ई भोजपुरी भाखा, लोक, कला, संस्कृति अउर समाज के जाने अ बुझे खातिर एगो छोटहन प्रयास बा। अगर रउवा भोजपुरी प्रेमी बानी आ भोजपुरिया बानी त ई मजगर जतरा प रउवा सभे के सबहर बोलाहटा बा।
Ras Buniya is an attempt to understand Bhojpuri language, people, art, culture and society. You are most welcome to come with us on this adventurous journey.
भोजपुरी के पानी आ बानी दूनों बड़ा मीठ, बरिआर आ सहजोर होला। एह भा
षा के बानी पर त शब्दन के जवन पानी चढ़ल बा ओकर कवनो जवाब नइखे। अपना शब्दन के अनमोल धन के जवन धरोहर भोजपुरी भाषा में बा, ऊ कवनो भाषा के गुमान करे खातिर काफी बा। एह शब्दन में मदन-रस मातल महुआ के ताजगी आ मह-मह महक बा, अपना मनमोहन नशा में अग-जग गोति देबे वाला लेंढ़िआत कटहर कटहर के सरस, गभुराइल गम-गम गमक बा, मोजराइल आम के मनमातल सुबास बा, आपन जोरावर माटी के सोन्हाई बा, भक दे अँजोर क देबे वाला जोन्हाई बा, भरम के काटि के मरम के डिठार करा देबे वाली भाषा के आँजन बा, पुरखन के मरजाद बा, हियरा हरसा देबे वाली गंगा के पबित्रता बा, हिमालय के ऊँचाई बा, सागर के अतल गहराई बा, अमराई के जुड़छाँह बा आ बा सुरुज के जवरे आगि के गरम आँचिओ। मतलब ई जे एगो भरल-पूरल, टाँठ-पोढ आ जीअत जनगर भाषा के शब्दन में जइसन जिनिगी, अनुभव, चुस्ती, कसावट, गहराई आ धार चाहीं ओइसन एह के शब्दन में बा। एह शब्दन में लोच बा, मिठास बा, लुनाई बा, सुघराई बा। इहनीं में कोंंअराई आ गूढ़ता दूनो बा। ई अदनार आ रूढ़ो-पकठाइल बाड़न। ई जनमतुआ निहन आल्हरो बाड़न आ लकड़ी के गाँठ नियन गँठगर आ ठेठो बाड़न।
मधु में बोरल, अमृत में सनाइल जवन शब्द होलन, ऊ निहाल क देलन (एह भाषा के मिठासपन के चलते ही एह पेज के नाम "रस बुनिया" धराइल बा। कहे के मतलब कि ई बा कि भोजपुरी बँहिकट भाषा ना ह, एकरा शब्दन के बाँहि बड़ा लमहर बा।
(भोजपुरी के उद्भट बिद्वान, अनिल कुमार 'आंजनेय' जी के सादर नमन करते हुए उहाँ से कुछ शब्द पईंचा ले के)