02/04/2026
Must Read ⬇️⬇️🚩 हनुमान जन्मोत्सव: जीवन सूत्र 🚩
जब आनंद (श्रीराम) से शांति (सीता जी) बिछड़ गईं, तब घने अंधकार रूपी गुफा ने वानरों का मार्ग रोका। ऐसे समय में हनुमान जी (प्राण शक्ति और विश्वास) ने नेतृत्व किया। गुफा के अंधेरे को पार करते ही वहां स्वयंप्रभा (भक्ति) के दर्शन हुए, जहाँ शीतल जल और फलों से सबकी तृप्ति हुई।
इस कथा का सार:
• हनुमान जी: हमारे भीतर का साहस और संकल्प हैं। जब जीवन में कठिन समय (अंधकार) आए, तो घबराने के बजाय हनुमान जी का हाथ थामकर अपने अंतर्मन में उतरें।
• स्वयंप्रभा: जब हम भीतर उतरते हैं, तो भक्ति का स्वयं-प्रकाश मिलता है, जो हमारी भटकन को शांत करता है।
• निष्कर्ष: बिना भक्ति के न ज्ञान मिलता है, न शांति। हनुमान जी ही वह माध्यम हैं जो हमें अंधेरे से निकाल कर खोई हुई शांति (सीता जी) से मिलवाते हैं और पुनः आनंद (राम जी) की प्राप्ति कराते हैं।
*जय जय जय हनुमान गोसाईं।*
*कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।*
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!
अपने भीतर के हनुमान को जगाएं, भक्ति का मार्ग अपनाएं।
जय श्री राम! जय हनुमान! 🚩🙏