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07/25/2025

आज दिल्ली मे गढ़वाल सांसद श्री Anil Baluni जी हरिद्वार के सांसद श्री Trivendra Singh Rawat जी और टिहरी सांसद महारानी Mala Rajya Laxmi Shah जी के साथ माननीय गृह मंत्री श्री Amit Shah जी से भेंट कर उत्तराखंडी भाई-बहनों के साथ हुए LUCC फ्रॉड मामले में कठोर कार्रवाई की उनसे विशेष मांग की।

हमने आग्रह किया कि प्रोमोटर्स को इंटरपोल की मदद से भारत लाकर न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए, ताकि पहाड़ के हमारे पीड़ित भाई-बहनों की लूटी गई जमा-पूंजी उन्हें वापस मिल सके।

आदरणीय गृह मंत्री जी ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह न्याय और जनविश्वास की रक्षा की लड़ाई है।

इस अवसर पर माननीय गृह मंत्री जी से 'रामायण रिसर्च काउंसिल' के अंतर्गत सीतामढ़ी (राघोपुर बखरी) में 833 वर्ष प्राचीन स्थल पर मां सीताजी के मंदिर का जीर्णोद्धार तथा 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं जोत लाकर मां सीताजी के शक्ति-स्वरूप में मंदिर निर्माण के पहल की भी चर्चा की। मा. गृह मंत्री जी ने काउंसिल के प्रयत्नों की प्रशंसा की और इस पहल को जारी रखने संबंधी मार्गदर्शन दिए।

07/20/2025
08/15/2023
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08/10/2023
08/06/2023

सीता माता सी कोई नहीं..

राधा बनने को सब चाहे माता सीता सी कोई नहीं।
सब कृष्ण के प्रेम में भटक रही संग राम के वन में कोई नहीं।।

यह क्यों कहते हैं धोखा खा गई रो-रो कर वक्त गुजार रही।
सब ढूंढती रही है राजभवन सीता सा वन पथ कोई नहीं।।

फिर कहां मिलेगा सत्य प्रेम जो कर्तव्यों जुझी नहीं।
वह जनक सुता महलों की ज्योति वन आकर भी बुझी नहीं।।

बिता दिया कांटों में जीवन फिर भी लंका की हुई नहीं।
राम हुए बस सीता के...
वो और किसी की हुई नहीं।।

राधा बनने को सब चाहे माता सीता सी कोई नहीं। सब कृष्ण के प्रेम में भटक रही संग राम के वन में कोई नहीं।।

जय श्री सीताराम जी की 🙏
#माताजानकी #सीतामढ़ी #जयजयसियाराम

08/06/2023

लंका दहन के बाद सीता माता के हनुमान जी से प्रश्न-

माता जानकी ने पूछा कि हनुमान एक बात बताओ बेटा ! तुम्हारी पूंछ नहीं जली आग में और पूरी लंका जल गई ?

श्री हनुमान जी ने कहा कि माता ! लंका तो सोने की थी और सोना कहीं आग में जलता है क्या ?

फिर कैसे जल गया? मां ने पुनः पूछा ?

हनुमान जी बोले- माता! लंका में साधारण आग नहीं लगी थी ! पावक थी ! (पावक जरत देखी हनुमंता।)

पावक ?

हाँ मां !

ये पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हो, पावक माने तो आग ही है।
हनुमान जी बोले- न माता! यह पावक साधारण नहीं थी।

फिर !

जो अपराध भगत कर करई।
राम रोष पावक सो जरई।।

यह राम जी की रोष रूपी पावक थी जिसमे सोने की लंका जली !

तब जानकी माता बोलीं- बेटा ! आग तो अपना पराया नहीं देखती, फिर यह बताओ, यह तुम्हारी पूंछ कैसे बच गई? लंका जली थी तो पूंछ भी जल जानी चाहिए थी।

हनुमान जी ने कहा कि माता ! उस आग में जलाने की शक्ति ही नहीं, बचाने की शक्ति भी बैठी थी।

मां बोली- बचाने की शक्ति कौन थी?

हनुमान जी ने तो जानकी माता के चरणों में सिर रख दिया और कहा कि माँ ! हमें पता है, प्रभु ने आपसे कह दिया था। तुम पावक महुं करहु निवासा- उस पावक में तो आप बैठी थीं। तो जिस पावक में आप विराजमान हों, उस पावक से मेरी पूंछ कैसे जलेगी ? माता की कृपा शक्ति ने मुझे बचाया, माँ! तुम बचाने वाली हो, आप ही भगवान की कृपा हो ! तब माँ सीता के मुह से निकल पड़ा-

अजर अमर गुणनिधि सुत होहू।
करहिं बहुत रघुनायक छोहु।।

।। राम राम🚩 जय सियाराम🙏 ।।

#जयजयसियाराम #सीतामढ़ी
#माताजानकी #रामायण #रामायण_रिसर्च_काउंसिल

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