Ram Narayan Sewa Sansthan

Ram Narayan Sewa Sansthan Ram Narayan Sewa Sansthan is a NGO established by "Acharya Vankatesh Sharma". We are working on SWASTHYA, SIKSHA, SOYROJGAR and KANYA VIVAH.

Ram Narayan Sewa sansthan is a Non – governmental organization established by "Acharya
Vankatesh Sharma" . Our aim is to empower AAM ADAMI who trapped in vicious cycle of poverty. In our society lacs of men, women and children suffer ill health ,illiteracy due to unemployment and underemployment.

पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏आज हमारे पूजनीय दादाजी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि।दाद...
02/10/2026

पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏
आज हमारे पूजनीय दादाजी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि।
दादाजी का स्नेह, संस्कार, आशीर्वाद और जीवन से मिली सीख आज भी हमारे परिवार के लिए अमूल्य धरोहर है। वे भले ही आज हमारे बीच प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, आदर्श और संस्कार सदैव हमारे हृदय में जीवित रहेंगे।
उनकी स्मृतियाँ हमारे जीवन में हमेशा प्रकाश और प्रेरणा देती रहेंगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को उनके बताए मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
दादाजी, आपकी स्मृतियाँ सदैव हमारे हृदय में अमर रहेंगी।
🙏 ॐ शांति। शांति। शांति। 🙏

14/09/2026
इस लेख में हम बेहद अनूठी और वैज्ञानिक अध्ययन देने जा रहे हैं, जिसका नाम है— 'नाम जप का वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और यौगिक दृ...
08/09/2026

इस लेख में हम बेहद अनूठी और वैज्ञानिक अध्ययन देने जा रहे हैं, जिसका नाम है— 'नाम जप का वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और यौगिक दृष्टिकोण'।

जब भी हम किसी को माला फेरते या नाम जप करते हुए देखते हैं, तो आज की आधुनिक पीढ़ी इसे केवल एक धार्मिक कर्मकांड या अंधविश्वास समझ लेती है। लोग सोचते हैं कि इससे क्या होगा? लेकिन एक चिकित्सक और विज्ञान का छात्र होने के नाते, जब मैंने इसके पीछे के न्यूरो-वैज्ञानिक स्रोतों को देखा, तो मैं खुद दंग रह गया। आज हार्वर्ड से लेकर मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट तक के वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि बार-बार एक ही शब्द या मंत्र का उच्चारण हमारे मस्तिष्क को कैसे रीवायर (re-wire) कर सकता है। आज हम बिना किसी भ्रांति के नाम जप के पीछे छिपे शुद्ध शरीर क्रिया विज्ञान को समझेंगे। आलेख को बहुत ध्यान से पढ़ना ।

सबसे पहले समझते हैं कि जब हम लगातार नाम जप करते हैं, तो हमारे दिमाग में क्या बदलाव आता है? हमारे मस्तिष्क में एक खूबी होती है, जिसे 'न्यूरोप्लास्टिसिटी' (Neuroplasticity) कहते हैं। यानी, दिमाग अपनी संरचना को हमारे विचारों के अनुसार बदल सकता है। जब हम दिनभर तनाव, चिंता और नकारात्मक बातें सोचते हैं, तो हमारा मस्तिष्क बीटा वेव्स (Beta waves) में होता है, जो अत्यधिक सक्रियता और तनाव को दर्शाता है। लेकिन मेडिकल स्टडीज में देखा गया है कि जब कोई व्यक्ति लयबद्ध तरीके से नाम जप या मंत्र का उच्चारण करता है, तो मस्तिष्क तुरंत अल्फा (Alpha) और थीटा (Theta) वेव्स में प्रवेश कर जाता है। ये वही ब्रेन वेव्स हैं, जो गहरी नींद, ध्यान और हीलिंग के समय सक्रिय होती हैं। यानी, नाम जप आपके अशांत दिमाग को सीधे हीलिंग मोड में ले जाने का एक न्यूरोलॉजिकल शॉर्टकट है।

अब आइए इसके पैथोफिजियोलॉजी (Pathophysiology) पर। हमारे दिमाग में एक हिस्सा होता है, जिसे 'अमिगडाला' (Amygdala) कहते हैं। इसे शरीर का फियर सेंटर या अलार्म सिस्टम भी कहा जाता है। तनाव और एंजाइटी में यह अमिगडाला ओवरएक्टिव हो जाता है।

जब आप नाम जप करते हैं, विशेषकर जब जीभ और तालू का आपस में संपर्क होता है, तो हमारे मुंह के ऊपरी हिस्से में स्थित 84 मेरिडियंस पॉइंट्स (Meridians points) उत्तेजित होते हैं। यह उत्तेजना सीधे हाइपोथैलेमस को सिग्नल भेजती है। इसके साथ ही मंत्र के उच्चारण से जो कंपन पैदा होते हैं, वे हमारी वेगस नर्व (Vagus nerve) को सक्रिय कर देते हैं। वेगस नर्व हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic nervous system) की महारानी है। जैसे ही यह सक्रिय होती है, आपका कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन गिर जाता है, ब्लड प्रेशर सामान्य होता है और हृदय की गति संतुलित हो जाती है। विज्ञान कहता है कि यह केवल भगवान को रिझाना नहीं, बल्कि अपने नर्वस सिस्टम को शांत करना है।

योग विज्ञान के अनुसार, हमारा शरीर केवल हाड़-मांस का ढांचा नहीं है, बल्कि इसमें ऊर्जा का एक जाल है, जिसमें करोड़ों नाड़ियां हैं। जब हम किसी दिव्य नाम का जप करते हैं, तो वो ध्वनि तरंगें हमारे अनाहत चक्र और विशुद्धि चक्र को जाग्रत करती हैं। यह ध्वनि ऊर्जा हमारे अवचेतन मन में बैठे पुराने संस्कारों और कचरे को साफ करने लगती है। ऋषियों ने इसे मंत्र कहा है— "मननात् त्रायते इति मंत्रः"। अर्थात, जो मन को बंधनों से तार दे, मुक्त कर दे, वही मंत्र है। जब विज्ञान और अध्यात्म इस बिंदु पर मिलते हैं, तो जीवन में एक अद्भुत रूपांतरण होता है। इस परम व्यवस्था के लिए प्रकृति के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहिए।

निष्कर्ष के रूप में, नाम जप केवल एक धार्मिक क्रिया ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को उत्कृष्ट बनाने का एक वैज्ञानिक और यौगिक फॉर्मूला भी है।

प्रिय मित्रों ! क्या आप भी प्रतिदिन नाम जप या किसी विशेष मंत्र का उच्चारण करते हैं? आपका अनुभव कैसा रहा है? अपना पसंदीदा मंत्र कमेंट्स में हमारे साथ जरूर साझा करें । विज्ञान और अध्यात्म के इस अद्भुत संगम को केवल अपने तक सीमित न रखें। तनाव और चिंता से घिरे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ इसे शेयर करें ताकि वे भी इसका लाभ उठा सकें। इसे बाद में पढ़ने के लिए 'सेव' जरूर करें और पेज को फॉलो/सब्सक्राइब करना न भूलें। स्वस्थ रहिए, आध्यात्मिक बनिए, धन्यवाद ! जय श्री कृष्ण ।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी — धर्म, प्रेम और कर्मयोग का पावन संदेशजन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि ...
04/09/2026

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी — धर्म, प्रेम और कर्मयोग का पावन संदेश
जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की विजय और निराशा पर आशा की विजय का पर्व है।
जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी इसी दिव्य उद्देश्य का प्रतीक है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते हैं—
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥”
श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को धर्म, सत्य, साहस और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
श्रीकृष्ण का जीवन—एक संपूर्ण दर्शन
बाल्यकाल में माखन चुराने वाले नटखट कान्हा हों, गोपियों के प्रिय सखा हों, ग्वाल-बालों के मित्र हों, कंस के अत्याचार का अंत करने वाले योद्धा हों या कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर—श्रीकृष्ण का प्रत्येक रूप जीवन के किसी न किसी सत्य को समझाता है।
उन्होंने हमें सिखाया कि प्रेम में पवित्रता हो, शक्ति में मर्यादा हो और ज्ञान में विनम्रता हो।
गीता का सबसे बड़ा संदेश
भगवान श्रीकृष्ण का कर्मयोग आज भी उतना ही प्रासंगिक है—
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
अर्थात हमारा अधिकार अपने कर्म पर है, परिणाम पर नहीं। इसलिए जीवन में ईमानदारी और निष्ठा से अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए।
आज जब मनुष्य तनाव, चिंता, प्रतिस्पर्धा और असंतोष से घिरा हुआ है, तब श्रीकृष्ण का संदेश हमें भीतर से मजबूत बनाता है—कर्तव्य करो, सत्य के साथ खड़े रहो और परिणाम की चिंता भगवान पर छोड़ दो।
आज की जन्माष्टमी का संकल्प
इस जन्माष्टमी पर केवल मंदिर में पूजा और व्रत ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में श्रीकृष्ण के आदर्शों को उतारने का संकल्प लें।
मन में प्रेम हो,
वाणी में मधुरता हो,
कर्म में ईमानदारी हो,
विचारों में सकारात्मकता हो
और जीवन में धर्म का मार्ग हो।
आइए, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर हम संकल्प लें कि अपने परिवार, समाज और राष्ट्र में प्रेम, सेवा, सद्भाव, संस्कार और सत्य की भावना को मजबूत करेंगे।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
“जहाँ धर्म है, वहाँ श्रीकृष्ण हैं;
जहाँ सत्य है, वहाँ श्रीकृष्ण हैं;
जहाँ निःस्वार्थ सेवा है, वहाँ श्रीकृष्ण हैं।”
भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार हो।
जय श्रीकृष्ण!
— आचार्य वेंकटेश शर्मा

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का त्योहार नहीं, बल्कि रक्षा, विश्वास, कर्तव्य, संस्कार और पारिवारिक एकता का पवित्र पर्व...
28/08/2026

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का त्योहार नहीं, बल्कि रक्षा, विश्वास, कर्तव्य, संस्कार और पारिवारिक एकता का पवित्र पर्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय संस्कृति में बहुत गहरे आध्यात्मिक अर्थ रखता है।
🕉️ रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?
1. भाई-बहन के पवित्र संबंध का प्रतीक
बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती है। भाई बहन की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है।
2. रक्षा-संकल्प का पर्व
‘रक्षा’ का अर्थ केवल शारीरिक सुरक्षा नहीं है। यह धर्म, संस्कार, परिवार, नारी सम्मान और समाज के मूल्यों की रक्षा का भी संकल्प है।
3. धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा
भारतीय परंपरा में रक्षा-सूत्र का प्रयोग प्राचीन काल से होता आया है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी मंत्रोच्चार के साथ रक्षा-सूत्र बाँधा जाता है। इसका भाव है—ईश्वर हमारी रक्षा करें और हम अपने कर्तव्यों का पालन करें।
4. श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा
महाभारत की प्रसिद्ध परंपरा के अनुसार, श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त निकलने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक टुकड़ा बाँध दिया था। श्रीकृष्ण ने उसके इस स्नेह और समर्पण को याद रखा और संकट के समय उसकी रक्षा की। यह कथा निःस्वार्थ प्रेम और रक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है।
5. सामाजिक समरसता का संदेश
रक्षाबंधन का संदेश परिवार से आगे बढ़कर समाज तक जाता है—
“जो कमजोर है, उसकी रक्षा करना; जो दुखी है, उसका सहारा बनना और समाज में प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखना।”
🌸 आध्यात्मिक संदेश
राखी का धागा केवल कलाई पर नहीं,
हृदय में विश्वास और जीवन में संस्कार बाँधता है।
रक्षा का संकल्प केवल बहन की नहीं,
धर्म, नारी सम्मान, परिवार और संस्कृति की भी हो।
रक्षाबंधन हमें सिखाता है—
प्रेम में अधिकार नहीं, जिम्मेदारी हो;
रिश्तों में स्वार्थ नहीं, समर्पण हो;
और जीवन में केवल सुख नहीं, दूसरों की रक्षा का संकल्प भी हो।
आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः॥

Address

Lane No/2 , Taradham Colony, Tulsipur, Mahmoorganj
Varanasi
221010

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