आचार्य पं. आनंद कृष्ण जी महाराज का एक परिचय...
वैदिक आध्यात्मिक , गरिमामयी व्यास परंपरा की विलक्षण वाग्धारा की उत्ताल ऊर्मि के रसमय वाहक " महाराज श्री "का जन्म बृजमंडल में श्रीधाम गोवर्धन के निकट भरनाकलांँ नामक ग्राम में महर्षि अंगिरा के प्रपौत्र ब्रह्मर्षि सौभरि के वंश में दिनांक 1 मार्च 1990 को हुआ ।
आपके पूज्य पिता पंडित श्री बलबीर प्रसाद शर्मा जी एवं माता ललिता देवी निष्ठावान भगवतप्रेमी हैं
,
महाराज श्री के लघु भ्राता का नाम "बृज रसिक" माधव कृष्ण है जो कि भजनों के माध्यम से श्रोताओं के ह्रदय को बृजभाव में डुबकी लगवाते रहते हैं..
महाराज श्री ने अपने माता-पिता के द्वारा बचपन से ही रामायण व श्री कृष्ण चरित्र का मनोयोग से श्रवण किया , आपके पिता आपको उच्च शिक्षा दिलाकर भागवत के एक निपुण प्रवक्ता के रूप में देखना चाहते थे , भागवत के पूज्य सद्गुरुदेव श्री दामोदर त्रिपाठी जी के शुभाशीर्वाद से इसमें शीघ्र सफलता मिली , श्री गुरुदेव के आशीर्वाद से आपने व्याकरण से आचार्य (M.A) एवं शिक्षाशास्त्री ( B.ED ) की डिग्री प्राप्त की है..
महाराज श्री को अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा एवं ब्रह्मकीर्ति रक्षक दल व ब्रजभूमि कल्याण परिषद के द्वारा , शास्त्रार्थ महारथी श्री पुरुषोत्तम शरण शास्त्री जी , पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ जी ,
पंडित श्री शिव कुमार पारीक जी श्री श्रीवत्स गोस्वामी जी
पं राधा कृष्ण पाठक जी
पंडित श्री जुगेन्द्र भारद्वाज जी एवं बृजवासी विप्रों एवं रेणु रसिक जनों द्वारा..
वैष्णव बैठक कुंभ मेला 2021 में शुभ दिनांक 1 मार्च 2021 को ( संयोग से इस दिन महाराज श्री का जन्मदिन भी था)
"बृजवासी जगदगुरु" की उपाधि से समलंकृत किया गया है ..।
महाराज श्री को कल्पतरु सेवा संस्थान के द्वारा
"भागवत रत्न सम्मान "
ब्रजभूमि कल्याण परिषद के द्वारा "सनातन गौरव सम्मान" व
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के द्वारा" विप्र गौरव" की उपाधि से समलंकृत किया गया है
महाराज श्री 16 वर्ष की अवस्था से ही श्री कृष्ण कथा एवं राम कथा कह रहे हैं , महाराज श्री मधुर संगीत के साथ शुद्ध हिंदी एवं बृज भाषा में कथा कहते हैं , आपकी कथा शैली इतने सहज एवं सरल है कि सभी श्रेणी के श्रोता आनंद लाभ लेते हैं , महाराज श्री की शास्त्र सम्मत मान्यता है कि भागवत श्री कृष्ण स्वरूप है इसलिए भागवत के किसी भी प्रसंग को बिल्कुल छोड़ना अपराध है , संगीत का माध्यम साथ रहते हुए भी आप कथानक एवं आध्यात्मिक पक्ष पूरा ध्यान रखते हुए कथा कहते हैं ,
हिंदू संस्कृति एवं वैदिक सनातन धर्म के प्रचार भावना को लेकर एवं बृज संरक्षण के लिए महाराज श्री एक दीप से अनेकों दीपों को जलाने में लगे हैं , और निष्काम भाव से श्री कृष्णकथा एवं श्री रामकथामृत वर्षा करते रहते हैं ,
महाराज श्री के पावन सानिध्य में , और आप सब के सहयोग से अन्नक्षेत्र , गौ सेवा , वस्त्र एवं दवाओं का मुफ्त वितरण चल रहा है...