Aastha - Astrologicals by B.p.upadhyay

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Aastha - Astrologicals by B.p.upadhyay Astrological Guidance, Horoscope Reading,Vastu Guidance & Palm Reading by Life member of ICAS. Scientific reading based on 40 years experience.

21/09/2026

।। भूमि पूजन और शिलान्यास( नींव भराई)।।
कोई भी पञ्चाङ्ग उठा कर देखिए उक्त दोनों के अलग अलग मुहूर्त नहीं है जबकि हकीकत में दोनों अलग अलग मुहूर्त होते है,80%जनमानस भी अनभिज्ञ और 90% ज्योतिषी भी,कई बार ये एक ही दिन भी आते है मगर अक्सर ये भीन्न भी होते है अतः अपने घर के/ आशियाने के लिऐ मुहूर्त अच्छे जानकार से ही निकलवाया जाना चाहिये। बरसों से मैंने ये मुहूर्त निकाले है और शतप्रतिशत निर्माण समय पर बगैर बाधा रहित पूरे हुए है(,यह पोस्ट आत्मप्रसंशा या स्वविज्ञापन नहीं है और मुझसे मशविरा लेने वाले जानते है ये।,मैंने मेरे घर के बाहर अपने नाम तक की तख्ती भी नहीं टाँक रखी है इसलिये व्यावसायिक ज्योतिषी इसे अन्यथा लेने की जगह पूरी ईमानदारी से मुहूर्त बतावे।). पोस्ट का मकसद मात्र ये जानकारी देने के लिऐ है कि जब भी किसी ज्योतिषी के पास मुहूर्त निकलवाने जावे दोनों मुहूर्त निकलवावे।सर्व हितेन ये पोस्ट है।
।। जय श्री कृष्ण ।।

14/09/2026

पत्रिका के उदयपुर संस्करण में श्री गणेश पूजन के मुहूर्त जयपुर एवं आसपास के गांवों, शहरों के है,उदयपुर शहर में वृश्चिक लग्न 11.02 से13.19 एवं शुभ का चौघड़िया 9.27 से 10.58 तक है। गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।

10/08/2026

।। आस्था अनन्त ....1 ।।

धर्म ग्रंथों का,वैदिक मान्यताओं का उपहास उड़ाना भी आजकल चलन में है तो धर्म की आड़ में मतलब सिद्धि भी चरम पर है।कोई भी व्यक्ति बगैर जांचे,परखे किसी का भी अनुसरण करने लगता है जबकि सेहत के लिए जिस तरह अच्छी और पौष्टिक खुराक जरूरी है,मन की खुराक भी शुद्ध और पौष्टिक होना जरूरी है।

पौराणिक देवी ,देवताओं के नाम भी अपने आप में पूर्ण मंत्र की तरह है, जैसे राम,कृष्ण,दुर्गा,राधा...... । "राम" नाम की व्याख्या मै पहले कर चुका हूं। नीम करौली बाबा (कैंची धाम) तो भक्तों से बोलते भी यही थे बेटा राम नाम जप बस।
आज बात करे ""राधा" की

"रा " जिनके रोम कूपो में अनेक विश्व है वे महा विष्णु ही रा शब्द है

"धा" संसार के प्राणियों तथा लोक में मातृ वाचक "धाय" है ।

राधिका जी स्वयं एक प्रसंग में कहती है "मै माता,मूल प्रकृति और ईश्वरी हूं,इसीलिए श्री हरि ने मेरा नाम राधा रखा है।
ज्योतिष शास्त्र के सन्दर्भ "रा" याने शुक्र
"धा" याने गुरु

याने ज्ञान और रस का मिलन .......इससे सुन्दर और सुखद क्या?

इसीलिए जहां अनेकों सन्त कह गए हैं कि राम राम जपो वही अनेकों सन्त कहते है राधे राधे जपो।।

।। सुप्रभात।।
।। राधे राधे।।

03/08/2026

"ग्रह और गृह"

हिन्दी भाषा की खूबसूरती देखिए कि ग्रह की टांग आगे है इस तरह " / " जबकि गृह की टांग पीछे मुड़ी हुई है,ग्रह अपना काम करेंगे ही मगर हमारा घर (गृह) हम लचीलेपन से चला लेंगे।

"जय श्री कृष्ण "

29/07/2026

।। परम सौभाग्य से............

मां से ही सारे संस्कार हममें आते है जिनमें पिता प्राण फूंकता है,शास्त्र कहते है कि मां गर्भकाल में जिस तरह का चिन्तन करती है वो सन्तान फल की तरह मां की गोद में आ जाता है।

मेरा ऐसा मानना है कि ईश्वर का द्वार हो या सद्गुरु की चौखट वहां की दहलीज पर पहुंचाने का कार्य पिता ही करते है।तराशने का कार्य शिक्षक और परिष्कृत करने का कार्य गुरु करते हैं। तो मेरे इन गुरु श्रेष्ठों का मेरा सादर नमन, सादर प्रणाम और उन सभी के लिए बहुत बहुत लघु शब्द हैं लेकिन फिर भी कहने का मन है मन, आत्मा से उनका हार्दिक धन्यवाद।

अच्छे संस्कारों के बिना ज्ञान प्राप्ति संभव नहीं है,मेरे पिता का योगदान इसलिए सबसे बड़ा है क्योंकि सीमित आय में भी उन्होंने हम सभी बच्चों को शिक्षा के लिए किसी खर्च से कभी मना नहीं किया और न ही मेरी माँ ने पिता के निर्णयों में कोई भी दखल दिया।

समय तो निरन्तर सिखाता ही रहा है,कुछ न कुछ सीखने के ललक,पढ़ते रहने की ललक से ही समझ में आया कि हमारे ईष्ट देवों के किन किन गुणों के चलते उनमें अपार शक्ति समाहित है......

श्री गणेश जी से बड़ा द्वारपाल कौन जो मां की आज्ञा के पालनार्थ जब तक मां की आज्ञा नहीं हो हर किसी के नगर प्रवेश पर रोक लगाते शीश कटा बैठे।
श्री हनुमान जी से निस्वार्थ सेवक कौन......
श्री कृष्ण से बड़ा मित्र कौन......
श्री राम से बड़ा आज्ञाकारी पुत्र कौन ....
मां दुर्गा से बड़ी योद्धा कौन...
और भी है बहुत कुछ जो आगे किसी पोस्ट से शेयर करूंगा।
।। जय श्री कृष्ण।।
।।गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।।

10/07/2026

" मन....... ज्योतिष ....1"
मानव मन भी कैसा है कि कोई खुश हो कर मिलता है तो हम भी खुश हो जाते हैं और सहज ही में यह पल अतीत बन जाते है लेकिन कोई नाराज़ हो जाए,कोई ताना मार दे,कोई अनदेखा कर दे,कोई गैर सा बन जाए हम उसे महीनों, बरसों मन में लिए घूमते रहते है,यह मन का ऐसा स्वभाव है जिससे कोई परम योगी ही बचता है,बचता भी है या उनका संयम इतना पुष्ट हो जाता है कि वो महसूस ही नहीं होने देते कि कोई टीस सी मन में अभी भी है। मुझे अपने बचपन का ही एक प्रसंग याद आता है कि मेरे एक दोस्त ने मुझे यह ताना मार दिया कि "तुम तो गरीब हो ,तुम्हारे पास तो कपड़े,जूते तक ढंग के नहीं है " बाल मन था मगर वो बात दिल को ऐसा चीर गई कि उस दिन के बाद से मैने उससे बात करना बन्द किया और ऐसा बन्द किया कि बाद के सालों में कई बार सामने पड़ने पर भी उससे बात नहीं कर पाया।
हम अपनी जिन्दगी में लगभग सब कुछ मन के अधीन होकर ही तो करते हैं। और मन और मन की खुशियों,मन की पीड़ाओं,मन की शक्ति को जितना हमारे मनीषियों ने समझा है चाहे वो धर्म शास्त्र हो,चाहे वो आयुर्वेद हो या ज्योतिष शास्त्र तभी तो ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को ही मन का कारक कहा गया है और फलित और ज्योतिष से जुड़ी अधिकांश क्रियाओं में चन्द्रमा को ही अधिक महत्व दिया जाता है।
भले ही वो मुहूर्त हो,मेलापक हो ,मुख्य दशा पद्धति हो या नामकरण चन्द्रमा को ही प्रमुखता दी जाती है और तो और वैदिक विधान में राशि फल का आधार भी चन्द्र राशि से ही है। हममे से बहुतेरे जो सुबह सुबह अखबारों में राशिफल पढ़ कर खुश या दुखी होते है उनका आधार भी अधिकांशतः चन्द्र राशि ही है......
मन के भाव ही तो है जो किसी को लेखक बनाता है,किसी को कवि,किसी को चित्रकार तो किसी को मूर्तिकार ,मन ही है जो विज्ञान के अधीन नहीं है........होना भी नहीं चाहिए यदि बिंदास जीना है तो....
मन पर तो और बात करेंगे लेकिन मन पर ही करेंगे मन की नहीं।
।। शुभरात्रि।। जय श्री कृष्ण।।

11/04/2026

।। आभार।। धन्यवाद।।
"ता कहूँ प्रभु कछु अगम नहीं,जा पर तुम्ह अनुकुल।
तव प्रभाव बड़वानलहि जारि सकई खलु तूल ।।"
युद्ध रुकने की तारीख की मेरी भविष्यवाणी पर कुछ लोगों ने कहा कि युद्ध विराम है,युद्ध रुका कहां है? सही है लेकिन लगभग सभी युद्ध एकदम से बन्द होने की जगह युद्ध विराम से ही गुजरते हैं और बन्द होते है। जो भी ऐसा कह रहे हैं उन्हें मुझसे ईर्ष्या,जलन या कोई शिकायत हो सकती है लेकिन हमारे वैदिक ज्ञान से तो नहीं ही होनी चाहिए। मुझे जो भी मेरी भविष्यवाणी थी उस पर अभिमान, अहंकार नहीं है क्योंकि
सो सब तव प्रताप रघुराई
नाथ न कछू मोरी प्रभुताई
आप सभी ने चाहे TV पर ज्योतिषियों की बहस सुनी होगी, अखबारों में भी किसी न किसी ज्योतिषी की बताई कोई बात पढ़ी होगी लेकिन किसी ने भी 8.4.26 तारीख को युद्व रुकने की भविष्यवाणी नहीं की थी और वो भी 17 दिन पहले। सटीक तारीख बता पाना ईश्वर का आशीर्वाद ही तो है।
इसमें सचमुच मेरा कोई योगदान मै नहीं मानता,मेरा ज्योतिष विज्ञान पर भरोसा बढ़ा है,मेरे ईष्ट देव पर श्रद्धा,आस्था असीमित हुई है।
आप सभी जिन्होंने मेरी पोस्ट को लाईक किया,मुझे उत्साहित करते हुए सन्देश भेजे उनके लिए मेरा हार्दिक आभार और खुब खूब सारा धन्यवाद।
।

जब सारे ही ज्योतिषी युद्ध को लेकर कोई भी भविष्यवाणी करने से कतरा रहे थे,मैने आज से 17 दिन पहले याने 22मार्च को ही FB पर ...
08/04/2026

जब सारे ही ज्योतिषी युद्ध को लेकर कोई भी भविष्यवाणी करने से कतरा रहे थे,मैने आज से 17 दिन पहले याने 22मार्च को ही FB पर ही लिखा था 8अप्रैल को युद्ध रुकेगा। ज्योतिष पूर्ण विज्ञान है मान लीजिए।
सुप्रभात, जय श्री कृष्ण

19/03/2026

"पवित्र ग्रंथ गीता में भी सात सौ श्लोक है और दुर्गा सप्तशती में भी सात सौ श्लोक ही है,जहां गीता हमे कर्म आधारित जीवन यापन का संदेश देती है,सप्तशती नारी शक्ति से यह संदेश देती है कि नारी को हासिल नहीं किया जा सकता है और नारी की इच्छाओं का अनादर नहीं किया जा सकता है।नारी कमजोर नहीं,स्वयं शक्ति है।
आज ही के दिन से हम अपना हिन्दु नववर्ष आरम्भ मानते हैं।तो इस पवित्र नवरात्रि पर्व और नववर्ष की मंगल कामनाएं।
बादलों के आच्छादित होने का अपना फल सहिंता ग्रन्थ बताते है,मातारानी सभी का भला करे ,सभी पर अपनी कृपा दृष्टि रखे।
।। सभी को खूब खूब शुभकामनाएं,हार्दिक शुभकामनाएं।।

14/03/2026

ज्योतिष रहस्य 6
एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के माध्यम से यह बताया जा रहा था कि अमुक राशि वालो को अमुक रंग से होली खेलनी चाहिए।जितनी फ़ज़ीहत ज्योतिष शास्त्र की होने लगी है यह वैदिक विद्या अपना भरोसा कायम भी रख सकेगी इसमें सन्देह है...
कुछ ऐसी बातें जो इस शास्त्र के ज्ञाता को अन्तर्मन से स्वीकार करनी जरूरी है।
1आचरण,चरित्र में अशुद्धि है तो किसी को भी गोल गोल घुमाकर मूर्ख तो बना सकते हो,लेकिन सटीक भविष्य फल नहीं।
2सिर्फ पढ़ने मात्र से यह देव,वेद विद्या आपकी नहीं होगी इसके लिए आप को मां सरस्वती का आशीर्वाद मिलना जरूरी है जो लालची,स्वार्थी ज्योतिषियों को प्राप्त नहीं होता।जितने भी फिर से जितने भी ज्योतिषी रेट लिस्ट लगा कर भविष्यफल कर रहे है वो व्यापारी है,गुरु बनने योग्य नहीं हैं।
3 यह देव विद्या इसलिए भी है कि अक्सर नन्हे,छोटे बच्चे जिन्हें कोई ज्ञान नहीं होता उनकी जुबान से निकली बातों को सत्य होते प्रत्यक्ष,साक्षात् अनुभव किया है मैने। इसलिए इस ज्ञान पर जिसे अहंकार है वह पैसा तो कमा सकता है लेकिन अंत पंत बैचेन आत्मा लिए भटकता ही है।
4.महंगे रत्न या बेकारण महंगे अनुष्ठान यदि आप अपना या परिवार जनों का पेट काट कर या बच्चों को शिक्षा से वंचित रखते हुए करते हैं तो यह ईश्वर कभी स्वीकार नहीं करेंगे यह अनुभवसिद्ध है।
5.आप के गुरु निर्लोभी है , तो बार बार गुरु न बदले क्योंकि उपचार,उपाय के तीन स्तर होते है।पूरी तरह सात्विक,कुछ सात्विक के साथ साथ टोटकों के साथ तो तीसरी अवस्था में उग्र लेकिन अहानिकारक पूजा पाठ तो यदि सरलतम उपाय से आपकी समस्या नहीं सुलझी है तो दूसरा गुरु ढूंढने की जगह इन्हें ही मिल कर कहिए आपकी पूजा से कुछ नहीं हुआ ताकि वो कुछ और उस पूजा में जोड़ सके। क्योंकि जिस भी दूसरे के पास आप जायेंगे वो दूसरे स्तर से शुरू करेगा ठीक उसी तरह जैसे अच्छा डॉक्टर लाइट डोज से इलाज शुरू किया करते है और जरूरत हो तो डोज बढ़ा देते है........... क्रमशः
पोस्ट लम्बी है लेकिन कई सारी उपयोगी जानकारी जिनमें से काफी सारी आप पहली बार पढ़ेंगे मै शेयर करूंगा। कृपया कॉपी पेस्ट बिल्कुल न करे,शेयर करना चाहे कर सकते हैं.....

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