Rajiv Dixit Followers

Rajiv Dixit Followers " राजीव भाई " के सपनों का भारत बनाने के ल?
(3)

24/05/2026
27/04/2026

16/04/2026

11/02/2026

31/01/2026

क्या आपको नहीं लगता कि आजकल देश में विवाद "पैदा" किए जा रहे हैं, ताकि असली सवालों की "हत्या" की जा सके?
ज़रा क्रोनोलॉजी समझिए:
* मदारी का खेल (ध्यान भटकाना):
अचानक यूजीसी (UGC) का कोई नया विवादास्पद फरमान आता है या शंकराचार्य जी को कुंभ में स्नान करने से रोकने/टोकने जैसी खबर हेडलाइन बन जाती है।
पूरा देश भावुक हो जाता है। सोशल मीडिया पर जंग छिड़ जाती है—धर्म, संस्कृति और अपमान की बहस शुरू हो जाती है। आपकी चाय की चर्चा का विषय बदल जाता है।
* असली खेल (चुपचाप समझौता):
ठीक इसी शोर-शराबे के बीच, जब आपकी नज़रें टीवी डिबेट पर होती हैं, सरकार पीछे के दरवाजे से विदेशों के साथ संधियां (Foreign Deals) कर रही होती है।
* FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की शर्तें तय हो रही हैं।
* खेती और एआई (AI) पर विदेशी कंपनियों का कंट्रोल पक्का किया जा रहा है।?
* निजीकरण की नई फाइलों पर हस्ताक्षर हो रहे हैं।?
यह महज संयोग नहीं, प्रयोग है!
90 के दशक को याद कीजिए—तब भी देश को 'धार्मिक उन्माद' में उलझाकर WTO (विश्व व्यापार संगठन) और वैश्वीकरण का जुआ हमारे गले मढ़ दिया गया था। आज हम उसी आर्थिक गुलामी के कर्जदार हैं।
आज फिर वही स्क्रिप्ट दोहराई जा रही है:
* विषय बदला है: तब मुद्दा कुछ और था, आज मुद्दा 'यूजीसी' और 'शंकराचार्य' है।
* मकसद वही है: FTA और डिजिटल गुलामी पर जनता की चुप्पी।
चुभते हुए सवाल:
* क्या शंकराचार्य जी का अपमान या यूजीसी का विवाद सिर्फ एक "लाल कपड़ा" है जिसे दिखाकर जनता को सांड की तरह भड़काया जा रहा है, ताकि पीछे से 'व्यापारी' अपना काम कर जाएं?
* हम यूजीसी के सिलेबस पर तो लड़ रहे हैं, लेकिन FTA के सिलेबस (शर्तों) पर सवाल क्यों नहीं पूछ रहे जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को गुलाम बनाएगा?
सावधान!
जब तक हम भावनात्मक मुद्दों के "झुनझुने" से खेलते रहेंगे, तब तक ये "सौदागर" हमारी ज़मीन और ज़मीर, दोनों का सौदा विदेशी बाज़ार में कर चुके होंगे।?
आंखें खोलिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए! 👁️🚫🇮🇳

Address

Udaipur
Udaipur
313001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Rajiv Dixit Followers posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Rajiv Dixit Followers:

Share