15/02/2026
🙏
जब भगवान शिव अपने गले में सर्प धारण कर सकते हैं,
नंदी को अपना प्रिय बना सकते हैं,
हर प्राणी को समान दृष्टि से देख सकते हैं…
तो हम इंसान होकर क्यों दिल छोटा कर लेते हैं?
जिस ईश्वर ने हमें करुणा का हृदय दिया,
उसी ने उन बेजुबानों को मासूम आँखें दीं —
जो बोल नहीं पाते,
पर हर दर्द चुपचाप सह जाते हैं।
सोचिए…
जब कोई प्यासा कुत्ता सड़क किनारे बैठा होता है,
जब कोई घायल पक्षी तड़प रहा होता है,
जब कोई गाय भूखी खड़ी होती है —
तो क्या उनकी पीड़ा ईश्वर तक नहीं पहुँचती होगी?
शायद भगवान हमसे ही उम्मीद करते हैं…
कि हम उनके हाथ बनें,
उनकी दया बनें,
उनकी करुणा बनें।
आइए, आज वादा करें —
हम पत्थर दिल नहीं, इंसान बनेंगे।
हम नफरत नहीं, प्रेम चुनेंगे।
हम क्रूरता नहीं, करुणा फैलाएँगे।
क्योंकि
पशुओं से प्रेम करना केवल दया नहीं,
यह हमारी इंसानियत की पहचान है। 🐾❤️