18/02/2026
मेरी जीवनी: अध्याय - 2
"एक संकल्प, एक नई दिशा"
2009 का वह साल मेरे जीवन का 'टर्निंग पॉइंट' था। जब मैं खुद से वह वादा करके अपने कॉलेज के लिए निकला, तो लौटते वक्त मैं वह इंसान नहीं रहा था जो गया था। मेरी रातों की नींद अब चैन की नहीं, बल्कि एक मकसद की मोहताज हो चुकी थी। दिल और दिमाग में बस एक ही गूँज थी—अपनी बहन यश्मी धमीजा (बेंनू) के उस सपने को हकीकत में बदलना।
उस दिन के बाद जैसे मेरी दुनिया ही बदल गई। ब्रांडेड कपड़ों का शौक और दोस्तों के साथ बेमतलब की मस्ती, सब पीछे छूट गए। मैंने अपना वक्त अनाथालयों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में बिताना शुरू कर दिया। मैं जीवन की गहराइयों और रिश्तों के असली अर्थ को समझने की कोशिश करने लगा। हर साल राखी आती और बेंनू की भेजी हुई वह राखी मेरे उस वादे को और फौलादी बना देती, जो मैंने उसे उपहार के रूप में देने के लिए खुद से किया था।
वर्ष 2013 में मेरी B.Tech पूरी हुई। करियर की राह मुझे दिल्ली ले आई, जहाँ मैंने IES की तैयारी के लिए 'Madeeasy' में दाखिला लिया। वहाँ बिताए उन 7-8 महीनों ने मुझे न केवल नए दोस्त दिए, बल्कि एक मार्गदर्शक भी दिया—बी. सिंह (B. Singh) जी।
वहाँ पढ़ाई के दौरान, एक दिन सर ने 'Complete School' के कॉन्सेप्ट का जिक्र किया। उन्होंने एक ऐसे स्कूल की कल्पना साझा की जहाँ बच्चा सिर्फ शिक्षा के लिए न आए, बल्कि सफलता का हाथ थामकर बाहर निकले। दिल्ली में रहकर किताबों और सिलेबस में मेरी दिलचस्पी भले ही कम रही हो, लेकिन वहाँ मिले जीवन के अनुभवों ने मेरे सपनों को पंख दे दिए। मुझे वह मार्ग मिल गया था, जिस पर चलकर मैं अपने गंतव्य तक पहुँच सकता था।
जनवरी का महीना था, जब मेरे कॉलेज का मित्र अशोक अपनी नौकरी छोड़ SSC CGL की तैयारी के लिए दिल्ली आ गया। उसी दौरान मेरे स्कूल का साथी मनोज भी दिल्ली पहुँचा। अब मैं अकेला नहीं था; हम तीन दोस्त और एक साझा सपना था। यहीं से शुरू हुए उस सपने को धरातल पर उतारने के नए और ठोस प्रयास...
जारी है...
अपनी बहन यश्मी धमीजा (बेंनू) के नाम समर्पित।
आगे की कहानी अगली पोस्ट में... जारी है...
— कलम: मोहन सोनी
M.D -MAV School Sirsa
(अध्यापक: अपनी पसंद से, इत्तेफाक से नहीं)