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यह समाज का सबसे बड़ा अन्याय है कि हम 'विक्टिम-ब्लेमिंग' (पीड़ित को ही दोषी ठहराना) को एक रिवाज बना चुके हैं। जब तक हम अप...
21/04/2026

यह समाज का सबसे बड़ा अन्याय है कि हम 'विक्टिम-ब्लेमिंग' (पीड़ित को ही दोषी ठहराना) को एक रिवाज बना चुके हैं। जब तक हम अपराधी के चेहरे से नकाब हटाकर उसे बहिष्कृत नहीं करेंगे, तब तक न्याय सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा।
समाज की "स्वीकृति" चरित्र का प्रमाण नहीं होती। हिम्मत मत हारिएगा।
जय हिन्द🇮🇳

*घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला न्याय की उम्मीद  लेकर पहुंची ह्यूमन राइट्स सेल -राष्ट्रीय महिला जागृति मंच*राष्ट्रीय महिला ...
20/04/2026

*घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला न्याय की उम्मीद लेकर पहुंची ह्यूमन राइट्स सेल -राष्ट्रीय महिला जागृति मंच*

राष्ट्रीय महिला जागृति मंच,ह्यूमन राइट्स सेल उदयपुर (राजस्थान) में एक महिला जो ससुराल पक्ष के द्वारा मार पीट एवं घरेलू हिंसा से परेशान होकर मंच से न्याय की उम्मीद में पहुंची ।
महिला ने बताया पति और ससुराल वालों ने गर्भावस्था से ही मारपीट कर शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था । महिला की एक बेटा 9 माह का एवं एक बेटी ढाई साल की है! बेटी को ससुराल वालो ने पीड़िता से छिनकर मारपीट कर पीड़िता को ससुराल से निकाल दिया है एक 9 माह का दुधमूहा बेटा जो पीड़िता के पास है बेटी अपनी मां से मिलने के लिए तरस रही है ।
महिला ने हर तरफ से मदद की गुहार लगा चुकी है परंतु उस से निराशा हाथ लगी ।
अब वह महिला राष्ट्रीय महिला जागृति मंच , ह्यूमन राइट्स सेल के पास एक उम्मीद लेकर आई है ।

पैनल अधिवक्ता नरेंद्र गर्ग ने पीड़िता की परेशानी सुनी और और अब उसकी पूरी विधिक लड़ाई पूर्णतया नि शुल्क मंच के माध्यम से करी जाएगी।
राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सुरभि मेनारिया धींग जी ने पीड़िता की परेशानी को सुनी और कहा कि एक मां को जल्द से जल्द अपनी बेटी से मिलाने तथा न्याय दिलाने का मंच पूरा प्रयास करेगा ।
अंतरराष्ट्रीय अध्यक्षा एवं संस्थापिका श्रीमती अंबिका शर्मा को भी पूरी जानकारी दी गई ।
पीड़िता की प्रार्थना पत्र राष्ट्रीय कार्यालय में ले लिया गया है ।राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर भावेश भट्ट ने कहा कि पीड़िता के परिजनों एवं उसके ससुराल वालों से भी बात करी जाएगी
इसकी पूरी जानकारी मंच की मिडिया प्रभारी निकिता जांगिड़ जी द्वारा दी गई।
JAI HIND🇮🇳

14/04/2026
11/04/2026

झूठा दहेज का केस साबित होने पर क्या कार्रवाई संभव है?

धारा 498ए अब BNS 85 का उद्देश्य महिलाओं को दहेज उत्पीड़न और क्रूरता से संरक्षण देना है। लेकिन यदि अदालत में यह साबित हो जाए कि मामला झूठा, मनगढ़ंत या दुर्भावना से दर्ज कराया गया था, तो कानून ऐसे मामलों को भी हल्के में नहीं लेता।

1-झूठी शिकायत पर आपराधिक कार्रवाई
यदि यह सिद्ध हो जाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी थी, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ झूठी सूचना देने या न्यायालय को गुमराह करने के आधार पर कार्रवाई हो सकती है। अदालत की अनुमति से अभियोजन भी चल सकता है।

2-मानहानि का दावा
झूठे आरोपों से प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा हो तो पीड़ित व्यक्ति मानहानि का आपराधिक या दीवानी दावा कर सकता है।

3-हर्जाना (Compensation) की मांग
यदि झूठे मुकदमे के कारण आर्थिक और मानसिक क्षति हुई हो, तो उचित मंच पर हर्जाने की मांग की जा सकती है।

4-तलाक का आधार
कई मामलों में अदालतों ने माना है कि झूठे आपराधिक आरोप लगाना वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है, जो तलाक का आधार बन सकता है।

5-अदालत की टिप्पणी का महत्व
सिर्फ बरी होना पर्याप्त नहीं है। यह महत्वपूर्ण है कि अदालत अपने आदेश में स्पष्ट रूप से आरोपों को झूठा या दुर्भावनापूर्ण बताए।

कानून का उद्देश्य संरक्षण है, प्रतिशोध नहीं। यदि कोई प्रावधान का दुरुपयोग करता है, तो न्यायालय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटता।
#झूठामुकदमा #कानूनीजानकारी #दहेजउत्पीड़न #परिवारिकविवाद #कानूनकीबात

आज (6 अप्रैल, 2026) तमिलनाडु की एक अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड (Death Penalty) की...
06/04/2026

आज (6 अप्रैल, 2026) तमिलनाडु की एक अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड (Death Penalty) की सजा दी है। यह मामला 2020 के बहुचर्चित साथानकुलम (Sathankulam) हिरासत में मौत के मामले से जुड़ा है, जिसमें एक व्यापारी जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की पुलिस टॉर्चर के कारण मौत हो गई थी।
इस अदालती आदेश की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
कोर्ट का आदेश और विवरण
• न्यायालय: मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत (First Additional District and Sessions Court)।
• न्यायाधीश: न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन (Judge G. Muthukumaran)।
• सजा: अदालत ने सभी 9 दोषी पुलिसकर्मियों को धारा 302 (हत्या) के तहत फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही, मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
• कुल मुआवजा: कोर्ट ने दोषियों द्वारा पीड़ित परिवार को कुल 1.40 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
न्यायाधीश ने सजा सुनाते समय इस मामले को "रैरेस्ट ऑफ रेयर" (Rarest of Rare) श्रेणी में रखा और कहा:
1. कानून के रखवाले ही भक्षक: कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह एक गंभीर मामला है जहाँ पुलिस अधिकारियों ने, जिनका कर्तव्य कानून व्यवस्था बनाए रखना था, स्वयं कानून के विरुद्ध जाकर क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।
2. क्रूरता का स्तर: अदालत ने पाया कि पिता-पुत्र को पूरी रात बेरहमी से टॉर्चर किया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और अत्यधिक रक्तस्राव की पुष्टि हुई थी।
3. जवाबदेही: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आम नागरिक ऐसा करते तो स्थिति अलग होती, लेकिन वर्दी में मौजूद रक्षकों द्वारा किया गया यह कृत्य समाज के लिए गहरा कलंक है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह घटना जून 2020 की है, जब लॉकडाउन के दौरान कथित तौर पर दुकान समय से ज्यादा देर तक खुली रखने के आरोप में पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को गिरफ्तार किया गया था। साथानकुलम पुलिस स्टेशन में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसके कुछ दिनों बाद अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। इस मामले की जाँच CBI द्वारा की गई थी।
दोषी पाए गए पुलिसकर्मी:
सजा पाने वालों में तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर रघु गणेश और बालकृष्णन, साथ ही अन्य हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल हैं। (एक आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पालदुरई की ट्रायल के दौरान ही मृत्यु हो गई थी)



Fight for RIGHTS ✍️🗒️JAI HIND🇮🇳
23/03/2026

Fight for RIGHTS ✍️🗒️
JAI HIND🇮🇳

अहमदाबाद के एक मामले में फैमिली कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी व्यभिचार में लिप्त पाई जाती है तो उसे भरण-पोषण का अधिकार नहीं ...
21/03/2026

अहमदाबाद के एक मामले में फैमिली कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी व्यभिचार में लिप्त पाई जाती है तो उसे भरण-पोषण का अधिकार नहीं मिलेगा। मामले में पति द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला और गुजारा भत्ता देने से इनकार ✖️कर दिया।

✍️यह फैसला केवल एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि वैवाहिक संबंधों में विश्वास और जिम्मेदारी की अहमियत को भी सामने लाता है। विवाह एक सामाजिक और कानूनी संबंध है, जिसमें दोनों पक्षों से निष्ठा और ईमानदारी की अपेक्षा की जाती है। जब यह भरोसा टूटता है, तो उसका असर केवल रिश्ते पर ही नहीं, बल्कि कानूनी अधिकारों पर भी पड़ता है।

🗒️हालांकि, ऐसे मामलों में हर परिस्थिति अलग होती है और अदालत साक्ष्यों व परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है। इसलिए किसी एक फैसले को सभी मामलों पर लागू नहीं माना जा सकता।

✍️यह मामला यह भी सिखाता है कि रिश्तों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना ही सबसे बड़ा समाधान है, क्योंकि कानून भी उसी संतुलन को ध्यान में रखकर निर्णय देता है।
JAI HIND🇮🇳
JAI SAVIDHAN ✍️




*पारिवारिक न्यायालय में भरणपोषण एवं घरेलू हिंसा का केस दर्ज*उदयपुर  पारिवारिक न्यायालय में राष्ट्रीय महिला जागृति मंच — ...
28/02/2026

*पारिवारिक न्यायालय में भरणपोषण एवं घरेलू हिंसा का केस दर्ज*
उदयपुर पारिवारिक न्यायालय में राष्ट्रीय महिला जागृति मंच —
ह्यूमन राइट्स सेल द्वारा 144 BNS और घरेलू हिंसा sec.12 के तहत पीड़िता के ससुराल वालों एवं उसके पति के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करवाया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सुरभि मेनारिया धींग जी ने पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिले यह पूरी कोशिश हमारी टीम रहती हैं ।
इस मे ऑफिस टीम का भी सहयोग रहता हैं ।
इस केस के पैनल अधिवक्ता अर्चना जी व्यास द्वारा केस प्रस्तुत किया गया ॥
अंतरराष्ट्रीय अध्यक्षा एवं संस्थापिका श्रीमती अंबिका शर्मा जी को पूरी जानकारी दी गई ।
मंच की मिडिया प्रभारी निकिता जांगिड़ के द्वारा लेकर कार्यालय मे रिपोर्ट दी गई ।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्री भावेश भट्ट ने केस रिकॉर्ड दर्ज किया ।

जय हिंद🇮🇳

Latest judgment
28/02/2026

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