09/02/2026
145 करोड़, अपनी विफलताओं के लिए एक अकेले मोदी जी को नहीं कोस सकते, जिनकी कोई औलाद भी नहीं है। क्या मोदी जी ने कहा था दशरथ के चार हो जाएं तो पांच पांडाव करने के लिए? या मोदी जी बोले थे, कि बेटे के लालच में बेटियों की लाईन लगाने के लिए? या सरकारी फ्री शिक्षा होते हुए भी न पढ़ने के लिए? या जवानी आते ही दारू की लाईन में खड़े होने के लिए? क्या मोदी जी कहते हैं कि रिश्वत ले लो? उन्होंने जितना कर दिया, इस देश के लोग उसके काबिल भी नहीं है। और बीजेपी के चंपू नेताओं की तो मौज करवा दी। मोदी जी न होते तो बीजेपी गढ्ढे में गई थी। पर उनके आते ही सारे बीजेपी के नेता उनके खिलाफ हो गए। क्योंकि वो सारे अंदर से कांग्रेसी थे। कांग्रेस दो मूंह का सांप है, जो एक मुंह से देशभक्ति की बात करता है, और दूसरे मूंह से माल गटकता है। आरक्षण को रोने वाले निजी क्षेत्र लेकर आए। मोदी जी ने सबकुछ निजी कर दिया तो क्या बुरा किया? अब क्यों अंबानी अडानी को कोसते हो? और आरक्षण लेने वाले मौज करते रहे पर अपने परिवार के सदस्यों तक को नहीं पूछा, समाज और पार्टी को तो छोड़ दो। फिर ये कैसे निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग कर सकते हैं, जब ये डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की दिलाई सुविधाओं से प्राप्त संपदा को न परिवार से साझा करते हैं, न उनके मिशन में सहयोग देते हैं। मोदी जी ने उच्च जाति के हिंदुओं की लगभग हर बात मानी, पर अब ये ही सबसे ज्यादा उनकी आलोचना करते हैं। आजकल ये आंबेडकरवादी बन कर एक तरफ बीएसपी की सफाई करते हैं तो दूसरी तरफ मोदी जी की आलोचना करते हैं। इनका कम्युनिस्ट चोला भी इसलिए ही होता है। क्योंकि कांग्रेस की बेलगाम लूट अब खत्म होती दिखाई दे रही है, जब काम भी नहीं करना होता था और मलाई भी पूरी मिलती थी। निजी क्षेत्र में जब कड़ाई से नौकरियों का पालन करना होगा तो उनके लिए तो मुसिबत ही है जिन्हें मेहनत कम और मलाई ज्यादा खाने की आदत है। अब दिखाओ अपना मैरिट निजी क्षेत्र में। अब मोदी जी को काहे कोसते हो? सेना में आरक्षण नहीं है, क्योंकि वहां मैरिट होना चाहिए, ऐसा कहने वाले क्यों अग्निवीर की आलोचना करते हैं? मैरिट है तो टिक कर दिखाओ। मोदी जी तो आपको मैरिट सिद्ध करने का मौका दे रहे हैं। ऐसी ही कई बातें हैं जो यही कहती हैं, कि कुलमिलाकर मोदी जी ने जिन लोगों की बात रखी, आज वे ही उन्हें कोसते हैं। बेशक, कमियां रही हैं, पर आप एक ऐसे आदमी पर अपने जन्मों भर की नाकामी की तौहमत नहीं लगा सकते। और वह भी वो लोग, जिनके वर्गों का सबसे ज्यादा ख्याल मोदी जी ने रखा। आपने कहा नोटबंदी करो, मोदी जी ने की। आपने कहा आर्थिक आधार पर आरक्षण करो। मोदी जी ने कर दिया, पर आप फिर भी अपने धर्म वालों के हिस्से पर आंख जमाए, अपनी जातिवादी मानसिकता का परिचय देते हो। आपकी हर बात उन्होंने मानी। पर फिर भी आप उनकी बुराई करते हो, जहां तहां जातिगत जलसे करके उन्हें धमकियां देते हो। कांग्रेस के इशारों पर आंदोलन करते हो। दिन रात मोदी जी को कोसते हो। आपके ऐसे कृत्य को हिंदी की भाषा में कृतघ्न बोलते हैं। पर हमारी राजस्थानी बोली में इसे कहते हैं - ‘आंख में सुअर का बाल,’ यानी कि, मतलब निकल जाने पर भी ऐहसानमंद होने की जगह गुर्राना। आपकी इसी फिदरत के कारण आप उन गांधी जी को हमेशा कोसते हो जो हिंदु धर्म और उच्च जाति के हिंदुओं के हित के लिए खड़े रहे, और उल्टा उनके हत्यारे को सही सिद्ध करने में लगे रहते हो, जो हो सकता हो कि एक जाति के वर्चस्व के लिए धर्म की आढ़ ले रहा हो। और ऐसे ही आप निरंतर डॉ. भीमराव आंबेडकर जी को भी कोसते हो, जो बिचारे आपके ही समाज को सुधारने में लगे रहे और जिन्होंने आपको दुनिया का श्रेष्ठतम संविधान दिया। ऐसी फिदरत वाले को ‘ओंढी खोपड़ी’ का भी बोलते हैं। आप जिस डाली पर बैठते हो, उसे ही काटते हो। जिस थाली में खाते हो, उसी में छेद करते हो। आपकी मानसिक ट्रेनिंग में ही खराबी है, जो आपको किसी असामाजिक अपराधी जैसा बनाती है, जो लूट के बाद सबको मारकर, सारा धन लूटना चाहता है।
आज बेशक मोदी जी पर दबाव डलवा कर ट्रम्प ने भारत को नीचा दिखाया है। पर देर सवेर अमेरिका ने टेरिफ बढ़ाना ही था। पर यदि मोदी जी अड़ जाते और अमेरिका से युद्ध की घोषणा करते तो आप उनके बारे में क्या कहते? क्या आप अमेरिका से युद्ध कर सकते हैं जब आप आपस में ही एक नहीं हैं? क्या आप तब मोदी जी के साथ खड़े रहते, यदि युद्ध अगले दस से पंद्रह वर्षों तक चलता रहता? मैं यह नहीं कहता कि हम डरते हैं और युद्ध से पीछे हटते हैं। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं, कि क्या आपने मोदी जी में इतना विश्वास पैदा किया है, कि वे अमेरिका से लड़ते? जबकि, आप उन्हें ही कोस रहे हैं, तब, जब उन्होंने तो आपकी ही बात हमेशा मानी है। इसलिए मोदी जी का सम्मान करें। नीतियों पर आलोचना सही है। पर आखिरकार, इतना ध्यान रखें, एक तो यह, कि उन्हें अपना उल्लू सीधा करने की निगाह से नहीं देखें, और दूसरा यह, कि उनकी इज्जत करें। कम-से-कम वे तो ऐसा ही करें, जिनके लिए उन्होंने हर वह काम किया जो वह चाहते थे। - निखिल सबलानिया Nikhil Sablania
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