09/08/2026
ई पर्व थिक—मधुश्रावणी, जेकाँ तिलाठी गामक पवनैतैनी सब परम निष्ठा, भक्ति आ उल्लासक सँग भव्य रूप सँ मना रहल छथि।
१५ दिन धरि चलैत ई अनुष्ठान मात्र एकटा व्रत नहि, बल्कि मैथिल नारीक त्याग, प्रेम आ सांस्कृतिक निरन्तरताक सब सँ जीवन्त प्रमाण थिक। भोरबाक शीतल बयार में पूजाक लेल ताजा फूल-पात लोढ़ब, आँगन में कलात्मक अरिपण सजाएब, आ विषहरा (नाग देवता) सँग-सँग महादेव-पार्वतीक आराधना करब—ई दृश्य तिलाठी गामक आध्यात्मिक सौन्दर्य केँ अद्वितीय बना दैत अछि। एहि पावनि में पवनैतैनी सब दिनभरि कथा-वार्ता सुनि कऽ अपन लोकसंस्कृति आ गृहस्थ धर्मक गूढ़ रहस्य केँ आत्मसात करैत छथि।
गामक पवनैतैनी सभक ई सामूहिक सहभागिता, हाथ में सजल पूजाक डलिया, आ सीमन्त पर चमकैत सिन्दूर मिथिलाक ओहि आभिजात्य धरोहर केँ दर्शाबैत अछि जे युग-युग सँ अक्षुण्ण अछि। आधुनिकताक ई दौरहु में तिलाठी गामक पवनैतैनी सब अपन परम्परा केँ जेहि समर्पण सँ जोगा कऽ राखने छथि, ओ सम्पूर्ण मिथिलांचल लेल एकटा गौरव आ प्रेरणाक विषय थिक।
"तिलाठी गामक समस्त पवनैतैनी सभ केँ मधुश्रावणीक पावन पर्वक असीम शुभकामना! महादेव आ माता विषहराक कृपा सँ अहाँ सभक जीवन में सदैव सुख, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि आ अखण्ड सौभाग्यक वास होअ। अहाँ सभक ई अटूट निष्ठा आ परम्परा गामक गौरव केँ युग-युग धरि ईहे तरहेँ उज्यार करैत रहौ।"
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