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Society For Environment Education And Development Society is an NGOs working in the field of forest conservation and management and education in rural India, provides skill development training and livelihood training to nearby forest & rural communities.

प्रकृति का उपहार: मध्य प्रदेश में लघु वनोपज और जनजातीय आजीविका 🌿🍯मध्य प्रदेश, जिसे "भारत का हृदय" कहा जाता है, न केवल अप...
18/03/2026

प्रकृति का उपहार: मध्य प्रदेश में लघु वनोपज और जनजातीय आजीविका 🌿🍯
मध्य प्रदेश, जिसे "भारत का हृदय" कहा जाता है, न केवल अपनी भौगोलिक स्थिति के लिए बल्कि अपने विशाल वन क्षेत्र और जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है। हमारे राज्य के जंगलों में केवल लकड़ी (Timber) ही नहीं, बल्कि लघु वनोपज (Non-Timber Forest Products - NTFP) का एक अनमोल खजाना छुपा है, जो लाखों ग्रामीण और जनजातीय परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है।

NTFP क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
लघु वनोपज में वे सभी जैविक उत्पाद शामिल हैं जो जंगलों से प्राप्त होते हैं, लेकिन लकड़ी नहीं होते। इसमें फल, बीज, फूल, जड़ी-बूटियाँ, शहद, गोंद और पत्तियां शामिल हैं।
* आर्थिक सुरक्षा: मध्य प्रदेश के लगभग 20 लाख से अधिक संग्राहक अपनी आय के लिए इन उत्पादों पर निर्भर हैं।
* महिला सशक्तिकरण: वनोपज संग्रहण और प्राथमिक प्रसंस्करण (Processing) में 70% से अधिक भागीदारी महिलाओं की होती है।
मध्य प्रदेश के मुख्य लघु वनोपज और उनका योगदान
| उत्पाद | संग्रहण का समय | उपयोग और महत्व |

| तेंदू पत्ता | अप्रैल - जून | इसे 'हरा सोना' कहा जाता है; बीड़ी उद्योग का आधार। |
| महुआ (फूल और बीज) | मार्च - मई | खाद्य पदार्थ, तेल और पारंपरिक पेय के रूप में उपयोग। |
| चिरौंजी | अप्रैल - जून | ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयों में उच्च मांग। |
| मुलहठी और जड़ी-बूटियाँ | वर्षभर | आयुर्वेद और फार्मास्युटिकल उद्योगों का आधार। |
| शहद और गोंद | नवंबर - जून | शुद्ध प्राकृतिक मिठास और औद्योगिक उपयोग (जैसे कुल्लू गोंद)।

चुनौतियां और अवसर: एक नई राह 🚀
जंगलों से उत्पाद चुनना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक विज्ञान है। लेकिन आज इस क्षेत्र को कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
* बिचौलियों की भूमिका: संग्रहणकर्ताओं को अक्सर सही बाजार मूल्य नहीं मिल पाता।
* मूल्य संवर्धन (Value Addition) की कमी: कच्चे माल को सीधे बेचने के बजाय यदि गांव के स्तर पर ही प्रसंस्करण (जैसे महुआ का लड्डू या शहद की पैकिंग) हो, तो आय 2-3 गुना बढ़ सकती है।
* जलवायु परिवर्तन: बदलता मौसम फूलों और फलों के चक्र को प्रभावित कर रहा है।

SEED और हमारा संकल्प 🌱
सोसाइटी फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन एंड डेवलपमेंट (SEED) का मानना है कि वनों का संरक्षण तभी संभव है जब वनों पर निर्भर समुदाय समृद्ध हों। हम निम्नलिखित दिशाओं में कार्य कर रहे हैं:
* सतत संग्रहण (Sustainable Harvesting): वैज्ञानिक तरीकों से संग्रहण ताकि जंगल का विनाश न हो।
* बाजार संपर्क: वन धन केंद्रों के माध्यम से संग्राहकों को सीधे बाजार से जोड़ना।
* प्रशिक्षण: स्थानीय समुदायों को ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण देना।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश के घने जंगलों की हर पत्ती और हर बीज में समृद्धि की कहानी छिपी है। आइये, हम सब मिलकर इन प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करें और वन-वासियों की मेहनत को सही पहचान दिलाएं।
"जंगल बचेगा, तो जीवन बचेगा; और जब समुदाय समृद्ध होगा, तभी जंगल बचेगा।"

छत्तीसगढ़ के वनों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ और समाधान पर आधारित यह विस्तृत रिपोर्ट संस्था "Society for Environment Ed...
27/02/2026

छत्तीसगढ़ के वनों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ और समाधान पर आधारित यह विस्तृत रिपोर्ट संस्था "Society for Environment Education and Development - SEED." के द्वारा तैयार की गई है।
वर्तमान में तो छत्तीसगढ़ के जंगलों की दशा ठीक हैं। मगर विनाश की प्रक्रिया चालू हो चुकी हैं। जिस पर तुरंत काम करने की आवश्यकता हैं ।

1. छत्तीसगढ़ में वनों की वर्तमान स्थिति (Current Forest Position 2025-26)
हालिया भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2023) और 2026 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ वन प्रबंधन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है।
* कुल वन क्षेत्र: राज्य का कुल वन क्षेत्र लगभग 55,811.75 वर्ग किमी है।
* भौगोलिक प्रतिशत: यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 41.21% है।
* वन वृद्धि में प्रथम: छत्तीसगढ़ संयुक्त वन और वृक्ष आवरण वृद्धि (Combined Forest and Tree Cover Growth) में देश में प्रथम स्थान पर रहा है, जिसमें 684 वर्ग किमी की कुल वृद्धि दर्ज की गई है।
* वनों का वर्गीकरण:
* आरक्षित वन (Reserved Forest): 43.13%
* संरक्षित वन (Protected Forest): 40.21%
* अवर्गीकृत वन (Unclassed Forest): 16.65%
* प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ: साल (Sal) और सागौन (Teak) यहाँ के प्रमुख वृक्ष हैं। राज्य को "सालगोदाम" भी कहा जाता है।

2. प्रमुख चुनौतियाँ (Key Challenges)
वनों को विनाश की ओर ले जाने वाली प्रक्रिया मध्य प्रदेश में भी चालू हो चुकी हैं। जिस पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता हैं। वनों के विस्तार के बावजूद, राज्य को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है ।
* अवैध कटाई और अतिक्रमण: वन भूमि पर कृषि और आवास के लिए अवैध कब्जा एक बड़ी समस्या है। पट्टे और कृषि भूमि के लिए ग्रामीण लगातार वनों को काटकर उस पर कब्जा कर रहे हैं। सुनने में आ रहा हैं। कि भूमि माफिया भी इस पर सक्रिय हो गया हैं। इसे तुरंत रोकने की आवश्यकता हैं । नहीं तो परिणाम गंभीर होने वाले हैं।
* वनाग्नि (Forest Fires): मार्च से जून के बीच छत्तीसगढ़ के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। 2026 के शुरुआती आंकड़ों में भी आग की चेतावनी (Fire Alerts) में वृद्धि देखी गई है।
* खनन गतिविधियाँ (Mining): कोयला और लौह अयस्क के खनन के कारण बड़े पैमाने पर वन कटाई और जैव विविधता का नुकसान हो रहा है (जैसे हसदेव अरण्य क्षेत्र)। इसके अलावा भी बहुत से ऐसी परियोजनाएं हैं। जिसका वन क्षेत्र पर विपरीत असर पड़ रहा हैं।
* मानव-वन्य प्राणी संघर्ष: जंगलों के विखंडन (Fragmentation) के कारण बाघ, जंगली हाथी और अन्य वन्य प्राणी बस्तियों में घुस रहे हैं । जिससे जान-माल की हानि हो रही है। इसके खिलाफ प्रतिक्रिया भी हो रही हैं। जिससे मानव और वन्य प्राणी में सीधे टकराव हो रहा हैं ।
* जलवायु परिवर्तन: वर्षा चक्र में बदलाव के कारण कुछ संवेदनशील प्रजातियों के पुनरुद्धार (Regeneration) में कमी आ रही है।

3. समाधान और भावी रणनीतियाँ (Solutions & Way Forward)
पर्यावरण संरक्षण और विकास के दृष्टिकोण से निम्नलिखित समाधान प्रभावी हो सकते हैं:
* सामुदायिक भागीदारी (CFR): सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों (CFR) को मजबूत करना ताकि स्थानीय आदिवासी समुदाय वनों के संरक्षक बनें। वन समितियों को मजबूत करना होगा । उनकी ट्रेनिंग लगातार करना होगा । उन्हें पूरी तरह वनों की रक्षा में समर्थ बनाना होगा।
* नवाचारी परियोजनाएं: * हॉर्नबिल रेस्टोरेंट: दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए फलदार वृक्षों का रोपण। लघु वनोपज आधारित फलदार वृक्षों का रोपण को बढ़ावा देना होगा। क्योंकि छत्तीसगढ़ में वनों के पास रहने वाले आदिवासी समाज की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं। इनसे उन्हें लाभ होगा । हर वृक्षारोपण का हर साल का प्रत्यक्ष लाभ चार्ट में निकलकर रखा जावे । जिससे वृक्षारोपण औचित्य सिद्ध हो सके।
* मधुमक्खी कॉरिडोर (Bee Corridor): परागण और जैव विविधता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे विशेष वृक्षारोपण करना होगा । इसके अलावा लघु वनोपज आधारित सफल एंटरप्राइज निर्माण करने होंगे। कुल मिलाकर वनों के पास रहने वाले आदिवासी समाज को सीधे रोजगार प्रदान करने का योजन करना होगा। जिससे वे वनों के संरक्षण के प्रति गंभीर हो सकेंगे।
* तकनीकी उपयोग: वन अपराधों और आग पर नियंत्रण के लिए GIS मैपिंग, ड्रोन निगरानी और उपग्रह आधारित अलर्ट सिस्टम का विस्तार करना होगा। जिससे टेक्नोलॉजी के उपयोग से वनों को बचाया जा सके। जो कि अभी बहुत कम हैं।
* पारिस्थितिक पर्यटन (Eco-Tourism): पर्यटन को संरक्षण से जोड़ना ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और वे वनों को काटने के बजाय बचाने के लिए प्रेरित हों। टूरिज्म और इको टूरिज्म में स्थानीय लोगों को लाभ देना होगा । होम स्टे जैसे नए विचारों पर तेजी से काम करना होगा ।
* वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors): हाथियों और अन्य जानवरों के सुरक्षित आवागमन के लिए गलियारों को पुनर्स्थापित करना होगा ।

4. बजट और सरकारी पहल (Government Initiatives 2026)
राज्य सरकार ने बजट 2026-27 (संकल्प) में पर्यावरण के लिए विशेष प्रावधान किए हैं:
* वन विभाग में 1,000 नए पदों की भर्ती की जावे ताकि सुरक्षा तंत्र मजबूत हो सकेगा।
* अभयारण्यों और ईको-टूरिज्म के विकास के लिए भारी निवेश करने की आवश्यकता हैं ।
* कृष्ण कुंज योजना जैसी पहलों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा । जो कि अभी बहुत धीमी रफ्तार में हैं।
> महत्वपूर्ण तथ्य: छत्तीसगढ़ देश का तीसरा सबसे बड़ा वन क्षेत्र वाला राज्य है (मध्य प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के बाद)। अगर हम यहां के जंगलों को साध गए । तो हम बेहतर कल की नींव रखेंगे। क्योंकि जंगल हैं तो कल हैं।

महाराष्ट्र के वनों का संरक्षण न केवल राज्य की जैव विविधता के लिए, बल्कि जलवायु स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। म...
18/02/2026

महाराष्ट्र के वनों का संरक्षण न केवल राज्य की जैव विविधता के लिए, बल्कि जलवायु स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र भारत का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपनी राज्य वन्यजीव कार्य योजना (2021-2030) तैयार की है।

महाराष्ट्र में वन संरक्षण: चुनौतियाँ और समाधान

महाराष्ट्र का वन क्षेत्र पश्चिमी घाट (Western Ghats) की समृद्ध जैव विविधता से लेकर विदर्भ के शुष्क पर्णपाती वनों तक फैला हुआ है । हालांकि, तेजी से होते शहरीकरण और औद्योगिक विकास ने इन वनों के सामने कई गंभीर संकट खड़े कर दिए हैं।
1. प्रमुख चुनौतियाँ (Major Challenges)
शहरीकरण और बुनियादी ढांचा विकास:
मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों के विस्तार के कारण वन भूमि का गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग बढ़ा है। हाल के वर्षों में 'आरे' (Aarey) और मैंग्रोव क्षेत्रों में निर्माण कार्यों ने पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित किया है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict):
आवासों के विखंडन (Fragmentation) के कारण तेंदुए और बाघ अक्सर रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) और चंद्रपुर जैसे क्षेत्रों में यह समस्या सबसे अधिक है।

तथ्य: मुंबई के SGNP क्षेत्र में तेंदुओं का घनत्व दुनिया में सबसे अधिक (लगभग 26 तेंदुए प्रति 100 वर्ग किमी) है।

वन अतिक्रमण (Encroachment):
खेती और बस्तियों के लिए वन भूमि पर अवैध कब्जा एक बड़ी समस्या है। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में वन भूमि के अधिकारों और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।

जलवायु परिवर्तन और वनाग्नि (Forest Fires): बढ़ते तापमान के कारण गर्मियों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे कीमती वनस्पति और छोटे जीव नष्ट हो जाते हैं।
* मैंग्रोव का विनाश: तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव वन चक्रवात और समुद्री कटाव से सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन अवैध झींगा पालन और कचरा डंपिंग के कारण ये तेजी से खत्म हो रहे हैं।

2. प्रभावी समाधान और सरकारी पहल (Solutions & Initiatives)

राज्य वन्यजीव कार्य योजना (2021-2030):
महाराष्ट्र ने अगले दशक के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई है जो तटीय, समुद्री और अंतर्देशीय जल प्रणालियों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करती है।

सामुदायिक भागीदारी (Community Participation): गढ़चिरौली के मेंढा लेखा (Mendha Lekha) गाँव का मॉडल एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ स्थानीय समुदायों ने 1,800 हेक्टेयर वन क्षेत्र का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।

तकनीक का उपयोग: वनाग्नि की निगरानी के लिए सैटेलाइट डेटा और अवैध कटाई रोकने के लिए 'ई-सर्विलांस' और ड्रोन का उपयोग बढ़ाया जा रहा हैं ।

वन गलियारों (Wildlife Corridors) का संरक्षण: बाघों और अन्य बड़े जानवरों की आवाजाही के लिए सुरक्षित गलियारे बनाना अनिवार्य है ताकि वे मानव बस्तियों में प्रवेश किए बिना एक जंगल से दूसरे जंगल जा सकें।

पुनर्वनीकरण (Afforestation): 'ग्रीन इंडिया मिशन' के तहत पालघर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। साथ ही, स्थानीय प्रजातियों के 'सीड बैंक' (Seed Banks) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

महाराष्ट्र के वनों का भविष्य 'विकास बनाम पर्यावरण' के बीच संतुलन पर निर्भर करता है। जब तक स्थानीय समुदायों को संरक्षण का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा और तकनीकी निगरानी सख्त नहीं होगी, तब तक इन चुनौतियों का सामना करना कठिन होगा। महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई 'बांस मिशन' (Bamboo Mission) योजना न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय रोजगार के लिए भी एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। मगर यह काफी नहीं होगा। सभी मोर्चों पर तेजी से काम करना होगा। और विकाश का ऐसा मॉडल खड़ा करना होगा। जिसमें वन और वन्य जीव का व्यापक चिंतन हो ।

01/02/2026

मध्य प्रदेश (MP) में वनों की कटाई एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि यह राज्य भारत के सबसे बड़े वन क्षेत्र का घर है। SEED (Society for Environment Education and Development) जैसी संस्थाएं इस दिशा में न केवल जागरूकता फैला रही हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान भी लागू कर रही हैं।

नीचे इस विषय पर विस्तृत शोध और SEED के कार्यों का विवरण दिया गया है:

1. मध्य प्रदेश में वनों की कटाई:
वर्तमान स्थिति (2024-2026)
हालिया आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश ने पिछले दशक में विकास परियोजनाओं के नाम पर देश में सबसे अधिक वनों की कटाई (लगभग 38,000+ हेक्टेयर) दर्ज की है।

* मुख्य हॉटस्पॉट:
सिंगरौली, शहडोल, पन्ना और खंडवा जिलों में विकास और खनन के कारण वन क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट देखी गई है।

* नकारात्मक रुझान:
जहाँ भारत के कई राज्यों में हरियाली बढ़ी है, वहीं MP उन चुनिंदा राज्यों में से है जहाँ वनों का घनत्व कम हुआ है।

वनों की कटाई के प्रमुख कारण:

* बुनियादी ढांचा परियोजनाएं:
बांध निर्माण (जैसे केन-बेतवा लिंक), सड़क विस्तार और ट्रांसमिशन लाइनें।

* अवैध अतिक्रमण:
खेती और आवास के लिए वन भूमि पर कब्जा।

* ऊर्जा की आवश्यकता:
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खाना पकाने के लिए लकड़ी (Fuelwood) पर अत्यधिक निर्भरता। आपको आश्चर्य होगा कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कई ऐसी जगह हैं। जहां सागौन तक को जलाया जा रहा हैं।

* जलवायु परिवर्तन और आग:
बढ़ती गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे प्राकृतिक पुनर्जनन (natural regeneration) रुक गया है।

2. समाधान:
वनों को बचाने की रणनीतियां
वनों की रक्षा के लिए "सुरक्षा और विकास" का संतुलन आवश्यक है:

* स्मार्ट वनीकरण (Afforestation):
केवल पेड़ लगाना काफी नहीं है, बल्कि स्थानीय प्रजातियों (जैसे महुआ, पलाश, नीम, हर्रा, बहेड़ा, आंवला, भीलमा, जामुन, आम, जाम) को लगाना जरूरी है जो पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल हों। इसके अलावा जड़ी बूटी के उत्पादन को भी बढ़ाने की आवश्यकता हैं। क्योंकि इन्हें जंगल में ही सही तरीके से उत्पादित किया जा सकता हैं।

* तकनीकी निगरानी:
ड्रोन और AI-आधारित सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से अवैध कटाई की रीयल-टाइम निगरानी करनी होगी। तब ही हम जंगल को बचा पाएंगे।

* सतत वैकल्पिक आजीविका:
वन-निर्भर समुदायों को वनों से रोजगार उपलब्ध करवाने होंगे । जैसे - औषधीय उद्योग, वन उत्पादों का प्रस्सकरण कर एंटरप्राइज डेवलपमेंट को बढ़ावा, शहद उत्पादन, मशरूम खेती और ईको-टूरिज्म जैसे विकल्पों से जोड़कर वनों के पास के समाज को रोजगार देना होगा । नहीं वन इसी तरह से कटते रहेंगे।

3. SEED (Society for Environment Education and Development) की भूमिका -
SEED एक प्रमुख संस्था है । जो शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण पर काम कर रही हैं ।
SEED की प्रमुख उपलब्धियां और कार्य (Achievements):
कार्य का विवरण और प्रभाव
पर्यावरण शिक्षा -
ग्रामीण और शहरी स्कूलों में 'ग्रीन एंबेसडर' कार्यक्रम के माध्यम से हजारों छात्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक कर रहे हैं ।

सामुदायिक नर्सरी -
स्थानीय महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) बनाकार उनकी मदद से 'बीज बैंक' और नर्सरी की स्थापना की जा रही हैं । जिससे स्थानीय पौधों का रोपण बढ़ रहा हैं।

जल और मृदा संरक्षण -
वन क्षेत्रों के किनारे छोटे तालाब और चेक-डैम ग्रामीणों की मदद से बनाकर मिट्टी की नमी को संरक्षित किया जा रहा हैं । जिससे जंगलों के विस्तार में मदद मिल रही हैं ।

वैकल्पिक ऊर्जा -
लोगों के आजीविका के लिए काम उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का काम किया जा रहा हैं। जिससे ग्रामीण गैस का खर्च वहन कर सके । जिससे ऊर्जा को लेकर जंगलों से लकड़ी काटने की दर को कम किया जा रहा हैं ।

नवाचार (Innovation) -

त्योहारों के समय 'बीज-गणेश' (मिट्टी की मूर्तियों में बीज मिलाकर) जैसी पहल संस्था के माध्यम से किया जा रहा हैं। ताकि विसर्जन के बाद वे पौधों के रूप में उग सकें। और वनों का विस्तार हो सके।

4. समाज के लिए संदेश और शिक्षा -
SEED के अनुसार, वनों की कटाई की समस्या केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी है।
इसलिए इसका समाधान भी समाज को तलाशना पड़ेगा। इसके लिए निम्न बिंदुओं में काम करना चाहिए।

एनवायरनमेंट शिक्षा: -
जब तक स्थानीय समुदाय वन के आर्थिक लाभ (जैसे कार्बन क्रेडिट या वनोपज) को नहीं समझेगा, तब तक संरक्षण मुश्किल है।

विकास:
SEED 'सतत विकास' (Sustainable Development) का समर्थन करता है, जहाँ जंगल काटकर नहीं, बल्कि जंगल के साथ मिलकर उद्योग लगाए जाएं। अगर आप संस्था के कामों से जुड़ना चाहते हैं। तो नीचे दिए कमेंट कर सकते हैं । या हम से
Email - [email protected]
Mobile - 094246 53303 में संपर्क कर सकते हैं।
आइए वनों को को बचाने के मिलकर साथ काम करते हैं । क्योंकि वन हैं तो कल हैं।

20/10/2025
🌾 Empowering Rural India, Building Sustainable Livelihoods 🌾At Self Employment Environment Education Society (SEEES), we...
18/08/2025

🌾 Empowering Rural India, Building Sustainable Livelihoods 🌾

At Self Employment Environment Education Society (SEEES), we believe that true development begins in villages. By creating sustainable livelihood opportunities, we empower rural communities to become self-reliant, skilled, and economically strong.

✅ Skill Development & Vocational Training
✅ Promotion of SHGs & Micro-Enterprises
✅ Eco-Tourism & Agroforestry Initiatives
✅ Forest-Based & Traditional Livelihoods

Our mission is to transform rural India by connecting communities with skills, markets, and opportunities—ensuring inclusive growth and sustainable development.

🌍 Together, let’s build a future where every rural family thrives with dignity and prosperity.

📩 Join hands with us in shaping a stronger Rural India.

01/08/2025

Hi everyone! 🌟 You can support me by sending Stars - they help me earn money to keep making content you love.

Whenever you see the Stars icon, you can send me Stars!

01/06/2025

🌱 Self Employment Exchange Education Society (SEEES)

📅 1st June 2025 | Empowering Rural Lives, Every Day

🚜 This June, we renew our mission to empower tribal and forest-dependent communities through sustainable livelihoods, eco-tourism, and skill development.

🎯 Our Focus Areas:
✅ Forest Produce-Based Livelihood (Mahua, Lac, Dona Pattal)
✅ Tribal Youth Skill Training
✅ SHG Strengthening
✅ Eco-Livelihood & Homestay Models
✅ Convergence with Forest, Panchayat & Tribal Departments

🌿 If you are a community leader, forest official, or NGO, collaborate with us to bring real change in:
📍 Mandla | Dindori | Balaghat | Chhindwara | Seoni & more!

🤝 Together, let’s make 2025-26 the year of employment, empowerment, and environment.

📧 Email: [email protected]
📲 Call/WhatsApp: +91 9424653303
🔗 Let’s connect to implement projects with purpose!

13/04/2025

Empowering Rural Communities | Building Sustainable Livelihoods
Self Employment Exchange Education Society (SEEES)

With 22+ years of experience, SEEES is committed to transforming lives in forest and rural areas of Madhya Pradesh through:

Skill Development & Vocational Training

Livelihood Promotion for Forest-Dependent Communities

Eco-Restoration & Agroforestry Initiatives

Women & Youth Empowerment through SHGs

Collaborations with Forest Department, FRI & NGOs

We believe in "Sustainability through Self-Reliance."
Join us in creating impact that lasts generations!

Partner | Volunteer | Support
Contact us at: [email protected]
WhatsApp - 094246 53303
Follow: .ngo



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Would you like a Hindi version or a campaign-specific post (like Mahua Laddu, Lac, CAMPA, etc.)?

24/02/2025

🌿 Transforming Lives Through Sustainable Development – Self Employment Environment Education Society (SEEES) 🌱

Self Employment Environment Education Society (SEEES) is dedicated to empowering rural and forest-dependent communities through sustainable livelihoods, eco-restoration, and skill development.

✅ Our Key Focus Areas:
🔹 Community-based Forest Management
🔹 Skill Development for Rural Youth & SHGs
🔹 Sustainable Livelihood Promotion (NTFP, Agroforestry, Eco-Tourism)
🔹 Capacity Building for Forest & Rural Development Programs
🔹 Eco-Restoration & Afforestation Initiatives
🔹 Collaboration with Government, NGOs & Academic Institutions

💡 Our Impact:
📍 Supporting tribal families & farmers in self-employment
📍 Promoting green entrepreneurship & sustainable rural development
📍 Creating a model for livelihood-based conservation

📞 Join Us in Creating a Greener, Self-Reliant Future!

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