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श्रद्धा, भक्ति और आस्था के पावन पर्व नागपंचमी के मंगल अवसर पर माँ मनसा देवी के वार्षिक श्रृंगार एवं विशेष पूजा-अर्चना का...
14/08/2026

श्रद्धा, भक्ति और आस्था के पावन पर्व नागपंचमी के मंगल अवसर पर माँ मनसा देवी के वार्षिक श्रृंगार एवं विशेष पूजा-अर्चना का पावन आयोजन किया जा रहा है।

माँ के दिव्य श्रृंगार, पूजा-अर्चना और दर्शन का यह अवसर भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति से जुड़ने का एक सुंदर अवसर है। आइए, परिवार सहित माँ मनसा देवी के चरणों में शीश नवाएँ और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

माँ मनसा देवी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल बना रहे।

📅 तिथि: 17 अगस्त 2026, सोमवार
📍 स्थान: माँ मनसा देवी मंदिर, रामनगर, वाराणसी

आप सभी भक्तजन सादर आमंत्रित हैं।

॥ जय माँ मनसा देवी ॥

एक लीला, दो युग… रामलीला की दुर्लभ स्मृतियाँ‘वशिष्ठ सभा’, चित्रकूट में ‘जनकागमन’ तथा ‘सभा’ लीला — जहाँ श्रीराम, भरत और ज...
14/08/2026

एक लीला, दो युग… रामलीला की दुर्लभ स्मृतियाँ

‘वशिष्ठ सभा’, चित्रकूट में ‘जनकागमन’ तथा ‘सभा’ लीला — जहाँ श्रीराम, भरत और जनक जी के मिलन में प्रेम, त्याग, कर्तव्य और आत्मीयता का ऐसा भाव दिखाई देता है, जो आज भी हृदय को स्पर्श करता है।

मुनि वशिष्ठ भरत को समझाते हैं—व्यर्थ की ग्लानि से कुछ प्राप्त नहीं होता। श्रीराम का स्नेह तुम्हारे साथ है। श्रीराम तो सबके हृदय में निवास करते हैं। भ्राता भरत की व्याकुलता और श्रीराम के प्रति उनका निर्मल प्रेम देखकर स्वयं देवगण भी उनके प्रेम की महिमा स्वीकार करते हैं।

इसी बीच विदेहराज जनक के आगमन का समाचार मिलता है। श्रीराम पूरे समाज के साथ आगे बढ़कर जनक जी का आदरपूर्वक स्वागत करते हैं। पिता और पुत्री का मिलन, जनक जी का सीता के प्रति स्नेह और उनके मुख से निकले आशीर्वचन—लीला के वातावरण को अत्यंत भावपूर्ण बना देते हैं।

फिर आता है वह क्षण, जब भरत की व्याकुलता देखकर श्रीराम स्वयं अधीर हो उठते हैं। दोनों भाइयों का यह स्नेहमय मिलन केवल दो भाइयों का मिलन नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और धर्म की उस मर्यादा का दर्शन है, जिसे रामकथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे हृदयों में जीवित रखती आई है।

इन्हीं भावों को अपने भीतर समेटे ये दो दुर्लभ तस्वीरें समय की दो अलग-अलग झलकियाँ हमारे सामने रखती हैं।

पहली तस्वीर 1925 की है और दूसरी 1978 की। दोनों तस्वीरें छायाचित्रकार Richard Schechner ने ली थीं। एक ही लीला के ये दो चित्र हमें बताते हैं कि समय आगे बढ़ता रहा, पीढ़ियाँ बदलती रहीं, पर रामलीला के प्रति श्रद्धा, प्रेम और भाव वही बना रहा।

एक लीला…
दो समय…
और एक ऐसी परंपरा, जो आज भी हृदयों में जीवित है।

ये तस्वीरें केवल बीते समय की स्मृतियाँ नहीं, बल्कि काशी की जीवित सांस्कृतिक परंपरा और रामलीला के प्रति जनमानस की अटूट श्रद्धा की अनमोल झलकियाँ हैं।

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🌟 प्रतीक्षा की घड़ियां समाप्त! आज होने जा रहा है रामनगर रामलीला का श्रीगणेश 🌟आज पवित्र श्री गणेश पूजन के साथ विश्व प्रसि...
02/08/2026

🌟 प्रतीक्षा की घड़ियां समाप्त! आज होने जा रहा है रामनगर रामलीला का श्रीगणेश 🌟

आज पवित्र श्री गणेश पूजन के साथ विश्व प्रसिद्ध रामनगर रामलीला का विधिवत शुभारंभ होगा! 🚩

✨ आज के मुख्य आकर्षण:

पावन आह्वान: पंच स्वरूपों, गुरु वशिष्ठ और संकटमोचन हनुमान जी का पूजन कर आह्वान किया जाएगा।

अनूठी पूजन विधि: एक नए पीढ़े पर श्री गणेश और हनुमान जी के मुखौटे रखकर विशेष पूजा होगी। इसके एक ओर लीला के औजार (ब्रश, बंसुला, कैंची) और दूसरी ओर लाल कपड़े में लिपटी रामलीला की पोथी विराजमान होगी।

संवाद शिक्षा: आज से ही आदरणीय व्यास जी पंच स्वरूपों को संवाद, हाव-भाव और अनुशासन का अभ्यास कराना शुरू करेंगे।

रामनगरवासी, बनारसी नेमी और सभी लीला प्रेमी प्रभु के आगमन की इन तैयारियों को लेकर अत्यंत उत्साहित और आह्लादित हैं। आइए, हम सब भी इस पावन उत्सव से जुड़ें!

जय सिया राम जी की! 🙏🏼
हर हर महादेव! 🙌

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