणादायी जीवन आदर्शों का प्रसार करेगी। काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष श्री Ajay Bhatt जी (माननीय सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री) ने 16 मई यानी आज, उत्तराखंड में नैनीताल जिले के रामनगर स्थित रामायण काल से संबद्ध रखने वाले स्थान 'सीतावनी' में पहली श्रीजानकी कथा करवाने की घोषणा की थी।
रामायण रिसर्च काउंसिल के अध्यक्ष श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी सांदीपेंद्र जी महाराज जी के निर्देश पर उनके परम स्नेही शिष्य वैदेहीनंदन वेदांत जी (12 वर्षीय बाल व्यास) इस कथा को कहेंगे, ऐसा तय किया गया और श्रीमान अजय भट्ट जी ने प्रेस वार्ता में इस विषय की भी घोषणा की।
अंततः वह घड़ी आ गई। आज पहली श्रीजानकी कथा आयोजित होने जा रही है, इसलिए आज का दिन रामायण रिसर्च काउंसिल के लिए विशेष है।
छोटे-छोटे कदम से हम हज़ारों मील की यात्राएं तय करते हैं। आज भले ही छोटा सा काउंसिल परिवार हमारा इस प्रमुख दिवस पर गौरवान्वित है, परंतु इस श्रीसीतारामकाज में कल पूरा सनातन परिवार विश्व गौरवान्वित होगा, ये संभव है। क्योंकि जब कोई बीजारोपण होता है तो एक छोटी इकाई ही होती है, परंतु जब वो बीज अंकुरित होकर वृक्ष का स्वरूप लेता है तो पूरे समाज को वो सुखद आभास देता है। बस सही दिशा में मेहनत और माई की कृपा चाहिए।

"सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें॥" "जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा॥"

सीतामढ़ी में अति प्राचीन श्रीरामजानकी स्थान पर देर शाम वो सतत बैठक... कई चर्चाओं का दौर...
16/05/2026

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जय जय श्रीसीताराम।
15/05/2026

जय जय श्रीसीताराम।

जय सीता राम।
13/05/2026

जय सीता राम।

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