17/04/2026
विश्नोई मंदिर सरकड़ा विश्नोई :
29 नियमों का सरकड़ा विश्नोई मंदिर जम्भवाणी हरिकथा में किया गया वर्णन
विश्नोई मंदिर सरकड़ा विश्नोई पर आयोजित श्री हरिकथा ज्ञानयज्ञ में भगवान श्री गुरु जंभेश्वर द्वारा बताए गए, 29 नियमों का किया गया वर्णन, रात्रि जागरण का आयोजन
गुरुवार को विश्नोई मंदिर सरकड़ा विश्नोई में श्री महंत स्वामी प्रणवानन्द जी महाराज के सानिध्य में चल रही, श्री जम्भवाणी हरिकथा ज्ञानयज्ञ के षष्ठम दिवस के पावन अवसर पर, कथाव्यास आचार्य श्री अमृतानंद जी महाराज ने विश्नोई समाज को संबोधित करते हुए, 29 नियमों में 30 दिन सूतक, विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि, तीस दिन तक प्रसूता स्त्री को गृह कार्य से पृथक् रखना/रहना चाहिये। प्रसव के दौरान स्त्रियां कमजोर हो जाती हैं। यदि प्रारम्भिक काल ही बिगड़ जायेगा, तो फिर आगे मानवता का विकास असंभव है। बिश्नोइयों के लिये बालक जन्म का सूतक तो, 30 दिन का बतलाया है तथा मृत्यु का सूतक-पातक 03 दिन का बतलाया है। समय पाकर ही पवित्रता आ सकती है। इसलिये तीस दिनों का समय रखा गया है। जो सूतक रूप में धर्म से जोड़ा गया है तथा तीस दिन पूर्ण हो जाने पर ही संस्कार करके, उसे बिश्नोई बनाया जाता है। जीव मृत्यु के तीसरे दिन पाहल-हवन द्वारा संस्कार कर दिया जाता है। "आज मूवा कल दूसरा दिन है,जो कुछ सरै तो सारी।" बच्चे का जन्म होने से, उसके शरीर में कमजोरी आ जाती है। जिसकी पूर्ति के लिये, एक महीने का पूर्णतया विश्राम तथा शरीर पुष्टि के लिये, पौष्टिक आहार दिया जाना भी आवश्यक है। यदि ऐसा न हो सका, तो कमजोर शरीर से, न तो कुछ कार्य हो सकेगा, न ही शरीर स्वस्थ रह सकेगा। अनेकानेक बीमारियां शरीर को जकड़ लेगी। जिससे कभी भी अकाल मृत्यु हो सकती है। दूसरा लाभ यह होता है कि नवजात शिशु को अपनी माता का दूध भरपूर मिलेगा। उस समय का अपनी ही माता का पीया हुआ अमृतमय दूध, भविष्य में शरीर, मन, बुद्धि के निर्माण में सहायक होगा। कथा प्रांगण में स्वामी शरणानंद जी, राजेश्वरानंद जी, जगदेवानंद जी, अंचल विश्नोई, अनीता विश्नोई, संगीता विश्नोई, कविता विश्नोई, राधा विश्नोई,सुधीर विश्नोई,रवि विश्नोई, वंश विश्नोई, प्रकृति विश्नोई, ममता विश्नोई, विकास विश्नोई, गरिमा विश्नोई, शताक्षी विश्नोई, तनवी विश्नोई, शिवी विश्नोई, आशी विश्नोई, आराध्या विश्नोई, श्री विश्नोई, सिद्धि विश्नोई, अविका विश्नोई,प्राची विश्नोई, शिवानी विश्नोई, वरुणा विश्नोई, रिमझिम विश्नोई, श्रद्धा विश्नोई, शिवांगी विश्नोई, इंजीनियर अमित विश्नोई, डा.विवेक विश्नोई, नमन विश्नोई, राम विश्नोई, श्याम विश्नोई, सक्षम विश्नोई, मानवी विश्नोई, डुग्गू विश्नोई, नैतिक विश्नोई, यश विश्नोई, दीपक विश्नोई, नीरज विश्नोई, कमल विश्नोई, विमल विश्नोई, आशा विश्नोई, संजीव विश्नोई, पूनम विश्नोई, मीना विश्नोई, रीना विश्नोई, सरोज विश्नोई, अर्चना विश्नोई, अंकुर विश्नोई, सतीश कुमार विश्नोई, बालमुकंद विश्नोई, सुधा विश्नोई, अरुणा विश्नोई, आशीष विश्नोई, प्रहलाद विश्नोई, कुलदीप विश्नोई, प्रदीप विश्नोई, विपिन विश्नोई, सुभाष विश्नोई, डा.रामअवतार विश्नोई, डा.प्रवेश विश्नोई, नवीन विश्नोई, अंश विश्नोई, सचिन विश्नोई, राजन विश्नोई, देवेंद्र विश्नोई, अतुल विश्नोई, अजय विश्नोई, सुनील विश्नोई, सुशील विश्नोई, मोहित विश्नोई, अंकित विश्नोई, रोहित विश्नोई, श्याम सिंह विश्नोई, अभिषेक विश्नोई, अभिनव विश्नोई, उदयवीर विश्नोई, सतवीर विश्नोई, डा.अजय विश्नोई, श्रवण कुमार विश्नोई, सुदेश विश्नोई, अम्बरीष विश्नोई, सुंदर विश्नोई, शोभा विश्नोई, पूजा विश्नोई, पल्लवी विश्नोई, माही विश्नोई, आयुषी विश्नोई, संदीप विश्नोई, अभय विश्नोई, कुलवंत विश्नोई, मुनमुन विश्नोई, दयानंद, महेश विश्नोई, अवधेश विश्नोई, कृष्ण कुमार विश्नोई, निर्बोश विश्नोई, निर्दोष विश्नोई, सुबोध विश्नोई, पुष्पेंद्र विश्नोई, बबीता विश्नोई, रूपल विश्नोई, आकांक्षा विश्नोई, गीता विश्नोई, प्रीति विश्नोई, भूमिका विश्नोई, मालती विश्नोई, सुशीला विश्नोई, रीना विश्नोई, विनोद विश्नोई, अक्षत विश्नोई, रितु विश्नोई, प्रेमवती विश्नोई, गौरव विश्नोई, प्रफुल्ल विश्नोई, बिट्टू विश्नोई, निकिता विश्नोई, रश्मि विश्नोई, सरिता विश्नोई, अंजू विश्नोई, दिया विश्नोई, विनीता विश्नोई, शशि विश्नोई, गौरी विश्नोई, रिन्शी विश्नोई, सुमन विश्नोई, हृदयेश विश्नोई, रेखा विश्नोई, लक्ष्मी विश्नोई, उर्मिला विश्नोई, बृजेश विश्नोई, विजय विश्नोई, वर्षा विश्नोई आदि गणमान्य विश्नोई बंधुगण उपस्थित रहे। कथा के उपरांत विष्णु आरती कर, प्रसाद वितरण किया गया। सभी श्रद्धालुगणों ने प्रसाद गृहण किया। रात्रि में जागरण का आयोजन किया गया। जिसमें विश्नोई समाज के लोग, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब से, क्षेत्रीय फरीदपुर काशम, डिलारी, मीरपुर मोहनचक, बैरमपुर, बमनिया पट्टी, मीरपुर मोहनचक, सुरजननगर,हरथला, मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर आदि जनपदों से विश्नोई समाज के बंधुगण उपस्थित रहे।