ग़ज़ल के गाँव से

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04/10/2025

इस क़दर रोया हूँ तेरी याद में
आईने आँखों के धुँदले हो गए

- नासिर काज़मी

22/09/2025

इक दिन तिरी गली में मुझे ले गई हवा
और फिर तमाम उम्र मुझे ढूँढती रही

- विपुल कुमार

20/09/2025

एक नाज़नी की मय्यत और दुश्मनी के कांधे
कांटो पे जा रहा है इक फूल का जनाज़ा.

19/09/2025

पता अब तक नहीं बदला हमारा
वही घर है वही क़िस्सा हमारा

वही टूटी हुई कश्ती है अपनी
वही ठहरा हुआ दरिया हमारा

किसी जानिब नहीं खुलते दरीचे
कहीं जाता नहीं रस्ता हमारा

हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़'
हमारे साथ है साया हमारा

- अहमद मुश्ताक़

कहीं उम्मीद सी है दिल के निहाँ ख़ाने मेंअभी कुछ वक़्त लगेगा उसे समझाने में                    नए दीवानों को देखें तो ख़ु...
18/09/2025

कहीं उम्मीद सी है दिल के निहाँ ख़ाने में
अभी कुछ वक़्त लगेगा उसे समझाने में

नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है
हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में

- अहमद मुश्ताक़

15/09/2025
15/09/2025

रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैं
सब तेरी ओढ़नी के तार नज़र आते हैं.

कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे
आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं.

मैं कहाँ जाऊँ करूँ किस से शिकायत उस की
हर तरफ़ उस के तरफ़-दार नज़र आते हैं

एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर 'ताबिश'
और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं

~ ज़ुबैर अली ताबिश

Ghalib 💕
13/09/2025

Ghalib 💕

12/09/2025

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जॉन 💕
09/09/2025

जॉन 💕

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