29/12/2025
▪︎ जब अस्पताल नहीं थे, जब आधुनिक चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं थी, तब बच्चे की नाभि कौन काटता था❓️
▪︎ पिता से भी पहले उस नवजात शिशु को सबसे पहला स्पर्श किसका होता था—इस पर कभी समाज ने ईमानदारी से विचार किया❓️
आपके जीवन के प्रथम संस्कार से लेकर अंतिम संस्कार तक, समाज के अलग-अलग वर्ग, अलग-अलग जातियाँ निरंतर एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं...
▪︎ मुंडन के समय कौन स्पर्श करता था❓️
▪︎ विवाह के मंडप में नाईं और धोबन की उपस्थिति क्यों अनिवार्य मानी जाती थी❓️
▪︎ क्यों लड़की का पिता, लड़के के पिता से आग्रहपूर्वक इन दोनों के लिए साड़ी की माँग करता था❓️
▪︎ छठ व्रत आज भी वाल्मीकि समाज द्वारा बनाए गए सूप के बिना पूर्ण नहीं माना जाता...
यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास की जीवंत परंपरा है❗️
▪︎ आपके घर में कुएँ से पानी कौन लाता था❓️
▪︎ भोज के लिए पत्तल कौन बनाता था❓️
▪︎ आपके कपड़े कौन धोता था❓️
▪︎ डोली को अपने कंधों पर मीलों-मील दूर कौन ले जाता था—और उनके जीवित रहते किसी की मजाल नहीं होती थी कि आपकी बिटिया की ओर कुदृष्टि से भी देख सके...
▪︎. जेठ की झुलसाती गर्मी में किसके हाथों से बनी मिट्टी की सुराही से आपकी आत्मा तृप्त हो जाती थी❓️
▪︎ कौन आपकी झोपड़ियाँ बनाता था❓️
▪︎ कौन खेतों में दिन-रात परिश्रम कर अन्न उपजाता था और आपके घर तक पहुँचाता था❓️
▪︎ और जब जीवन की अंतिम यात्रा आती थी—
तब कौन आपकी चिता जलाने में सहायक सिद्ध होता था❓️
▪︎ जन्म से लेकर मरण तक, जीवन के हर चरण में, हर संस्कार में, समाज के सभी वर्ग एक-दूसरे को स्पर्श करते थे, एक-दूसरे पर निर्भर थे, और एक-दूसरे का सम्मान करते थे...
फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि सनातन समाज में छुआछूत थी❓️
सच्चाई यह है कि छुआछूत की यह बीमारी मुग़ल और अंग्रेज़ी शासन के दौरान, सनातन धर्म को कमजोर करने और समाज को तोड़ने के उद्देश्य से योजनाबद्ध रूप से फैलाई गई...
जातियाँ थीं—पर उनके बीच घृणा नहीं, बल्कि एक मौन प्रेम-धारा बहती थी, जिसका उल्लेख इतिहास में जानबूझकर दबा दिया गया...
यदि समाज में जातिवाद होता, तो भगवान श्रीराम कभी शबरी के झूठे बेर स्वीकार न करते...
निषादराज, केवट, आदिवासी और वनवासी उनके जीवन- यात्रा के सहायक न बनते...
रामकथा स्वयं प्रमाण है कि सनातन परंपरा का मूल स्वर समन्वय, करुणा और कर्तव्य रहा है...
इसलिए आज आवश्यकता है कि हम भ्रमित आख्यानों से बाहर निकलें... जाति में उलझने के बजाय धर्म के मूल तत्व को समझें...
विभाजन नहीं, बल्कि एकता को अपनाएँ...
क्योंकि—
धर्म जोड़ता है, संस्कार जोड़ते हैं,
और एकजुट समाज ही राष्ट्र को सशक्त बनाता है...
Warisaliganj Vivek Thakur Maghi foundation रंजीत मगही Environment of warisaliganj