18/07/2025
ज्योतिष यात्रा 3
इस पोस्ट के पूर्व दोनों भाग को पसन्द करने, प्रोत्साहित करती टिप्पणियों का सभी को हार्दिक धन्यवाद ,खूब सारा आभार।
ज्ञान सिर्फ पुस्तकों में नहीं मिलता है,जीवन यात्रा के पग पग पर मिलता है,प्रकृति से मिलता है,बुजुर्गों के दिए संस्कारों से मिलता है। ऐसे गुरु से मिलता है जो ग्रहण क्या करना है और त्याग किसका करना है सिखाता हैं।गहरे समन्दर में से कोई मोती चुन लेता है तो कोई सिर्फ बालु या कंकर। इसी के साथ ईष्ट प्रबल होना बहुत ही जरूरी है ,यह वो अदृश्य शक्ति है जो हर पल,हर लम्हे और हर जगह आपके साथ रहती है।
मैने इस पोस्ट के दूसरे भाग में कहा था कि स्व.श्री बी वी रमन जी और नारायण दत्त जी श्रीमाली ने अल्पमोली पुस्तकों या किरो को पढ़ते हुए यात्रा आगे बढ़ती रही परन्तु कुछ प्रकाशकों के चलते जिनमें मोतीलाल बनारसी दास,रंजन पब्लिकेशन,सागर पब्लिकेशन, एल्फा पब्लिकेशन और अनुपम व साधना पॉकेट बुक्स का योगदान का जिक्र व आभार ज़रूरी है।
वहीं मन ,आत्मा को एक नया स्वरूप देने में परमहंस योगानंद जी की पुस्तक ""योगी कथामृत ""का बहुत बहुत बड़ा योगदान रहा है।
ये एक ऐसी पुस्तक है जो सभी को एक बार तो अवश्य ही पढ़नी चाहिए।संग्रह भी करे तो उत्तम। इसी तरह पवित्र ग्रंथ"भगवद्गीता" जिसको पढ़ते हुए लगा था कि हर भाषा के विद्यालयों में इसे पाठ्य पुस्तक के तौर पर अनिवार्य रूप से पढ़ाना ही चाहिए।उपहार में देने के लिए भी यह दोनों पुस्तके बेहतरीन उपहार है।
साथ ही वो परम पिता मेरी आस्था को भगवान श्री बजरंग बली की तरफ ले गए और फिर
" बल बुद्धि विद्या देहु मोही हरहु क्लेश विकार "
पोकरण प्रवास के दौरान ही मेरे मित्र श्री प्रकाश सेवग जो खुद भी हनुमान भक्त थे मुझे हनुमान चालीसा,बजरंग बाण से एक सीढ़ी आगे ले जाते हुए श्री हनुमद बड़वानल स्तोत्र जैसी संजीवनी से परिचित कराया और भगवान हनुमान जी की भक्ति ही है जो मुझे हर पल कुछ नया सीखने को प्रेरित करती रही हैं ,करती रहती है।
मेरे जानने वालों में से शायद ही कोई ऐसा हो जिसे कोई पूजा पाठ, आध्यात्मिक उपचार बताए और उन्हें करने पर कार्य सिद्ध न हुए हो। महंगे महंगे रत्न जो नहीं कर पाते हैं वो रोजाना दस पंद्रह मिनिट की पूजा पाठ से हो जाते है।
ये बात और है कि हम अज्ञान वश इस भ्रम,इस अहंकार में रहते है कि """" ये मैने किया """"
।। सो सब तव प्रताप रघुराई,नाथ न कछू मोरी प्रभुताई।।
जय श्री राम,जय श्री राम,जय श्री राम,जय श्री राम,जय श्री राम