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हैप्पी बर्थ-डे बाबा जाहरवीर गोगा जीShrichandra Seva Samiti Regd
27/08/2024

हैप्पी बर्थ-डे बाबा जाहरवीर गोगा जी
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Jai mata di
27/08/2024

Jai mata di

✅ गोगा नवमी पर विशेष - ✅विक्रमी संवत के माह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा नवमी ...
26/08/2024

✅ गोगा नवमी पर विशेष - ✅
विक्रमी संवत के माह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा नवमी मनाR जाती है. गोगा राजस्थान के लोक देवता हैं. पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है. गोगा नवमी इसलिए भी खास है क्योंकि इसे हिन्दू और मुसलमान दोनों मनाते हैं.जाहरवीर गोगा (गुग्गा) नवमी के दिन नागों की पूजा करते हैं. मान्यता है कि गुग्गा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है. गुग्गा देवता को सांपों का देवता भी माना जाता है. गुग्गा देवता की पूजा श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन से आरंभ हो जाती है. यह पूजा-पाठ नौ दिनों तक यानी नवमी तक चलती है इसलिए इसे गुग्गा नवमी कहा जाता है।

गोगाजी को गुग्गा वीर, जाहिर वीर, राजा मण्डलिक व जाहर पीर के नाम से भी जानते हैं. यह गोरखनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे. उनका जन्म विक्रम संवत 1003 में राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा गांव में हुआ था. यह ददरेवा में स्थित है जहां पर सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं. कायम खानी मुस्लिम समाज उनको जाहर पीर के नाम से पुकारते हैं. राजस्थान के छह सिद्धों में गोगाजी का प्रमुख स्थान है. ऐसा माना जाता है कि अगर किसी के घर में सांप निकले तो गोगाजी को कच्चे दूध का छिटा लगा दें. इससे सांप बिना नुकसान पहुंचाए चला जाता हैं. जिस घर में गोगा जी की पूजा होती है, उस घर के लोगो को सांप नहीं काटता है. गोगाजी पूरे परिवार की रक्षा करते हैं।

आज मनाई जा रही है श्री जाहरवीर गोगा नवमी, जानें कैसे गुग्गा महाराज बने नागों के देवता

रानी, योगी के समक्ष अपने दुख को व्यक्त करती है और अपनी कोई संतान न होने का दुख बताती है. शिष्य योगी, रानी को अपने गुरु से मिलने को कहता है जिससे उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान प्राप्त हो सकता है.

आज मनाई जा रही है श्री जाहरवीर गोगा नवमी,

जानें कैसे गुग्गा महाराज बने नागों के देवता

आज श्री जाहरवीर गोगा जी का जन्मदिन यानि कि गोगा नवमी है।

विक्रमी संवत के माह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा नवमी मनाR जाती है. गोगा राजस्थान के लोक देवता हैं. पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है. गोगा नवमी इसलिए भी खास है क्योंकि इसे हिन्दू और मुसलमान दोनों मनाते हैं.

जाहरवीर गोगा (गुग्गा) नवमी के दिन नागों की पूजा करते हैं. मान्यता है कि गुग्गा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है. गुग्गा देवता को सांपों का देवता भी माना जाता है. गुग्गा देवता की पूजा श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन से आरंभ हो जाती है. यह पूजा-पाठ नौ दिनों तक यानी नवमी तक चलती है इसलिए इसे गुग्गा नवमी कहा जाता है.

गोगाजी को गुग्गा वीर, जाहिर वीर, राजा मण्डलिक व जाहर पीर के नाम से भी जानते हैं. यह गोरखनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे. उनका जन्म विक्रम संवत 1003 में राजस्थान के चुरू जिले के दत्तखेड़ा गांव में हुआ था. यह ददरेवा में स्थित है जहां पर सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग मत्था टेकने के लिए दूर-दूर से आते हैं. कायम खानी मुस्लिम समाज उनको जाहर पीर के नाम से पुकारते हैं. राजस्थान के छह सिद्धों में गोगाजी का प्रमुख स्थान है. ऐसा माना जाता है कि अगर किसी के घर में सांप निकले तो गोगाजी को कच्चे दूध का छिटा लगा दें. इससे सांप बिना नुकसान पहुंचाए चला जाता हैं. जिस घर में गोगा जी की पूजा होती है, उस घर के लोगो को सांप नहीं काटता है. गोगाजी पूरे परिवार की रक्षा करते हैं.

श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज की जन्म कथा
गोगा (गुग्गा) नवमी के विषय में एक कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार गुग्गा मारु देश का राजा था और उनकी मां बाछला, गुरु गोरखनाथ जी की परम भक्त थीं।

एक दिन बाबा गोरखनाथ अपने शिष्यों समेत बछाला के राज्य में आते हैं. रानी को जब इस बारे में पता चलता है तो वह बहुत प्रसन्न होती हैं इधर बाबा गोरखनाथ अपने शिष्य सिद्ध धनेरिया को नगर में जाकर फेरी लगाने का आदेश देते हैं. गुरु का आदेश पाकर शिष्‍य नगर में भिक्षाटन करने के लिए निकल पड़ता है. भिक्षा मांगते हुए वह राजमहल में जा पहुंचता है तो रानी उसे बहुत सारा धन प्रदान करती हैं. लेकिन शिष्य वह लेने से मना कर देता है और सिर्फ थोड़ा-सा ही अनाज मांगता है।

रानी अपने अहंकारवश उससे कहती है कि राजमहल के गोदामों में तो आनाज का भंडार लगा हुआ है. तुम इस अनाज को किसमें ले जाना चाहोगे. तो योगी शिष्य अपना भिक्षापात्र आगे बढ़ा देता है. आश्चर्यजनक रुप से सारा आनाज उसके भिक्षा पात्र में समा जाता है और राज्य का गोदाम खाली हो जाता है. किंतु योगी का पात्र भरता ही नहीं है. तब रानी उन योगीजन की शक्ति के समक्ष नतमस्तक हो जाती है और उनसे क्षमा याचना की गुहार लगाती है।

रानी, योगी के समक्ष अपने दुख को व्यक्त करती है और अपनी कोई संतान न होने का दुख बताती है. शिष्य योगी, रानी को अपने गुरु से मिलने को कहता है जिससे उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान प्राप्त हो सकता है।

यह बात सुनकर रानी अगली सुबह जब गुरु के आश्रम जाने को तैयार होती है तभी उसकी बहन काछला पहुंचकर उसका सारा भेद ले लेती है और गुरु गोरखनाथ के पास पहले से पहुंचकर उससे दोनों फल ग्रहण कर लेती है. परंतु जब रानी उनके पास फल के लिए जाती है तो गुरू सारा भेद जानने पर पुन: गोरखनाथ रानी को फल प्रदान करते हैं और आशिर्वाद देते हें कि उसका पुत्र वीर तथा नागों को वश में करने वाला तथा सिद्धों का शिरोमणि होगा।

इस प्रकार रानी को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और उस बालक का नाम गोगा (गुग्गा) रखा जाता है. कुछ समय पश्चात गुग्गा के विवाह के लिए गौड़ बंगाल के राजा मालप की बेटी सुरियल को चुना गया परंतु राजा ने अपनी बेटी की शादी गुग्गा से करवाने से मना कर दिया. इस बात से दुखी गुग्गा अपने गुरु गोरखनाथ जी के पास जाते हैं और उन्हें सारी घटना बताते हैं. बाबा गोरखनाथ ने अपने शिष्य को दुखी देख उनकी सहायता हेतु वासुकी नाग से राजा की कन्या पर विषप्रहार करवाते हैं।

राजा के वैद्य को उस विष का तोड़ नहीं मालूम होता. अंत में वे वासुकी नाग राजा से कहते हैं कि यदि वह गुग्गा मंत्र का जाप करें तो शायद विष का प्रभाव समाप्त हो जाए. राजा गुगमल मंत्र का प्रयोग विष उतारने के लिए करते हैं. देखते ही देखते राजा की बेटी सुरियल विष के प्रभाव से मुक्त हो जाती है और राजा अपने कथन अनुसार अपनी पुत्री का विवाह गुगमल से करवा देता है।

जाहरवीर गोगा नवमी पूजा विधि-

नवमी के दिन स्नानादि करके गोगा देव की या तो मिटटी की मूर्ति घर लाकर या घोड़े पर सवार वीर गोगा जी की तस्वीर को रोली, चावल, पुष्प, गंगाजल आदि से पूजन करना चाहिए. साथ में खीर, चूरमा, गुलगुले, लापसी, पूरी, पुए आदि का प्रसाद लगाएं एवं चने की दाल गोगा जी के घोड़े पर श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं।

इस दिन भक्तगण गोगा जी की कथा का श्रवण और वाचन कर नागदेवता की पूजा-अर्चना करते हैं. कहीं-कहीं तो सांप की बांबी की पूजा भी की जाती है. ऐसा माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से नागों के देव गोगा जी महाराज की पूजा करते हैं, उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जहां उनकी पूजा रोली, मोली, अक्षत, नारियल से होती है. रक्षाबन्धन पर बांधी गई राखियां खोलकर गोगा जी के चरणों में अर्पित की जाती हैं।

हैप्पी बर्थ-डे मेरे बाबा जाहरवीर जी


















26/08/2024

हैप्पी जन्माष्टमी
सभी वालों को बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं 💐🎊
#हैप्पीबर्थडे कान्हा जी 🎂🎂🎂🎂
🎁🎈🎀🎄🎀🎄🎁🎀



हैप्पी जन्माष्टमी 2024
26/08/2024

हैप्पी जन्माष्टमी 2024

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