27/04/2026
मुग़लों एवं बंगाल सुल्तान के खिलाफ विद्रोह करने वाले बिहार के अहीर :-
1. परसादी के अहीर जागीरदार बिदेशी राउत ने बंगाल सुल्तान अलाउद्दीन हुसैन शाह के खिलाफ विद्रोह किया था, जिसके परिणामस्वरूप सुल्तान ने विवश होकर परगना-ए-सारण की जागीरदारी बिदेशी राउत को मुकर्रर की।
2. बिदेशी राउत की पीढ़ी में जन्मे मर्दन राउत ने लगभग 1620 के आसपास सारण के स्थानीय अफगान व राजपूत जमींदारों के साथ मिलकर मुग़ल बादशाह जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह किया। इस दौरान मुग़ल वफादार ईश्वर शाही और मर्दन राउत के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें मर्दन राउत ने वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की। इसके पश्चात विद्रोह को शांत करने हेतु मुग़ल शहजादा परवेज मिर्जा ने परसादी के जागीरदारों को उनकी वीरता के सम्मान में 126 गांव प्रदान किए।
3. चंदुआरी राज के अहीर जागीरदार हेलमणि चौधरी ने 1656–57 में मुग़लों के खिलाफ विद्रोह किया। उनकी लड़ाई मुग़ल शहजादा व बिहार सूबे के तत्कालीन सूबेदार शाह सूजा से थी। शाह सूजा ने अपने वफादार बहरोज सिंह को विद्रोह दबाने की जिम्मेदारी सौंपी, हालांकि कई छोटी-बड़ी लड़ाइयों के बावजूद हेलमणि चौधरी मजबूती से डटे रहे। यह समय मुग़ल शहजादों के बीच गद्दी के लिए चल रहे संघर्ष का भी था। औरंगजेब के सेनापति मीर जुमला ने एक निर्णायक युद्ध में शाह सूजा को परास्त कर बिहार से खदेड़ दिया, जिसके बाद चंदुआरी के अहीर जागीरदारों और नई मुग़ल सत्ता के बीच शांति स्थापित हुई। तत्पश्चात बादशाह औरंगजेब के आदेश पर सैय्यद अजमेरी द्वारा एक सनद जारी कर चंदुआरी के जागीरदारों को क्षेत्र में शासन की मान्यता प्रदान की गई।