31/07/2025
ठाकुर चुप है क्योंकि उसे चुप रहना सिखा दिया गया है पहले कलम से मारा गया फिर नीति से फिर विचारधारा से और अब रोज़ ताने सुनकर भी वह उसी सोच में घुला है कि जवाब देना हमें शोभा नहीं देता पर सच तो ये है कि जबाब ना देना ही अब सबसे बड़ा अपमान है खुद का
कभी क्षत्रिय का मतलब था जो शत्रु को देखकर क्रोध से नहीं पर धर्म से तलवार उठाए पर अब वही क्षत्रिय बौद्धिक चक्करों में ऐसा फँसा है कि गाली सुनकर कानून की किताब खोलता है जबकि बाकी जातियाँ अपमान पर एकजुट होकर सड़क पर उतरती हैं
बिहार से शुरू हुआ यह मानसिक षड्यंत्र जहाँ लाल सलाम की आड़ में ठाकुर शब्द को गाली बना दिया गया मंचों पर ठाकुर का पात्र वही होता था जो पिटता था जिसे जनता ताली बजा कर देखती थी उसे शोषक दिखाया गया ग़लत को ग़लत कहने वाला ठाकुर अब नाटक में विलेन और असल ज़िंदगी में निशाना बना दिया गया
कांग्रेस शासन में जब रियासतें छिनी जब जमींदारी ख़त्म की गई तो लक्ष्य सिर्फ़ आर्थिक संपत्ति नहीं था लक्ष्य था ठाकुर के भीतर के आत्मविश्वास को तोड़ देना इतिहास की किताब में उसे सिर्फ़ अत्याचारी दिखाना और बाकी समाज के ज़ेहन में बिठा देना कि ठाकुर मतलब ग़लत
फिर मीडिया आई फिर वेबसीरीज़ आई फिर लेखक आए और सबने वही रटा रटाया एजेंडा दोहराया ठाकुर मतलब सामंती ठाकुर मतलब जातिवादी ठाकुर मतलब अपराधी और जो चुप रहा वही ठाकुर
जो यादव समाज पर बोले तो आरक्षण की धमकी
जो दलित पर बोले तो संविधान खतरे में
जो पंडित पर बोले तो धर्म संकट में
पर ठाकुर पर कोई भी बोले कोई भी गाली दे कोई भी ठोक दे तो बस यही सुनने को मिलता है समाज सहिष्णु बना रहे यही अपेक्षा है
ग़ैर जातियों द्वारा गाली दी जाए तो समाज में आक्रोश फिर भी आंशिक
पर जब ब्राह्मण ही मंच से कहे कि ठाकुरों ने देश को बर्बाद किया तो उस वक्त ठाकुरों का मौन सिर्फ़ दुर्बलता नहीं मानसिक दासता है
अब क्षत्रिय समाज को निर्णय लेना है या तो इस चुप्पी को परंपरा मानकर अपनी अगली पीढ़ी को भी इसी मौन की विरासत दो या फिर वहीं से लड़ाई शुरू करो जहाँ से तुम्हारा चरित्र तोड़ा गया था
जिसने गाली दी उसे जवाब दो और वैसा ही जवाब दो जैसा बाक़ी समाज अपने सम्मान के लिए देता है
ग़ैर राजनीतिक व्यक्ति हो या प्रशासनिक पदाधिकारी कोई भी हो अगर सार्वजनिक रूप से ठाकुर शब्द का अपमान करता है तो उसे सड़क पर दौड़ाना ग़लत नहीं न्याय है
अगर OBC द्वारा दी गई गाली पर तुम FIR करते हो
तो ब्राह्मण द्वारा बोले गए अपमान पर भी उतना ही प्रहार करो
न्याय अगर समान नहीं होगा तो तुम्हारे मौन से बड़ा अपराध कुछ नहीं
यह समाज तब तक मज़ाक बना रहेगा जब तक हर अपमान का जवाब अपने तरीके से नहीं दिया जाएगा
अब वक़्त आ गया है कि ठाकुर शब्द फिर से डर का प्रतीक बने
न्याय के लिए नहीं बदले के लिए नहीं सिर्फ़ इसलिए कि जब तक भय नहीं होगा तब तक प्रीत नहीं आएगी
और इस बार किसी को बख्शा नहीं जाना चाहिए
जो अपमान करेगा वह भुगतेगा
बोलने की आज़ादी सबको है
पर ठाकुर के जवाब की आज़ादी अब किसी से कम नहीं होनी चाहिए
अब क्षत्रिय को चुप रहना नहीं है
अब उसे वो करना है जिसकी आदत बाक़ी सबको हो गई है और ठाकुर को भूल गई है
अपमान की भाषा सबको समझ में आती है
अब समय है कि क्षत्रिय भी वही भाषा बोले जिसे सब समझें