Jan jagrti sasthan

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पाकिस्तान को रेल कर बांग्लादेश को हमी ने निकाला था 😂 😂अब बांग्लादेश की बारी है ||😄 😆
14/12/2024

पाकिस्तान को रेल कर बांग्लादेश को हमी ने निकाला था 😂 😂
अब बांग्लादेश की बारी है ||😄 😆

28/11/2024
 #डोनाल्ड_ट्रंप की राष्ट्रपति पद पर विजय और दुनिया भर के वामपंथियों में घबराहट ,और विश्व की महाशक्ति की ओर अग्रसर भारत😌*...
16/11/2024

#डोनाल्ड_ट्रंप की राष्ट्रपति पद पर विजय और दुनिया भर के वामपंथियों में घबराहट ,और विश्व की महाशक्ति की ओर अग्रसर भारत😌
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डोनाल्ड ट्रम्प की विजय के निहितार्थ क्या हो सकते हैं?। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प की जीत न केवल अमेरिका, बल्कि भारत और विशेष रूप से हिंदुओं के लिए सकारात्मक प्रभाव ला सकती है। उनके पहले कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में मजबूती आई थी, और उन्होंने भारत को अपने सहयोगियों में एक अहम स्थान दिया था। ट्रम्प द्वारा 'हिंदूफोबिया' का स्पष्ट विरोध करना और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। ट्रम्प ने पाकिस्तान जैसे देशों पर दबाव बनाकर आतंकवाद का समर्थन रोकने का प्रयास किया था, जो हिंदू अस्मिता और भारतीय समुदाय के लिए राहत भरा रहा।

ट्रम्प की विचारधारा से हिंदू-अमेरिकी समुदाय को एक खास जुड़ाव महसूस होता है, खासकर जब उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान दिखाया। "Howdy Modi" जैसे आयोजन में ट्रम्प की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि वे भारत, इसके वर्तमान नेतृत्व और हिंदू समुदाय के साथ खड़े हैं। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति ट्रम्प का समर्थन, बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों की घटनाओं (जैसे मंदिरों पर हमले और हिंदू विरोधी हिंसा) पर उन्होंने खुलकर चिंता जताई है। ट्रम्प का कट्टरपंथी इस्लाम के विरुद्ध सख्त रवैया वैश्विक स्तर पर कट्टरवाद और आतंकवाद की रोकथाम के लिए उपयोगी हो सकता है।

यदि ट्रम्प प्रशासन इन विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबद्धता जताता है तो विश्व शांति और मानवता के हित में इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

वैसे, वामपंथी 'इकोसिस्टम' के लिए, ट्रम्प की विजय एक चुनौती हो सकती है। उनकी राष्ट्रवादी नीति उस वामपंथी एजेंडे के विपरीत है, जिसमें अराजकता में परिवर्तित होने वाली 'उदारता' और जनसंख्या के संतुलन के जरिए लोकतंत्र को प्रभावित करने वाली घुसपैठ और खुली सीमाओं का समर्थन अधिक होता है। ट्रम्प का 'अमेरिका फर्स्ट' दृष्टिकोण उन देशों पर ध्यान केंद्रित करता है, जो उनके प्रमुख सहयोगी हैं, जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

चीन के संदर्भ में भी ट्रम्प की विजय भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है। चीन के प्रति ट्रम्प की आक्रामक नीति ने भारत को सामरिक लाभ पहुंचाया है। सीमाओं पर बढ़ते तनाव के समय में यह कड़ा रुख भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

अंततः ट्रम्प की विजय से भारत और हिंदू समुदाय को वैश्विक स्तर पर तार्किक सहयोग मिल सकता है। ट्रम्प की राष्ट्रवादी और कट्टरपंथ-विरोधी नीतियां वामपंथी 'इकोसिस्टम' के लिए चुनौती भरी हो सकती हैं, लेकिन भारत के लिए एक नई दिशा खोल सकती हैं। हालांकि यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका की प्राथमिकता अमेरिका है, किंतु जानकार मानते हैं कि ट्रम्प के नेतृत्व में उनकी नीतियों से भारत-अमेरिका संबंध मजबूत होंगे, सबसे बडी बात डोनाल्ड ट्रम्प जो बाइडेन की तरह कुटिल नही है,

इसीलिये ना बराक ओबामा और न अमेरीकन डीप स्टेट उन्हे कंट्रोल कर पायेगा,जो पर्दे के पीछे से चीन के खिलाफ असली लडाई को छोडकर भारत और रूस के खिलाफ शीतयुद्ध मे शामिल हो गये जो बाइडेन के आने से अमेरिका भारत को उसी शीत युद्धकालीन तीसरी श्रेणी का देश समझने लगा था जब भारत को पाकिस्तान के बराबर व्यवहार किया जाता था,शायद इसीलिये भारत के उत्कर्ष को रोकने के लिये ही जो बाइडेन का 2020 मे चुनाव किया गया था ???

और भारत को कंट्रोल करने के लिये ही बांगलादेश मे शेख हसीना का तख्तापलट तक करवा दिया गया है , खैर अब यह समय है जब विश्व के सबसे पुराने तथा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जुगलबंदी विश्व इतिहास में सहयोग का नया अध्याय लिख सकती है।

भारत माता की जय/वंदे मातरम/जयहिंद

06/10/2024

No matter how painful and difficult your journey is, please never give up. Many of life's failures are people who did not realize how close they were to success when they gave up

30/09/2024

Happy Monday 💚

30/09/2024
27/09/2024

ुर्गापूजा_आने_ही_वाली_है. जिसमें हम में से अधिकांश घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है.हमारे उसी दुर्गा सप्तशती में माँ काली का वर्णन आता है. और, मूर्तियों में माँ काली को सामान्यतः गले में मुंड माला, एक हाथ में खप्पर तथा दूसरे हाथ के खड्ग लिए एक राक्षस का वध करते हुए दर्शाया जाता है.लेकिन, क्या आप जानते हैं कि... वो राक्षस असल में कौन था जिसका वध वे कर रही हैं...?

असल में वो राक्षस "रक्तबीज" था.सच कहूँ तो इस रक्तबीज का चरित्र मुझे हमेशा से बेहद रहस्यमय लगता रहा है.क्योंकि, रक्तबीज को ये वरदान था कि यदि उसपर हमला किया गया तो उसके रक्त की जितनी भी बूंद धरती पर गिरेगी... उतना ही रक्तबीज और पैदा हो जाएगा.

देखा जाए तो ये ऐसा वरदान था जो उसके वध को असंभव बनाता था.लेकिन, आश्चर्य की बात ये थी कि... अपनी ऐसी अमरता का वरदान हासिल करने के बाद भी वो कहीं का राजा नहीं था..बल्कि, वो राक्षस राज शुम्भ-निशुम्भ का एक प्यादा मात्र था.

ये रहस्य मुझे काफी दिनों तक समझ नहीं आया कि...जब रक्तबीज इतने यूनिक वरदान से लैस था तो फिर भी वो कहीं का राजा क्यों नहीं था ? क्योंकि, उसके अलावा हिरणकश्यपु, रावण आदि तो इससे कमतर वरदान के बाद भी अपने-अपने समय के राजा ही थे.

खैर, रक्तबीज के ऐसे वरदान के कारण उसे मारना लगभग असंभव था...क्योंकि, देवताओं द्वारा उस पर प्रहार किए जाते ही उसके गिरे रक्त से कई रक्तबीज पैदा हो जाया करते थे..!
अंततः, देवताओं ने माँ दुर्गा से उसके वध की प्रार्थना की और फिर माँ दुर्गा ने काली का रूप लेकर उस रक्तबीज का संहार किया.
और, ये बताने की आवश्यकता नहीं है कि... माँ काली ने रक्तबीज का संहार करते समय एक हाथ में खप्पर रखा तथा उसके भूमि पर गिरते रक्त के हर बून्द को उसी खप्पर में लेकर पी गई.सच कहूँ बचपन में मुझे रक्तबीज का उसके रक्त के गिरते हर बून्द से नया रक्तबीज बन जाने की कहानी रोमांचित तो करती थी...
लेकिन, ये सच्चाई से दूर किसी साइंस फ्रिक्शन मूवी की तरह लगती थी.इसके अलावा एक बात मुझे ये भी कभी समझ नहीं आया था कि आखिर ब्रह्मा-विष्णु-महेश तक उसका वध क्यों नहीं कर पा रहे थे ?

क्योंकि, देवो के देव महादेव तो स्वयं ही महाकाल कहे जाते हैं. तो, फिर वे भी उस रक्तबीज के संहार में फेल कैसे हो जा रहे थे ? इन सारे सवालों के जबाब मुझे दशकों बाद इराक के विध्वंस के बाद 2012 के आसपास मिल पाया.

2010-12 के आसपास जब इराक और सीरिया में ISIS के जे हादी पिस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए कत्लेआम मचा रहे थे..तो, यजीदी लड़कियों ने उनसे लड़ने के लिए अपनी एक सेना बनाई थी.और, मैं यह देखकर हैरान था कि उन यजीदी लड़कियों की सेना को देखते ही ISIS के जेहा दियों में भगदड़ मच जाती थी...
और, कोई भी जे हादी उन लड़कियों से लड़ना नहीं चाहता था.इस तरह उन लड़कियों ने ISIS जेहा दियों में एक तरह की दहशत पैदा कर दी थी.

इसका कारण मालूम करने पर पता चला कि... आसमानी किताब के अनुसार अगर कोई जे हादी जलकर या फिर किसी स्त्री के हाथों मारा जाता है तो फिर वो जन्नत अथवा हूर पाने के लिए पात्रता खो देता है. ये महजबी राज जानते ही मुझे समझ आ गया कि माँ काली, माँ दुर्गा का क्या महत्व रहा होगा.

और, साथ ही मुझे रक्तबीज के उस वरदान का रहस्य एवं उसके राजा न होकर महज प्यादा रहने का कारण भी समझ आ गया. क्योंकि, इस समय भी हम सब ये देखते हैं कि जैसे ही किसी जे हादी को मार दिया जाता है तो फिर उसके इनकॉउंटर अथवा गिरफ्तारी को मधरसे एवं मुसरिम मुहल्लों में इसे दीन के लिए दी गई कुर्बानी अथवा शहीदी के तौर पर प्रचारित किया जाता है.

जिससे, उसी के समान या फिर उससे भी ज्यादा खतरनाक नए 20-50 जे हादी और तैयार हो जाते हैं. आखिर, यही तो था ""रक्तबीज का वरदान"" कि उसके शरीर का जितना बून्द रक्त जमीन पर गिरेगा उसके उतने की क्लोन पैदा होते जाएँगे.. जिस तरह आज इन जे हादियों के हो रहे हैं.
और चूँकि... ये जे हादी कोई नेता या राष्ट्र प्रमुख न होकर छोटे-मोटे गरीब लोग होते हैं...
इसीलिए, हमारे धर्मग्रंथों में भी इस रक्तबीज को कहीं का राजा नहीं बल्कि सिर्फ एक प्यादा ही बताया गया है.

साथ ही, यही वो कारण था जिस कारण कोई भी देवता ... यहाँ तक कि, सर्वशक्तिशाली ब्रह्मा, विष्णु, महेश तक उसका वध नहीं कर पा रहे थे..
और, माँ काली को उसके वध के लिए मैदान में आना पड़े.

यहाँ, रक्तबीज के खून को खप्पर में लेकर पी जाने से तात्पर्य ये है कि.... आसमानी किताब के अनुसार एक महिला के हाथों मारे जाने के कारण उसको न जन्नत मिलना था और न हूर.
जिस कारण, उसके मरने के बाद भी नए जे हादी पैदा होना बंद हो गए या फिर उनमें हड़कंप मच गया क्योंकि किसी महिला के हाथों मर कर कोई भी जे हादी अपना जन्नत और हूर कैंसिल नहीं करवाना चाहता था.
कारण कि... जेहादी बनने का मुख्य उद्देश्य ही तो जन्नत और हूर था.

इस पूरी कहानी का तत्पर्य ये है कि... आज हम जो देश और दुनिया में जो होता देख रहे हैं वो सब कुछ नया नहीं है..
बल्कि, हमारे पूर्वज ये सब पहले भी झेल चुके हैं और उन्होंने इससे निपटने के बाद इसकी पूरी कथा हमारे लिए रेफरेंस के लिए छोड़ रखी है.. ताकि, दुबारा यदि इसी तरह की कोई समस्या आये तो हम भी उनके अनुभव से लाभ उठाते हुए उनसे आसानी से निपट सकें.
लेकिन, हमारी मुसीबत यही है कि... हम अपने धर्मग्रंथों को समझने अथवा सीखने के लिए नहीं पढ़ते हैं.
बल्कि, सुबह नहा धो कर पूण्य कमाने के उद्देश्य से पढ़ते हैं इसीलिए, उससे कुछ सीख नहीं पाते हैं..
और, विपरीत परिस्थिति देखते ही घबड़ा जाते हैं.
जबकि, हमारी हर समस्या का समाधान हमारे धर्मग्रंथों में ही लिखित है..!
अब देखना ये बाकी है की भारत की आदि शक्ति नारी दुर्गा अपने नकली और नग्न नारीवाद युक्त विदेशी #फेमेनिज्म को छोडकर अपने गौरव को पहचान कर हाथो मे शस्त्र लेकर कब इन #रक्तबीज असुरो का पुनः संहार करती है ???

जय माँ काली...!
जय महाकाल...!!!

#साभार

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