आरोग्यं उन्नति मानवता समिति

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आरोग्यं उन्नति मानवता समिति कोई सोये न भूखें पेट.. जब हाथ में हो कौशल की भेंट..
#भूख मुक्त भारत #कौशल युक्त भारत #भीख रहित भारत

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16/01/2024

राम के प्राण (सीता) और राम की प्रतिष्ठा (राम-धर्म) सनातन है । फिर अर्ध-निर्माणाधीन राम मंदिर में राम की पूर्ण प्राण-प्रतिष्ठा कैसे हो सकती है। अर्ध प्राण-प्रतिष्ठा कोई धर्म, शास्त्र, और शास्त्रियों को आधीन करके करवाता हो तो धर्मरक्षा के किये विरोध अति आवश्यक हो जाता। किसी व्यक्ति का भी विरोध करना पड़े चाहे वो किसी भी पद-प्रतिष्ठा को सुशोभित करता हो तो धर्म की रक्षा के लिए जरूर आगे बढ़ना चाहिए। कोई सत्ता में बना रहे उसके लिए राम की अधार्मिक प्राण-प्रतिष्ठा होती हो तो विरोध अवश्य करना चाहिए। और ऐसी अधार्मिक प्राण-प्रतिष्ठा का अगर कोई साधु-संत सहभागी होता हो तो उसका भी विरोध करना चाहिए। ऐसे में भगवतिक दोष नही लगता। साधु-संत धर्म की रक्षा के लिए भागवत पथ पर जीवन न्यूछावर करते है उनको किसी व्यक्ति विशेष को सत्ता में बनाये रखने के लिए, चाहे वो उनका मित्र ही क्यों न हो, प्रयास भी नही करना चाहिए। राम जिस तिथि पर धरती पर जन्म प्राप्त किये थे उसी तिथि पर ही प्राण-प्रतिष्ठा होनी चाहिए, जन्मस्थान में, और पूर्ण मंदिर में, और धर्म-शास्त्र की पद्धति का पालन करते हुए।
राम कोई सत्ता प्राप्त करने की सीढ़ी या सत्ता में बने रहने की कुंजी नहीं है। राम धर्म है, राम भारत का हृदय है, राम हर घर के प्रभु है, राम प्राणवायु है: उन्हें प्रतिष्ठा की क्या जरूरत? अधर्म से, जनमानस को उद्विग्न करके राम के नाम पर राम को मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठित करना राम द्रोह है और भारत माँ की धरती पर ऐसा अधर्म नही होना चाहिए।

बड़े दुःख कि बात है: राम को राम नही रहने दिया भारत देश की राजनीति ने । राम को राजनीति में फसाना और प्रभु राम की दी हुई रोटी खाकर राम का राजनीतिकरण अपराध है। सज़ा के भागी आप हो गए है।
दण्ड सुनिश्चित करें... हे राम! जय सियाराम

समस्त भारतवासियों को गोविन्द दास माधवेन्द्र शुक्ला की मकर संक्रांति की अशेष शुभकामनाएं🙏

24/12/2023

मैं ना तो भाजपा का सदस्य हूँ और ना ही RSS का l राष्ट्र प्रथम के भाव से ओत-प्रोत हूँ l सनातन धर्म का पालक हूं और संरक्षक भी l राष्ट्र सेवा के प्रति तत्पर एवं प्राणियों में सदभाव का प्रकाशक l
परंतु मैं बेरोज़गार हूँ , शिक्षित हूँ पर l जेब है पर खाली - आय का कोई श्रोत नहीं है l भूखा हूँ कि बिना मुफ़्त वाले अनाज के बिना अपना पेट कभी भर पायूँ l कभी खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपना जीवन यापन कर सकूँ l
क्या भूखे पेट , फटी जेब, बेरोजगार , कमज़ोर मन से सनातन धर्म का प्रहरी हो सकता हूँ ? क्या राष्ट्र प्रथम के भाव को बनायें रख सकता हूँ ? क्या प्राणियों में सदभाव को प्रकाशित कर सकता हूँ ?
केवल वही शरीर और मन सनातन धर्म की रक्षा कर सकता है , राष्ट्र प्रथम के भाव को चरितार्थ कर सकता है , और सदभाव से जी सकता है जिसको सबसे पहले दो जून की रोटी का इन्तेजाम हो और रोटी खुद के कमाए पैसे से बनी हो ,मुफ़्त के राशन से नहीं l
देश का युवा अगर काहिल बना दिया जायेगा, उसे भी रेवड़ी कल्चर में डुबो दिया जायेगा तो भारत देश में युवशक्ती की जगह रेवड़ी शक्ति स्थान ले लेगी और ऐसी शक्ति से उत्पन्न जीव केवल बाटेगा , कभी जोड़ेगा नहीं l
घर का लडका घर पर पडा हो बेकार जब की लोग उसे कभी घर का चिराग़ कहते थे l वो लाचार है, हार रहा है, भटकने वाला है और उसे सम्भालने वाला कोई नहीं है ? वो लोग जो अपनी गरीबी का रोना प्रचारित करके, लच्छेदार भाषणों से पूरे देश को ऐसी स्थिति में पहुँचा दिए है जहां लोग खुद के अस्तित्व को ही भूल गए है...लोग अब निरजीव , पेहले से भी असहाय महसूस करने लगे है ...वो अवसाद में जी रहे है मानो उन्हें ये लगने लगा हो कि देश को अवसाद की स्थिति में ले जाने वाला कभी सत्ता से नहीं हटेगा? क्या अब देश उसके रूची और अरुचि से चलेगा ??

मेरे सम्माननीय भारत वासियों, साल 2024 वो निर्णायक वर्ष है जब पूरा देश साथ मिलकर भारत देश में राजनैतिक परिवर्तन प्राप्त करवा सकता है l सभी वर्ग, सम्प्रदाय, पंथ और धर्म के लोग विशेषकर युवा एकजुट हो जाइए और देश की सत्ता में नए चेहरों को स्थान दिलवाइयें। बहुत हो गया देश और धर्म के नामपर पिछड़ापन-गवारपन, धपोसलें; अब जागिये मेरे देश के वासियों ...धर्म व्यक्तिगत विषय होता है देश का नही। हम हिन्दू हैं ये सरकार को बताने की जरूरत नहीं l इसी तरह सरकार को भी हुन्दुत्व के नाम पर बनाने की जरूरत नही । जितने भी देश जो धर्म के नाम पर बने हो वो तक केवल विकास की बात करते हैं । और भारत सरकार हर बार विकास के नामपर केवल मन्दिर बनाना ही विकास मानती है। कभी किसी भारत देश के वासी को रोजगार देकर दिखाएं, कभी उसको विश्वकर्मा बनाकर दिखाएं कभी उसको उसके पैरों में खड़े होना सिखाएं। काहिल और कमजोर बना दिया है आज की सरकारों ने। युवा बहुत बेबस और लाचार हो चुका है ।
देश में विकास होना चाहिए... मुँह वाला नही... जो दिखता हो। रोज़गार हो 4 साल से ज्यादा वाला, कौशल विकास हो जो युवाओं को विश्वकर्मा बनाता हो , गुणवत्ता युक्त शिक्षा वैसे संस्थानों से जिनहे कुकुरमुत्ता नीति के तहत न बनाया गया हो और देश का व्यापार किसी एक या दो के हवाले न कर दिया हो।

बहुत समय हो गया है ...अब जागिये, हिम्मत कीजिये, मत घबराइए, परिवर्तन के लिए वोट कीजिये , देश के युवा के लिए वोट कीजिये; युवाओं की सरकार बनाईये 2024 लोकसभा चुनाव में। पार्टी कोई भी हो अब सत्ता युवा के हाथ में होगी।

- गोविन्द दास माधवेन्द्र शुक्ला
#युवाशक्ति ज़िंदाबाद #लोकसभा2024चुनाव

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