13/10/2026
आज का औषधीय पौधा – पुनर्नवा
पुनर्नवा (_Boerhavia diffusa_ L.) आयुर्वेद एवं अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उपयोग की जाने वाली एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी है। यह भारत की समृद्ध औषधीय वनस्पति विरासत का एक अनमोल हिस्सा है।
औषधीय उपयोग:
✅ यकृत (लीवर) संबंधी विकारों में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
✅ पीलिया एवं हेपेटाइटिस के पारंपरिक उपचार में इसका उपयोग किया जाता है।
✅ मूत्र उत्पादन बढ़ाने वाले मूत्रवर्धक (डाइयूरेटिक) के रूप में इसका उपयोग किया जाता है।
✅ शरीर में तरल पदार्थ जमा होने के कारण होने वाली सूजन (एडीमा) को नियंत्रित करने के लिए पारंपरिक रूप से इसका उपयोग किया जाता है।
✅ गुर्दे एवं मूत्र संबंधी विकारों में भी पारंपरिक रूप से उपयोगी है।
उपयोगी भाग: जड़
रोपण का समय: अप्रैल से जून
स्वभाव: बहुवर्षीय शाकीय पौधा
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत, औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास, सतत प्रबंधन एवं खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
पुनर्नवा उन मूल्यवान औषधीय पौधों में से एक है, जो भारत की समृद्ध जड़ी-बूटी विरासत और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को दर्शाता है। इसका संरक्षण एवं सतत खेती इस प्राकृतिक संपदा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में सहायक हो सकती है।
आइए, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के साथ मिलकर अपने औषधीय पौधों का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार करें और भारत की अमूल्य औषधीय विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें!
⚠️ नोट: यहाँ बताए गए उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित हैं और इन्हें चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए औषधीय पौधों का उपयोग करने से पहले योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।