17/03/2026
"शक्ति सम्मान" से सम्मानित हुई महिलाएं -
शक्ति अभियान के अंतर्गत विकास खंड बिसवां कार्यालय के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। सम्मेलन में महिला दिवस की आयोजक विभा सिंह ने बताया कि महिलाएं शक्ति का स्रोत है, दुनिया की, देश की आधी आबादी हैं।महिलाओं के भारत के साथ - साथ पूरी दुनिया में संघर्ष का एक इतिहास रहा है।उन्होंने अमेरिका में 1908 में भेदभाव और काम के घंटों को कम कराने को लेकर अपने देश की तत्कालीन सरकार और फैक्ट्री मालिकों के विरोध में बड़ा संघर्ष किया , जीत भी हासिल की और नए आयाम कायम किए। उनके संघर्ष की बदौलत ही आज महिला कुछ स्वतंत्र हुई है लेकिन पूरी तरह से आज भी महिलाओं पर बंदिशे खत्म नहीं हुई है।देश की आजादी की लड़ाई लड़ने में रानी लक्ष्मी बाई, बेगम हजरतमहल, ऊदा देवी , लक्ष्मी सहगल जैसी महिलाओ का शानदार इतिहास रहा है, देश का संविधान बनाने वाली संविधान सभा में 15 महिलाएं जिसमें सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी, विजयलक्ष्मी पंडित,जैसी महिलाओं की भागीदारी थी। समाज को सुधारने में खासकर शिक्षा को बढ़ावा देने में सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख जैसी महिलाएं आज भी लाखों महिलाओं को प्रेरणा देती है।आज पूरी दुनिया में जिस तरह से एक देश की दूसरे देश को लेकर अविश्वसनीयता बढ़ रही है, युद्धोंन्माद बढ़ रहा है उसका सबसे अधिक असर अगर पड़ेगा तो महिअओ पर पड़ेगा। अंतराष्ट्रीय स्तर पर महिलाएं कही भी नीति निर्णायक नहीं होती है, न ही कही किसी भी स्तर पर पॉलिसी मेकर बनती है।बड़े से बड़े देश अपने देश में महिलाओं को देश के सर्वोच्च पदों पर बराबरी का मौका और भागीदारी नहीं दे पाए है। हमें उसी भागीदारी को देश में बढ़ाने की जरूरत है।कार्यक्रम को पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री अतीक अहमद जी, संबोधित किया, महिलाओं को अपने हाथों से शक्ति सम्मान पत्र और खुशहाली, हरियाली का प्रतीक गमले दिए और महिला दिवस की शुभकामना दी।भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बिसवां ब्लॉक के अध्यक्ष श्री अब्दुल करीम अंसारी जी ने महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामना दी। कार्यक्रम को नागरिक अधिकर संगठन से श्री हरिशंकर गुप्ता,वादा फाउंडेशन से श्री श्रीराम यादव, श्री काशीराम भार्गव, वामा संस्था की ज्योति भारती, शर्मावती, ने संबोधित किया। अंत में शक्ति सम्मान पत्र ऐसी महिलाओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने एक महिला होने के नाते समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई, मुकाम हासिल किया और बगैर किसी पुरुष के सहारे अपने बल पर अपने बच्चों को परवरिश दी । इन महिलाओं में सरिता भारती,सुषमा भार्गव,रीना,राधा, अनुप्रास मिश्रा,रूबी