श्री रमण महर्षि

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श्री रमण महर्षि श्री रमणाश्रमम् का आधिकारिक फेसबुक प? श्री रमणाश्रमम् और दुनियाँ भर में फैलें हुए श्री रमण महर्षि के भक्तों से जुड़े रहने के लिए इस पेज से संबद्ध रहें।

05/10/2026
मुरुगनार पुण्यतिथि -  १० सितंबर २०२६ ):     मुरूगनर की पुण्यतिथि १० सितंबर को मनाई गई । रामनद जिले  में अगस्त १८९० में प...
10/09/2026

मुरुगनार पुण्यतिथि - १० सितंबर २०२६ ): मुरूगनर की पुण्यतिथि १० सितंबर को मनाई गई । रामनद जिले में अगस्त १८९० में पैदा हुए मुरूगनार को कविता की प्रेरणा रमण की उपस्थिति एवं उपदेश से जागृत हुई। उनकी रचनाओं में असीम प्रेम, सौंदर्य एवं ज्ञान प्रवाहित होता है । उन्होंने तीस हजार कविताओं की रचना की । वह कई वर्षों तक आश्रम में रहे तथा भक्तों को रमण महर्षि के उपदेशों से मार्गदर्शन करते रहे। उनकी रचनाएँ गुरुवाचक कोवै तथा पदममलै में प्रकाशित हुईं । १९७३ में, अमावस के दिन मुरूगनार अरुणाचल में लीन हो गए।

अरुणाचल आगमन दिवस  :  भगवान् रमण महर्षि, लगभग १२६ वर्ष पूर्व अरुणाचल आए थे। घर छोड़ते समय उन्होंने अपने भाई को एक छोटा पत...
01/09/2026

अरुणाचल आगमन दिवस : भगवान् रमण महर्षि, लगभग १२६ वर्ष पूर्व अरुणाचल आए थे। घर छोड़ते समय उन्होंने अपने भाई को एक छोटा पत्र लिखा था जो पढ़ने योग्य है। " मैं अपने पिता की खोज में उनके निर्देश एवं आज्ञा से यहाँ से जा रहा हूँ। यह यात्रा केवल एक पावन उपक्रम के लिए है। इसलिए इस कृत्य पर किसी को दु:ख करने की आवश्यकता नहीं है। ' इसकी ' खोज में कोई पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं है " आपकी फीस अभी तक जमा नहीं हुई है। दो रुपये इसके साथ संलग्न हैं। इस प्रकार ..... उन्होंने तिन्डिवनम् का टिकट खरीदा और ट्रेन में सवार हो गए। उनके निकट बैठे एक मौलवी ने उनको तिरुवण्णामलै का सही रास्ता बताया तथा वह १ सितंबर को तिरुवण्णामलै पहुँचे तथा जीवन पर्यन्त यहीं रहे। भक्त अनुरोध करते थे कि भगवान् को दूसरे भक्तों को दर्शन देने हेतु देश में निकलना चाहिए। तब उनका उत्तर रहता था कि मेरे साथ पर्वत को भी साथ ले कर चलो। अरुणाचल के प्रति उनकी भक्ति अद्वितीय थी।

स्वतंत्रता दिवस ( १५ अगस्त )   श्री रमणाश्रम में आज १५ अगस्त बड़े धूमधाम से मनाया गया। प्रातः काल से ही आश्रम में भक्तगण...
15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस ( १५ अगस्त ) श्री रमणाश्रम में आज १५ अगस्त बड़े धूमधाम से मनाया गया। प्रातः काल से ही आश्रम में भक्तगण एकत्रित होने लगे । आश्रम के अध्यक्ष श्री वेंकट एस.रमणन ने प्रात ७ बजे तिरंगा झंडा फहराया। राष्ट्र गीत एवं वंदे मातरम् के उद्घोष से वातावरण गुंजित हो उठा । इस अवसर पर मिठाई का वितरण हुआ । १९४७ में स्वतंत्रता दिवस पर भगवान श्री रमण महर्षि ने अपने हाथों से सीले गए तिरंगे झंडे को फहराया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि उस अवसर पर भगवान के आंखों में आंसू थे। भगवान का उपदेश था कि केवल विदेशी शासन से मुक्त होना स्वतंत्रता नहीं है बल्कि आंतरिक विकारों - अज्ञान, वासना एवं अहंकार से मुक्त होना वास्तविक स्वतंत्रता है । यही वास्तविक स्वराज है । यह वह स्वतंत्रता है जिसे पाने के लिए भगवान हर किसी को प्रोत्साहित करते थे। आश्रम हर वर्ष झंडा वंदन से न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का आदर करता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि भगवान के हृदय में ज्योतिर्मय मुक्ति ही शाश्वत मुक्ति है जो आरंभ एवं अंत से परे है। उस मुक्ति का हम श्रद्धा से नमन करते हैं।

कुंजु स्वामी पुण्यतिथि (७.८.२०२६)   आज कुंजु स्वामी की पुण्यतिथि अक्षरमणमाला के पाठ एवं आरती के साथ मनाई गई। कुंजु स्वाम...
08/08/2026

कुंजु स्वामी पुण्यतिथि (७.८.२०२६) आज कुंजु स्वामी की पुण्यतिथि अक्षरमणमाला के पाठ एवं आरती के साथ मनाई गई। कुंजु स्वामी को बचपन में स्वप्न में भगवान शिव का दर्शन मिला तथा पंचाक्षरी मंत्र की दीक्षा प्राप्त हुई। २०१९ में भगवान् से मिलने पर भगवान् ने उनसे कहा -"बोध करो कि तुम कौन हो, इससे तुम्हारे सभी दु:खों का अन्त हो जायेगा । अपने स्वरुप के बोध से भीतर शान्ति आयेगी"। तब से उन्होंने भगवान् को कभी नहीं छोड़ा। १९२० से १९३० तक भगवान् की सेवा की। १९९४ में उन्होंने अंतिम सांस ली और अरुणाचल में विलीन हो गए। स्वामी का श्रद्धामय‌ जीवन भक्तों को सदा प्रेरणा देता रहेगा।

गुरु पूर्णिमा : (२९.७.२०२६) ‌                गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आज भगवान रमण महर्षि की समाधि के समक्ष सन्यासियों क...
29/07/2026

गुरु पूर्णिमा : (२९.७.२०२६) ‌ गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आज भगवान रमण महर्षि की समाधि के समक्ष सन्यासियों को नई पगड़ी के साथ सम्मानित किया गया । गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर गुरु की महत्ता दर्शाता है । इस दिन भक्तगण आध्यात्मिक पथ दर्शाने वाले गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं । गुरु के बारे में रमण महर्षि के कथन उल्लेखनीय है -" गुरु आत्मा है । जीवन में कभी व्यक्ति अपने आप से संतुष्ट नहीं होता। अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु वह ईश्वर आदि की प्रार्थना करता है । क्रमशः मन शुद्ध होने पर वह अपनी इच्छा पूर्ति के स्थान पर ईश्वरीय अनुग्रह की प्रार्थना करता है । ईश्वर का अनुग्रह प्रकट होता है। ईश्वर, गुरु रूप धरकर भक्त के समक्ष प्रकट होता है । अपने सान्निध्य से वह भक्त के मन को शुद्ध करता तथा सत् का उपदेश देता है । भक्त का मन शक्ति प्राप्त कर अंतर्मुखी होता है। ध्यान के निरंतर अभ्यास से मन शांत हो जाता है । गुरु भीतर और बाहर दोनों ओर है। बाहर से वह मन को अंतर्मुखी होने के लिए धक्का देता है । भीतर से वह मन को आत्मा में खींचता है । गुरु अनुग्रह इस तरह का है । ईश्वर, आत्मा और गुरु में कोई भेद नहीं है, तीनों एक हैं "। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आश्रम, सभी भक्तों को शुभ कामना प्रेषित करता है।

30/06/2026
गौ माता लक्ष्मी दिवस :   ( २६.६.२०२६ )  आश्रम में आज गौ माता लक्ष्मी दिवस मनाया गया। आश्रम स्थित लक्ष्मी की समाधि को सुस...
26/06/2026

गौ माता लक्ष्मी दिवस : ( २६.६.२०२६ ) आश्रम में आज गौ माता लक्ष्मी दिवस मनाया गया। आश्रम स्थित लक्ष्मी की समाधि को सुसज्जित किया गया। पूजा एवं आरती हुई। रामस्वामी अय्यर रचित गीत गाया गया। यों तो आश्रम में बहुत जानवर रहते थे किन्तु उनमें सबसे प्रसिद्ध थी- गाय लक्ष्मी। एक भक्त अरुणाचल पिल्लै ने एक गाय एवं उसकी बछिया को महर्षि को भेंट किया था। धीरे-धीरे वह आश्रम के वातावरण में ढल गयी तथा महर्षि की प्रिय पात्र बन गई। महर्षि ने लक्ष्मी के बारे में बताया," यद्यपि वह बोल नहीं पाती किंतु सब कुछ समझती है तथा दोपहर के भोजन के समय लक्ष्मी नियमित रूप से महर्षि के कक्ष में पहुंच जाती तथा उनके साथ ही भोजन कक्ष में जाती थी। अपने जीवन काल में उसने नौ बच्चों को जन्म दिया जिसमें से तीन महर्षि के जन्मदिन पर क्रमशः पैदा हुए । बाद में गायों‌ की संख्या बढ़ने पर आश्रम में एक गौशाला का निर्माण हुआ तथा इसका विधिवत उद्घाटन किया गया। १७ जून १९४८ को लक्ष्मी बीमार पड़ी । दूसरे दिन प्रातः महर्षि उसके पास गए और पूछा, "अम्मा क्या आप मेरे निकट रहना चाहती हैं "। उन्होंने उसकी आंखों की ओर देखा तथा अपना एक हाथ उसके सिर पर दूसरा हृदय पर रखा और तथा वह आश्वस्त हो गए कि लक्ष्मी का हृदय वासना रहित हो गया है और उसे मुक्ति मिल गई। लक्ष्मी को विधि विधान से दफनाया गया तथा उसकी समाधि बनाई गई । उसके समाधि प्रस्तर पर भगवान ने स्वयं लक्ष्मी के बारे में एक तमिल कविता लिखी जिसमें उन्होंने बताया कि लक्ष्मी को मुक्ति प्राप्त हो गई। किसी और पर भगवान ने ऐसी कविता नहीं लिखी यह आलेख है - " १८. ६.१९४८ को लक्ष्मी ने मुक्ति प्राप्त की "।

महापूजा - ९.६.२०२६              किशोर आयु में ही भगवान श्री रमण महर्षि ने अरुणाचल की मौन पुकार सुनकर घर छोड़ दिया। उनका ...
09/06/2026

महापूजा - ९.६.२०२६

किशोर आयु में ही भगवान श्री रमण महर्षि ने अरुणाचल की मौन पुकार सुनकर घर छोड़ दिया। उनका घर छोड़ना, उनकी मांँ के लिए एक गहरा आघात था। जब वह पवलकुन्नरू में उनसे मिलीं तो वापस चलने के लिए कहा तथा रोईं। भगवान अविचलित रहे तथा मौन में लीन थे। उन्होंने एक कागज पर लिखा- " नियंता कर्मानुसार भाग्य का निर्धारण प्रारब्ध के रूप में करता है। जिसका नहीं होना निश्चित है, वह नहीं होगा। तुम चाहे उसके लिए कितना भी प्रयत्न कर लो । जिसका होना तय है, वह अवश्य होगा । उसे रोकने के लिए तुम चाहे कुछ भी प्रयत्न करो । यह निश्चित है। इसलिए सर्वोत्तम है- मौन रहना" । समय गुजरता गया । माँ अलगम्माल तिरुवण्णामलै आती जाती रहीं । बाद में जब वह बीमार पड़ीं तो भगवान ने उनकी बड़ी सेवा की तथा उनके आरोग्य के लिए प्रार्थना स्वरूप अरुणाचल पर एक छंद की रचना की । उनकी देखभाल एवं प्रार्थना से माँ निरोग हो गईं। १९१६ में वह स्थाई रूप से भगवान के साथ रहने आ गईं। वह आश्रम के रसोई घर में भक्तों के लिए भोजन बनाने लगीं। उनके अंतिम दिनों में भगवान ने उनकी दिन-रात सेवा की । १९२२ में वैकसी कृष्ण नवमी को भगवान ने उन्हें मुक्ति प्रदान की । पूछने पर भगवान ने कहा -" वह मरीं नहीं आत्मलीन हो गई हैं " । उन्हें आश्रम परिसर में ही दफनाया गया तथा एक शिवलिंग की स्थापना की गई । मातृ भूतेश्वर मंदिर उसी का रूप है। यह दिन हर वर्ष महापूजा के रूप में मनाया जाता है। आज रूद्रम पूजा तथा अभिषेक के साथ भव्य रूप में पूजा हुई । लगभग १०.३० पर दीप आराधना संपन्न हुई । भक्तों ने भोज ग्रहण किया । यूट्यूब पर प्रसारित इस कार्यक्रम को हजारों लोगों ने देखा। आज इस पावन अवसर पर आश्रम, सभी भक्तों पर मां के अनुग्रह की प्रार्थना करता है।

09/06/2026

🔴 MAHA PUJA - SCHEDULE
9-6-2026 (Tuesday)

Morning
04.45 a.m. – Mahanyasam, Rudra Japam commences
05.15 a.m to 06.30 a.m – Aksharamanamalai followed by evening tamil parayana (tuesday schedule)
08.00 a.m. to 10.00 a.m. – Commencement of Puja at Bhagavan's Shrine followed by Abhishekam and Special Puja at MOTHER'S SHRINE, Deeparadhana.

MAHA PUJA - SPECIAL PARAYANA (TIRUVACHAKAM)
Morning

07.30 a.m. to 8.00 a.m
10.00 a.m to 11.00 a.m
02.30 p.m. to 05.00 p.m
06.00 p.m to 8.00 p.m

Venue of this special parayanam: NEW HALL, SRI BHAGAVAN SHRINE, MOTHER'S SHRINE

All are Welcome

Address

80 चेंगम रोड
Tiruvannamalai
606603

Opening Hours

Monday 5am - 9pm
Tuesday 5am - 9pm
Wednesday 5am - 9pm
Thursday 5am - 9pm
Friday 5am - 9pm
Saturday 5am - 9pm
Sunday 5am - 9pm

Telephone

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