18/09/2025
*गुरु भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाला*
*चमत्कारी दादागुरुदेव इकतीसा रचना का रहस्य*
दादागुरु इकतीसा की रचना आज से 74 वर्ष पूर्व संवत आठ दोय हजारा (२००८), आसोज तेरस शुक्रवार के शुभ दिवस में हुई ।
इकतीसा की रचना करने का रहस्य यह है कि लगभग 80-90 वर्ष पूर्व संघ समाज श्रीपूज्यों एवं दादागुरुदेवों के उपकारों को भूलने लगे। दादागुरुदेव के उपकारों को स्मरण में पुनः लाने के लिये संघ समाज को जागृत करने के लिए दादागुरुदेव की इकतीसा का निर्माण करने का निर्णय लिया गया। श्रीपूज्यों दादागुरुदेव के उपकारों का वर्णन करना कोई आसान बात नहीं थी। दादागुरुदेव के इकतीसे का लिखने का जिम्मा जंगम युगप्रधान वृहद भट्टारक दादागुरुदेव की गादी के 39 वें पट्टधर 1008 खरतरगच्छाधिपति, श्रीपूज्य श्री जिनविजयेन्द्र सूरिजी म. सा. ने अपने छड़ीदार सेवक गोपालजी को दिया।
यह जानकारी भी अनिवार्य है कि गोपालजी अनपढ़ थे । खरतरगच्छाधिपति श्रीपूज्य श्री जिनविजयेन्द्र सूरि म. सा. ने जब अपने छड़ीदार सेवक गोपाल को इकतीसा लिखने को कहा तब गोपालजी बोले गुरुदेव क्यों मेरा मजाक उड़ा रहे हैं। श्रीपूज्य गुरुदेव ने अपना हाथ गोपालजी के सिर पर रखा और कहा, गोपालजी आप गुरु इकतीसा की रचना शुरु किजीये हमारा आशीर्वाद सदैव आपके साथ है।
खरतरगच्छाधिपति श्रीपूज्य श्री जिनविजयेन्द्र सूरिजी म.सा. की प्रेरणा, शुभाशीष, मार्गदर्शन से गुरु इकतीसा का लेखन पूर्ण कर गोपाल जी ने खरतरगच्छाधिपति श्रीपूज्यजी श्री जिनविजयेन्द्रसूरि जी म. सा. को अर्पित कर कहा गुरुदेव यह तो सचमुच में चमत्कार हो गया। मैं तो ठहरा अनपढ़ अगुठा टेक और आपकी कृपा से यह कार्य आपने मेरे द्वारा पूर्ण करवाया।
खरतरगच्छाधिपति श्रीपूज्य श्री जिनविजयेन्द्र सूरि जी म.सा. द्वारा अपने साधना बल से सम शक्ति संपन्न कर सकल चतुर्विध जैन संघ के समक्ष सर्व प्रथम स्वमुख से, आसोज वदी तेरस शुक्रवार, सिंह लग्न, शुभ मुहूर्त में गुरु इकतीसा का पठन चतुर्थ दादागुरुदेव द्वारा स्थापित खरतरगच्छ केन्द्र गुरु गद्दी बड़ा उपासरा बीकानेर में किया गया एवं सकल संघ के मंगल कल्याणार्थ, श्री संघ को पठन हेतु प्रदान किया।
*दादागुरु इकतीसा रचना प्रेरणा प्रदाता*
जं.यु.वृ.भ. दादागुरुदेव की गादी के 39 वें पट्टधर 1008,
खरतरगच्छाधिपति श्रीपूज्य जिनविजयेन्द्र सूरिजी म.सा.
*दादागुरु इकतीसा रचना स्थान*
खरतरगच्छ केन्द्र, बड़ा उपासरा, बीकानेर
*दादागुरु इकतीसा प्रथम पठन तिथी*
आसोज बदी तेरस शुक्रवार संवत् 2008
*दादागुरु इकतीसा रचनाकार*
छड़ीदार सेवक गोपाल जी
*दादागुरु इकतीसा प्रथम पठन कर्ता*
खरतरगच्छाधिपति श्रीपूज्य जिनविजयेन्द्र सूरिजी म.सा.
श्रीपूज्यों दादागुरुदेव के उपकारों का स्मरण करते हुए गुरुदेवों की अनवरत बरस रही कृपा से अनुपम स्वर्णिम लाभ से लाभान्वित होकर भक्तिमय भावों से अपने नजदीक मन्दिर दादावाड़ी या निवास स्थान पर
*आसोज वदी तेरस, शुक्रवार दिनांक 19 सितम्बर 2025* को
108 बार गुरु इकतीसा का पाठ अवश्य करें।
प्रेषक :
* #जिनशासन_गौरव*
* #पदमसिंह_चौधरी_जयपुर__9414075821*