18/06/2026
"स्मार्ट सिटी" परियोजनाओं को लेकर अक्सर कहा जाता है कि 50 साल पुराने पेड़ों को बचाने के लिए इंजीनियरों के पास विकल्प होते हुए भी उन्हें काट दिया जाता है। सड़क का डिज़ाइन थोड़ा बदलकर पेड़ों को बचाया जा सकता है, लेकिन कोई ऐसा करना ही नहीं चाहता। यह दावा शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल उठाता है। लेकिन क्या यह दावा सच है? आइए फैक्ट-चेक करते हैं।
फैक्ट-चेक में यह पाया गया कि यह दावा आंशिक रूप से सही, लेकिन सामान्यीकरण के साथ (Partially True & Misleading) है।
यह सच है कि कई मामलों में सड़कों, फ्लाईओवरों और शहरी विकास परियोजनाओं के डिज़ाइन में बदलाव करके पुराने पेड़ों को बचाया जा सकता है। दुनिया भर में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जहां इंजीनियरों ने सड़क का घुमाव बदलकर, लेन की चौड़ाई समायोजित करके या वैकल्पिक डिज़ाइन अपनाकर दशकों पुराने पेड़ों को संरक्षित किया है।
भारत में भी कुछ शहरों में विकास परियोजनाओं के दौरान ट्री ट्रांसप्लांटेशन (पेड़ों का स्थानांतरण), डिज़ाइन संशोधन और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग किया गया है। इसलिए यह कहना कि इंजीनियरों के पास "कोई विकल्प नहीं होता", पूरी तरह सही नहीं है।
हालांकि, वायरल पोस्ट का दूसरा हिस्सा – "पेड़ कोई बचाना ही नहीं चाहता" – एक व्यापक सामान्यीकरण है। वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। कई बार सड़क की चौड़ाई, यातायात का दबाव, भूमिगत पाइपलाइनें, मेट्रो कॉरिडोर, सुरक्षा मानक, बजट और भूमि उपलब्धता जैसी तकनीकी बाधाएं भी डिज़ाइन को प्रभावित करती हैं।
इसके बावजूद, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं में पुराने पेड़ों का पारिस्थितिक महत्व अक्सर कम आंका जाता है। एक परिपक्व पेड़ केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि कार्बन अवशोषण, तापमान नियंत्रण, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे पेड़ों की भरपाई केवल नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती।
इसी वजह से कई नागरिक समूह और पर्यावरणविद यह मांग करते रहे हैं कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में "ट्री-फर्स्ट प्लानिंग" को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकें।
फैक्ट-चेक का निष्कर्ष यह है कि यह दावा "आंशिक रूप से सही (Partially True)" है। कई मामलों में सड़क डिज़ाइन में बदलाव कर पुराने पेड़ों को बचाया जा सकता है और ऐसे उदाहरण मौजूद भी हैं। हालांकि, यह कहना कि सभी इंजीनियर या योजनाकार पेड़ बचाना ही नहीं चाहते, एक सामान्यीकरण है। वास्तविक स्थिति तकनीकी, प्रशासनिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के संतुलन पर निर्भर करती है।