25/06/2026
सोनम वांगचुक स्विट्ज़रलैंड जा रहे हैं.!! हमेशा के लिए ??
वहाँ पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के भविष्य पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने.
सोनम बताते हैं कि जब वे वीज़ा लेने स्विस एंबेसी पहुँचे, तो उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. उन्हें पाँच वर्ष का वीज़ा दिया गया.
वीज़ा फीस तक नहीं ली गई.
अधिकारियों ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है.
एक पराया देश है, जो उनके काम का सम्मान करता है, उनके विचारों को सुनना चाहता है.
और एक अपना देश है, जहाँ उन्हें कभी राष्ट्रविरोधी, कभी देशद्रोही और कभी व्यवस्था-विरोधी बताने की कोशिशें होती रहती हैं.😑
क्यों?
क्योंकि वे लद्दाख के बच्चों की शिक्षा, पर्यावरण और जलवायु जैसे मुद्दों पर काम तो करते ही हैं, साथ ही सत्ता और व्यवस्था से सवाल भी करते हैं.
और हमारे समय का सबसे बड़ा अपराध शायद यही है...सवाल करना.
हमारे यहाँ वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विचारकों के लिए सम्मान तभी तक है जब तक वो सत्ता की धुरी के पहिये-कीले बने रहे.
तब वे पुरस्कार जीतते रहेंगे, मंचों पर मुस्कुराते रहेंगे तब तक वे राष्ट्र का गौरव बने रहेंगे.
लेकिन जिस दिन वे जनता, पर्यावरण, लोकतंत्र या सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने लगते हैं, वे अचानक संदिग्ध हो जाते हैं. समस्या हो जाते है.
जबकि किसी लोकतंत्र की ताकत केवल उसकी सेना, सड़कें और ऊँची इमारतें नहीं होतीं....उसकी असली ताकत उसके विचार होते हैं.
और वैचारिक रूप से अभी देश अपने पतन पर है.
सोनम वांगचुक भारत में रहेंगे या नहीं, यह उनका निजी निर्णय है.लेकिन अपने ही देश मे उन्हें उचित सम्मान ना मिलना,उस के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है.
फिर भी मुझे नहीं लगता कि वे इस मिट्टी को छोड़ देंगे..वे लौटेंगे.
वे लौटेंगे, और फिर उसी काम में जुट जाएँगे जिसके लिए दुनिया उन्हें सम्मान देती है और अपना देश उनसे सवाल पूछता है.
सम्मान मिले या अपमान, वह अपने समय के ज़रूरी सवाल पूछना नहीं छोड़ता.
ठीक उसी तरह,जैसे कुछ लोग मेरी आलोचना करते हैं.. लेकिन मैं व्यवस्था पर बात करूंगा..
सरकार कोई भी हो..
हमने कांग्रेस के समय में भी सवाल किए..अब भी करते है.
हमारे सवाल सरकार से कम..सिस्टम से ज्यादा है.
सरकारें आती जाती रहेगी,
सिस्टम से सवाल ना करना...
आप के चाटुकार होने का ..
या आप के बौद्धिक दिवालिया होने का ..
या आप के बिक जाने का...
या फिर आप की आत्मा के मर जाने का प्रमाण है.
अब्दुल माजिद
संस्थापक एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
आल इंडिया पसमांदा अधिकार मंच
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