10/09/2026
वेस्टइंडीज़ की टीम अपने बारे में एक बात बड़े गर्व से कहा करती थी कि हम सिर्फ मैच जीतने के लिए नहीं, बल्कि दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए क्रिकेट खेलते हैं। उनके क्रिकेट में जीत के साथ-साथ आक्रामकता, रोमांच और दर्शकों को कुछ यादगार देने की भावना भी होती थी। शायद यही क्रिकेट की असली खूबसूरती है; नतीजे के साथ मनोरंजन भी।
आज दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईशान किशन की रणनीति समझ से परे रही। पहली पारी में 708 रन बनाने और बड़ी बढ़त हासिल करने के बाद मैच ड्रॉ होने की स्थिति में भी जीत लगभग सुनिश्चित थी। ऐसे में पाँचवें दिन का उद्देश्य सिर्फ समय बिताकर मैच को और नीरस बनाना क्यों होना चाहिए?
पहले सेशन के बाद, या अधिक से अधिक दूसरे सेशन के आधे हिस्से तक अपनी पारी घोषित करके साउथ जोन को बल्लेबाज़ी का मौका दिया जा सकता था। देवदत्त पडिक्कल और तिलक वर्मा जैसे बल्लेबाज़ों को तेज़ी से रन बनाने के लिए भेजा जाता, तो मैच में कम-से-कम कुछ रोमांच पैदा होता। दर्शकों को भी कुछ ऐसा देखने को मिलता जिसके लिए वे मैदान और स्क्रीन के सामने बैठे थे।
जब आपके गेंदबाज़ पर्याप्त आराम कर चुके थे और विपक्षी बल्लेबाज़ भी लंबे समय तक मैदान से बाहर रहे थे, तब उन्हें चुनौती देने का एक मौका देना क्रिकेट के लिहाज़ से भी दिलचस्प रणनीति हो सकती थी।
फाइनल सिर्फ ट्रॉफी जीतने का नाम नहीं है। यह खिलाड़ियों को परखने, रणनीति दिखाने और दर्शकों को यादगार क्रिकेट देने का भी मंच है।
जीत महत्वपूर्ण है, लेकिन क्रिकेट की खूबसूरती सिर्फ जीत में नहीं, बल्कि इस बात में भी है कि आप जीत तक पहुँचने का रास्ता कितना रोमांचक बनाते हैं।
आज दलीप ट्रॉफी के फाइनल में जीत तो मिली, लेकिन क्रिकेट का रोमांच कहीं पीछे छूट गया...