Aastha - Astrologicals by B.p.upadhyay

Aastha - Astrologicals by B.p.upadhyay Astrological Guidance, Horoscope Reading,Vastu Guidance & Palm Reading by Life member of ICAS. Scientific reading based on 40 years experience.

21/09/2025

शारदीय नवरात्रि की पूर्व संध्या पर मेरे सभी अपनो से एक ही आग्रह है कि जीवित व्यक्तियों में से किसी को भगवान जैसा दर्जा देना है तो वो माता, पिता,अच्छे शिक्षक, जान बचाने वाले चिकित्सक को ही दे,टीवी पर आने वाले किसी भी चेहरे को हर्गिज नहीं।

05/09/2025

शिक्षक दिवस पर...
हर दिन कुछ न कुछ अच्छा पढ़ना चाहिए, सीखना चाहिए क्योंकि हमारे वेद,पुराण,धर्म ग्रन्थ यहां तक कि पंचतंत्र,जातक कथाएं,हितोपदेश,कहावतें ,मुहावरे,गुरु, माता पिता भी अच्छी सीख देते रहे है।

03/09/2025

भगवान राम कोई उपदेश नहीं देते,उनके कर्म हमे प्रेरणा देते है,जबकि कृष्ण हमें गीता ज्ञान के रूप में संसार को समझ कर आगे बढ़ने के कर्म के महत्व को समझाते हैं।विष्णु के दोनों अवतार ज़िन्दगी को परिपूर्ण करते है।
।। जय श्री कृष्ण।। जय श्री राम।।

21/08/2025

।। अंक सात ।।
मैने दस अगस्त को मेरी पोस्ट में सोलह अंक की बात की थी उसी को आगे बढ़ाते हुए बात करते हैं अंक सात की ।
मुझे अपने ईष्ट देव की अपार कृपा का एहसास है,ऋणी हूं मैं सभी आध्यात्मिक शक्तियों का कि जो बात आज मैं अपनी पोस्ट में बताने जा रहा हूं वह अंक सात पर मेरी अपनी सोच, अपना मंथन है। अन्यत्र आपने न किसी से सुना होगा न कहीं भी पढ़ा होगा।

जब हम पूज्य सिद्ध संतो की बात करते है (आज के ढोंगी,लालची स्वयंभू संतो की नहीं ) तो उन्होंने अपने शिष्यों से यही कहा है कि तमाम समस्याओं का हल "राम", राम, राम याने "राम" नाम जपने और लिखते रहने में है चाहे वो नीम करौली बाबा हो या देवरहा बाबा या और भी अनेक सिद्ध संतो ने यही कहा है कि सबसे अच्छी और अनुभूत औषधि "राम" नाम है।
कहा भी है न कि
राम नाम की लूट है ,लूट सके तो लूट
अन्त काल पछताएगा प्राण जायेंगे छूट
गांधी जी के अंतिम शब्द भी " हे राम " ही बताए जाते हैं।
अब ज्योतिष के सन्दर्भ मे हम देखते है तो अंक ज्योतिष के कई रूप,स्वरूप उपलब्ध हैं लेकिन मैने अपनी पोस्ट "ज्योतिष यात्रा"
के पहले भाग में बताया था कि अंक ज्योतिष पर मेरी पसन्द और विश्वास "किरो" पर है
उनके अंक ज्योतिष से
R A M के अंक 2+1+4=7 है और उन्होंने सात को रहस्यमय और आध्यात्मिक अंक माना है तो यक़ीनन राम राम जपना सबसे अल्पमोली लेकिन सबसे करामाती औषधि है।
वैदिक ज्योतिष से भी राम में शुक्र+सूर्य है,शुक्र भोग है,शुक्र अंधकार है सूर्य उसे अपने में समेट कर पवित्र अग्नि बना देता है,न लालच,लोभ न षडयंत्र इसीलिए राम के व्यक्तित्व में न लोभ था न कोई षड्यंत्र।
।। जय श्री राम।।

15/08/2025

।।हमारा राष्ट्रीय मंत्र।।
सत्यमेव जयते
भक्ति शक्ति युक्तमेव जयते,
धर्म धैर्य धारणमेव जयते,
ज्ञान उपासना कर्मैव जयते,
इच्छा क्रिया ज्ञानमेव जयते,
प्रेम शील सत्यमेव जयते ।।
(चंडी पत्रिका से साभार)

10/08/2025

।। महत्व सोलह का।।
अक्सर सुनने को मिलता है कि बोरियत हो रही है,ईश्वर की असीम कृपा है कि ऐसे भाव मुझमें नहीं आते , वैज्ञानिक कहते है कि हम अपने ब्रेन की क्षमता का दस फीसदी ही उपयोग में लेते हैं और इतना भी कुछ ही लोग लेते है अर्थात जिन क्षमताओं के साथ ईश्वर ने हमने जन्म दिया है।
जब इस सच्चाई को हम स्वीकार कर लेते हैं कि
"जीवन चलने का नाम है,चलते रहना चाहिए,चलते रहने से कुछ नया मिलेगा,कुछ नया होगा। चलना शरीर का भी हो सकता है और मन,बुद्धि का भी।
हिन्दू धर्म और पौराणिक कथाओं में सोलह कलाओं का जिक्र है।हर व्यक्ति में मौजूद 16 विशिष्ट गुण या क्षमता रहती है। ये सोलह कलाएं तो सिर्फ भगवान कृष्ण में थी ,भगवान राम को भी सिर्फ बारह कलाओं से पूर्ण माना जाता था। इतनी कलाएं हम में नहीं हो सकती लेकिन किन्हीं एक या दो कलाओं के साथ भी जीवन गुजारने का अभ्यास हो जाता है तो फिर बोरियत हो ही नहीं सकती।
16 सोलह
सोलह कलाएं,सोलह श्रृंगार,सोलह संस्कार।
अच्छा पति पाना हो तो सोलह सोमवार का व्रत कि भगवान शिव पार्वती का आशीर्वाद मिल जाएगा।
बाली उम्र भी सोलह साल में इसके बाद तो बस फिर परिपक्व होने की दौड़।
और 16
याने एक और छः का जोड़ ..........
इसके बारे में अगली पोस्ट में बात करते हैं.......
।। जय श्री कृष्ण।।

21/07/2025

जिस भी विधा के आप जानकार है,उसका नियमित अभ्यास करते रहना चाहिए इसे राजस्थान की एक लोक कथा से समझे
एक बार भयंकर सूखा पड़ा,पेड़ सूख गए, पशु पक्षी मरने लगे,धरती नंगी लगने लगी।
ऐसे भयंकर अकाल में भी एक किसान अपने खेतों में हल चला रहा था,संयोग से शिव पार्वती भी घूमते घूमते उधर से गुजर रहे थे,पार्वती ने किसान को हल चलाते देख किसान को पागल समझते हुए यह बात शिव को बताई,शिव भी आश्चर्य में पड़ गए और किसान के पास जाकर पूछा, कहीं तुम पागल तो नहीं हों जो इतने भयंकर सूखे में भी खेत में हल चला रहे हो?
किसान ने कहा,नहीं मैं पागल नहीं हूं ,मुझे पता है कि सूखा पड़ा हुआ है पर यदि मैने हल नहीं चलाया तो मेरा अभ्यास छूट जायेगा।
शिव पार्वती चल पड़े,थोड़ी दूर जाने पर पार्वती ने शिव से कहा "स्वामी,पिछले चार साल से अपने वर्षा नहीं करवाई है,कहीं आपका शंख बजाने का अभ्यास छूट तो नहीं गया ?
भोले शिव झट से कह उठे "हां, हाँ पार्वती वास्तव में कहीं अभ्यास छूट न गया हो?
फिर बजा कर देखिए न?
पार्वती के कहते ही भगवान शिव ने अपना शंख जोर से बजाया,शंख बजते ही आकाश बादलों से भर गया और जोरो की बारिश शुरू हो गई।

तो आप भी अपनी पसंदीदा कला का अभ्यास जारी रखें।
वैसे भी हमारे कवि भी तो कह गए हैं:
"करत करत अभ्यास के जड़मती होत सुजान "
।। शुभरात्रि।। जय श्री कृष्ण।।

18/07/2025

ज्योतिष यात्रा 3

इस पोस्ट के पूर्व दोनों भाग को पसन्द करने, प्रोत्साहित करती टिप्पणियों का सभी को हार्दिक धन्यवाद ,खूब सारा आभार।
ज्ञान सिर्फ पुस्तकों में नहीं मिलता है,जीवन यात्रा के पग पग पर मिलता है,प्रकृति से मिलता है,बुजुर्गों के दिए संस्कारों से मिलता है। ऐसे गुरु से मिलता है जो ग्रहण क्या करना है और त्याग किसका करना है सिखाता हैं।गहरे समन्दर में से कोई मोती चुन लेता है तो कोई सिर्फ बालु या कंकर। इसी के साथ ईष्ट प्रबल होना बहुत ही जरूरी है ,यह वो अदृश्य शक्ति है जो हर पल,हर लम्हे और हर जगह आपके साथ रहती है।
मैने इस पोस्ट के दूसरे भाग में कहा था कि स्व.श्री बी वी रमन जी और नारायण दत्त जी श्रीमाली ने अल्पमोली पुस्तकों या किरो को पढ़ते हुए यात्रा आगे बढ़ती रही परन्तु कुछ प्रकाशकों के चलते जिनमें मोतीलाल बनारसी दास,रंजन पब्लिकेशन,सागर पब्लिकेशन, एल्फा पब्लिकेशन और अनुपम व साधना पॉकेट बुक्स का योगदान का जिक्र व आभार ज़रूरी है।

वहीं मन ,आत्मा को एक नया स्वरूप देने में परमहंस योगानंद जी की पुस्तक ""योगी कथामृत ""का बहुत बहुत बड़ा योगदान रहा है।

ये एक ऐसी पुस्तक है जो सभी को एक बार तो अवश्य ही पढ़नी चाहिए।संग्रह भी करे तो उत्तम। इसी तरह पवित्र ग्रंथ"भगवद्गीता" जिसको पढ़ते हुए लगा था कि हर भाषा के विद्यालयों में इसे पाठ्य पुस्तक के तौर पर अनिवार्य रूप से पढ़ाना ही चाहिए।उपहार में देने के लिए भी यह दोनों पुस्तके बेहतरीन उपहार है।

साथ ही वो परम पिता मेरी आस्था को भगवान श्री बजरंग बली की तरफ ले गए और फिर
" बल बुद्धि विद्या देहु मोही हरहु क्लेश विकार "
पोकरण प्रवास के दौरान ही मेरे मित्र श्री प्रकाश सेवग जो खुद भी हनुमान भक्त थे मुझे हनुमान चालीसा,बजरंग बाण से एक सीढ़ी आगे ले जाते हुए श्री हनुमद बड़वानल स्तोत्र जैसी संजीवनी से परिचित कराया और भगवान हनुमान जी की भक्ति ही है जो मुझे हर पल कुछ नया सीखने को प्रेरित करती रही हैं ,करती रहती है।

मेरे जानने वालों में से शायद ही कोई ऐसा हो जिसे कोई पूजा पाठ, आध्यात्मिक उपचार बताए और उन्हें करने पर कार्य सिद्ध न हुए हो। महंगे महंगे रत्न जो नहीं कर पाते हैं वो रोजाना दस पंद्रह मिनिट की पूजा पाठ से हो जाते है।
ये बात और है कि हम अज्ञान वश इस भ्रम,इस अहंकार में रहते है कि """" ये मैने किया """"

।। सो सब तव प्रताप रघुराई,नाथ न कछू मोरी प्रभुताई।।
जय श्री राम,जय श्री राम,जय श्री राम,जय श्री राम,जय श्री राम

14/07/2025

ज्योतिष यात्रा 2
1978 में पोकरण पोस्टिंग,गोदाम निर्माण करवा रहा था तब फुर्सत के पलो का सदुपयोग (फुर्सत के पलो का सदुपयोग हमारे माता पिता और गुरुजनों के दिए संस्कारों से ही सम्भव है) मैने ज्योतिष की पुस्तकों के अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए किया। तब डॉ बी वी रमन जी की आंग्ल भाषा की और नारायण दत्त श्रीमाली जी की अल्प मोली पुस्तकों के चलते मेरी ज्योतिष यात्रा चल रही थी,आज जब मैं देखता हूं सौ पृष्ठ की पुस्तक की कीमत दो सौ,तीन सौ और कुछ पुस्तके जिनमें सौ पृष्ठ भी नहीं होते है की कीमत पांच सौ रुपए तो दुखद आश्चर्य होता है कि जो ज्ञान ईश्वर की कृपा के बगैर प्राप्त किया ही नहीं जा सकता है उसे बांटते हुए आधुनिक ज्योतिष लेखक,प्रकाशक व्यापारी बन बैठे है। इससे भी हैरानी मुझे गुजरात के एक लेखक की नाड़ी पुस्तकों को देख कर हुई जिसमें हर आठवें दसवें पृष्ठ पर उनकी फोटो छपी देखी।
आरम्भिक दिनों में मै किरो की book of numbers के आधार पर भी भविष्य फल करता था,कई बार चमत्कारिक रूप से भविष्य फल सही उतर जाता था,इसी का उदाहरण था कि कुछ शहरों में गोदाम निर्माण की निविदा प्रकाशित हुई थी और एक कॉन्ट्रैक्टर थे श्री ओम प्रकाश अग्रवाल , उन्होंने ऐसे ही मुझसे सवाल कर लिया कि छः टेंडर में से उन्हें कितने मिलेंगे और कहां कहां के और तब मैने किरो की न्यूमरोलॉजी अप्लाई करते हुए उन्हें उत्तर दिया जो सौ फीसदी सही उतरा। तब मैं नौसिखिया था जबकि उनके पुराने ज्योतिषी ने जो कहा सब गलत निकला।
और तब मन ने कहा था
सो सब तव प्रताप रघुराई।
नाथ न कछू मोरी प्रभुताई।।
आप का स्नेह प्यार रहा तो यह यात्रा जारी रहेगी.........

।। जय श्री कृष्ण।।

11/07/2025

ज्योतिष यात्रा.......1
भविष्य फल क्या मात्र पढ़ने से या किसी के सिखाए सीख लिया जाता है?
मेरे एक मित्र की बिटिया सात आठ साल की उम्र में अपने पिता को ऑफिस जाने से रोकती है,मित्र बाल हठ समझ घर से निकलते है और दुर्घटना हो जाती है,वो ज्योतिष तो नहीं जानती थी,किसी से सीखी भी नहीं.......
बच्ची कहती है क्या सभी को मरना पड़ता है,पापा कह रहे हैं हां फिर अगली जिज्ञासा ," तो क्या नाना भी मर जायेंगे ? "उसी के थोड़ी देर बाद समाचार आता है कि हजार ग्यारह सौ किलोमीटर दूर उसके नाना देवगति पा चुके हैं और उसी समय जब बच्ची प्रश्न पूछ रही है।
क्या इससे पता नहीं चलता है कि ज्योतिष मात्र पुस्तकों को पढ़ने से,ये महंगे महंगे ज्योतिष संस्थानों में पढ़ने भर से नहीं आती इसके लिए ईश्वरीय शक्ति आप में होना जरूरी है ,ईश्वर में आसक्ति होना जरूरी है। और भविष्य फल यदि ईश्वरीय देन है तो आप परामर्श शुल्क के बोर्ड,विज्ञापन कैसे दे पाते हो मेरी समझ से बाहर है।
दक्षिण के ज्योतिषीय ज्ञान का एक विधान,विधि है प्रश्न विद्या ।
इसमें दक्षिणा का,उपहार का प्रसंग आता है और ज्योतिषी मात्र उपहार देख कर जिज्ञासु का प्रश्न समझ लेता है और सटीक उत्तर दे देता है। क्योंकि ज्योतिष के a,b,c,d से ही यह दर्शाया गया है कि ब्रह्मांड में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो किसी ग्रह या राशि के अधीन न आती हो तो दक्षिणा की वस्तु से यह समझ लेना,चेष्टाओं से यह जान लेना कि सामने वाला किस चिन्ता में है और समाधान क्या है
तो परामर्श शुल्क की तरह की कमाई ज्योतिषी का धर्म नहीं हो सकता है।
इसलिए जो बड़े बड़े ज्योतिष कार्यालय कॉरपोरेट ऑफिस की तरह खुलते जा रहे हैं उनका बहिष्कार करिए.....
पोस्ट की अगली किश्त भी जल्दी आपके सामने होगी....
।। जय श्री कृष्ण।।

10/07/2025

माता पिता,शिक्षक के बाद समय ही सबसे बड़ा गुरु है,जिसने समय से सबक नहीं लिया,समय पर निर्णय नहीं लिया,समय की कद्र नहीं की,समय रहते लोगों को नहीं समझा उसने सदा मात खाई है।गुरु पुर्णिमा पर सभी को नमन और हार्दिक शुभकामनाएं।

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