27/03/2026
मर्यादा पुरुषोत्तम राम भगवान,सनातन धर्म के वह उत्कृष्ट चरित्र हैं,देव हैं जिनको देखकर के मनुष्य अपने दैनिक समस्याओं से दुखी होने की जगह उस पर विजय पाने का कौशल प्राप्त करता है।
भगवान राम जिनको राज्य सत्ता मिलनी थी?वहाँ वन सत्ता मिलती है!
वहाँ प्रभु सहज वन को चल देते हैं!बिना प्रतिकार के।
क्योंकि वह यह संदेश देना चाहते हैं दुनिया में कुछ भी बड़ा नहीं है,माता-पिता के आदर और सुख,सम्मान के सामने।
(कोई भी परिस्थिति अगर सुख दे सकती है तो वहीं स्थिति दुख भी देती है) इसलिए जो मिले,जो सहजता में हो उसको आदर सहित स्वीकारो।
भगवान राम के जीवन में रावण जब भगवती जानकी का हरण कर लेता है तो वह बिना किसी राजकीय सहयोग के (शुद्ध भाषा में कहें तो राजा के पुत्र होने के बाद भी राजकुमार होने के बाद भी उन्होंने किसी राजा की तरफ नहीं देखा की कोई उनको सहयोग करे या वो उनसे सहयोग ले)जो उनके आसपास थे सुग्रीव,जामवंत,हनुमान जी,जो उनके वनवासी मित्र बन पाए उनका साथ लेकर के रावण जैसे पराक्रमी के ऊपर विजय प्राप्त किया!
यह उनके जीवन का दर्शन दर्शाता है कि जिस परिस्थिति में है,जहां हैं,वहीं से सृजन की शुरुआत करिए, ना कि पूर्व में आप क्या थे? पूर्व में आपके लोग कौन सहयोगी थे? या कौन राजा आपका मित्र है? उसकी जगह जो आपके पास है उहा से सृजन करिए और वहीं से विजय मिलेगा!
ऐसे अनेक अनेक उदाहरण के प्रतीक हमारे प्रभु के आज के प्राकट्य दिवस को उल्लास और उत्साह के साथ मना करके हम आने वाली अपनी पीढियो को एक सुंदर प्रेरक,ऐसे एक आदर्श चरित्र के बारे में बताएं जिससे की हमारी वर्तमान की पीढ़ियां अपने ऊपर पड़ने वाले दुख को इतना बड़ा दुख ना समझे? जिससे कि वह अवसाद में चल जाए!बल्कि उस दुख को अपने सृजन का माध्यम समझ करके, अपने उत्कर्ष का माध्यम समझकर के, अपने जीवन को बढ़ाने का माध्यम समझ करके, उस पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा भगवान राम के जीवन से ले सके!
आज इस रामनवमी पर हम कुछ ऐसा करें,ऐसा उत्सव मनाएं हम इस तरह से अपने बच्चों को प्रेरित करके हम सब भगवान राम के प्राकट्य को मानते हैं
मंगल हो रामनवमी
अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी