08/02/2026
साधु सेवा ही सच्ची सेवा है।
जहाँ संतों के चरण पड़ते हैं, वहीं भगवान स्वयं विराजमान होते हैं।
भूखे साधु को अन्न, प्यासे को जल और थके को सहारा—यही सनातन धर्म की आत्मा है।
आइए, मिलकर साधु सेवा करें और जीवन को धन्य बनाएं। 🧡