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मेरी जीवनी: अध्याय - 2"एक संकल्प, एक नई दिशा"2009 का वह साल मेरे जीवन का 'टर्निंग पॉइंट' था। जब मैं खुद से वह वादा करके ...
18/02/2026

मेरी जीवनी: अध्याय - 2

"एक संकल्प, एक नई दिशा"

2009 का वह साल मेरे जीवन का 'टर्निंग पॉइंट' था। जब मैं खुद से वह वादा करके अपने कॉलेज के लिए निकला, तो लौटते वक्त मैं वह इंसान नहीं रहा था जो गया था। मेरी रातों की नींद अब चैन की नहीं, बल्कि एक मकसद की मोहताज हो चुकी थी। दिल और दिमाग में बस एक ही गूँज थी—अपनी बहन यश्मी धमीजा (बेंनू) के उस सपने को हकीकत में बदलना।

उस दिन के बाद जैसे मेरी दुनिया ही बदल गई। ब्रांडेड कपड़ों का शौक और दोस्तों के साथ बेमतलब की मस्ती, सब पीछे छूट गए। मैंने अपना वक्त अनाथालयों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में बिताना शुरू कर दिया। मैं जीवन की गहराइयों और रिश्तों के असली अर्थ को समझने की कोशिश करने लगा। हर साल राखी आती और बेंनू की भेजी हुई वह राखी मेरे उस वादे को और फौलादी बना देती, जो मैंने उसे उपहार के रूप में देने के लिए खुद से किया था।

वर्ष 2013 में मेरी B.Tech पूरी हुई। करियर की राह मुझे दिल्ली ले आई, जहाँ मैंने IES की तैयारी के लिए 'Madeeasy' में दाखिला लिया। वहाँ बिताए उन 7-8 महीनों ने मुझे न केवल नए दोस्त दिए, बल्कि एक मार्गदर्शक भी दिया—बी. सिंह (B. Singh) जी।

वहाँ पढ़ाई के दौरान, एक दिन सर ने 'Complete School' के कॉन्सेप्ट का जिक्र किया। उन्होंने एक ऐसे स्कूल की कल्पना साझा की जहाँ बच्चा सिर्फ शिक्षा के लिए न आए, बल्कि सफलता का हाथ थामकर बाहर निकले। दिल्ली में रहकर किताबों और सिलेबस में मेरी दिलचस्पी भले ही कम रही हो, लेकिन वहाँ मिले जीवन के अनुभवों ने मेरे सपनों को पंख दे दिए। मुझे वह मार्ग मिल गया था, जिस पर चलकर मैं अपने गंतव्य तक पहुँच सकता था।

जनवरी का महीना था, जब मेरे कॉलेज का मित्र अशोक अपनी नौकरी छोड़ SSC CGL की तैयारी के लिए दिल्ली आ गया। उसी दौरान मेरे स्कूल का साथी मनोज भी दिल्ली पहुँचा। अब मैं अकेला नहीं था; हम तीन दोस्त और एक साझा सपना था। यहीं से शुरू हुए उस सपने को धरातल पर उतारने के नए और ठोस प्रयास...
जारी है...

अपनी बहन यश्मी धमीजा (बेंनू) के नाम समर्पित।

आगे की कहानी अगली पोस्ट में... जारी है...

— कलम: मोहन सोनी
M.D -MAV School Sirsa

(अध्यापक: अपनी पसंद से, इत्तेफाक से नहीं)

Aap Sab ka bahut bahut आभार..1. Mata Bimla Devi -110002. Mamta Sinwar- 11003. Deepak soni -51004. Krishan bhai ji -21005...
17/02/2026

Aap Sab ka bahut bahut आभार..

1. Mata Bimla Devi -11000
2. Mamta Sinwar- 1100
3. Deepak soni -5100
4. Krishan bhai ji -2100
5. Rakesh bhai ji - 2100
6. Sharmila bai - 5100
7. Lovepreet -1100
8. Aman dhayal - 1100
9. Sushila bai bhattu - 1100
10. Ramesh ji chimpa - 500
11. Geeta ji nezia- 1100
12. Kapil ji soni - 3100
13. Kishor ji soni - 1100

🌟 एक सपने का साकार होना: 'नेक्स्ट गांव' - एजुकेशनल अनाथ आश्रम की नींव 🌟​"आज 15 फरवरी 2026 का दिन मेरे जीवन का सबसे ऐतिहा...
15/02/2026

🌟 एक सपने का साकार होना: 'नेक्स्ट गांव' - एजुकेशनल अनाथ आश्रम की नींव 🌟

​"आज 15 फरवरी 2026 का दिन मेरे जीवन का सबसे ऐतिहासिक और भावुक दिन है।"

​17 साल पहले, एक छोटा सा बीज एक सपने के रूप में मन में बोया गया था—एक ऐसा सपना जहाँ उन बच्चों को सहारा मिले जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है। आज वह सपना हकीकत में बदल गया है। मुझे यह बताते हुए अपार हर्ष और संतोष हो रहा है कि आज हमने 'नेक्स्ट गांव' (Next Gaon) नामक एक अनोखे एजुकेशनल अनाथ आश्रम की नींव रख दी है।

​हमारा संकल्प:

'नेक्स्ट गांव' केवल एक आश्रय स्थल नहीं होगा, बल्कि यह एक ज्ञान का मंदिर होगा। यहाँ हम अनाथ बच्चों को गोद (Adoption) लेंगे और उनकी उच्च स्तर की शिक्षा, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। हमारा लक्ष्य है कि यहाँ से निकलने वाला हर बच्चा समाज का एक जिम्मेदार और सफल नागरिक बने।

​स्थान: माता अनारी देवी विद्यापीठ, जमाल (जिला सिरसा, हरियाणा) के पास।

​आज के पावन अवसर की झलकियाँ:

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने मेरे अपनों का साथ पाकर मेरा उत्साह और भी बढ़ गया। इस शुभ अवसर पर मेरे पिता श्री प्रभु दयाल भामा जी, फूफा जी श्री सुभाष चंद्र जी सोनी जी, मेरे प्रिय मित्र अमन की माता जी, भाई कृष्ण जी, धर्मवीर राव जी, नवीन, रोहतास जांगड़ा जी,दीपक भाई जी, कपिल भाईसाहब राकेश जी, ममता मैडम और मनीष शास्त्री जी उपस्थित रहे। साथ ही, स्कूल के समस्त स्टाफ मेंबर्स और प्यारे विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। आप सभी का आशीर्वाद और सहयोग ही मेरी असली ताकत है।

​यह सफर लंबा है, लेकिन इरादे फौलादी हैं। 17 साल का इंतजार आज एक नई शुरुआत में बदल गया है। मैं आप सभी से निवेदन करता हूँ कि इस नेक कार्य में अपना आशीर्वाद और साथ बनाए रखें।

​संपर्क करें:
यदि आप इस मुहिम से जुड़ना चाहते हैं या कोई जानकारी चाहते हैं, तो हमसे संपर्क करें:
📞 9813203074
9050303074

​"शिक्षा ही वह शस्त्र है जिससे हम दुनिया बदल सकते हैं, और 'नेक्स्ट गांव' इसी बदलाव की पहली सीढ़ी है।"

मेरे जीवन की कहानी 1.जीवन का एक नया अध्याय: मेरी छोटी बहन और वह टर्निंग पॉइंट​हर किसी के जीवन में कुछ लक्ष्य होते हैं और...
15/02/2026

मेरे जीवन की कहानी

1.जीवन का एक नया अध्याय:

मेरी छोटी बहन और वह टर्निंग पॉइंट
​हर किसी के जीवन में कुछ लक्ष्य होते हैं और उन लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए कोई न कोई 'टर्निंग पॉइंट' (मोड़) ज़रूर आता है। मेरे जीवन का वह मोड़ साल 2009 में आया, जब मैं अपनी राखी बहन, बेनू से पहली बार लुधियाना में मिला।
​उस समय तक मैं एक ऐसा लड़का था जिसे सिर्फ ब्रांडेड कपड़े पहनना और मौज-मस्ती में रहना पसंद था। हालांकि दोस्ती मेरे लिए तब भी उतनी ही प्यारी थी जितनी आज है, जिसके लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूँ।

2. ​वह मुलाकात जिसने सब बदल दिया

​उस समय मेरी 'लिटिल चैम्प' बेनू शायद सातवीं या आठवीं कक्षा में रही होगी। उसने मुझसे कहा— "भैया, कहीं घूमने चलें?" मुझे लगा उसे बर्गर, पिज्जा खाना होगा या कोई मूवी देखनी होगी। मैं तैयार हो गया, पर मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि वह छोटी सी गुड़िया मुझे लुधियाना के 'मदर टेरेसा अनाथ आश्रम' ले जाएगी और मेरी पूरी सोच को हिलाकर रख देगी।
​वहाँ अनाथ बच्चों के साथ-साथ मानसिक रूप से अक्षम (mentally challenged) बच्चे और एक वृद्धाश्रम भी था। बेनू मुझे एक-एक करके हर जगह ले गई।

3.​घृणा से प्रेम तक का सफर

​जब हम छोटे बच्चों से मिले, तो मेरी नज़र एक ऐसे बच्चे पर पड़ी जो शायद कई दिनों से नहाया नहीं था और काफी गंदा दिख रहा था। उसे देखकर मेरे मन में एक पल के लिए घृणा (घिन) का भाव आया। लेकिन तभी बेनू ने उसी बच्चे को बिना किसी हिचकिचाहट के गोद में उठा लिया और उसे लाड-दुलार करने लगी।
​वह मेरी दुनिया को झकझोर देने वाला पहला पल था। अगले ही पल, मेरी वह घिन प्यार में बदल गई और उस दृश्य ने हमेशा के लिए मेरी दुनिया बदल दी।

4. ​निस्वार्थ सेवा की मूरत

​इसके बाद हम वृद्धाश्रम गए। वहाँ कई बुजुर्ग दादा-दादी उसे पहचान रहे थे और उसे ढेर सारा आशीर्वाद दे रहे थे। मैं बस मंत्रमुग्ध होकर यह सब देख रहा था। मेरे अंदर कुछ टूट रहा था और कुछ नया बन रहा था। अपनी छोटी सी बहन के लिए मेरे मन में सम्मान और प्यार कई गुना बढ़ गया था।
​अगला पड़ाव वह वार्ड था जहाँ मानसिक रूप से अक्षम बच्चे थे। हैरानी की बात तो यह थी कि जो बच्चे किसी को नहीं पहचानते थे, वे भी बेनू को पहचान रहे थे। यह उस निस्वार्थ प्रेम की ताकत थी, जो उसे वहाँ एक अलग पहचान दे रही थी। मेरी बहन मुझे अनजाने में ही 'प्रेम' का असली मतलब समझा रही थी। उस दिन तक मैं एक लक्ष्यहीन (visionless) इंसान था, लेकिन बेनू ने मुझे जीवन का एक बड़ा उद्देश्य दे दिया था।

5. ​राखी का अनमोल कर्ज

​वहाँ कुछ बच्चे ऐसे भी थे जिन्हें वह पढ़ाया करती थी। इतनी कम उम्र में समाज के लिए ऐसा समर्पण देखकर मैं खुद को उसकी राखी के कर्ज तले दबा हुआ महसूस करने लगा। उसी दिन मैंने ठान लिया कि मुझे अपनी इस बहन को राखी का असली उपहार देना है।
​साल दर साल बीतते गए, बेनू राखी भेजती रही और मैं हर बार खुद से और उससे यह वादा करता रहा कि— "एक दिन तेरा भाई तुझे उपहार में बेसहारा लोगों का सहारा बनने वाला एक 'आशियाना' बनाकर देगा।"

​आगे की कहानी अगली पोस्ट में... जारी है...

​— कलम: मोहन सोनी
(अध्यापक: अपनी पसंद से, इत्तेफाक से नहीं)

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14/02/2026

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