23/08/2026
🕊️ क्या हमारे पास अपने मरने वालों के लिए जगह है?
अल-रशीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल फाउंडेशन आज आपके सामने एक ऐसा सवाल रख रहा है, जिसका जवाब शायद हमें आज ज़रूरी न लगे, लेकिन कल हमारे बच्चों के सामने ज़रूर खड़ा होगा:
अगर कल हमारे घर में किसी की मौत हो जाए, तो हम उन्हें दफ़्न कहाँ करेंगे?
हम अपने लिए घर बनाते हैं, ज़मीन खरीदते हैं और बच्चों के भविष्य के लिए पैसा जमा करते हैं। किसी के पास 35 गज़ ज़मीन है, किसी के पास 100 गज़ और किसी के पास इससे भी ज़्यादा।
लेकिन क्या हमने कभी सामूहिक रूप से अपनी आख़िरी आरामगाह के बारे में सोचा है?
हमारे आसपास कई कब्रिस्तान तेज़ी से भर रहे हैं। कुछ जगहों पर स्थानीय पहचान या निवास के कारण बाहर के लोगों के लिए दफ़्न की जगह मिलना मुश्किल होता जा रहा है।
दिल्ली मोहन गार्डन का अतीत भी हमें एक सबक देता है।
एक समय वहाँ मुसलमानों का कब्रिस्तान मौजूद था, लेकिन उसकी कानूनी दस्तावेज़ी स्थिति और मज़बूत व्यवस्था समय पर पूरी नहीं हो सकी। आज वहाँ का दृश्य पूरी तरह बदल चुका है।
हम किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाना चाहते।
हम सिर्फ़ इतना पूछना चाहते हैं:
क्या हम अतीत की गलतियों को दोबारा दोहराएँगे?
या अब एक ऐसा स्थायी, कानूनी और सुरक्षित कब्रिस्तान बनाने की कोशिश करेंगे, जिसका लाभ हमारी आने वाली नस्लें भी उठा सकें?
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🌿 हमारी प्रस्तावना
मुसलमानों की सामूहिक कोशिश से एक उपयुक्त ज़मीन खरीदी जाए।
उसकी पूरी कानूनी जाँच हो।
सभी दस्तावेज़ सुरक्षित किए जाएँ।
ज़मीन को उचित कानूनी व्यवस्था के तहत कब्रिस्तान के लिए सुरक्षित किया जाए।
हर चंदा बैंक के माध्यम से लिया जाए।
हर दान की रसीद दी जाए।
आमदनी और खर्च का पूरा हिसाब रखा जाए।
और नियमित ऑडिट के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
हम अभी आपसे चंदा नहीं माँग रहे।
हम पहले आपकी राय और आपका साथ माँग रहे हैं।
अगर आपको लगता है कि हमारे क्षेत्र को एक स्थायी और सुरक्षित कब्रिस्तान की ज़रूरत है, तो इस मुहिम में हमारे साथ जुड़िए।
आप आर्थिक सहयोग कर सकते हैं, ज़मीन तलाशने में मदद कर सकते हैं, कानूनी सलाह दे सकते हैं, फ़ंड रेज़िंग में सहयोग कर सकते हैं, स्वयंसेवक बन सकते हैं या सिर्फ़ इस संदेश को आगे पहुँचा सकते हैं।
🤝 हमें आपकी ज़रूरत है।
अगर आपको यह प्रस्ताव मुमकिन और प्रभावी लगता है, तो हमें जवाब दें और लिखें:
"मैं इस मुहिम में आपके साथ हूँ।"
हो सकता है आपका एक जवाब इस सफ़र की पहली मज़बूत कड़ी बन जाए।
हो सकता है आपका आज का एक कदम कल हमारी औलाद के लिए आसानी बन जाए।
आइए, अपने लिए नहीं — आने वाली नस्लों के लिए सोचें।
🕊️ घर के लिए ज़मीन आज, कब्र के लिए जगह भी आज — क्योंकि मौत का वक़्त कल मालूम नहीं।
अल-रशीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल फाउंडेशन
शिक्षा, सेवा, भलाई और सामूहिक ज़िम्मेदारी के लिए एक कदम
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