अखिल भारतीय वरगाही/परिहार क्षत्रिय महासंघ

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अखिल भारतीय वरगाही/परिहार क्षत्रिय महासंघ संगठित बरगाही /परिहार क्षत्रिय सशक्त राजपूताना � Verified Official Page

ग्रुप का उद्देश्य -
१.Bargahi राजपूतो को संघित करना|
२.Bargahi राजपूतो के गौरवशाली इतिहास की जानकारी देना|
३.फिल्म तथा टी.वी के माध्यम से राजपूतो के इतिहास के साथ छेड्छाड को बन्द करना|
४.भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए सेना में राजपूतो को ५०% आरक्षण की मांग करना|
५.आर्थिक रूप से कमजोर राजपूत बन्धुओ के लिए राजपूतो के रोजगारपूरक संस्थानो से मदद ले कर उनकी जॉब इत्यादि में मदद करना|

साभार जनाना ड्योढ़ी सिटी पैलेस में एक क्षेत्र है जो शाही परिवार की महिलाओं और उनके सहायकों के लिए समर्पित है। इस खूबसूरत...
01/08/2023

साभार

जनाना ड्योढ़ी सिटी पैलेस में एक क्षेत्र है जो शाही परिवार की महिलाओं और उनके सहायकों के लिए समर्पित है। इस खूबसूरत कक्ष को भित्तिचित्रों और प्लास्टर के काम से सजाया गया है। खिड़कियों के स्थान पर बारीक नक्काशीदार जालियां बनी हुई हैं। जालियों ने प्राकृतिक वेंटिलेशन और आगंतुकों या बाहरी लोगों को अंदर का दृश्य दिखाने से इनकार करने के दोहरे उद्देश्य को पूरा किया। हालाँकि, महल की महिलाएँ दीवान-ए-आम में अदालती कार्यवाही का उचित दृश्य देख सकती थीं। विस्मयकारी स्थान और जटिल शिल्प कौशल राजपूत शासकों की अद्भुत सौंदर्य भावना और स्वाद की झलक देते हैं।

जनाना ड्योढ़ी, सिटी पैलेस, करौली, राजस्थान, भारत

#इतिहासनामा

फोटो में जो वृद्ध गड़रिया है  वास्तव में ये सेना का सबसे बड़ा राजदार था पूरी पोस्ट पड़ो इनके चरणों मे आपका सर अपने आप झुक ज...
22/07/2023

फोटो में जो वृद्ध गड़रिया है

वास्तव में ये सेना का सबसे बड़ा राजदार था पूरी पोस्ट पड़ो इनके चरणों मे आपका सर अपने आप झुक जाएगा, 2008 फील्ड मार्शल*मानेक शॉ* वेलिंगटन अस्पताल, तमिलनाडु में भर्ती थे। गम्भीर अस्वस्थता तथा अर्धमूर्छा में वे एक नाम अक्सर लेते थे - *'पागी-पागी!'* डाक्टरों ने एक दिन पूछ दिया “Sir, who is this Paagi?”

सैम साहब ने खुद ही brief किया...

1971 भारत युद्ध जीत चुका था, जनरल मानेक शॉ *ढाका* में थे। आदेश दिया कि पागी को बुलवाओ, dinner आज उसके साथ करूँगा! हेलिकॉप्टर भेजा गया। हेलिकॉप्टर पर सवार होते समय पागी की एक थैली नीचे रह गई, जिसे उठाने के लिए हेलिकॉप्टर वापस उतारा गया था। अधिकारियों ने नियमानुसार हेलिकॉप्टर में रखने से पहले थैली खोलकर देखी तो दंग रह गए, क्योंकि उसमें दो रोटी, प्याज तथा बेसन का एक पकवान (गाठिया) भर था। Dinner में एक रोटी सैम साहब ने खाई एवं दूसरी पागी ने।

*उत्तर गुजरात* के *सुईगाँव* अन्तर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की एक border post को *रणछोड़दास post* नाम दिया गया। यह पहली बार हुआ कि किसी आम आदमी के नाम पर सेना की कोई post हो, साथ ही उनकी मूर्ति भी लगाई गई हो।

पागी यानी *'मार्गदर्शक'*, वो व्यक्ति जो रेगिस्तान में रास्ता दिखाए। *'रणछोड़दास रबारी'* को जनरल सैम मानिक शॉ इसी नाम से बुलाते थे।

गुजरात के *बनासकांठा* ज़िले के पाकिस्तान सीमा से सटे गाँव *पेथापुर गथड़ों* के थे रणछोड़दास। भेड़, बकरी व ऊँट पालन का काम करते थे। जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें 58 वर्ष की आयु में बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक *वनराज सिंह झाला* ने उन्हें पुलिस के मार्गदर्शक के रूप में रख लिया।

*हुनर इतना कि ऊँट के पैरों के निशान देखकर बता देते थे कि उस पर कितने आदमी सवार हैं। इन्सानी पैरों के निशान देखकर वज़न से लेकर उम्र तक का अन्दाज़ा लगा लेते थे। कितनी देर पहले का निशान है तथा कितनी दूर तक गया होगा सब एकदम सटीक आँकलन जैसे कोई कम्प्यूटर गणना कर रहा हो।*

1965 युद्ध की आरम्भ में पाकिस्तान सेना ने भारत के गुजरात में *कच्छ* सीमा स्थित *विधकोट* पर कब्ज़ा कर लिया, इस मुठभेड़ में लगभग 100 भारतीय सैनिक हत हो गये थे तथा भारतीय सेना की एक 10000 सैनिकोंवाली टुकड़ी को तीन दिन में *छारकोट* पहुँचना आवश्यक था। तब आवश्यकता पड़ी थी पहली बार रणछोडदास पागी की! रेगिस्तानी रास्तों पर अपनी पकड़ की बदौलत उन्होंने सेना को तय समय से 12 घण्टे पहले मञ्ज़िल तक पहुँचा दिया था। सेना के मार्गदर्शन के लिए उन्हें सैम साहब ने खुद चुना था तथा सेना में एक विशेष पद सृजित किया गया था *'पागी'* अर्थात पग अथवा पैरों का जानकार।

भारतीय सीमा में छिपे 1200 पाकिस्तानी सैनिकों की location तथा अनुमानित संख्या केवल उनके पदचिह्नों से पता कर भारतीय सेना को बता दी थी, तथा इतना काफ़ी था भारतीय सेना के लिए वो मोर्चा जीतने के लिए।

1971 युद्ध में सेना के मार्गदर्शन के साथ-साथ अग्रिम मोर्चे तक गोला-बारूद पहुँचवाना भी पागी के काम का हिस्सा था। *पाकिस्तान* के *पालीनगर* शहर पर जो भारतीय तिरंगा फहरा था उस जीत में पागी की भूमिका अहम थी। सैम साब ने स्वयं ₹300 का नक़द पुरस्कार अपनी जेब से दिया था।

पागी को तीन सम्मान भी मिले 65 व 71 युद्ध में उनके योगदान के लिए - *संग्राम पदक, पुलिस पदक* व *समर सेवा पदक*!

27 जून 2008 को सैम मानिक शॉ की मृत्यु हुई तथा 2009 में पागी ने भी सेना से 'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति' ले ली। तब पागी की उम्र 108 वर्ष थी ! जी हाँ, आपने सही पढ़ा... 108 वर्ष की उम्र में 'स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति'! सन् 2013 में 112 वर्ष की आयु में पागी का निधन हो गया।

आज भी वे गुजराती लोकगीतों का हिस्सा हैं। उनकी शौर्य गाथाएँ युगों तक गाई जाएँगी। अपनी देशभक्ति, वीरता, बहादुरी, त्याग, समर्पण तथा शालीनता के कारण भारतीय सैन्य इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए रणछोड़दास रबारी यानि हमारे 'पागी'।

चित्र उन्हीं का है।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित आमेट रावत पत्ताजी चुण्डावत की हवेली, जिसमें उन्हीं की आंखों के सामने उनकी माता सज्जन कंवर, 9 र...
16/07/2023

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित आमेट रावत पत्ताजी चुण्डावत की हवेली, जिसमें उन्हीं की आंखों के सामने उनकी माता सज्जन कंवर, 9 रानियों, 5 पुत्रियों व 2 छोटे पुत्रों ने जौहर किया। इस स्थान पर होने वाला जौहर कई राजपूतानियों के बलिदान का साक्षी बना और फोटो में दिखाया गया पत्ताजी का महल अब तक काला है। यह युद्ध अकबर के चित्तौड़गढ़ आक्रमण (1568) में लड़ा गया था।

रावत पत्ताजी ने इसका प्रतिशोध कुछ इस क़दर लिया कि अबुल फ़ज़ल ने भी उनको "किले में सबसे आख़िर में मारा जाने वाला राजपूत" होना लिखा है। ख़ुद अकबर ने 9 मार्च 1568 ई. को जारी किए गए फ़तहनामे में रावत पत्ताजी की तुलना एक हजार घुड़सवारों से की और इनकी गजारूढ़ प्रतिमा बनवाई।

धन्य है वे महान वीर योद्धा, जो लहू की अंतिम बूंद तक लड़ते रहे......🚩🙏

भारत माता की जय।🚩🙏

From, Sambhavami

राजा मानसिंह के शासनकाल जैसा स्वर्णिम काल हिंदुओ का पिछले २००० सालों में नही आया । राजा मानसिंह भारत के एक महान धनुर्धर ...
11/07/2023

राजा मानसिंह के शासनकाल जैसा स्वर्णिम काल हिंदुओ का पिछले २००० सालों में नही आया । राजा मानसिंह भारत के एक महान धनुर्धर और दिग्विजयी राजा थे । उनकी दान वीरता और स्मृति संसार में चिरकाल तक बनी रहेगी ।।
राजा मानसिंह का पूरा जीवन ऐसा रहा की अपने जीवन काल के कुल ७० वर्षो में से ४४ वर्ष उन्होंने युद्ध के मैदान में बिताए ।

चित्तौड़ पर विजय ।।
खिंचीवाड़ा पर विजय ।।
गुजरात, अहमदाबाद, खंबात
और सूरत के पठानों पर विजय ।।
शेर खान फौलादी पर विजय ।।
इख्तियारुमुल्क पर विजय ।।
बिहार में पठानों पर विजय ।
अफगानिस्तान पर विजय
ईरान पर विजय ।।
उज़्बेकिस्तान पर विजय
कजाकिस्तान पर विजय
किर्गिस्तान पर विजय
ताजिकिस्तान पर विजय
तुर्कमेनिस्तान पर विजय ।
मोटे तौर पर पूरा सेंट्रल एशिया
राजा मानसिंह ने जीत लिया था ।।
इसके साथ ही बंगाल और उड़ीसा में भी पठानों को धूल चटाकर राजा मानसिंह ने विजयश्री प्राप्त की ।।

श्रीमानसिंह ने अपने जीवन में जितने भी युद्ध किए, उन अधिकतर युद्धों में उन्हे एक लाख से भी बड़ी संख्याबल वाली सेना का सामना करना पड़ा था ।। कइयों बार रहा श्रीमानसिंह के नेतृत्व में आमेर की सेना ने शत्रुओं को पूरी की पूरी सेना का ही वध कर दिया था ।

अकबरनामा में वर्णन मिलता है की राजा मानसिंह की बिहार बंगाल और उड़ीसा की लूट बहुत लाभदायक रही । क्यों की इन तीनो ही स्थानों का राजा एक था, दाऊद खान । जो अफगान मूल का पठान था ।। इसका ही सेनापति था " काला पहाड़ " । जिसने उड़ीसा के कोर्णाक मंदिर को तोड़ने के बाद भगवान जगदीश के मंदिर को हानि पहुंचाने की हिमाकत भी की थी ।।

राजा मानसिंह ने यहां शत्रुओं को मसल कर रख दिया ।। दाऊद खान उस समय एशिया की सबसे बड़ी शक्ति था ।। ८०० से ज्यादा आधुनिक तोपें उसके पास थी ।। उसे रहा मानसिंह ने ऐसी धूल चटाई की उसकी ८ लाख से अधिक विशाल पैदल सेना ने राजा मानसिंह के आगे सरेंडर कर दिया ।। दाऊद खान की ४४०० नाव और नोसेनिको को राजा मानसिंह ने अपनी हिरासत में ले लिया । १०,००० से अधिक स्पेशल ट्रेंड सैनिकों को उनके घोड़े सहित हिरासत में लिया ।।

इस विजय के बाद राजा मानसिंह ने जगन्नाथपुरी मंदिर का जीर्णोधार करवाया ।।

राजा मानसिंह का काल केवल युद्धकाल ही कहा जाएं ऐसा नही है । इस महान राजा के काल में देश एक अलग ही बुलंदी पर पहुंच गया था ।। साहित्य जगत को राजा मानसिंह ने इतना प्रोत्साहन दिया की लाखो लाखो रुपया कवियों को दान कर देते थे । गांव के गांवों का राज पाठ कवियों को सौंप देते ।। उनके छोटे मोटे चारणो के पास भी १००-१०० हाथी होते थे ।।

राजा मानसिंह के अन्न के गोदामों की संख्या एक लाख थी । किसी समय गुजरात आदि क्षेत्रों में युद्ध एवम अकाल के कारण अन्न संकट आया , तो आमेर से ही अन्न गया, और इतना अन्न गया, की गुजरातवासियो को एक दिन भी अन्न की कमी महसूस नहीं हुई ।।

इंफ्राटेकचर के विकास में भी राजा मानसिंह पीछे नही रहें । देश के अधिकांश गांव, कस्बे , तालाब, परकोटे, उन्ही के द्वारा निर्मित हैं।।

आज भी बंगाल में मानभूमि, विरभूमि, सिंहभूमि, उन्ही के नाम से विख्यात है ।। आमेर में मानसागर, मानसरोवर, मानतालाव, मानकुंड, काशी में मान घाट मान मंदिर मानगांव, काबुल में माननगर, मानपुरा, मानगढ़ , मानदेवी, मानबाग, मानदरवाजा, मानमहल, मानझरोखा, मानपटन और मानशस्त्र आदि है ।।

आमेर का मानमहल उन्ही की देन है । गोविंददेवजी, शिलामाता मंदिर, हर्षनाथभैरवमंदिर, जगतशिरोमणि मंदिर, वहां के महल के ८ परकोटे आदि राजा मानसिंह की देन है ।

इसके अलावा जयगढ़, सांगानेर, मोजमाबाद, पुष्कर, अजमेर, दिल्ली, आगरा, फतेहपुर, रोहताशगढ़ आदि के महल, तथा मथुरा, वृंदावन काशी, हरिद्वार, पटना आदि के घाट और कुंज अधिकांश मंदिर राजा मानसिंह की देन है ।

ब्रह्मपुत्र के सलिमनगर, अटक बनारस और जयपुर में भी राजा मानसिंह ने कई मंदिर मुहल्ले बनाएं ।।

एक जन्म में इस महान राजा के गुणों का बखान नही हो सकता ।

#गुरूजी #राजामानसिंह #आमेर #जयपुर

चौहान राजवंश के सबसे महान योद्धा जो                                                   बेसुध अवस्था में बिना सिर के 500km...
10/07/2023

चौहान राजवंश के सबसे महान योद्धा जो
बेसुध अवस्था में बिना सिर के 500km तक लड़ने वाले पूरे भारत में एक ही योद्धा हुए अजयराज सिंहजी चौहान 🚩🙏 आज दोनो जगह पर इनकी पूजा होती है कच्छ जिले के अंजार तालुका में इनका धड़ पूजा जाता है और इनका सिर अजमेर में पूजा जाता हे

चौहान राजवंश के सबसे महान योद्धा जो बिना सिर के 500km तक लड़ने वाले पूरे भारत में एक ही योद्धा हुए अजयराज सिंहजी चौहान 🚩...
10/07/2023

चौहान राजवंश के सबसे महान योद्धा जो बिना सिर के 500km तक लड़ने वाले पूरे भारत में एक ही योद्धा हुए अजयराज सिंहजी चौहान 🚩🙏 आज दोनो जगह पर इनकी पूजा होती है कच्छ जिले के अंजार तालुका में इनका धड़ पूजा जाता है और इनका सिर अजमेर में पूजा जाता है।🙏 शत शत नमन 🙏

जहां प्राणोत्सर्ग की परीक्षा हुई - ऊंटाला!एक ऐसा गांव जहां मुगलिया थाने पर कायम ख़ान अपनी बड़ी टुकड़ी के साथ तैनात था और...
19/03/2023

जहां प्राणोत्सर्ग की परीक्षा हुई - ऊंटाला!

एक ऐसा गांव जहां मुगलिया थाने पर कायम ख़ान अपनी बड़ी टुकड़ी के साथ तैनात था और महाराणा अमरसिंह अपनी निर्णायक लड़ाइयों से मेवाड़ के मुकाबले के मायने समझा रहे थे।

Ladu Singh Ranawat ✍️

सन 1607... एक दिन ऊंटाला का थाना फतह करने का ठाना और रणनीति बनी! महाराणा ने शक्तावतों की ओर देखा। बल्लू सिंह की भुजा फड़क उठी। सलूंबर के चुंडावत सामंत जैत्रसिंह ने हरावल का सवाल उठाया। बात मेवाड़ की परंपरा की थी! रण के रंग की थी।

आखिर इस बात पर सहमति बनी कि जो ऊंटाला के किले में सबसे पहले घुसेगा, उसे हरावल में रहने का हक़! दोनों पक्ष आमने सामने! एक को हक लेने की स्पर्धा और दूसरे को हक खोने की आशंका! लेकिन, दोनों का लक्ष्य था कायम ख़ान को खदेड़कर बेड़च के उपजाऊ इलाके को फिर से पाना!

गिरवा से दोनों दल निकले। बल्लूसिंह ने तेजी दिखाई और किले के दरवाजे पर अंगद पांव जमा दिया।

जैत्रसिंह ने देखा कि शक्तावत आगे हो जायेंगे तो उसने सीढ़ी से दीवार चढ़कर भीतर घुसने के लिए ताल ठोक दी!

बल्लूसिंह ने जैत्रसिंह को दीवार पर चढ़ते देखा तो खुद किंवाड़ के नागदंतों से झूल गया और हाथी के महावत को आदेश किया : हाथी को हूल दो। जल्दी करो, बाजी हाथ से निकल न जाए! महावत ने बल्लूसिंह पर हाथी हूल दिया।

उधर, जैत्रसिंह ने द्वार टूटते देखा तो चुटकी में सेवक से अपना सिर काटकर किले के भीतर फेंक देने को कहा!

आदेश का सेवक और महावत ने पालन किया। इधर, मेवाड़ी पाग से सजा ललताई आंखों वाला सिर ऊंटाला के किले में गिरा और उधर नागदंतों से छलनी बल्लूसिंह का बदन दुर्ग के भीतर गिरा और द्वार टूट गया! प्राण उत्सर्ग करने की ऐसी परीक्षा के बाद मेवाड़ी सेनाएं किले पर टूट पड़ी! बंदूकें एक ही बार में खाली हो गईं और फिर हाथों सहित नीचे गिर पड़ीं। कायम ख़ानी थाना मेवाड़ के कब्जे में आ गया! ऐसा उदाहरण पहले अहमदनगर में भी हुआ। (मेवाड़ की ऐतिहासिक कहानियां, वीर विनोद, एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान और राजस्थान पत्रिका में 23. 7. 89 को प्रकाशित मेरा लेख )

आज ऊंटाला न रहा, वल्लभनगर हो गया!
कचहरी वाला वह किला बालिका विद्यालय हो गया!
कोई जानता ही नहीं!

वहां कोई लेख नहीं! जेम्स टॉड का लिखा अपनी जगह है। अकसर पत्नी कहती है : यह उसका स्कूल है और इसका दरवाजा देखकर बल्लूसिंह की तथा दीवारें देखकर चुंडावत सामंत की छवि याद आती है! जैत्रसिंह की छतरी भी बनी है। पिछले दिनों जब वल्लभनगर जाना हुआ तो चित्र ले आया!

ठिकाणा लांगच मेवाड़

सूत केसरिया धुज गही, धब केसरिया भेह |धण केसरिया आग में, बाली केसर देह ||वीर क्षत्रिय पुत्र ने केशरियां ध्वज ग्रहण किया त...
19/03/2023

सूत केसरिया धुज गही, धब केसरिया भेह |
धण केसरिया आग में, बाली केसर देह ||

वीर क्षत्रिय पुत्र ने केशरियां ध्वज ग्रहण किया तथा वीर क्षत्रिय पति ने केशरिया वेश | उधर वीर क्षत्राणि पत्नी ने अपनी केशर सी काया को केशरिया आग की लपटों में झोंक दिया |
हर दिवस पर महारानी पद्मिनी जी व सभी वीरांगनाओं को शत शत नमन...
जोहर_दिवस

समाज के दुःख- सुख में साथ देने वाले  सच्चे समाज सेवी श्रीमान  लोकेंद्र सिंह जी कालवी को हमने खो दिया। क्षत्रिय समाज के ल...
14/03/2023

समाज के दुःख- सुख में साथ देने वाले सच्चे समाज सेवी श्रीमान लोकेंद्र सिंह जी कालवी को हमने खो दिया। क्षत्रिय समाज के लिए यह अपूरणीय क्षति है। परमपिता परमात्मा दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे एवं शोकाकुल परिवार को यह वज्रपात सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति! शांति! शांति!!🙏🙏🙏🙏

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