चलो सतलोक - Chalo Satlok

चलो सतलोक - Chalo Satlok सतलोक में चल मेरी सुरता, यहां ना लावे देरी,
साँच कहूँ ना झूठ रति भर, तू बात मान ले मेरी।।

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नाम लेने वाले व्यक्तियों के लिए आवश्यक जानकारी ||

1. पूर्ण गुरु की पहचान

आज कलियुग में भक्त समाज के सामने पूर्ण गुरु की पहचान करना सबसे जटिल प्रश्न बना हुआ है। लेकिन इसका बहुत ही लघु और साधारण–सा उत्तर है कि जो गुरु शास्त्रो के अनुसार भक्ति करता है और अपने अनुयाईयों अर्थात शिष्यों द्वारा करवाता है वही पूर्ण संत है। चूंकि भक्ति मार्ग का संविधान धार्मिक शास्त्र जैसे – कबीर साहेब की वाणी, नानक साहेब की वाणी, संत गरीबदास जी महाराज की वाणी, संत धर्मदास जी साहेब की वाणी, वेद, गीता, पुराण, कुरआन, पवित्र बाईबल आदि हैं। जो भी संत शास्त्रो के अनुसार भक्ति साधना बताता है और भक्त समाज को मार्ग दर्शन करता है तो वह पूर्ण संत है अन्यथा वह भक्त समाज का घोर दुश्मन है जो शास्त्रो के विरूद्ध साधना करवा रहा है। इस अनमोल मानव जन्म के साथ खिलवाड़ कर रहा है। ऐसे गुरु या संत को भगवान के दरबार में घोर नरक में उल्टा लटकाया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर जैसे कोई अध्यापक सलेबस (पाठयक्रम) से बाहर की शिक्षा देता है तो वह उन विद्यार्थियों का दुश्मन है।

गीता अध्याय नं. 7 का श्लोक नं. 15 न, माम्, दुष्कतिनः, मूढाः, प्रपद्यन्ते, नराधमाः, मायया, अपहृतज्ञानाः, आसुरम्, भावम्, आश्रिताः।।