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औषधि आयुक्त मैडम कभी आप रिटेल मेडिकल स्टोरों पर भी फार्मासिस्ट का फिजिकल वेरिफिकेशन कर लो सच्चाई का पता चल जाएगा.....
13/06/2026

औषधि आयुक्त मैडम कभी आप रिटेल मेडिकल स्टोरों पर भी फार्मासिस्ट का फिजिकल वेरिफिकेशन कर लो
सच्चाई का पता चल जाएगा.....

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा की ओर मजबूत कदम: हर जिले में बढ़ेंगे  ड्रग इंस्पेक्टरों के स्वीकृत पद(औषधि नियंत्रण अध...
30/05/2026

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा की ओर मजबूत कदम: हर जिले में बढ़ेंगे ड्रग इंस्पेक्टरों के स्वीकृत पद
(औषधि नियंत्रण अधिकारी (DCO) पद)

​उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नकली दवाओं के कारोबार पर लगाम लगाने और फार्मास्युटिकल सेक्टर को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। शासन द्वारा जारी नए शासनादेश के अनुसार, अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में ड्रग इंस्पेक्टर (औषधि निरीक्षक DI) और औषधि नियंत्रण अधिकारी (DCO) के स्वीकृत पदों की संख्या को बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई है।

​इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य राज्य की विशाल आबादी को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं व दवाइयां उपलब्ध कराना है।

​पदों में वृद्धि की आवश्यकता क्यों पड़ी?
​वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जनसंख्या और मेडिकल स्टोर्स (औषधि प्रतिष्ठानों) की संख्या के अनुपात में ड्रग इंस्पेक्टरों की भारी कमी महसूस की जा रही थी।

​कार्यभार का दबाव: एक ही ड्रग इंस्पेक्टर के पास अक्सर एक से अधिक जिलों का प्रभार होता था, या फिर एक बड़े जिले में हजारों मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और दवा निर्माण इकाइयों (मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) की निगरानी का जिम्मा अकेले होता था।
​निरीक्षण में चुनौतियां: पदों की कमी के कारण नियमित रूप से मेडिकल स्टोर्स की जांच, दवाओं के सैंपल लेने और अवैध रूप से चल रही क्लीनिकों या बिना लाइसेंस की दुकानों पर त्वरित कार्रवाई करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही थीं।

​जनसंख्या और मेडिकल हब का विस्तार: पिछले कुछ वर्षों में यूपी के छोटे-बड़े शहरों में फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेंटर्स का दायरा बहुत तेजी से बढ़ा है, जिसके नियमन के लिए अतिरिक्त कार्यबल की सख्त जरूरत थी।

​नए शासनादेश की मुख्य बातें
​शासनादेश के अनुसार, जिलों की श्रेणी (आबादी और वहां संचालित दवा दुकानों की संख्या) के आधार पर पदों का पुनर्गठन और सृजन किया जा रहा है:
​बड़े जिलों में विशेष ध्यान: लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, और मेरठ जैसे बड़े व्यापारिक और अधिक आबादी वाले जिलों में ड्रग इंस्पेक्टरों की संख्या पहले के मुकाबले दोगुनी या तीन गुनी तक करने का प्रावधान है।
​हर जिले को मिलेगा स्वतंत्र बल: छोटे जिलों में भी, जहां पहले अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ता था, अब स्थायी रूप से समर्पित ड्रग इंस्पेक्टर तैनात किए जाएंगे।

​निरीक्षण में तेजी: पदों की संख्या बढ़ने से अब नियमित रूप से दवाओं की दुकानों, अस्पतालों के फार्मेसी विभागों और ब्लड बैंकों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) सुचारू रूप से हो सकेगा।
​इस फैसले का फार्मा सेक्टर और जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

​यह कदम उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे और फार्मासिस्ट समुदाय दोनों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है:
​नकली दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध: पर्याप्त संख्या में अधिकारी होने से प्रतिबंधित, मिलावटी और बिना मानक वाली दवाओं की बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी।
​पारदर्शिता और त्वरित लाइसेंसिंग: नए मेडिकल स्टोर खोलने या मौजूदा लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया में तेजी आएगी, क्योंकि फाइलों के निस्तारण के लिए अब पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

​रोजगार के नए अवसर: स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ने से राज्य लोक सेवा आयोग (UPPSC) या संबंधित भर्ती बोर्ड के माध्यम से युवाओं और योग्य फार्मासिस्टों के लिए सरकारी सेवा में आने के नए और सुनहरे अवसर पैदा होंगे।

​ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर निगरानी: जिला मुख्यालयों के साथ-साथ अब तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे मेडिकल स्टोर्स तक भी प्रशासन की पहुंच आसान होगी, जिससे सुदूर इलाकों में भी गुणवत्तापूर्ण दवाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी।

​निष्कर्ष
​उत्तर प्रदेश सरकार का यह शासनादेश राज्य के दवा प्रशासन को एक नई दिशा देने वाला है। ड्रग इंस्पेक्टरों के पदों में इस वृद्धि से न केवल फार्मा सेक्टर में अनुशासन और पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम नागरिक का भी स्वास्थ्य प्रणाली और जीवन रक्षक दवाओं पर भरोसा और मजबूत होगा। सुरक्षित उत्तर प्रदेश और स्वस्थ उत्तर प्रदेश की दिशा में यह एक अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी कदम है।

28/05/2026

Lokchetna Pravahika

26/05/2026
24/05/2026

दवा बाजार में सनसनी: ज्योति ड्रग हाउस के अवैध गोदाम पर छापा, भारी मात्रा में ‘नॉट फॉर सेल’ फिजिशियन सैंपल बरामद
आगरा।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की लखनऊ मुख्यालय द्वारा गठित विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर आगरा के फाउन्टेन इलाके में एक बहुत बड़े दवा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। झुलेलाल मार्केट स्थित ‘मेसर्स ज्योति ड्रग हाउस’ के एक बिना लाइसेंस वाले अवैध गोदाम पर छापेमारी कर टीम ने भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयों के फिजिशियन सैंपल (Physician Sample, Not for Sale) बरामद किए हैं।
इस मामले में औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) नवनीत कुमार की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने फर्म के मालिक नारायण दास हँसराजनी और उसके कर्मचारी किशोर मेहता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मुखबिर की सूचना पर जाल बिछाकर हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगरा के ड्रग इंस्पेक्टर नवनीत कुमार को एक मुखबिर से गोपनीय सूचना मिली थी कि ज्योति ड्रग हाउस का संचालक अपने कर्मचारी के माध्यम से तीसरी मंजिल पर बने एक गुप्त गोदाम में अवैध रूप से भारी मात्रा में फिजिशियन सैंपल जमा करके रखता है। इन सैंपल्स को कथित तौर पर ग्रामीण इलाकों के झोलाछाप डॉक्टरों को महंगे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मुख्यालय, लखनऊ द्वारा एक संयुक्त जांच दल का गठन किया गया। इस टीम में आगरा, मेरठ, अलीगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, रामपुर और बाराबंकी सहित कई जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया था。
मकान मालिक की सहमति से तोड़ा गया ताला
जब संयुक्त टीम प्रथम तल पर स्थित ‘मेसर्स ज्योति ड्रग हाउस’ की दुकान पर पहुंची तो वह बंद मिली। इसके बाद टीम ने बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर स्थित गोदाम का रुख किया, जहाँ ताला लटका हुआ था। ड्रग विभाग की टीम ने जब संचालक नारायण दास से फोन पर संपर्क किया, तो उसने आधे घंटे में आने की बात कही, लेकिन वह फोन बंद करके फरार हो गया।
इसके बाद टीम ने परिसर के बुजुर्ग मालिकों (करीब 70 वर्षीय दंपत्ति) से पूछताछ की। मकान मालिक ने बताया कि उन्होंने यह जगह ज्योति ड्रग हाउस के कर्मचारी किशोर मेहता को किराए पर दी है। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करते हुए टीम को ताला तोड़ने की लिखित सहमति दी

अजीब परिस्थितियों में रखी थीं दवाइयां, नकली होने की भी आशंका
स्थानीय पुलिस और ए.सी.पी. कोतवाली की मौजूदगी में जब गोदाम का ताला खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए। गोदाम के भीतर अत्यधिक तापमान और बेहद अनहाइजीनिक (अस्वच्छ) परिस्थितियों में दवाइयाँ ठूंस-ठूंस कर भरी गई थीं। ड्रग इंस्पेक्टरों के अनुसार, इतनी खराब स्थिति में रखे होने के कारण दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने और उनके खराब होने की पूरी संभावना थी, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी।
जांच टीम ने संदेह जताया है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में नामी कंपनियों के रैपर का इस्तेमाल कर नकली दवाइयां खपाने का खेल भी चल रहा था।

30 बोरों में सील की गईं दवाइयां, 10 संदिग्ध सैंपल लैब भेजे
दवाइयों की मात्रा इतनी अधिक थी कि पहले दिन रात 12 बजे तक चली कार्रवाई के बाद गोदाम को पुलिस की सुरक्षा में छोड़ना पड़ा। अगले दिन सुबह दोबारा शुरू हुई कार्रवाई में टीम ने कुल 256 प्रकार की दवाओं को जब्त किया, जिन्हें 68 कार्टन में भरकर कुल 30 प्लास्टिक के बोरों में सुरक्षित (सील) किया गया। संदिग्ध दवाओं में से 10 अलग-अलग प्रकार की दवाओं के नमूने (सैंपल्स) लेकर जांच के लिए सरकारी लैब भेजे जा रहे हैं।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
कोतवाली पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर नवनीत कुमार की शिकायत पर आरोपी नारायण दास हँसराजनी और किशोर मेहता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 319, 276, 277 और 278 के तहत मामला दर्ज किया है। ड्रग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लैब से रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अलग से भी परिवाद (केस) दाखिल किया जाएगा।

21/05/2026

प्रधानमंत्री जी कभी झारमुरी कभी मेलोडी टॉफी ,
अब कभी सरकारी अस्पताल में जाकर दवा भी ले
तब पता चले कि फार्मासिस्ट का पद खाली पड़ा है

19/05/2026

🚨🚨 जनहित में आवश्यक चेतावनी 🚨🚨

🔴 कुछ दवा संगठन एवं तथाकथित फार्मेसी बंद समर्थक
💊 मेडिकल स्टोरों पर दबाव बनाकर
🚫 दवाओं की आपूर्ति बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।

⚖️ जबकि शासन एवं औषधि प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि —

✅ दवा व्यवसाय आवश्यक सेवा है
✅ सभी मेडिकल स्टोर नियमित रूप से खुले रहेंगे
✅ मरीजों को दवा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है
✅ दवा आपूर्ति बाधित करना जनहित के विरुद्ध है

📢 किसी भी प्रकार की जबरन बंदी, दबाव, डराने-धमकाने अथवा दवा सप्लाई रोकने का प्रयास कानूनन दंडनीय हो सकता है।

🙏 समस्त फार्मासिस्ट दवा विक्रेताओं से अपील है कि
अपने प्रतिष्ठान पूर्व की भांति संचालित रखें तथा मरीजों की सेवा जारी रखें।

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🟢 डॉ अरविंद कुमार गौतम
(संपादक )
दैनिक लोकचेतना प्रवाहिका समाचार पत्र

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