19/05/2024
!!बेटा बाप से बढ़के !!
नवीन के हाथों में फोन था जो अभी-अभी उसने कान से हटाया था।
हेलो- हेलो की आवाज भी उसके कानों तक नहीं पहुंच रही थी जैसे।
तभी अचानक बाबूजी पूजा के कमरें से जल छिड़कते हुए निकले।... पगला गए हो क्या ? कुछ बोलते क्यों नहीं? तब से फोन की हेलो हेलो की आवाज आ रही है।
पर नवीन बोलने की स्थिति में कहां था। उसने फोन जमीन पर रख कर बाबूजी के पांव पकड़ लिए। उसके आंखों से आंसुओं की धार बह निकली मानो वो उन आंसुओं से उनके चरणों को पखार रहा हो।
अब तो दीनदयाल जी भी घबरा गए। अरे नवीन की मां देखो इसे क्या हुआ है।
मां भी जल्दी-जल्दी आंचल से हाथ पोंछते हुए रसोई से बाहर निकली। मां भी उसे इस हाल में देखकर घबरा गई।
बबुआ क्या हो गया? मां के पकड़ते ही वह मां की गोद में सर रखकर फफक कर रोने लगा। अब तो मां भी रोने रोने जैसी हो गई।
पर कांपते हाथों से नवीन का सिर उठाया। क्या हुआ बेटा? अब बता भी दो, हम दोनों का दिल बैठा जा रहा है।
अब शायद नवीन की आंखों से आंसू सूख गए थे, जी हल्का सा हो गया था।
कुछ नहीं मां बाबूजी, बहुत खुशी की बात है।
आज मैं बाबूजी से नजरे मिलाने के लायक हो गया हूं।
अब बाबूजी ने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा ऐसा क्या हो गया बेटा? तुझसे कोई गलती हो गई है क्या? तू तो मेरा आदर्श बेटा है।
मुझे तो याद नहीं कि तुझे कोई गलती हुई है।
बाबूजी आप दोनों लेटर पढ़िए,आपको खुद समझ में आ जाएगा।
बाबूजी ने उसके हाथ से देखा लेटर खोला तो अवाक रह गए।
पहले लिफाफे में उसका यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति का जॉइनिंग लेटर था। दूसरे लिफाफे में उसके शोध के लिए उसे सम्मानित किए जाने के लिए भारत सरकार द्वारा दिल्ली बुलाए जाने का बुलावा पत्र था।
अब आंखों से आंसू गिरने की बारी बाबूजी की थी।
बाबूजी याद आया जब मेरी मिडिल में नौकरी लगी थी तो आपने कहा था मैं बहुत खुश हूं बेटा।
पर मैंने मां से आपको ये कहते सुन लिया था, अभी तो उम्र है पढ़ लेता और ऊंचे के लिए ट्राई कर लेता। मेरा एक सपना था मैं पीएचडी नहीं कर पाया लेकिन मेरा बेटा कर लेता तो मुझे बहुत खुशी होती।
पर चलो कोई बात नहीं जरूरी नहीं कि सबके सपने पूरे ही हो।
बाबूजी ने रूंधे गले से कहा तूने यह सब मेरे लिए किया।
आज मैं उन खुशकिस्मत पिताओं में से हूं जो कह सकता है... मेरा बेटा मुझसे बढ़कर है।
मेरा आशीर्वाद है तुझे,
सूरज की तरह हमेशा चमकती रहना,
तेरी औलाद तुझसे भी बड़ा बने।।
अंजू चौबे