30/01/2026
मुंह पर मीठा और पीठ पीछे चुगली करने वाले स्वार्थी लोगों से दूरी क्यों रखे कलाप्रेमी?
कला केवल रंग, रेखा, स्वर या शब्द नहीं है — कला एक संवेदनशील आत्मा की सच्ची अभिव्यक्ति है। कलाप्रेमी व्यक्ति का मन अत्यंत कोमल, भावुक और सत्यप्रिय होता है। ऐसे में जो लोग मुंह पर मीठे बोल बोलते हैं लेकिन पीठ पीछे चुगली, ईर्ष्या और स्वार्थ का जाल बुनते हैं, वे कलाप्रेमी के जीवन और साधना दोनों के लिए घातक सिद्ध होते हैं।
मुंह पर प्रशंसा और पीछे निंदा करने वाले लोग दोहरी मानसिकता के शिकार होते हैं। वे दूसरों की प्रगति देखकर भीतर ही भीतर जलते हैं, पर ऊपर से मित्रता का मुखौटा लगाए रहते हैं। ऐसे लोग न तो सच्चे मित्र होते हैं और न ही शुभचिंतक। कलाप्रेमी की सृजनशील ऊर्जा, आत्मविश्वास और एकाग्रता को ये धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं।
कलाकार का मन स्वच्छ दर्पण के समान होता है। जब वह नकारात्मक, ईर्ष्यालु और स्वार्थी वातावरण में रहता है, तो उसकी कला में भी वही विकृति उतरने लगती है। चुगली करने वाले लोग कलाकार को भ्रमित करते हैं, उसे अपने लक्ष्य से भटकाते हैं और उसके मन में अनावश्यक शंका व भय भर देते हैं। परिणामस्वरूप कला-साधना बाधित होती है।
स्वार्थी लोग हमेशा अपने लाभ की सोचते हैं। जब तक कलाकार उनसे किसी रूप में उपयोगी रहता है, तब तक मिठास दिखाते हैं; जैसे ही उनका स्वार्थ समाप्त होता है, वही लोग पीठ पीछे अपमान, निंदा और षड्यंत्र करने लगते हैं। ऐसे संबंध कलाकार को मानसिक रूप से कमजोर बनाते हैं।
इसलिए कलाप्रेमी को चाहिए कि वह कम लेकिन सच्चे लोगों के साथ रहे, जो सामने और पीछे एक-से हों। जो आलोचना करें तो सामने करें, प्रशंसा करें तो मन से करें। दूरी रखना घृणा नहीं, बल्कि आत्म-रक्षा और आत्म-सम्मान का प्रतीक है।
याद रखें —
👉 कला पवित्र मन में ही फलती-फूलती है
👉 नकारात्मक लोगों से दूरी, सकारात्मक जीवन की पहली शर्त है
कलाप्रेमी जितना शांत, सजग और चयनशील होगा, उसकी कला उतनी ही ऊँचाइयों को छुएगी।
प्रेषक :
डॉ./प्रो. विकाश कुमार
निदेशक — विकास ललित कला अकादमी
संबद्ध: सुरों भारती संगीत कला केन्द्र, हुंगली ( पश्चिम बंगाल)
न्याय मार्ग, श्रीनगर, सिवान
संपर्क : 7563939396 , 9570757829 🙏