संक्षिप्त परिचय
श्री टेकचन्द तरुण संघ का गठन सन 1984 मे गुरु पुर्णिमा को हुआ था। प्रथम अध्यक्ष श्री हीरालाल सोलंकी थे । जिनके साथ श्री संतोष जी गोयल , श्री सुरेश परमार , श्री प्रदीप सोलंकी , श्री अनिल परमार , श्री गोवर्धन लाल जाधव, श्री राधेश्याम सोनगरा, श्री विजय परमार, श्री राजाराम कामरेड, श्री कैलाश सोनगरा आदि कार्यकारणी में थे।
संघ द्वारा गुरुधाम कड़छा में प्रथम कार्यक्रम के रूप में लक्की ड्र
ा दिनांक ०३-११-१९८५ शरद पूर्णिमा पर किया गया| अन्य कार्यो में उज्जैन से कड़छा आवागमन हेतु रोडवेज़ के द्वारा बसो की व्यवस्था करना , जिला पंचायत के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना | उस समय ग्राम कड़छा में ओढ़ने बिछाने की व्यवस्था नहीं रहती थी , तरुण संघ द्वारा नाममात्र शुल्क पर उज्जैन से गादी-रजाई ले जाकर यात्रियों को उपलब्ध कराता था| गरबे इत्यादि का प्रोग्राम भी शरद पूर्णिमा पर आयोजित किया गया| जो कि कई कार्यक्रमों के साथ १९९० तक अनवरत चलता रहा ।
१९९० के बाद संगठन के सदस्यों के निष्क्रिय होने के कारण १९९५ तक कोई सामाजिक कार्य नहीं किया गया|
सन १९९६ में श्री मुकेश सोनगरा को अध्यक्ष बनाते हुए संगठन का पुनर्गठन किया गया जिसमे प्रारंभिक रूप में रंगोली प्रतियोगिता , सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आदि का आयोजन शरद पूर्णिमा पर ग्राम कड़छा में बच्चों के लिए करते हुए सर्वप्रथम ५० पैसे में चाय की व्यवस्था स्टाल के माध्यम से की गई|
कड़छा में सर्वप्रथम परिचय सम्मलेन का आयोजन शरद पूर्णिमा २००५ के एक दिवस पूर्व भव्य रूप में किया गया जो कि समाज में ऐतिहासिक रहा जिसमे सर्वाधिक विवाह योग्य युवक एवं युवतियों कि ४५० प्रविष्ठियां दर्ज होकर मंच के माध्यम से युवक - युवतियों द्वारा परिचय दिया गया था । जिसकी परिचय पुस्तिका मिलन प्रयास २००५ का प्रकाशन भी उसी दिनांक को हुआ था ।
वर्ष २००९ में देवउठनी ग्यारस पर श्री टेकचंद तरुण संघ द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रथम बार सशुल्क राशी १५०००/- रुपये प्रति पक्ष लेते हुए सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन किया गया जिसमे संगठन की ओर से वधु को पलंग , गादी, रजाई , सोफे , अलमारी , कूलर, कलर टीवी , पांच बर्तन, मंगल सूत्र, बिछिया, आदि उपहार स्वरुप दी गई थी| जो कि निरंतर समाजजनों के सहयोग से चल रहा है| वर्ष २०१४ में देवउठनी ग्यारस पर छठवा सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है|
श्री टेकचंद तरूण संघ द्वारा सम्पुर्ण समाज की जनगणना करते हुए उसे संगठन की वेबसाईट पर इन्टरनेट के माध्यम से प्रदर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है ।