Ram Narayan Sewa Sansthan

Ram Narayan Sewa Sansthan Ram Narayan Sewa Sansthan is a NGO established by "Acharya Vankatesh Sharma". We are working on SWASTHYA, SIKSHA, SOYROJGAR and KANYA VIVAH.

Ram Narayan Sewa sansthan is a Non – governmental organization established by "Acharya
Vankatesh Sharma" . Our aim is to empower AAM ADAMI who trapped in vicious cycle of poverty. In our society lacs of men, women and children suffer ill health ,illiteracy due to unemployment and underemployment.

02/06/2026
माननीय गृह राज्य मंत्री, भारत सरकार श्री नित्यानंद राय जी से उनके दिल्ली स्थित आवास पर आत्मीय मुलाकात हुई।
31/05/2026

माननीय गृह राज्य मंत्री, भारत सरकार श्री नित्यानंद राय जी से उनके दिल्ली स्थित आवास पर आत्मीय मुलाकात हुई।

🙏🏻 हर हर महादेव 🙏🏻🌊 गंगा दशहरा | प्रदोष विशेष | 26 मई 2026 🌊काशी विश्वनाथ की पावन नगरी मेंआज गंगा दशहरा का दिव्य पर्व बड...
26/05/2026

🙏🏻 हर हर महादेव 🙏🏻

🌊 गंगा दशहरा | प्रदोष विशेष | 26 मई 2026 🌊

काशी विश्वनाथ की पावन नगरी में
आज गंगा दशहरा का दिव्य पर्व बड़े श्रद्धा और उल्लास से मनाया जा रहा है।
गंगा केवल जल नहीं — वह चेतना, प्राण और मोक्ष का प्रवाह है।

🕉 “यथा पिंडे तथा ब्रह्माण्डे”
मनुष्य पंचतत्वों, त्रिदोष और प्राण ऊर्जा से निर्मित ईश्वर का अद्भुत पिंड है।
जब मनुष्य प्रकृति, ऋतु और प्राण के अनुसार जीवन जीता है तभी शरीर, मन और आत्मा संतुलित रहते हैं।

🌿 ग्रीष्म ऋतु में —
सात्विक आहार, जल सेवन, ध्यान, जप और पंचतत्व संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

🔱 हमारा संकल्प 🔱
मनुष्य में देवत्व का उदय हो
प्राण एवं प्रकृति की रक्षा हो
और आरोग्य आर्यावर्त की स्थापना हो।

🏛 राम नारायण सेवा संस्थान
प्राकृतिक चिकित्सा | ज्योतिष | आयुर्वेद शोध संस्थान
काशी वाराणसी

📞 +91 93343 31326
📞 +91 99520 49453

🔱 काशी से विश्व आरोग्यता की ओर 🔱

25/05/2026

शंख बजाने की ट्रेनिंग वीडियो

आज बिहार के यशस्वी मा० मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी से 1 अणे मार्ग स्थित आवास पर हमारी आत्मीय एवं सौहार्दपूर्ण मुलाक...
23/05/2026

आज बिहार के यशस्वी मा० मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी से 1 अणे मार्ग स्थित आवास पर हमारी आत्मीय एवं सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई।

इस दौरान बिहार के विकास, जनकल्याण एवं संगठनात्मक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायक विचार सदैव जनसेवा के प्रति नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

हम सभी बिहार को विकास, सुशासन एवं समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रहे हैं।

#जनसेवा #विकसित_बिहार #बिहार_विकास #सुशासन #आत्मनिर्भर_बिहार #युवा_शक्ति #सामाजिक_सेवा #जनकल्याण

वट सावित्री व्रत : अखंड सौभाग्य, नारी शक्ति और अटूट संकल्प का पावन पर्वभारत की सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, श्रद्धा...
16/05/2026

वट सावित्री व्रत : अखंड सौभाग्य, नारी शक्ति और अटूट संकल्प का पावन पर्व

भारत की सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति, श्रद्धा, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना गया है। भारतीय परंपराओं में ऐसे अनेक व्रत और पर्व हैं, जो केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि पारिवारिक मूल्यों और वैवाहिक जीवन की पवित्रता को भी सुदृढ़ करते हैं। इन्हीं महान पर्वों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है — वट सावित्री व्रत। यह व्रत विवाहित स्त्रियों का प्रमुख त्योहार माना जाता है, जिसे ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएँ वट अर्थात बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं तथा माता सावित्री, सत्यवान और धर्मराज यमराज का स्मरण कर अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी के अटूट प्रेम, धैर्य, बुद्धिमत्ता और संकल्प का जीवंत प्रतीक है।

सावित्री-सत्यवान की अमर कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री अत्यंत तेजस्विनी, विदुषी और पतिव्रता थीं। उन्होंने सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना, जबकि ऋषियों ने पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। परंतु सावित्री ने अपने दृढ़ निश्चय और प्रेम के कारण सत्यवान से ही विवाह किया।
निर्धारित समय आने पर सत्यवान जंगल में लकड़ी काटते समय अचेत होकर गिर पड़े और उनके प्राण लेने के लिए स्वयं धर्मराज यमराज वहाँ पहुँचे। तब सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं। यमराज ने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन सावित्री अपने पति के प्रति अटूट निष्ठा और धर्मयुक्त वचनों के कारण पीछे नहीं हटीं।
सावित्री की बुद्धिमत्ता, धर्मपरायणता और पतिव्रत धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान माँगने को कहा। सावित्री ने पहले अपने सास-ससुर की दृष्टि और राज्य, फिर अपने पिता के लिए पुत्र प्राप्ति का वरदान माँगा। अंत में उन्होंने स्वयं सौ पुत्रों की माता बनने का वर माँग लिया। तब यमराज समझ गए कि बिना सत्यवान को जीवित किए यह वरदान पूर्ण नहीं हो सकता। अंततः उन्होंने सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान कर दिया।
इस प्रकार सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, भक्ति और पतिव्रत धर्म के बल पर धर्मराज से अपने पति को वापस प्राप्त किया। तभी से यह व्रत “अखंड सौभाग्य” का प्रतीक माना जाता है।

वट वृक्ष का धार्मिक महत्व

वट वृक्ष को भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र और दीर्घायु माना गया है। इसकी विशाल जड़ें और सदैव हरा-भरा स्वरूप दीर्घ जीवन, स्थिरता और अमरत्व का प्रतीक है। मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
व्रत के दिन महिलाएँ वट वृक्ष के चारों ओर धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं और अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यह परिक्रमा केवल पूजा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट बंधन और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक है।

सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश

वट सावित्री व्रत भारतीय समाज को यह संदेश देता है कि प्रेम, विश्वास, संयम और समर्पण से हर कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। यह पर्व नारी की शक्ति और उसकी आध्यात्मिक ऊँचाई को भी दर्शाता है। सावित्री केवल एक पतिव्रता स्त्री नहीं थीं, बल्कि वे धैर्य, ज्ञान और साहस की मूर्ति थीं, जिन्होंने मृत्यु के देवता तक को अपने सत्य और संकल्प से पराजित कर दिया।
आज के आधुनिक समय में भी यह व्रत भारतीय पारिवारिक संस्कृति और वैवाहिक मूल्यों को जीवित रखने का कार्य कर रहा है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें त्याग, विश्वास और संघर्ष की शक्ति भी निहित होती है।

मेष लग्न की कुंडली में यदि चंद्रमा प्रथम भाव में स्थित हो, तो यह एक प्रभावशाली और संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करता ह...
12/05/2026

मेष लग्न की कुंडली में यदि चंद्रमा प्रथम भाव में स्थित हो, तो यह एक प्रभावशाली और संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करता है। प्रथम भाव शरीर, स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन की दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं, लोकप्रियता और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह है।
मेष लग्न में चंद्रमा चौथे भाव का स्वामी होता है, इसलिए उसका प्रथम भाव में आना विशेष महत्व रखता है।
प्रमुख फल
व्यक्तित्व और स्वभाव
जातक आकर्षक, तेजस्वी और लोगों को प्रभावित करने वाला होता है।
मन चंचल और भावुक हो सकता है, लेकिन मेष की अग्नि प्रकृति के कारण निर्णय जल्दी लेने की प्रवृत्ति रहती है।
समाज में पहचान बनाने की तीव्र इच्छा रहती है।
चेहरे पर चमक और आंखों में आकर्षण देखा जाता है।
मानसिक स्थिति
चंद्रमा मन का कारक होने से व्यक्ति अत्यधिक संवेदनशील होता है।
मन में उतार-चढ़ाव जल्दी आते हैं।
कभी अत्यधिक उत्साह तो कभी अचानक निराशा का अनुभव हो सकता है।
यदि चंद्रमा शुभ दृष्टि में हो तो मानसिक शक्ति बहुत प्रबल होती है।
माता और सुख
चंद्रमा चौथे भाव का स्वामी होकर प्रथम में आने से माता का प्रभाव जीवन पर गहरा रहता है।
घर, वाहन, भूमि और सुख-सुविधाओं की प्राप्ति का योग बनता है।
मातृ सुख सामान्यतः अच्छा मिलता है।
लोकप्रियता और जनसमर्थन
ऐसा जातक जनता के बीच लोकप्रिय हो सकता है।
राजनीति, समाज सेवा, अध्यात्म, शिक्षा या जनसंपर्क वाले क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।
लोगों की भावनाओं को समझने की विशेष क्षमता होती है।
स्वास्थ्य
शरीर में जल तत्व की अधिकता के कारण कभी-कभी सर्दी, कफ, रक्तचाप या मानसिक तनाव की समस्या हो सकती है।
चंद्रमा कमजोर होने पर अनिद्रा या चिंता बढ़ सकती है।
विशेष योग
यदि चंद्रमा शुभ और बलवान हो —
पूर्णिमा के निकट हो,
गुरु की दृष्टि हो,
पाप ग्रहों से पीड़ित न हो,
तो जातक को सम्मान, प्रसिद्धि और समाज में विशेष स्थान मिलता है।
अशुभ स्थिति में
यदि चंद्रमा राहु, केतु, शनि या मंगल से पीड़ित हो तो —
मानसिक अशांति,
क्रोध में निर्णय,
पारिवारिक तनाव,
भावनात्मक अस्थिरता बढ़ सकती है।
आध्यात्मिक प्रभाव
ऐसे जातक में अंतर्ज्ञान (intuition) बहुत प्रबल होता है। कई बार बिना बताए लोगों के मन की बात समझ लेते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों में रुचि बढ़ सकती है।
मेष लग्न में प्रथम भाव का चंद्रमा व्यक्ति को तेज, भावुक, नेतृत्व क्षमता वाला और जनप्रिय बनाता है। यदि पूरी कुंडली का सहयोग मिले तो राजनीति, सामाजिक नेतृत्व, शिक्षा, मीडिया या आध्यात्मिक क्षेत्र में विशेष सफलता दिला सकता है।

Address

Lane No/2 , Taradham Colony, Tulsipur, Mahmoorganj
Varanasi
221010

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ram Narayan Sewa Sansthan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Ram Narayan Sewa Sansthan:

Share