Save Shimla From Terrible People

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Save Shimla From Terrible People We are a group of responsible citizens of Shimla city and are striving hard to retain the tag of "Queen of Hills" for Shimla in the real sense.

देखिए हाल ए व्यवस्था , यह शिमला टूटीकंडी बाय पास का टॉयलेट है। शिमला में टूरिस्ट व यात्रियों की सबसे ज्यादा आवाजाही इसी ...
05/08/2026

देखिए हाल ए व्यवस्था , यह शिमला टूटीकंडी बाय पास का टॉयलेट है। शिमला में टूरिस्ट व यात्रियों की सबसे ज्यादा आवाजाही इसी जगह है। शौचालयों को साफ करने व शहर को अस्ल में स्मार्ट बनाने के बजाए MC प्रशासन तो उद्घाटनों व टी पार्टियों में ही व्यस्त है।

ढली सब्जी मंडी के पास फैली गंदगी से लोगों का चलना हुआ मुश्किल, 600 से अधिक स्कूली बच्चे भी परेशानसफाई व्यवस्था पर उठे सव...
09/07/2026

ढली सब्जी मंडी के पास फैली गंदगी से लोगों का चलना हुआ मुश्किल, 600 से अधिक स्कूली बच्चे भी परेशान

सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों का आरोप- मंडी के मजदूर और आसपास के लोग फैला रहे कचरा; नगर निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग
DC Shimla CMO Himachal

03/07/2026

STRICT ACTION Should be taken against these fools Zero Civic sense 😕😕😕😕😕😕 DC Shimla CMO Himachal

"स्मार्ट सिटी" परियोजनाओं को लेकर अक्सर कहा जाता है कि 50 साल पुराने पेड़ों को बचाने के लिए इंजीनियरों के पास विकल्प होत...
18/06/2026

"स्मार्ट सिटी" परियोजनाओं को लेकर अक्सर कहा जाता है कि 50 साल पुराने पेड़ों को बचाने के लिए इंजीनियरों के पास विकल्प होते हुए भी उन्हें काट दिया जाता है। सड़क का डिज़ाइन थोड़ा बदलकर पेड़ों को बचाया जा सकता है, लेकिन कोई ऐसा करना ही नहीं चाहता। यह दावा शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल उठाता है। लेकिन क्या यह दावा सच है? आइए फैक्ट-चेक करते हैं।

फैक्ट-चेक में यह पाया गया कि यह दावा आंशिक रूप से सही, लेकिन सामान्यीकरण के साथ (Partially True & Misleading) है।

यह सच है कि कई मामलों में सड़कों, फ्लाईओवरों और शहरी विकास परियोजनाओं के डिज़ाइन में बदलाव करके पुराने पेड़ों को बचाया जा सकता है। दुनिया भर में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जहां इंजीनियरों ने सड़क का घुमाव बदलकर, लेन की चौड़ाई समायोजित करके या वैकल्पिक डिज़ाइन अपनाकर दशकों पुराने पेड़ों को संरक्षित किया है।

भारत में भी कुछ शहरों में विकास परियोजनाओं के दौरान ट्री ट्रांसप्लांटेशन (पेड़ों का स्थानांतरण), डिज़ाइन संशोधन और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग किया गया है। इसलिए यह कहना कि इंजीनियरों के पास "कोई विकल्प नहीं होता", पूरी तरह सही नहीं है।

हालांकि, वायरल पोस्ट का दूसरा हिस्सा – "पेड़ कोई बचाना ही नहीं चाहता" – एक व्यापक सामान्यीकरण है। वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। कई बार सड़क की चौड़ाई, यातायात का दबाव, भूमिगत पाइपलाइनें, मेट्रो कॉरिडोर, सुरक्षा मानक, बजट और भूमि उपलब्धता जैसी तकनीकी बाधाएं भी डिज़ाइन को प्रभावित करती हैं।

इसके बावजूद, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं में पुराने पेड़ों का पारिस्थितिक महत्व अक्सर कम आंका जाता है। एक परिपक्व पेड़ केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि कार्बन अवशोषण, तापमान नियंत्रण, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे पेड़ों की भरपाई केवल नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती।

इसी वजह से कई नागरिक समूह और पर्यावरणविद यह मांग करते रहे हैं कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में "ट्री-फर्स्ट प्लानिंग" को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकें।

फैक्ट-चेक का निष्कर्ष यह है कि यह दावा "आंशिक रूप से सही (Partially True)" है। कई मामलों में सड़क डिज़ाइन में बदलाव कर पुराने पेड़ों को बचाया जा सकता है और ऐसे उदाहरण मौजूद भी हैं। हालांकि, यह कहना कि सभी इंजीनियर या योजनाकार पेड़ बचाना ही नहीं चाहते, एक सामान्यीकरण है। वास्तविक स्थिति तकनीकी, प्रशासनिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के संतुलन पर निर्भर करती है।

14/06/2026

चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में जंकी दास जी की हत्या अत्यंत कायरतापूर्ण और दुखद घटना है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि हिमाचल प्रदेश और विशेषकर रोहड़ू के इस व्यक्ति के लिए आखिर कोई आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा? यहां तक कि रोहड़ू से भी कोई विशेष प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिल रही, जबकि उनकी धर्मपत्नी स्वयं नव-निर्वाचित प्रधान हैं।
लोगों की इस खामोशी का आखिर क्या मतलब निकाला जाए? क्या रोहड़ू के शेरदिल लोग पंजाब के गैंगस्टरों के सामने खामोश हो गए हैं, या फिर उन्हें इस हत्या से कोई फर्क ही नहीं पड़ा?
और भी आश्चर्य की बात यह है कि पंजाब विश्वविद्यालय और डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में सक्रिय HIMSU तथा अन्य हिमाचली छात्र संगठनों के नेता भी मौन हैं। वे केवल तब सक्रिय दिखाई देते हैं जब कोई कार्यक्रम आयोजित करना हो या हिमाचल से किसी नेता को बुलाकर उनकी सेवा-सत्कार करनी हो।
एक निर्दोष व्यक्ति की निर्मम हत्या पर यह चुप्पी बेहद दुखद और चिंताजनक है। ऐसे मौकों पर समाज और छात्र नेतृत्व दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे न्याय की मांग के लिए आगे आएं। अफसोस है कि आज अधिकांश लोग केवल दर्शक बनकर रह गए हैं।

Smart City Really ❓❓❓❓
07/06/2026

Smart City Really ❓❓❓❓

06/06/2026
हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण विकास विभाग में मिशन के तहत नियुक्त एक कर्मचारी के कारनामे सामने आए है...
04/06/2026

हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण विकास विभाग में मिशन के तहत नियुक्त एक कर्मचारी के कारनामे सामने आए हैं। उक्त कर्मचारी ने कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से पहले परियोजना में इंटर्नशिप के माध्यम से नौकरी प्राप्त की। बाद में उसकी चालबाजियों को नजरअंदाज करते हुए उसे पहले मिशन एग्जीक्यूटिव और फिर जिला कार्यक्रम प्रबंधक (District Program Manager) के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर मिशन में वर्षों से ईमानदारी और अनुभव के साथ कार्य कर रहे कर्मचारियों को पदोन्नति के नाम पर लगातार नजरअंदाज किया गया।
जानकारी के अनुसार इस भ्रष्ट कर्मचारी ने अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपये की ठगी की, जिसके चलते वह वर्तमान में जेल की हवा खा रहा है।
प्रदेश सरकार से अनुरोध है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन पर कड़ी नकेल कसी जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के भ्रष्टाचार पर रोक लग सके और ईमानदार कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके।
PMO India

28/05/2026

हिमाचल हाई कोर्ट 1 दिसंबर 2026 तक वन भूमि से सभी अवैध कब्जे पूरी तरह हटाएं। रसूखदार हो या आम आदमी, नियम सब पर लागू। समय पर जमीन खाली न करने पर प्रशासन जबरन बुलडोजर चलाएगा और उसका खर्च भी कब्जाधारियों से वसूलेगा!

Sharing a news post from Amar Ujala . A simple Question to the Government of Himachal Pradesh …..1. What about the priva...
14/05/2026

Sharing a news post from Amar Ujala .
A simple Question to the Government of Himachal Pradesh …..
1. What about the private vehicles of Employees of Judicial / Bureaucratic / Police / Government / Medical departments plying through restricted and Sealed roads without any permits ??
2.What about the taxis , both registered / applied for / private number operating as taxis , plying through such roads ??
3.What about Scooties , latest to join in , of unregistered Fari wallahs ??
4. Lastly , what about Government vehicles stopping in middle of such roads , to shop vegetables for the Babu Sahab . Or dropping / picking their kids while plying through such roads ??
Will such vehicles will also be challaned , traveling through restricted/ sealed roads , without Permits .
Or this law is just to squeeze a common law abiding citizen of Shimla ??

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