03/02/2026
हिमाचल फोरम अगेंस्ट ड्रग एब्यूज (HFADA)
• नशे के खिलाफ लड़ने के लिए समग्र और समेकित प्रयासों की ज़रूरत- HFADA
• नशे में फंसे युवाओं या उनके परिवारों का बहिष्कार करना गलत।
• नशा निवारण बोर्ड की बैठक बुलाकर सरकार साँझा करे एकीकृत रणनीति।
हिमाचल फोरम अगेंस्ट ड्रग एब्यूज (HFADA) ने नशे के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान को एकीकृत एवं समन्वित रूप में चलाने पर बल दिया। HFADA फोरम की ओर से अध्यक्ष, दीपक सानन, संगठनात्मक सहयोगी ज्ञान विज्ञान समिति से सत्यवान पुंडीर तथा तकनीकी सहयोगी गुंजन से विजय कुमार द्वारा जारी संयुक्त बयान में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तथा राज्यपाल के नेतृत्व में प्राथमिकता देने व चिट्टा मुक्त हिमाचल के प्रयासों का स्वागत करते हुए सराहना की। साथ ही सोशल मिडिया पर विभिन्न संस्थाओं एवं व्यक्तियों द्वारा हस्तक्षेपों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ सरकार और विभिन्न संस्थाएं अलग-अगल तरीकों से अभियान चला रही है यह एक सकारात्मक संकेत तो हैं लेकिन अभियान चलाने वालों में न तो समन्वय दिखाई देता है और न ही मुद्दे के प्रति स्पष्ट समझ। बहुत सी संस्थाएं नशा करने वालों और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की कवायद और पकड़वाने पर इनाम घोषित करती नज़र आती हैं जो बिल्कुल भी उचित और मान्य नहीं है।
HFADA फोरम ऐसी किसी भी समझ का समर्थन नहीं करता बल्कि जो परिवार नशे में फंस चुके अपने बच्चों को इससे बाहर निकालना चाहते हैं और इलाज के लिए आगे आ रहे हैं वे हतोत्साहित होंगे। सामाजिक बहिष्कार के भय से कोई भी परिवार इलाज के लिए सामने नहीं आएगा। फोरम ने आशंका ज़ाहिर की है कि इनाम की राशि तय करना या संलिप्तों का बहिष्कार करना कहीं केवल लोकप्रियता पाने के औज़ार के तौर पर तो इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
HFADA के अध्यक्ष दीपक सानन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निसंदेह समाज में व्याप्त नशे का संकट बहुत गहरा है और इस पर समाज की चिंता वाजिब है लेकिन वैज्ञानिक समझ के बिना इस पर काम करना इस पूरी मुहिम को पीछे धकेल सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि हमारा तंत्र, हमारी पूरी व्यवस्था, हमारा सामाजिक ढांचा क्या इतना कमज़ोर है कि हमें अपने ही गांव, पंचायत एवं आसपास मालूम नहीं कि कौन नशे के धंधे तथा व्यापार में संलिप्त है। लोगों को सामूहिक रूप से इस बुराई के खिलाफ सामने आना होगा तभी इस पर रोक लग सकेगी।
सप्लाई कहां से व कैसे आ रही है और कैसे दूर-दराज़ के गांव तक कैसे पहुंच रहा है। यह भी एक बड़ा सवाल है।
HFADA ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल से अपील की है कि तुरन्त नशा निवारण बोर्ड की बैठक आयोजित करके इस मुद्दे पर एकीकृत रणनीति बनाई जाए और न्यूनतम मापदण्ड तय किए जाएं ताकि नशे के खिलाफ अभियान को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।