Respect FIRST-Policy Implemented

Respect FIRST-Policy Implemented यदि समय आपकी परीक्षा ले रहा है तो परिणाम घोषित होने तक धैर्य रखिए.. क्योंकि बिना परीक्षा दिए कोई विजेता नहीं बनता...

18/03/2026
17/03/2026

@ अपना सफ़र अकेले तय कीजिए, !!
सहारे इंसान को कमजोर बना देते हैं!!

।।।। जय मां शारदे।।।।
18/02/2026

।।।। जय मां शारदे।।।।

06/02/2026

सच्चे प्रेम की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें दिखावा नहीं होता। जब दो लोग एक-दूसरे से सच में प्यार करते हैं, तो वे बिना बोले भी एक-दूसरे की भावनाएँ समझ लेते हैं। वे छोटी-छोटी बातों में खुशियां ढूँढ लेते हैं, और मुश्किल समय में एक-दूसरे की ढाल बन जाते हैं। असली प्यार में अधिकार नहीं होता, भरोसा होता है-जहाँ आप जानते हैं कि सामने वाला आपके साथ है, चाहे दुनिया कितनी भी बदल जाए। जो प्यार आपको शांत रखे, समझे, और आपकी कमियों को भी मुस्कान के साथ अपनाए-वही जीवन का सबसे खूबसूरत रिश्ता होता है।

06/02/2026

भाग १:- (पढ़ने के बाद लाइक और फॉलो जरूर करें)

इस दुनिया में एक सच्चाई है, जिससे हम सब भागते हैं, हम उसे अनदेखा करते हैं, उसका नाम लेने से डरते हैं, और वो सच्चाई है मृत्यु "दि एंड" । जब भी हमारे घर के पास से कोई अर्थी गुजरती है तो हमारे कानों में एक ही आवाज गूंजती है, राम-नाम सत्य है, हम सबने वो मंजर देखा है एक सफेद कफन में लिपटा हुआ शरीर। चार लोग उसे अपने कंधों पर उठाकर ले जा रहे होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी उस सफेद कफन के नीचे छिपी उस खौफनाक हकीकत को गौर से देखा है? अगर आप ध्यान देंगे तो पाएंगे कि मरने के बाद इंसान के शरीर को सिर्फ ढका नहीं जाता, बल्कि उसे रस्सीयों से बहुत कसकर बांधा जाता है। उसे बांस की अर्थी के साथ जकड़ दिया जाता है, और सबसे अजीब बात उसके पैरो के दोनों अंगूठो को एक दूसरे से बहुत कसकर बांध दिया जाता है। एक पल के लिए सोचिये, वो इंसान अब मर चुका है, वो हिल नही सकता, वो भाग नही सकता। वो किसी का विरोध नही कर सकता । वो बस एक डेड बॉडी है। तो फिर उसे एक अपराधी की तरह, एक कैदी की तरह रस्सीयों में जकड़ने की क्या जरूरत हैॽ क्या ये सिर्फ उसे गिरने से बचाने के लिए है? या फिर इसके पीछे कोई ऐसा गहरा, काला और रूह कंपा देने वाला राज़ छिपा हैॽ जिसका जिक्र गरुण पुराण के उन पन्नों में किया गया है, जिन्हें पढ़ने से भी लोग डरते है। क्या हो, अगर मैं आपसे कहूं कि लाश को बांधना सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों द्वारा बनाया गया एक लॉक सिस्टम है । एक ऐसा सुरक्षा कवच जो उस मृत शरीर को नहीं बल्कि हम जिंदा लोगों को बचाता है। क्या हो, अगर मैं आपसे कहूँ कि अगर वो रस्सी खुल जाए या अगर वो अंगूठे ना बांधी जाएं तो वह शरीर जो अभी-अभी शांत पड़ा है, वो फिर से हरकत कर सकता है। आज के इस कहानी में हम गरुण पुराण के उस प्रतिबंधित ज्ञान के समुद्र में गोता लगाएंगें । हम मृत्यु के बाद के पहले 24 घंटो को डी-कोड करेंगें। हम जानेंगें कि विज्ञान जिसे ट्रिगर मोटर्स कहता है उसे गरुण पुराण प्रेत बाधा क्यों कहता है ? हम जानेंगे कि शव यात्र में पीछे मुड़कर देखना मना क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल श्मशान में खोपड़ी को डंडे से क्यों तोड़ा जाता है? कहानी की शुरुआत होती है उस पल से, जब डॉक्टर कह देता है"I am Sorry, case no more" (आय एम सॉरी केश (ही/शी) इज नो मोर भोर)। हमारे लिए वह अंत है। लेकिन गरुण पुराण के अनुसार खेल तो अभी शुरु हुआ है। गरुण पुराण में भगवान विष्णु अपने वाहन गरुण को बताते हैं कि मृत्यु कोई एक झटके में होने वाली घटना नही है। यह एक प्रोसेस है, एक लंबी प्रक्रिया है जब प्राण शरीर छोड़ते हैं तो शरीर उसी वक्त निर्जीव हो जाता है। बायोलॉजी के लिए यह सिर्फ कोशिकाओं (cells) का मरना है।...... क्रमशः

01/02/2026

(भाग १ आपने बहुत पसंद किया ।
फाॅलो लाइक और कमेंट किया)
भाग २:-
लेकिन आध्यात्म के नजरिए से देखो तो उस वक्त कमरे का माहौल एकदम बदल जाता है। पुराणों में बताया गया है कि मरने के तुरंत बाद आत्मा को यह एहसास ही नही होता कि वह मर चुकी है। यह सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन इसे ऐसे समझिए जैसे आप एक बहुत गहरे सपने में है। जब आत्मा शरीर से बाहर निकलती है तो उसे लगता है कि वह सो रही है। या बेहोश है। वह अपने ही शरीर को बिस्तर पर लेटा हुआ देखती है। वो अपने परिवार वालों को रोते हुए देखती है। वो अपनी पत्नी को, अपने बच्चों को पुकारती है मै यहां खड़ा है। तुम उस शरीर को देखकर क्यों रो रहे हो । लेकिन विडम्बना यह है कि उसकी आवाज कोई नही ही सुन सकता। वह चिल्लाती है, कुछ छूने की कोशिश करती है, लेकिन उसका हांथ हवा के आर-पार हो जाता है। और यही वह पल होता है, जब उस आत्मा को सबसे बड़ा झटका लगता है। उसे अहसास होता है कि उसका कनेक्शन इस भौतिक दुनिया से टूट चुका है। और दोस्तों यहीं से शुरू होता है खतरा । गरुड़ पुराण कहता है कि मृत्यु के बाद के कुछ घंटे आत्मा मोह यानी अटैचमेंट के जाल में सबसे ज्यादा फंसी होती है। जिस घर में उसने ८० साल बिताए। जिस शरीर को उसने इतना खिलाया पिलाया, उसे वह इतनी आसानी से कैसे छोड़ दे? आत्मा कन्फ्यूज हो जाती है। उसे लगता है कि अगर वह दोबारा उस लेटे हुए शरीर में घुस जाए तो शायद वह फिर से जिंदा हो सकती है। यही वो वजह है कि शव को तुरंत बांधा जाता है। अब सवाल यह आता है कि शरीर को तो कहीं से भी बांधा जा सकता था, लेकिन पैरों के अंगूठों को एक-दूसरे से जोड़कर बांधना क्यों जरूरी है? इसके पीछे गरुड़ पुराण और योग विज्ञान का एक बहुत गहरा कनेक्शन है। हमारे शरीर में 72000 नाड़िया होती है, जिनमें प्राण ऊर्जा बहती है। योग शास्त्र कहता है कि हमारे शरीर में प्राण का प्रवाह पैरों से सिर की तरफ और सिर से पैरों की तरफ एक सर्किट में चलता है। जब इंसान मरता है तो यह ऊर्जा बिखरने लगती है, लेकिन शरीर में कुछ रिजिजुअल एनर्जी यानी बची खुची ऊर्जा रह जाती है। पैरों के अंगूठों को बांधना दरअसल उस सर्किट को शाॅर्ट करने जैसा है यह एक तरह का एनर्जी लाॅक है । पुराने जमाने के ॠषि मुनि जानते थे कि अगर पैरों को खुला छोड़ दिया जाए तो आत्मा अपने पुराने शरीर में वापस प्रवेश करने का रास्ता मिल सकता है अंगूठों को बांधकर हम प्रतिकात्मक और ऊर्जा के स्तर पर उस आत्मा को यह संदेश देते हैं कि यह दरबाजा अब बंद हो चुका है। अब तुम इस शरीर का इस्तेमाल नही कर सकते, लेकिन बात सिर्फ आत्मा के वापस आने की नही है। बात इससे कहीं ज्यादा डरावनी है और वह है दूसरी शक्तियों का खतरा। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प अध्याय में एक बहुत ही भयावह चेतावनी दी गई है। यह ब्रह्मांड सिर्फ उतना ही नहीं है, जितना हमें अपनी आंखों से दिखाई देता है। हमारे आसपास इसी हवा में कई ऐसी अदृश्य शक्तियां मौजूद है जो शरीर की तलाश में रहती हैं । इन्हें हम अतृप्त आत्माएं, पिशाच या नेगेटिव एंटिटीज कह सकते हैं। इमैजिन करिए एक खाली घर की। आगर किसी आलीशान घर का मालिक घर छोड़कर चला जाए और दरवाजा खुला छोड़ दे तो क्या होगा? आसपास के चोर उचक्के या कोई भी आवारा व्यक्ति उस घर में घुसकर कब्जा कर सकता है। ठीक यही स्थिति एक ताजा मृत शरीर यानी फ्रेश डेड बॉडी की होती है। असली मालिक यानी आत्मा जा चुका है। शरीर यानी घर अब खाली पड़ा है। और यह वह समय होता है जब श्मशान और मृत्यु की गंध से आकर्षित होकर नकारात्मक शक्तियां उस शरीर की तरफ खिंची चली आती हैं। शास्त्रों का मानना है कि अगर शव को बिना बांधे, बिना रक्षा सूत्रों के छोंड़ दिया जाए तो कोई बुरी शक्ति उस खाली शरीर पर कब्जा कर सकती है। इसे प्रकाया प्रवेश कहा जाता है। इतिहास में और लोक कथाओं में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं, जहां एक मुर्दा अचानक उठ बैठा। लेकिन उसका व्यवहार उस व्यक्ति जैसा नही था । वह हिंसक था, अजीब था। वैज्ञानिक इसे पोस्टमार्टम, स्पैम या मांसपेशियों की ऐंठन कह सकते है। लेकिन तन्त्र विज्ञान इसे पिशाच बाधा मानता है। शव को रस्सीयों से खासकर सुतली या नारियल की रस्सी से बांधना और उसे बांस जिसका उपयोग बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए होता है के साथ जकड़ना एक तरह का तांत्रिक बंधन है । यह उस शरीर को सील कर देता है। ताकि अंतिम संस्कार तक वह सुरक्षित रहे। चलिए थोड़ी देर के लिए गरुड़ पुराण को एक साइड रखते हैं और २१ वीं सदी के विज्ञान के चश्मे से देखते हैं। क्या शव को बांधने का कोई लॉजिकल या मेडिकल कारण भी है? जबाब है "हां" । और यह कारण भी कम डरावना नही है। जब इंसान मरता है तो उसके शरीर के अंदर बायोकेमिकल बदलाव शुरू हो जाते हैं। मरने के 3-4 घंटे बाद एक, प्रक्रिया शुरू होती है, जिसे ट्रिगर मोटर्स कहते हैं। इसमें शरीर की मांसपेशियों अकड़ने लगती हैं, और शरीर पत्थर जैसा सख्त हो जाता है। अब जरा पुराने समय के बारे में सोचिए। तब एंबुलेंस या शव वाहन नही होते थे। लोग शव को बांस की अर्थी पर कंधो पर उठाकर मीलों दूर नदी किनारे या जंगल में ले जाते थे। रास्ते उबड़ खाबड़ होते थे। अगर शरीर को कसकर नही बांधा जाएगा और रेग्युलर मोटर्स की वजह से शरीर अकड़ गया तो हो सकता है कि शव का हांथ या पैर अजीब तरीके से बाहर निकल आए या झटके लगने से शव अर्थी से नीचे गिर ‌जाए। एक मृत शरीर का अर्थी से गिर जाना या उसका हांथ लटक जाना यह दृश्य देखने वालों के लिए बहुत भयावह हो सकता है। यह उस मृत व्यक्ति का अपमान भी है। इसलिए शरीर को एक स्थिर मुद्रा में रखने के लिए उसे बांधना व्यवहारिक रूप से जरूरी था। इसके अलावा मरने के बाद शरीर के अंदर बैक्टीरिया अपना काम शुरु कर देते हैं। गैसेस बनने लगती है। कभी-कभी इन गैसों के दवाब के कारण मृत शरीर में अचानक हरकत होती है। जैसे मुंह का खुल जाना, आंखें पलट जाना या हांथ का उठ जाना। अगर शव बंधा नही है और शवयात्रा के बीच में मुर्दे का हांथ, अचानक हवा में उठ जाए तो सोचिए साथ चल रहे लोगों का क्या हाल होगा। भगदड़ मच जाएगी। रस्सियां उस शरीर को काबू में रखती है।....... क्रमशः

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