Vedic Bharat

Vedic Bharat Let we explore the Glory of Bharat, Aryavart

02/02/2023

यदि हमारे पूर्वजो को हवाई जहाज बनाना नहीं आता, तो हमारे पास "विमान" शब्द भी नहीं होता।

यदि हमारे पूर्वजों को Electricity की जानकारी नहीं थी, तो हमारे पास "विद्युत" शब्द भी नहीं होता।

यदि "Telephone" जैसी तकनीक प्राचीन भारत में नहीं थी तो, "दूरसंचार" शब्द हमारे पास क्यो है।

Atom और electron की जानकारी नहीं थी तो अणु और परमाणू शब्द कहा से आए।

Surgery का ज्ञान नहीं था तो, "शल्य चिकितसा" शब्द कहा ये आया।

विमान, विद्युत, दूरसंचार , ये शब्द स्पष्ट प्रमाण है, कि ये तकनीक भी हमारे पास थी।

फिसिक्स के सारे शब्द आपको हिन्दी में मिल जाएगे।

बिना परिभाषा के कोई शब्द अस्तित्व में रह नहीं सकता।

सौरमंडल में नौ ग्रह है व सभी सूर्य की परिक्रमा लगा रहे है, व बह्ममांड अनंत है, ये हमारे पूर्वजो को बहुत पहले से पता था। रामचरित्र मानस में काक भुशुंडि - गरुड संवाद पढिए, बह्ममांड का ऐसा वर्णन है, जो आज के विज्ञान को भी नहीं पता।

अंग्रेज जब 17-18 सदी में भारत आये तभी उन्होने विज्ञान सीखा, 17 सदी के पहले का आपको कोई साइंटिस्ट नहीं मिलेगा,

17 -18 सदी के पहले कोई अविश्कार यूरोप में नहीं हुआ, भारत आकर सीखकर, और चुराकर अंग्रेजो ने अविश्कार करे।

भारत से सिर्फ पैसे की ही लूट नहीं हुई, ज्ञान की भी लूट हुई है।

वेद ही विज्ञान है और हमारे ऋषि ही वैज्ञानिक हैं ।

न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं, नेमा विद्युतो भान्ति कुतोSयमग्निः।तमेव भान्तमनुभाति सर्वं,तस्य भासा सर्वमिदं विभाति।। ...
02/02/2023

न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं, नेमा विद्युतो भान्ति कुतोSयमग्निः।
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं,तस्य भासा सर्वमिदं विभाति।।
(कठोपनिषद- २ / २ / १५)
जिस प्रकार सूर्योदय हो जाने पर खद्योत प्रकाशित नही होता उसी प्रकार उस परमप्रकाश के उदय हो जाने पर सूर्य, चन्द्रमा, तारे, बिजली और अग्नि का प्रकाश समाप्त हो जाता है क्योंकि प्राकृत जगत् स्वयं ही उसी के प्रकाश से प्रकाशमान हो रहे हैं। यही परम उर्जा है। इसी के चारों ओर यह दृश्य और अदृश्य जगत परिभ्रमण कर रहा है।

न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम।।
(श्रीमद्भगवद्गीता- १५ / ६)
जहाँ जाकर मनुष्य (न निवर्तन्ते) निवृत होकर वापस नही लौटता और जिस स्वयंप्रकाश को सूर्य, शशाङ्क, अनल प्रकाशित नही कर सकते, वही मेरा परमधाम है।
"जय श्रीमन्नारायण महाप्रभु"

्रीहरि_विष्णु
#शुभ_बृहस्पतिवार

क्या आप जानते हैं कि..... हमारे हिंदुस्तान से अलग होने के बाद ..... मुस्लिमों ने अपने नए देश का नाम ""पाकिस्तान"" ही क्य...
31/01/2023

क्या आप जानते हैं कि..... हमारे हिंदुस्तान से अलग होने के बाद ..... मुस्लिमों ने अपने नए देश का नाम ""पाकिस्तान"" ही क्यों रखा ....????

असल में..... "पाकिस्तान" शब्द का जनक ....सियालकोट का रहने वाला 'मुहम्मद इकबाल' था..... जो कि... जन्म से एक कश्मीरी ब्राह्मण था . परन्तु बाद में मुसलमान बन गया था ...!

ध्यान रहे कि....ये वही मुहम्मद इकबाल है.... जिसने प्रसिद्द सेकुलर गीत ........"सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा" .. लिखा है...!

और, इसी इकबाल ने अपने गीत में एक जगह लिखा है कि..... ""मजहब नहीं सिखाता ....आपस में बैर रखना"

परन्तु .......दूसरी तरफ इस इकबाल ने .........अपनी एक किताब " कुल्लियाते इकबाल " में अपने बारे में लिखा है....

"मिरा बिनिगर कि दर हिन्दोस्तां दीगर नमी बीनी ,बिरहमन जादए रम्ज आशनाए रूम औ तबरेज अस्त "
अर्थात... मुझे देखो......... मेरे जैसा हिंदुस्तान में दूसरा कोई नहीं होगा... क्योंकि, मैं एक ब्राह्मण की औलाद हूँ......लेकिन, मौलाना रूम और मौलाना तबरेज से प्रभावित होकर मुसलमान बन गया...!

कालांतर में यही इकबाल....... मुस्लिम लीग का अध्यक्ष बन गया....

और, हैरत कि बात है कि...... जो इकबाल "सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा" .. लिखा ...और, ""मजहब नहीं सिखाता ....आपस में बैर रखना"..... जैसे बोल बोले थे...

उसी दोगले इकबाल ने ....... मुस्लिम लीग खिलाफत मूवमेंट के समय ...... 1930 के इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के सम्मलेन में कहा था .....

"हो जाये अगर शाहे खुरासां का इशारा ,सिजदा न करूं हिन्दोस्तां की नापाक जमीं पर "

यानि.... यदि तुर्की का खलीफा अब्दुल हमीद ( जिसको अँगरेजों ने 1920 में गद्दी से उतार दिया था ) इशारा कर दे...... तो, मैं इस "नापाक हिंदुस्तान" पर नमाज भी नहीं पढूंगा...!

बाद में...... इसी " नापाक" शब्द का विपरीत शब्द लेकर "पाक " से "पाकिस्तान " बनाया गया ...... जिसका शाब्दिक अर्थ है .....( मुस्लिमों के लिए ) पवित्र देश ...!

कहने का तात्पर्य ये है कि..... हिन्दू बहुल क्षेत्र होने के कारण.... मुस्लिमों को हिंदुस्तान ""नापाक"" लगता था.... इसीलिए... मुस्लिमों ने अपने लिए एक अलग देश की मांग की.... तथा, अपने तथाकथित पवित्र देश का नाम ... "पाकिस्तान"... रख लिया...!

अब इस सारी कहानी में.... समझने की बात यह है कि.......
जब एक कश्मीरी ब्राह्मण के .... धर्मपरिवर्तन करने के बाद.... अपने देश और अपनी मातृभूमि के बारे में सोच ... इतनी जहरीली हो सकती है....

तो, आज .... हिन्दुओं की अज्ञानता और उदासीनता का लाभ उठा कर ... जकारिया नाईक जैसे..... समाज के दुश्मनों द्वारा हजारो -लाखो हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन करवाया जा रहा है..... उसका परिणाम कितना भयानक हो सकता है...????

ऐसे में मुझे एक मौलाना की वो प्रसिद्द उक्ति याद आ रही है.... जिसमे उसने कहा था कि....

देखिये, हमारे तो इतने इस्लामी देश हैं .... इसीलिए , अगर हमारे लिए जमीन तंग हो जाएगी तो ,,,हम किसी भी देश में जाकर कहेंगे " अस्सलामु अलैकुम " ......और, वह कहेगा " वालेकुम अस्सलाम " ..... साथ ही....हमें भाई समझ कर अपना लेगा .

लेकिन मैं... अपने हिन्दू भाई-बहनों से एक मासूम सा सवाल पूछना चाहता हूँ कि....... उनके राम-राम का जवाब देने वाला ... दुनिया में दूसरा कौन सा देश है...... ????

इसलिए, अब यह समय की मांग है कि..... अब मनहूस सेक्यूलरों के बहकावे से दूर होकर .... जकारिया नायक जैसे क्षद्म जिहादी और इस्लाम का पर्दाफाश करने में हर प्रकार का सहयोग करें ...... !

याद रखें कि.... अगर धर्म नहीं रहेगा तो देश भी नहीं रहेगा !

क्योंकि.... देश और धर्म का अटूट सम्बन्ध है ....

जिस तरह.... धर्म के लिए देश की जरुरत होती है ... ठीक उसी तरह..... देश की एकता के लिए भी धर्म की जरूरत होती है ...!

इसीलिए, अगर हमारे हिन्दुस्थान को बचाना है तो...... जाति और क्षेत्रवाद का भेद भूलकर ..... कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी... और कच्छ से लेकर असम तक के सारे हिन्दुओं को एक होना ही होगा...!

जय हिंदुत्व!

बिना किसी अरबों खरबों के संयंत्र और apparatus का प्रयोग किये बिना ही हमारा सनातन वैदिक विज्ञान ये लाखों वर्षों से बताता ...
15/01/2023

बिना किसी अरबों खरबों के संयंत्र और apparatus का प्रयोग किये बिना ही हमारा सनातन वैदिक विज्ञान ये लाखों वर्षों से बताता चला आ रहा है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर ऐसे स्थान विशेष पर पहुँचती है कि सूर्य मकर रेखा या मकर राशि में प्रवेश करता है जिसे आज का विज्ञान एक assumed line Tropic of Capricorn बोलता है ।

हमारे सनातन वैदिक विज्ञान को यह भी पता था कि पृथ्वी स्थैतिज्व ऐसी जगह पर होगा जब सूर्य , नक्षत्र द्वारा निकलने वाली किरणों का प्रभाव जल पर पड़कर उसे और भी अमृतमय और विशेष radiation युक्त करता है जिसमें नहाकर मनुष्य मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकता है ।

यह बात ध्यान रखिये की जितना विज्ञान अभी तक जान पाया है केवल उतना ही नहीं है , बल्कि विज्ञान मात्र 0.05% ही जान पाया है । विज्ञान मात्र कुछ ही radiations और निकलने वाली एनर्जी या waves को ही जान पाया है ।

जल पर खगोलीय पिंडों और उनके द्वारा निकलने वाली अनजान और अदृश्य किरणों या different wavelength के खगोलीय प्रकाश का क्या असर होता है यह पूर्णिमा के दौरान समुद्र के ज्वारभाटा से समझा जा सकता है ।

कितना सूक्ष्म विज्ञान था जिसमें हमारे ऋषि मुनि ( आज की भाषा में वैज्ञानिक ) ने मकर संक्रांति , पूर्णिमा , संक्रांति या किसी विशेष तिथि पर सरोवर , नदी ( खुला जलाशय ) इत्यादि में स्नान करने का विधान बनाया और उसे धर्म से जोड़ दिया , लोभ लालच दिखाया कि इसी बहाने यह मनुष्य उक्त क्रिया करके मानसिक , शारीरिक एवं आध्यात्मिक लाभ ले सकें ।

आप सनातन धर्म का कोई भी त्योहार ले लीजिए , सभी त्योहार किसी न किसी कारण से बनाये गए हैं और प्रत्येक कारण के पीछे खगोलीय पिंडों की गति, घूर्णन , परिधि , परिक्रमा या ऐसे विशेष कारणों पर आधारित है ।
कुछ भी मतलब कुछ भी randomly कोई भी त्योहार उठा लीजिये । मैं challenge के साथ कह सकता हूँ और प्रमाणित कर सकता हूँ कि सभी के पीछे खगोलीय घटना है ।

अब सोचिये कि हमारा वैदिक विज्ञान कितना आगे था । जो लोग अब ढूँढ रहे हैं उससे अरब गुना आगे हम पहले ही खोज कर बैठे हैं ।

लेकिन हमें तो अपने शास्त्रों को गाली देना , जलाना , जूते मारना और अपनी ही स्वाभिमान और शक्तियों पर शर्मिंदा होना जो सिखा दिया गया है तो हम उसी तरह बन गए हैं ।

अपने त्योहारों पर गर्व करना सीखिए और उसके अंतरंग कारणों को जानना सीखिए , तभी किसी त्योहार की सार्थकता होगी और उसका लाभ आप प्राप्त कर सकते हैं । अपने आने वाली generation और बच्चों को सभी त्योहारों का महत्व , कारण और उन पर गर्व करना सिखाईये ।

इसी के साथ मकर संक्रांति , खिचड़ी , पोंगल आदि की सभी सनातनी बन्धुओं को हार्दिक शुभकामनायें ।।

भारत सरकार की अनुशंसा पर यूएन ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया गया है। इसका कारण बाजरे से पैदा होने वाले ...
13/01/2023

भारत सरकार की अनुशंसा पर यूएन ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया गया है। इसका कारण बाजरे से पैदा होने वाले फूड प्रॉडक्ट को बढ़ावा देना है ताकि वैश्विक बीमारियों पर नियन्त्रण किया जा सके.!
आज हम सबसे ज्यादा बाजरा पैदा करते हैं लेकिन खान पान में इसका प्रयोग कम करते जा रहे हैं.! लेकिन गाव के किसान लोग इसका फायदा जरूर उठाते है किसान लोगों का शरीर भी हष्टपुष्ट,ताकतवर बाजरा ही कारण है लेकिन शहरी लोग बाजरे को (गांव मे एक त्योहारी फाफरिया रोटी की तरह) खाते है।जबकि खाने के मामले में सबसे ज्यादा फायदेमंद बाजरा है.!
जहां तक बाजरे के गुणों की बात है..? सभी खाने के अनाजों में सबसे गुणकारी है.! बाजरे में फाइबर्स पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं। प्रोटीन और अमीनो अम्ल भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। बाजरे में कैंसर कारक टॉक्सिन भी नहीं बनते हैं जो दूसरे धानो में बनते हैं..!
बाजरे से शरीर को पर्याप्त एनर्जी मिलती है जिससे शरीर चुस्त और फुर्तिला बना रहता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है जो स्वस्थ दिल के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है..!
बाजरा डायबिटीज में भी उपयोगी है.! ज्यादा वजन वालों के लिए यह रामबाण औषधि है क्योंकि हमारे वजन को नियंत्रित रखता है.! त्वचा और बालों के लिए भी यह खास उपयोगी है.! अस्थमा के रोगी को बाजरे का उपयोग करना चाहिए.! यह शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर को स्वस्थ रखता है..!
इतना गुणकारी होने के बाद भी हम बाजरे को भोजन से दूर करते जा रहे हैं। खाली कागजों में बाजरा वर्ष मनाने से कुछ नहीं होगा.! बाजरे से उत्पन होने वाले खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करके ही स्वस्थ हो सकते हैं.!

08/01/2023

Bolo ram, बोलो राम 🙏

सनातन धर्म के विज्ञान का स्तर देखेहजारो करोड़ खर्च करके नासा ने पता लगाया कीसूर्य की आकृति मधुमक्खी के छत्ते जैसी हैयही ब...
03/01/2023

सनातन धर्म के विज्ञान का स्तर देखे

हजारो करोड़ खर्च करके नासा ने पता लगाया की
सूर्य की आकृति मधुमक्खी के छत्ते जैसी है

यही बात हमारी वैदिक पोथियों में सदियों से लिखी हुई है..
🚩🚩🚩🚩🚩

02/01/2023
तुलसी पूजन दिवस की सभी को शुभकामनाएं |
25/12/2022

तुलसी पूजन दिवस की सभी को शुभकामनाएं |

क्या मनोहर चित्र है। जय श्री राम 🙏
22/12/2022

क्या मनोहर चित्र है। जय श्री राम 🙏

आप शास्त्रों को पढ़ लेंगे , रट लेंगे , कंठस्थ कर लेंगे , बड़े बड़े आयोजन करवा लेंगे उसका पाठ करवाकर , 24 घण्टे में रामचरितम...
03/12/2022

आप शास्त्रों को पढ़ लेंगे , रट लेंगे , कंठस्थ कर लेंगे , बड़े बड़े आयोजन करवा लेंगे उसका पाठ करवाकर , 24 घण्टे में रामचरितमानस और एक सप्ताह में श्रीमद भागवद का पाठ तक करवा लेंगे , शट शास्त्री बन जायेंगे , वेदपाठी बन जाएँगे
लेकिन ............
शास्त्रों को समझने की बुद्धि कहाँ से लायेंगे ?
शास्त्रों के शब्दों के अंदर व्याप्त कल्याणपरक अर्थों , गूढ़ रहस्यों, छिपे ज्ञान और सार को समझने और आत्मसात करने हेतु वह बुद्धि , विवेक और समझ कहाँ से लायेंगे ???

प्रधानमंत्री की कुर्सी घर पर बनवा लेंगे, प्रधानमंत्री की तरह भाषण और अभिनय तो कर लेंगे , परन्तु प्रधानमंत्री की शक्तियाँ , Power और authority कहाँ से लायेंगे ???

आद्य जगद्गुरु मूल "आचार्य शंकर" की तरह वस्त्र धारण कर दंड लेकर उन्हीं का नाम "शंकराचार्य" पीछे लगाकर उन्हीं की तरह दिखने तो लग जायेंगे परन्तु आचार्य शंकर की तरह अपरिमित ज्ञान , ब्रह्मतेज , वैराग्य और समस्त शास्त्रों के एकीकरण कर उसके मूल अर्थ को प्रतिपादित करने का ज्ञान और सामर्थ्य कहाँ से लायेंगे ???

पौंड्रक की तरह श्रीकृष्ण का वेश धारण तो कर लेंगे पर श्रीकृष्ण की तरह अनुपम रूप लावण्य माधुरी , परमहंसों के चित्त को बरबस चुरा लेने वाला गुण , सुदर्शन चक्र धारण करने की शक्ति , समस्त विश्व को नचा देने वाली शक्ति , वह ऐश्वर्य , वह ज्ञान , वह पराक्रम कहाँ से लायेंगे ???

भागवत कथा कहने के लिए व्यासनन्दन परमहंस शुकदेव जैसे पुस्तकों से कथा वाचन कर लेंगे और परीक्षित बनकर कथा सुन भी लेंगे , परन्तु परमहंस शुकदेव जैसा ज्ञान , रस का आस्वादन कर परीक्षित बने श्रोताओं का उद्धार भला कैसे कर पायेंगे ?
और परीक्षित की तरह श्रोता उस स्थिति पर पहुँचकर उन सब गूढ बातों को कैसे समझ पायेंगे ?? बस कहानी किस्सा सुनना भागवद ग्रहण करना नहीं होता ।

24 घण्टे की सीमा लगाकर बड़े बड़े लाउडस्पीकर पर रामचरितमानस के शब्दों को जोर जोर जल्दी जल्दी गाकर पूरा तो कर लेंगे , पर गोस्वामी जी ने जीव कल्याणार्थ जिस ग्रंथ की रचना की है , उसके भाव और सारज्ञान को कैसे आत्मसात कर पायेंगे ???

वेदमन्त्रों को रटते हुए हाथ ऊपर नीचे कर उदात्त अनुदात्त के अनुसार उच्च स्वर से पाठ तो कर सकते हैं लेकिन वेदमन्त्रों के कल्याण करने हेतु जो उद्देश्य है उसे कैसे प्राप्त कर पायेंगे ???

एक एक घण्टे बड़ी बड़ी लाइन में लगकर एक गोल से पत्थर पर एक लोटा जल डाल कर या दूध तो चढ़ा कर उसको अभिषेक का नाम तो दे देंगे , पर वह गोलाकार पत्थर क्या है , उस पर दूध क्यों डाल जाता है , उसका आकार ऐसा क्यों है , उसकी समझ आप कहाँ से ला पायेंगे ???

बड़ी सी थाली में बड़े से कटोरे में घी डालकर उसको जलाकर मूर्ति को ऊपर नीचे घुमाकर उसे आरती नाम देकर इतिश्री तो कर लेंगे , परन्तु यह क्यों किया जाता है , इसका उद्देश्य क्या है , इसकी समझ कहाँ से ला पायेंगे ???

बड़े बड़े जटा धारण कर , भस्म रमाकर , त्रिपुंड लगाकर , नग्न रहकर , न नहाकर , अपने आप को साधु तो दिखा सकते हैं , लेकिन परमहंसिय और अवधूत अवस्था , वह तप , वह निरन्तर भगवान में निमग्न होने के कारण बाह्य आवरण और परिवेश भुला देने वाली स्थिति , मान अपमान से परे , जगत को भ्रम और स्वप्न समझ लेने वाली स्थिति कहाँ से लायेंगे ???

बस इसीलिए इन सब तत्वों को समझाने हेतु और इनके निहितार्थ मूल तत्व को समझाने हेतु किसी तत्ववेत्ता महापुरुष की आवश्यकता पड़ती है जो इन कथा कथानकों , शास्त्रों के शब्दों के अंदर छिपे गूढ़ अर्थों और भावार्थों को सही सही आपको समझा सके जिसको समझ कर आप निवृत्ति मार्ग पर आरूढ़ होकर अपना कल्याण कर सकें !!!

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

ग्राफिक्स - नहीं 😏सॉफ्टवेयर-नहीं 😏मशीन - नहीं 😏फिर भी सदियों पहले हमारे पूर्वजों ने कई फिट ऊंचे मंदिरो के भीतरी छतों में...
02/12/2022

ग्राफिक्स - नहीं 😏
सॉफ्टवेयर-नहीं 😏
मशीन - नहीं 😏

फिर भी सदियों पहले हमारे पूर्वजों ने कई फिट ऊंचे मंदिरो के भीतरी छतों में ऐसी नक्काशियाँ की जो आज के तथाकथित मॉडर्न इंजीनियरों को शर्मिंदा कर देती हैं।

#सनातन #धर्म

Address

Mathura
Vrindavan

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Vedic Bharat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share