All India Pasmanda Adhikar Manch

All  India Pasmanda Adhikar Manch Fight for Your Rights (फाइट फॉर योर राइट्स)
लड़ाई आपके अधिकारों की✍️

11/07/2026

*आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच* एक ऐसा संगठन है जो साम्प्रदायिकता, जातीय भेदभाव और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंच का मानना है कि पसमांदा हिन्दुओं और पसमांदा मुसलमानों के हित परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि समान हैं। दोनों समुदाय महँगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक असमानता और आर्थिक चुनौतियों जैसी समस्याओं का समान रूप से सामना करते हैं। इसलिए इन साझा मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करना समय की आवश्यकता है।

आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच सभी वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों के बीच आपसी भाईचारे, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने का आह्वान करता है। मंच का उद्देश्य यह है कि पसमांदा हिन्दू और पसमांदा मुसलमान मिलकर नफ़रत, साम्प्रदायिक तनाव और जातीय वैमनस्य फैलाने वाली प्रवृत्तियों का लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से मुकाबला करें तथा एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दें जहाँ समान अवसर, सम्मान और न्याय सभी नागरिकों को प्राप्त हो।

अब्दुल माजिद
संस्थापक व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
ऑल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच

5 जुलाई 26, मशरक छपरा जिला में मुस्लिम धोबी हवारी सम्मेलन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि डॉ एजाज अली पूर्व सांसद, मो उस्मान हलाल...
09/07/2026

5 जुलाई 26, मशरक छपरा जिला में मुस्लिम धोबी हवारी सम्मेलन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि डॉ एजाज अली पूर्व सांसद, मो उस्मान हलालखोर, डॉ नूर हसन आजाद ,रविराज नट, तौफीक अहमद शाह, सलीम रामपुरी, इदरीश हवारी, इजरायल हवारी अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। अध्यक्षता आस मोहम्मद हवारी ने की। सम्मेलन के माध्यम से बिहार सरकार से मांग की गई कि अरजाल आयोग का गठन किया जाए और अनुच्छेद 341 में राष्ट्रपति अध्यादेश वापस लिया जाए।

02/07/2026

भरत भूषण तिवारी हत्याकाण्ड

एक सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी का फर्ज़ी एनकाउंटर बिहार सरकार की पुलिस ने कर दिया।

लोग सोच रहे हैं कि हिन्दुओं की सरकार है और हिन्दुओं का फर्जी एनकाउंटर क्यों करवाती है?

इसका जवाब एकदम साफ है - भरत भूषण तिवारी वह एक गरीब हिन्दू था। वरना संसद और विधानसभाओं में बहुत बड़े-बड़े अपराधी बैठे हुए हैं, पुलिस उनका एनकाउंटर क्यों नहीं करती?

बिहार के भोजपुर में पुलिस ने एक निहत्थे गरीब हिंदू को चार गोलियाँ देकर यह संदेश दे दिया कि—"अगर तुम गरीब हिन्दू हो, तो तुम्हारी जान किसी कीड़े-मकोड़े से भी सस्ती है।"

सरकार के सामने एक गरीब हिंदू की कीमत यही है।

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01/07/2026

हमसे दो साल बाद चीन आजाद हुआ। तब वह अर्थव्यवस्था में चालीसवें नंबर पर था हम दसवें नंबर पर थें। आज वह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था का इंजन बना हुआ है और हम फर्जी आँकड़ों के बावजूद भी सिर्फ पाँचवीं अर्थव्यवस्था बन पाये हैं। वास्तविक आँकड़ों में आज भी हम दसवें नंबर पर ही हैं। बेशुमार प्राकृतिक संसाधनों और युवा मानवसंसाधनों के बावजूद परकैपिटा इन्कम में हम बांग्लादेश से भी पीछे हैं। आज भी हमारा भारत एक हारा हुआ फिसड्डी देश बना हुआ है।

याद रखिए—आप जैसे हैं, वैसे स्वीकार करना हार नहीं, जीत की शुरुआत है। और यही वह केंद्र बिंदु है, जहाँ से सीखने और बदलने की अंतहीन यात्रा शुरू होती है।

अब्दुल माजिद
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच

25/06/2026

सोनम वांगचुक स्विट्ज़रलैंड जा रहे हैं.!! हमेशा के लिए ??

वहाँ पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के भविष्य पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने.

सोनम बताते हैं कि जब वे वीज़ा लेने स्विस एंबेसी पहुँचे, तो उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. उन्हें पाँच वर्ष का वीज़ा दिया गया.
वीज़ा फीस तक नहीं ली गई.
अधिकारियों ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है.

एक पराया देश है, जो उनके काम का सम्मान करता है, उनके विचारों को सुनना चाहता है.

और एक अपना देश है, जहाँ उन्हें कभी राष्ट्रविरोधी, कभी देशद्रोही और कभी व्यवस्था-विरोधी बताने की कोशिशें होती रहती हैं.😑

क्यों?

क्योंकि वे लद्दाख के बच्चों की शिक्षा, पर्यावरण और जलवायु जैसे मुद्दों पर काम तो करते ही हैं, साथ ही सत्ता और व्यवस्था से सवाल भी करते हैं.

और हमारे समय का सबसे बड़ा अपराध शायद यही है...सवाल करना.

हमारे यहाँ वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विचारकों के लिए सम्मान तभी तक है जब तक वो सत्ता की धुरी के पहिये-कीले बने रहे.
तब वे पुरस्कार जीतते रहेंगे, मंचों पर मुस्कुराते रहेंगे तब तक वे राष्ट्र का गौरव बने रहेंगे.

लेकिन जिस दिन वे जनता, पर्यावरण, लोकतंत्र या सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने लगते हैं, वे अचानक संदिग्ध हो जाते हैं. समस्या हो जाते है.

जबकि किसी लोकतंत्र की ताकत केवल उसकी सेना, सड़कें और ऊँची इमारतें नहीं होतीं....उसकी असली ताकत उसके विचार होते हैं.

और वैचारिक रूप से अभी देश अपने पतन पर है.

सोनम वांगचुक भारत में रहेंगे या नहीं, यह उनका निजी निर्णय है.लेकिन अपने ही देश मे उन्हें उचित सम्मान ना मिलना,उस के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है.

फिर भी मुझे नहीं लगता कि वे इस मिट्टी को छोड़ देंगे..वे लौटेंगे.

वे लौटेंगे, और फिर उसी काम में जुट जाएँगे जिसके लिए दुनिया उन्हें सम्मान देती है और अपना देश उनसे सवाल पूछता है.

सम्मान मिले या अपमान, वह अपने समय के ज़रूरी सवाल पूछना नहीं छोड़ता.

ठीक उसी तरह,जैसे कुछ लोग मेरी आलोचना करते हैं.. लेकिन मैं व्यवस्था पर बात करूंगा..

सरकार कोई भी हो..

हमने कांग्रेस के समय में भी सवाल किए..अब भी करते है.

हमारे सवाल सरकार से कम..सिस्टम से ज्यादा है.

सरकारें आती जाती रहेगी,
सिस्टम से सवाल ना करना...
आप के चाटुकार होने का ..
या आप के बौद्धिक दिवालिया होने का ..
या आप के बिक जाने का...
या फिर आप की आत्मा के मर जाने का प्रमाण है.

अब्दुल माजिद
संस्थापक एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच

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12/06/2026
‎दिनाँक 9 जून 2026 को कचहरी परिसर में आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब एडवोकेट यूसुफ अंसारी साहब क...
10/06/2026

‎दिनाँक 9 जून 2026 को कचहरी परिसर में आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब एडवोकेट यूसुफ अंसारी साहब के अगुवाई में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पसमांदा समाज के सामाजिक और राजनीतिक उत्थान और उनकी सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी पर चर्चा की गई। बैठक में पसमांदा समाज के अधिकारों को सरकार तक पहुंचने के लिए एक प्रतिनिधि मंडल के गठन पर सहमती हुई।

‎बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि एक प्रतिनिधि मंडल का गठन किया जाएगा जो पसमांदा बिरादरियों की मांग को मांगपत्र के द्वारा सरकार तक पहुंचाएगी।

‎बैठक का संचालन आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच के संस्थापक एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अब्दुल माजिद ने की। बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद वसीम, राष्ट्रीय महासचिव ऐडवोकेट राजेंद्र यादव, राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद जमील, राष्ट्रीय सचिव सोहराब अख्तर एवं राष्ट्रीय सचिव एडवोकेट मोहम्मद सद्दाम ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।

आल इंडिया ‎पसमांदा अधिकार मंच ने दिया नारा‎"पसमांदा ने भारी हुंकार, लेकर रहेंगे अपना अधिकार"‎‎लगातार पसमांदा समाज के सवा...
07/06/2026

आल इंडिया ‎पसमांदा अधिकार मंच ने दिया नारा
‎"पसमांदा ने भारी हुंकार, लेकर रहेंगे अपना अधिकार"

‎लगातार पसमांदा समाज के सवालों के प्रति बरती जाने वाली उदासीनता और असंवेदनशीलता की वजह से आज पूरे देश में पसमांदा समाज बेहद ही बुरे दौर से गुजर रहा है । जहाँ एक-एक करके उसके सभी परंपरागत उद्योग धंधे या तो खत्म हो चुके हैं या खत्म होने की कगार पर हैं। वहीं सामाजिक, शैक्षणिक तथा राजनीतिक स्तर पर यह समाज बेहद पिछड़ेपन का शिकार है।

‎इसी संदर्भ में आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच के संस्थापक एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जनाब अब्दुल माजिद ने अलग अलग पसमांदा बिरादरियों के साथ बैठक की। बैठक में पसमांदा समाज के उत्थान और राजनीति में उनकी सक्रिय भागीदारी पर चर्चा हुए। चर्चा में मुस्लिम दलित हलालखोर कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब मुर्तुजा आलम ने हर तरह से अपनी भागीदारी देने और सबका साथ सबका विकास का नारा लगाया।

‎जानब अब्दुल माजिद साहब ने मीटिंग को संबोधित करते हुए कहा कि सभी धर्मों के दलित, पिछड़ो, आदिवासियों तथा पसमांदा तबकों की समस्या एक तरह की है। पसमांदा समाज के अधिकारों के लिए तमाम पसमांदा बिरादरियों और उनके संगठनों को एक साथ मिलकर चलना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सड़क से संसद तक का आंदोलन चलाया जाएगा।

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