Pujya shri Bhagwati gauri santoshi maharani ji ka darbar

Pujya shri Bhagwati gauri santoshi maharani ji ka darbar *जयकारा माँ शेरोंवाली दा*
*बोल सच्चे दरबार की जय*प्रेम से बोलो श्री भगवती सन्तोषी माँ जीकी जय

सच्चे भक्त वही हैं जो संतोष, धैर्य और विश्वास के साथ हर परिस्थिति में अडिग रहते हैं।मेरी कृपा से उनके जीवन में सुख, शांत...
04/04/2026

सच्चे भक्त वही हैं जो संतोष, धैर्य और विश्वास के साथ हर परिस्थिति में अडिग रहते हैं।मेरी कृपा से उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि सदा बनी रहती है। 🙏🌺“जो सच्चे मन से मेरी भक्ति करता है, उसके जीवन में सुख-शांति और संतोष हमेशा बना रहता है।🙏🌺“शुक्रवार का व्रत रखने वाले मेरे भक्तों, तुम्हारी हर मनोकामना मैं पूर्ण करूँगी।” 🌸🙏“सच्चे मन से भक्ति करो, सुख-शांति और समृद्धि तुम्हारे जीवन में अवश्य आएगी।”जिसने सच्चे मन से माँ को याद किया, उसकी हर मनोकामना पूर्ण हुई। 🙏🌺अगर आपको भी माँ पर विश्वास है तो कमेंट में लिखें — 🙏 जय माँ संतोषी 🌺 जो भक्त सच्चे मन से आरती करता है, माँ उसकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।✨🪔आरती की ज्योति में माँ की कृपा बरसती है, जो श्रद्धा से झुके, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। ✨🪔अगर आपको भी माँ पर विश्वास है तो कमेंट में लिखें — जय माँ संतोषी 🌺🙏माँ संतोषी कहती हैं – सच्चे मन से भक्ति करो, मैं तुम्हारे जीवन से हर दुख दूर कर दूँगी 🙏🌺संतोष और विश्वास रखो, तुम्हारी हर मनोकामना समय पर अवश्य पूरी होगी ❤️✨माँ संतोषी कहती हैं — “सच्चे मन से की गई भक्ति से हर दुख दूर होता है, बस अपने विश्वास को कभी कमजोर मत होने दो।” 🙏🌺माँ संतोषी कहती हैं — “जो भक्त सच्चे दिल से ‘जय माँ संतोषी’ लिखेगा, उसके घर में सुख-शांति हमेशा बनी रहेगी” 🌺🙏आपकी हर परेशानी दूर होगी और माँ का आशीर्वाद सदा साथ रहेगा 🌺🌹माँ संतोषी जी कहती हैं — “भक्त, सच्चे मन से भक्ति करो, मैं तुम्हारे जीवन में सुख और संतोष भर दूँगी।” 🙏🌸“विश्वास और धैर्य बनाए रखो, तुम्हारी हर मनोकामना समय पर पूर्ण होगी।” 🌺सच्चे मन से "जय श्री भगवती सन्तोषी माँ जी" लिखकर माता के दरबार में हाजिरी लगवाए झुक जा माँ के चरण में प्यारे,ये और कहीं ना झुकने देगी !मन में है विश्वाश जो पक्का,तेरा काम कभी ना रुकने देगी !! *श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी सरकार का मन्दिर हि. प्र. के जिला मण्डी तहसील सरकाघाट के मोही क्षेत्र में स्थित है ।यह माता रानी की बड़ी विशेष कृपा है हम सभी पर जो हमें जगत जननी जगदम्बा की भक्ति करने का अवसर मिला है!*जयकारा माँ शेरोंवाली दा**बोल सच्चे दरबार की जय*प्रेम से बोलो श्री भगवती सन्तोषी माँ जी की जय*ॐ शांति: शांति: शांति:*🌹🙏🏻We all Love you ᗰᗩᗩ !धर्म की जय हो ...अधर्म का विनाश हो प्राणीयों में सद्दभावना हो ...विश्व का कल्याण हो हर हर महादेव ....हर हर महादेव...हर हर महादेव सनातन धर्म की जय हो ...गोऊ माता की जय पुज्जेय माता -पिता की जय ....बोल सच्चे दरबार की जय वैष्णो रानी की जय .जयकारा श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी सरकार का....बोलो....सचे दरबार की जय.... श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!_संतोषी सदा सुखी __*प्रेम से बोलो भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!!! — _ स्वस्थ रहिये-मस्त रहिये।।_ .. परम पूज्य श्री नवदुर्गा भगवती गौरी संतोषी महारानी माताजी का दरबार गांव ठाणा(मोहि) पोस्ट ऑफिस गोपालपुर तहसील सरकाघाट जिला मंडी हिमाचल प्रदेश बोलो जय जय श्री भगवती गौरी संतोषी मां देवभूमि हिमाचल प्रदेश🇮🇳भारतमाता की जय🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳

26/03/2026

सच्चे मन से "जय श्री भगवती सन्तोषी माँ जी" लिखकर माता के दरबार में हाजिरी लगवाए झुक जा माँ के चरण में प्यारे,ये और कहीं ना झुकने देगी !
मन में है विश्वाश जो पक्का,तेरा काम कभी ना रुकने देगी !! *श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी सरकार का मन्दिर हि. प्र. के जिला मण्डी तहसील सरकाघाट के मोही क्षेत्र में स्थित है ।*जयकारा माँ शेरोंवाली दा*
*बोल सच्चे दरबार की जय*प्रेम से बोलो श्री भगवती सन्तोषी माँ जीकी जय
*ॐ शांति: शांति: शांति:*🌹🙏🏻We all Love you ᗰᗩᗩ !धर्म की जय हो ...अधर्म का विनाश हो प्राणीयों में सद्दभावना हो ...विश्व का कल्याण हो हर हर महादेव ....हर हर महादेव...हर हर महादेव सनातन धर्म की जय हो ...गोऊ माता की जय पुज्जेय माता -पिता की जय ....बोल सच्चे दरबार की जय वैष्णो रानी की जय .जयकारा श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी सरकार का....बोलो....सचे दरबार की जय.... श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!_संतोषी सदा सुखी __*प्रेम से बोलो भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!!! — _ स्वस्थ रहिये-मस्त रहिये।।_ .. परम पूज्य श्री नवदुर्गा भगवती गौरी संतोषी महारानी माताजी का दरबार गांव ठाणा(मोहि) पोस्ट ऑफिस गोपालपुर तहसील सरकाघाट जिला मंडी हिमाचल प्रदेश बोलो जय जय श्री भगवती गौरी संतोषी मां देवभूमि हिमाचल प्रदेश🇮🇳भारतमाता की जय🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳

नवरात्रि के तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा की उपासना विधि एवं फल〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ध्यान दे इस वर्ष तृतीया तिथि का क्षय ह...
22/03/2026

नवरात्रि के तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा की उपासना विधि एवं फल
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ध्यान दे इस वर्ष तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण आज द्वितीया तिथि को ही माँ के तीसरे स्वरूप की पूजा उपासना की जाएगी।

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन माँ के चंद्रघंटा विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है।

माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।

माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है।

मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना सद्यः फलदायी है। माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है। इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है।

माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं।

माँ के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किन्तु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भली-भाँति करते रहते हैं।

माता चंद्रघंटा की कथा
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देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला. असुरों का स्‍वामी महिषासुर था और देवाताओं के इंद्र. महिषासुर ने देवाताओं पर विजय प्राप्‍त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्‍वर्गलोक पर राज करने लगा।
इसे देखकर सभी देवतागण परेशान हो गए और इस समस्‍या से निकलने का उपाय जानने के लिए त्र‍िदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश के पास गए।
देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने इंद्र, चंद्र, सूर्य, वायु और अन्‍य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और उन्‍हें बंधक बनाकर स्‍वयं स्‍वर्गलोक का राजा बन गया है।
देवाताओं ने बताया कि महिषासुर के अत्‍याचार के कारण अब देवता पृथ्‍वी पर विचरण कर रहे हैं और स्‍वर्ग में उनके लिए स्‍थान नहीं है।
यह सुनकर ब्रह्मा, विष्‍णु और भगवान शंकर को अत्‍यधिक क्रोध आया. क्रोध के कारण तीनों के मुख से ऊर्जा उत्‍पन्‍न हुई. देवगणों के शरीर से निकली ऊर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई. यह दसों दिशाओं में व्‍याप्‍त होने लगी।
तभी वहां एक देवी का अवतरण हुआ. भगवान शंकर ने देवी को त्र‍िशूल और भगवान विष्‍णु ने चक्र प्रदान किया. इसी प्रकार अन्‍य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों में अस्‍त्र शस्‍त्र सजा दिए.
इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतरकर एक घंटा दिया. सूर्य ने अपना तेज और तलवार दिया और सवारी के लिए शेर दिया।
देवी अब महिषासुर से युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार थीं. उनका विशालकाय रूप देखकर महिषासुर यह समझ गया कि अब उसका काल आ गया है. महिषासुर ने अपनी सेना को देवी पर हमला करने को कहा. अन्‍य देत्‍य और दानवों के दल भी युद्ध में कूद पड़े।
देवी ने एक ही झटके में ही दानवों का संहार कर दिया. इस युद्ध में महिषासुर तो मारा ही गया, साथ में अन्‍य बड़े दानवों और राक्षसों का संहार मां ने कर दिया. इस तरह मां ने सभी देवताओं को असुरों से अभयदान दिलाया।

उपासना मन्त्र एवं विधि
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या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

हमें चाहिए कि अपने मन, वचन, कर्म एवं काया को विहित विधि-विधान के अनुसार पूर्णतः परिशुद्ध एवं पवित्र करके माँ चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना में तत्पर हों। उनकी उपासना से हम समस्त सांसारिक कष्टों से विमुक्त होकर सहज ही परमपद के अधिकारी बन सकते हैं। हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए परम कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है।
प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में तृतीय दिन इसका जाप करना चाहिए।

इस दिन सांवली रंग की ऐसी विवाहित महिला जिसके चेहरे पर तेज हो, को बुलाकर उनका पूजन करना चाहिए। भोजन में दही और हलवा खिलाएँ। भेंट में कलश और मंदिर की घंटी भेंट करना चाहिए।

माँ चंद्रघंटा ध्यान मन्त्र
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वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

माँ चंद्रघंटा स्तोत्र पाठ
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आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥

माँ चंद्रघंटा कवच
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रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं।
स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥

कर्ज से मुक्ति के उपाय
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कर्जें से मुक्ति के लिए क्या उपाय करें।
संपूर्ण प्रयासों के बावजूद भी ऋण से पीछा नहीं छुट रहा हो तो 108 गुलाब के पुष्प ॐ
ऐं ह्रीं श्रीं चं फट् स्वाहा मंत्र बोलते हुए भगवती चंद्रघंटा के श्री चरणों में अर्पित करें। सवा किलो साबुत मसूर लाल कपड़ें में बांधकर अपने सामने रख दें। घी का दीपक जलाकर ॐ ऐं ह्रीं श्रीं चंद्रघण्टे हुं फट् स्वाहा। इस मंत्र का जाप 108 बार करें। मसूर को अपने ऊपर से 7 बार उसार कर सफाई कर्मचारी को दान में दे दें। कर्जें से छुटकारा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

माँ चंद्रघंटा की आरती
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जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चन्द्र समाज तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
क्रोध को शांत बनाने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली॥
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥
सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥
हर बुधवार को तुझे ध्याये।
श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥
मूर्ति चन्द्र आकार बनाए।
शीश झुका कहे मन की बाता॥
पूर्ण आस करो जगत दाता।
कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥
कर्नाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी॥
भक्त की रक्षा करो भवानी।

माँ दुर्गा की आरती
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जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
>मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…
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अपनी सच्ची श्रद्धा भक्ति के अनुसार, जो भक्त माता रानी जी के दरबार में नवदुर्गा जी के पूजन हवन एवम भंडारे के लिए योगदान द...
17/03/2026

अपनी सच्ची श्रद्धा भक्ति के अनुसार, जो भक्त माता रानी जी के दरबार में नवदुर्गा जी के पूजन हवन एवम भंडारे के लिए योगदान देना चाहता है। वे 9816257391@upi में अनुदान कर सकता है।परम पूज्य श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती नवदुर्गा सन्तोषी महारानी माता जी का दरबार गांव ठाणा(मोहि) पोस्ट ऑफिस गोपालपुर तहसील सरकाघाट जिला मंडी हिमाचल प्रदेश बोलो जय जय श्री भगवती गौरी संतोषी मां
देवभूमि हिमाचल प्रदेश *
ॐ श्री संतोषी महामाया गजानंदम दायिनी शुक्रवार प्रिये देवी नारायणी नमोस्तुते ||
मां संतोषी आप सभी की मनोकामना पूर्ण करें आप सभी के जीवन में सुख शांति समृद्धि प्रदान करें II

🙏 आपको याद होगा की इंदिरा गाँधी, प्रधान मंत्री का चुनाव जितने के लिए, करपात्री जी महाराज के पास आशीर्वाद लेने गई तब करपा...
01/03/2026

🙏 आपको याद होगा की इंदिरा गाँधी, प्रधान मंत्री का चुनाव जितने के लिए, करपात्री जी महाराज के पास आशीर्वाद लेने गई तब करपात्री जी ने कहा- आशीर्वाद तो दूँगा लेकिन सरकार बनते ही सबसे पहले आपको गौ हत्या के विरुद्ध कानून बना कर- "गौ हत्या बंद करनी होगी"।
* इंदिरा ने हामी भरी और वचन भी दिया कि - में चुनाव जितने पर जरूर ही संपूर्ण राष्ट्र से गोहत्या बंध कर दूँगी।दो महीने बाद करपात्री जी महाराज, इंदिरा से मिले : उनका वादा याद दिला कर गौ हत्या के विरुद्द कानून बनाने के लिए कहा, तो इंदिरा जी ने कहा कि महाराज जी अभी तो मैं नई हूँ, कुछ समय दीजिए। कुछ समय बाद करपात्री जी फिर गए और कानून की मांग की लेकिन इंदिरा ने फिर टाल दिया।
*कई बार मिलने वादा याद दिलाने के बाद भी जब इंदिरा ने गौ हत्या बंद नहीं की, कानून नहीं बनाया तो 7 नवम्बर 1966,*_ _*उस दिन कार्तिक मास, शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी तिथि, देश का संत समाज, शंकराचार्य, अपने छत्र आदि छोड़ पैदल ही, आम जनता के साथ, गायों को आगे कर संसद कूच किये। करपात्री जी के नेतृत्व में जगन्नाथपुरी, ज्योतिष पीठ व द्वारका पीठ के शंकराचार्य, वल्लभ संप्रदाय के सातों पीठों के पीठाधिपति, रामानुज संप्रदाय, मध्व संप्रदाय, रामानंदाचार्य, आर्य समाज, नाथ संप्रदाय, जैन, बौद्ध व सिख समाज, निहंग व हजारों की संख्या में नागा साधुओं को पंडित लक्ष्मीनारायण जी चंदन तिलक लगाकर विदा कर रहे थे।*
*लालकिला मैदान से आरंभ होकर चावड़ी बाजार होते हुए पटेल चौक से संसद भवन पहुंचने विशाल जुलूस ने पैदल चलना आरंभ किया। रास्ते में घरों से लोग फूल वर्षा रहे थे।

* पूरे हिंदू समाज के लिए ये सबसे ऐतिहासिक दिन था, सभी शंकराचार्य और पीठाधिपति पैदल चलते हुए संसद भवन के पास मंच पर समान कतार में बैठे।
उसके बाद से आज तक ऐसा गौमाता आंदोलन कभी आज तक नहीं हुआ। नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चौक तक सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गौ हत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। उस वक्त इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी और गुलजारी लाल नंदा गृहमंत्री थे।
इस महासिंहनाद को देख कर इंदिरा ने सत्ता के मद में चूर होकर संतों, साधुओं, गायों और जनता पर अंधाधुंध गोलियों की बारिश करवा दी- हजारों हमारी गौमाता, साधु, संत और आमजन मारे गए। गौ रक्षा महाभियान समिति के तत्कालीन मंत्रियों में से एक और पूरी घटना के गवाह, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखक आचार्य सोहनलाल रामरंग के अनुसार इस गोलीबारी में कम से कम 10 हजार से अधिक मार दिये गये।*

* इंदिरा ने ढकने के लिए ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई। आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंक डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कर्फ्यू लागू कर दिया। तब करपात्री जी महाराज ने मरी हुई गायों के गले से लिपट कर रोते हुए कहा था कि "हम तो साधु हैं, किसी का बुरा नहीं करते। लेकिन तूने माता समान निरपराध गायों को मारा है, जा इसका फल तुझे भुगतना पड़ेगा, मैं श्राप देता हूँ कि एक दिन तेरी देह भी इसी प्रकार गोलियों से छलनी होगी और तेरे पूरे कुल और दल का विनाश करने के लिए मैं हिमालय से एक ऐसा तपस्वी भेजूँगा जो तेरे दल और कुल का नाश करेगा"।*
जिस प्रकार करपात्री जी महाराज का आशीर्वाद सदा सफल ही होता था उसी प्रकार उनका श्राप भी फलीभूत होता था।

* इस घटना की चर्चा गावँ गावँ में बच्चे बच्चे की जुबान पर थी और सभी इंदिरा को गालियां, बददुआएं दे रहे थे कि "हत्यारी ने गायों को मरवा दिया इसका भला नहीं होगा, भगवान करे ये भी इसी प्रकार मरे। भगवान इसका दंड जरूर देंगे"।

* अब इसे संयोग कहेंगे या करपात्री जी महाराज का श्राप कि इंदिरा का शरीर ठीक गोपाष्टमी के दिन उसी प्रकार गोलियों से छलनी हुआ जैसे करपात्री जी महाराज ने श्राप दिया था और अब नरेंद्र दामोदर मोदी के रूप में वह तपस्वी भी मौजूद है जो कांग्रेस का विनाश कर रहा है, जिसका खुला आव्हान है*
* "कांग्रेस मुक्त भारत"*

* सोचिये क्या ये संयोग है ?*
_*1- संजय गांधी मरे आकाश में तिथि थी अष्टमी ,*
_*2- इन्दिरा गाँधी मरी आवास में तिथि थी गोपाष्टमी*
_*3- राजीव गाँधी मरे मद्रास में तिथि थी अष्टमी*

* साधु संतों का श्राप व गौमाता की करुण पीड़ा ने इंदिरा को मारा और तब से ७ नवम्बर १९६६ का दिन, इतिहास के पन्नों का सबसे काला दिन ही बनकर रह गया। * जय गौमाताजी की। 🙏

*जो जीव एक बार परम पूज्य श्री भगवती नवदुर्गा सन्तोषी महारानी माता जी के शरणागत हो जाता हैं जी , उन्हें फिर किसी ज्योतिषी...
21/02/2026

*जो जीव एक बार परम पूज्य श्री भगवती नवदुर्गा सन्तोषी महारानी माता जी के शरणागत हो जाता हैं जी , उन्हें फिर किसी ज्योतिषी को अपनी ग्रहदशा और जन्म कुंडली दिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती जी । इसके पीछे का विज्ञान तो यह है कि माँ के शरणागत जीव की रक्षा स्वयं माँ ही किया करती है जी । सब ग्रह, नक्षत्र, देवी देवता माँ वैष्णो की ही तो शक्तियाँ हैं जी , सब उनके ही दास हैं जी । इसलिए उनके भक्त का अनिष्ट कोई कर ही नहीं सकता जी । इसलिए निर्भय होकर, डंके की चोट पर माँ से अपना नाता जोड़े रखिए जी एवं माँ की शरण में आयें जी 👏🏻 जय माता दी जी🙏🏻*सच्चे मन से "जय श्री भगवती सन्तोषी माँ जी" लिखकर माता के दरबार में हाजिरी लगवाए
झुक जा माँ के चरण में प्यारे,ये और कहीं ना झुकने देगी !
मन में है विश्वाश जो पक्का,तेरा काम कभी ना रुकने देगी !!We all Love you ᗰᗩᗩ !धर्म की जय हो ...अधर्म का विनाश हो प्राणीयों में सद्दभावना हो ...विश्व का कल्याण हो हर हर महादेव ....हर हर महादेव...हर हर महादेव सनातन धर्म की जय हो ...गोऊ माता की जय पुज्जेय माता -पिता की जय ....बोल सच्चे दरबार की जय वैष्णो रानी की जय .जयकारा *श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी सरकार का....* *बोलो....सचे दरबार की जय.... श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!* *_संतोषी सदा सुखी __ श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी की जय_** _*सभी भक्तो !!बोलो भगवती सन्तोषी माँ जी की जय दिल से कहो जय श्री आदि शक्ति राज राजेश्वरीश्री भगवती सन्तोषी माँ जी ये खाली नहीं भेजती *प्रेम से बोलो भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!!! *प्रेम से बोलो भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!!! *प्रेम से बोलो भगवती सन्तोषी माँ जी की जय !!!! — _ स्वस्थ रहिये-मस्त रहिये।।*_ .. परम पूज्य श्री नवदुर्गा भगवती गौरी संतोषी महारानी माताजी का दरबार गांव ठाणा(मोहि) पोस्ट ऑफिस गोपालपुर तहसील सरकाघाट जिला मंडी हिमाचल प्रदेश बोलो जय जय श्री भगवती गौरी संतोषी मां
देवभूमि हिमाचल प्रदेश *🇮🇳भारतमाता की जय🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*
*🇮🇳जयहिंद🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*🇮🇳*

🙏क्यों हर शुभ काम से पहले होती है श्री गणेश जी की पूजा? भगवान विष्णु जी की अनसुनी कथा 🚩🚩🚩🙏जब भगवान विष्णु जी का विवाह मा...
18/02/2026

🙏क्यों हर शुभ काम से पहले होती है श्री गणेश जी की पूजा? भगवान विष्णु जी की अनसुनी कथा 🚩🚩🚩🙏जब भगवान विष्णु जी का विवाह माता लक्ष्मी जी हुआ था ! तब उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा था! परंतु श्री गणेश जी को नहीं बुलाया था ! तब गरुड़ देवजी ने पूछा प्रभु! आपने सभी देवताओं को बुलाया पर श्री गणेश जी को क्यों नहीं बुलाया? विष्णु जी मुस्कुरा कर बोले अगर गणेश आए तो सारा भोजन अकेले ही खा जाएंगे ! और किसी के लिए कुछ नहीं बचेगा विवाह का दिन आया और गणेश जी को ये बात पता चल गई तो उन्होंने विघ्न का पाठ सिखाने का निश्चय किया ! अपने वाहन मूषक को आदेश दिया और बारात जाने के रास्ते में बड़े-बड़े गड्ढे बनवा दिए ! जब बारात निकली तो विष्णु जी का रथ बीच रास्ते में फंस गया ! देवताओं ने बहुत प्रयास किया लेकिन रथ नहीं निकला ! तब श्री विष्णु जी को अपने भूल का एहसास हुआ और उन्होंने तुरंत श्री गणेश जी का स्मरण किया और उनसे सब कुछ ठीक करने की विनती की ! जैसे ही श्री गणेशजी प्रसन्न हुए तो रथ स्वयंः ही बाहर आ गया ! उसी दिन विष्णु जी ने घोषणा की कि बिना श्री गणेश वंदना के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होगा ! अगर गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम नहीं हुई तो कार्य में विघ्न अवश्य आएगा! तभी से हर मंगल कार्य से पहले श्री गणेश जी की पूजा की परंपरा शुरू हुई है!
🙏जो भी इस कथा को पढ़ रहा है वह दिल से गणपति बप्पा मोरया अवश्य लिखें ! 🚩🚩🚩🚩
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🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🚩🚩🚩🚩
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🙏🍁 सभी मित्रों को महाशिवरात्रि की             हार्दिक शुभकामनाएं 🍁🙏🌷🌷 शिव शम्भु स्तोत्रम् ॥🌷🌷         ( हिन्दी अर्थ सहित...
15/02/2026

🙏🍁 सभी मित्रों को महाशिवरात्रि की
हार्दिक शुभकामनाएं 🍁🙏

🌷🌷 शिव शम्भु स्तोत्रम् ॥🌷🌷
( हिन्दी अर्थ सहित)

🍁
ॐ नमः शिवाय शान्ताय सच्चिदानन्दरूपिणे।
जगत्कारणरूपाय कालकालाय ते नमः॥१
भावार्थ: शान्त, सच्चिदानन्दस्वरूप, जगत् के कारण, काल के भी काल शिव को नमस्कार है।

🍁
त्रिनेत्रं त्रिशिरः शान्तं जटाजूटं शशांकभृत्।
सर्वदोषहरं देवं नमामि शिवशेखरम्॥२
भावार्थ: तीन नेत्रों और तीन शिरों वाले, जटा-जूटधारी, चन्द्रधारण करने वाले, सभी दोषों का नाश करने वाले शिव को नमस्कार।

🍁
नागेन्द्रहारं शूलं च पिनाकं च करे स्थितम्।
वन्दे शम्भुं सदानन्दं सर्वत्रैक्यमयं शिवम्॥३
भावार्थ: नागराज का हार, हाथ में त्रिशूल और पिनाक धनुष धारण करने वाले, शम्भु सदानन्द, एकत्वस्वरूप शिव को वन्दन।

🍁
कालाग्निरुद्ररूपं च मृत्युंजयमहेश्वरम्।
प्रलयं हरणं देवं पशुपतिं नमो नमः॥ ४
भावार्थ: कालाग्निरुद्रस्वरूप, मृत्युंजय, प्रलय करने वाले, पशुपति महेश्वर को बारंबार नमस्कार।

🍁
व्योमकेशं वृषारूढं भस्मालङ्कृतविग्रहम्।
भक्तानुग्रहदातारं शंकरं प्रणमाम्यहम्॥५
भावार्थ: आकाश जैसे केशों वाले, वृषभ पर आरूढ़, भस्म से विभूषित शरीर वाले भक्तवत्सल शंकर को प्रणाम।

🍁
दिगम्बरं महादेवं मुक्तकेशीं त्रिलोचनम्।
गङ्गाधरं सोमधरं नीलकण्ठं नमाम्यहम्॥६
भावार्थ: दिगम्बर, मुक्तकेशी, त्रिलोचन, गङ्गाधर, सोम और नीलकण्ठ महादेव को नमस्कार।

🍁
दक्षयज्ञविनाशं च सतीपतिं उमापतिम्।
भवेशं भयनाशं च सुरेशं शरणं मम॥ ७
भावार्थ: दक्षयज्ञविनाशक, सतीपति, उमापति, भवेश, भयनाशक, देवों के स्वामी मेरे शरण हैं।

🍁
वसिष्ठविश्वामित्राद्यैः पूजितं योगिसत्तमैः।
गायत्र्याख्यमहामन्त्रगूढं देवं नमाम्यहम्॥ ८
भावार्थ: वसिष्ठ, विश्वामित्र जैसे योगियों द्वारा पूजित, गायत्री मन्त्र में गूढ़ उस देव को नमस्कार।

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शिवाय शुद्धरूपाय चन्द्रशेखरमूर्तये।
प्रणतः क्लेशनाशाय नन्दिशायप्रिये नमः॥९
भावार्थ: शुद्धस्वरूप, चन्द्रशेखर शिव, जो नन्दि के प्रिय हैं, क्लेशों का नाश करने वाले हैं — उन्हें नमस्कार।

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गिरिशाय गिरावासाय गिरीशाय नमो नमः।
अग्न्यर्कचन्द्रनेत्राय नमः पावनमूर्तये॥१०
भावार्थ: पर्वतों पर निवास करने वाले गिरिश शिव को, जिनके नेत्र अग्नि, सूर्य और चन्द्र हैं — पावन मूर्ति को नमस्कार।

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त्रयीतनुस्वरूपाय ब्रह्मविष्णुशिवात्मने।
सृज्यस्थितिलयानां च हेतवे जगतां नमः॥११
भावार्थ: वे जो त्रयी (ऋग्, यजुः, साम) के स्वरूप हैं, ब्रह्मा, विष्णु और शिव के आत्मस्वरूप हैं — सृष्टि, स्थिति और लय के हेतु हैं — उन्हें नमस्कार।

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मणिकर्णिकायास्तीरे निवासं कुर्वते विभोः।
तं कालमृत्युनाशं च कालेशं प्रणमाम्यहम्॥१२
भावार्थ: जो मणिकर्णिका तीर्थ के तट पर निवास करते हैं, जो काल और मृत्यु का नाश करने वाले हैं — उन कालेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ।

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शमशानप्रियभूतात्मन् भस्मलेपनभूषण।
वीतरागमहावीर्य शिव ते शरणं मम॥१३
भावार्थ: शमशानप्रिय, भूतात्मा, भस्मलेपित, वीतराग, महान पराक्रमी शिव — आप ही मेरी शरण हैं।

🍁
लिङ्गरूपधरं देवं शक्तितत्त्वयुतं विभुम्।
शिवशक्तिसमायुक्तं नमामि परमं शिवम्॥१४
भावार्थ: लिङ्गस्वरूप, शक्तितत्त्व से युक्त, शिवशक्ति से संयुक्त उस परम शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

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अनादिनिधनं शम्भुं ब्रह्ममायातिगं हरम्।
निराकारं च चिन्मात्रं तं नमामि सदाशिवम्॥१५
भावार्थ: अनादि, अनन्त, ब्रह्म और माया से परे, निराकार, शुद्ध चैतन्यरूप सदाशिव को मैं प्रणाम करता हूँ।

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जटाजूटसमा गङ्गा या वहत्यधिदेहके।
सांनिध्यं करुणासिन्धो यस्तस्य प्रणतोऽस्म्यहम्॥१६
भावार्थ: जिनकी जटाओं में गंगा प्रवाहित होती है, करुणा के सागर उन शिव को मैं प्रणाम करता हूँ।

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वामे भवानी सहिता दक्षिणे च गणाधिपः।
मध्ये चन्दनगन्धानां रासेशं प्रणमाम्यहम्॥१७
भावार्थ: जिनके वाम भाग में भवानी और दक्षिण में गणपति हैं, और जो सुगन्धित चन्दन से शोभित हैं — उन रासेश्वर को प्रणाम।

🍁
विभूतिधारणं शम्भोः शुद्धज्ञानात्मकं हरम्।
योगिनां हृदि भाव्यं च योगेशं प्रणमाम्यहम्॥१८
भावार्थ: विभूति धारण करने वाले, शुद्ध ज्ञानस्वरूप, योगियों के हृदय में स्थित योगेश्वर शिव को प्रणाम।

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रुद्रं पाशुपतं देवं नीलकण्ठं त्रिलोचनम्।
लोकत्रयगुरुं शम्भुं नमामि भवभीषणम्॥१९
भावार्थ: रुद्र, पाशुपत, नीलकण्ठ, त्रिलोचन, लोकों के गुरु शम्भु और भव का भय हरने वाले शिव को नमस्कार।

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करालभालपट्टाभं कपालमालविभूषितम्।
त्रिपुरान्तकमीशानं नमामि भयनाशनम्॥२०
भावार्थ: जिनका भाल भयानक तेज से युक्त है, जो कपालों की माला धारण करते हैं, त्रिपुर का संहार करने वाले ईशान, भय का नाश करने वाले शिव को प्रणाम।

🍁
गङ्गाजलं शरीरे यः धारयत्यद्भुतं शिवः।
स एव भवरोगाणां हर्ता भवति निश्चितम्॥२१
भावार्थ: जो अपने शरीर पर गङ्गाजल धारण करते हैं, वही शिव संसार के समस्त रोगों के निश्चित नाशक हैं।

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शिवे रुष्टे न कश्चन त्राता भवसङ्कटे।
शिवे तुष्टे किमन्येन तस्मात् शम्भुं भजाम्यहम्॥२२
भावार्थ: यदि शिव रुष्ट हों तो कोई भी संसार से नहीं बचा सकता, और यदि वे प्रसन्न हों तो अन्य किसी की आवश्यकता नहीं — इसलिए मैं शम्भु की भक्ति करता हूँ।

🍁
भूतनाथं महाकायं विश्वनाथं च शङ्करम्।
कर्पूरगौरं ध्यायामि नागेन्द्रकृतकुण्डलम्॥२३
भावार्थ: भूतनाथ, विशालकाय, विश्वनाथ शंकर, कर्पूर के समान गौरवर्ण के, नागराज के कुण्डल धारण करने वाले शिव का मैं ध्यान करता हूँ।

🍁
दयानिधिं सुराधारं सिद्धगन्धर्वसेवितम्।
कैलासशिखरावासं श्रीशिवं प्रणमाम्यहम्॥२४
भावार्थ: करुणा के सागर, देवों के आधार, सिद्ध-गन्धर्वों द्वारा पूजित, कैलास शिखर पर निवास करने वाले श्री शिव को मैं प्रणाम करता हूँ।

🍁
शिवो मे रक्षकः साक्षात् शिवो मे दायकः सुखम्।
शिवो मे शरणं नित्यं शिवान्नान्यं समाश्रये॥२५
भावार्थ: मेरे रक्षक शिव ही हैं, सुखदाता भी शिव हैं, मेरी नित्य शरण शिव ही हैं — मैं शिव के अतिरिक्त किसी का आश्रय नहीं लेता।

🍁
शिवो भूत्वा च संसारं पालयत्याखिलं जगत्।
शिवे रमेण संसारो लीनो यान्ति परं पदम्॥२६
भावार्थ: शिव ही बनकर संसार का पालन करते हैं, शिव के साथ रमण करने से जीव संसार से मुक्त होकर परमपद को प्राप्त करता है।

🍁
अशेषदोषसंहर्ता कृपया परिपूरितः।
योगिनां च गुरुस्त्वं हि शंभो शरणमस्तु मे॥२७
भावार्थ: जो समस्त दोषों का नाश करने वाले, कृपा से परिपूर्ण हैं, योगियों के गुरु हैं — हे शम्भो! आप मेरी शरण हों।

🍁
नमः शिवाय शान्ताय नमस्ते करुणाकर।
नमस्ते भक्तवत्सल्य नमस्ते भक्तपालक॥२८
भावार्थ: शान्त, करुणासागर, भक्तवत्सल, भक्तों के रक्षक शिव को बारंबार नमस्कार।

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सर्वज्ञं सर्वरूपं च सर्वाद्यं सर्वकारणम्।
नमामीशं महादेवं सच्चिदानन्दरूपिणम्॥२९
भावार्थ: सर्वज्ञ, सर्वरूप, सबका आदि और कारण, सच्चिदानन्दस्वरूप महादेव ईश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।

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अचिन्त्यरूपिणं देवं अज्ञानतमसापहम्।
ध्यानगम्यं मुनिध्येयं नमामि परमं शिवम्॥३०
भावार्थ: जिनका रूप अचिन्त्य है, जो अज्ञानरूपी अंधकार को नष्ट करते हैं, ध्यानयोग से प्राप्त होने योग्य हैं — उन परम शिव को नमस्कार।

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सर्पकुण्डलसंयुक्तं भस्माङ्गरमणीयकम्।
कालत्रयविनिर्मुक्तं शिवं वन्दे निरञ्जनम्॥३१
भावार्थ: सर्प कुण्डलों से युक्त, अंगों पर भस्म रमाये हुए, तीनों कालों से परे, निष्कलंक शिव को मैं वन्दन करता हूँ।

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भस्मोदूलितसर्वाङ्गं भूतभूतप्रपञ्चकम्।
कालान्तकमकालं च नमामि त्रिगुणात्मकम्॥३२
भावार्थ: जिनका समस्त शरीर भस्म से अलंकृत है, जो समस्त भूतों का आधार हैं, जो काल का भी अंत करने वाले हैं — उन त्रिगुणस्वरूप शिव को नमस्कार।

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नमो हेमाङ्गदच्छन्न वामाङ्गार्धप्रियेश्वर।
त्रिपुरान्तक कृपालो नमस्ते नीलकण्ठक॥३३
भावार्थ: हे स्वर्णाभूषणों से विभूषित, वामांग में अर्धनारी नायिका प्रिय वाले ईश्वर, त्रिपुरांतक, कृपालु, नीलकण्ठ — आपको नमस्कार।

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योगिभिः ध्यानगम्यं च तपसा निर्मलं शिवम्।
भजामि हृदयेनैव त्रैलोक्यैकगुरुं हरम्॥३४
भावार्थ: योगियों के ध्यानगम्य, तप से निर्मल, त्रैलोक्य के एकमात्र गुरु हर शिव को मैं हृदय से भजता हूँ।

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श्रीकण्ठं कमलापत्यप्रीतिं करुणामयम्।
सर्वदुःखनिवृत्त्यर्थं वन्दे भूतमहेश्वरम्॥३५
भावार्थ: लक्ष्मीपुत्र विष्णु को प्रिय, करुणामय, समस्त दुःखों के निवारण हेतु पूज्य, भूतमहेश्वर को मैं वन्दन करता हूँ।

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प्रणवस्वरूपं शुद्धं नादबिन्दुसमन्वितम्।
ऋषिभिर्मुनिभिः सेव्यं शाश्वतं वन्दे शंकरम्॥३६
भावार्थ: प्रणव (ॐ) स्वरूप, शुद्ध, नाद-बिन्दु से युक्त, ऋषियों-मुनियों द्वारा पूज्य, शाश्वत शंकर को मैं वन्दन करता हूँ।

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शिवो भूत्वा सदा रक्षेत् भक्तानां च मनोव्रतम्।
संसारदाहनाशाय नमः शम्भो दयामय॥३७
भावार्थ: शिव सदा अपने भक्तों के संकल्पों की रक्षा करें। संसार रूपी दाह का नाश करने वाले करुणामय शम्भो को नमस्कार।

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कैलासशिखराधीशं गङ्गाधरमनामयम्।
अरण्यवासनं देवं नमामि मुक्तिदायकम्॥३८
भावार्थ: कैलास शिखर के अधिपति, गङ्गाधर, रोगरहित, वनवास करने वाले मुक्तिदायक देव को मैं नमस्कार करता हूँ।

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विवेकज्ञानविज्ञानं शिवानुग्रहसंभवम्।
शिवपूजनमात्रेण तत्सर्वं लभ्यते ध्रुवम्॥३९
भावार्थ: विवेक, ज्ञान और विज्ञान — ये सब शिव की कृपा से ही प्राप्त होते हैं; केवल शिवपूजन से यह सब निश्चितरूप से प्राप्त हो सकता है।

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शिवध्यानपरं नित्यं यः पापं च न पश्यति।
तं लोकपावनं देवं नमामि हृदि संस्थितम्॥४०
भावार्थ: जो शिव का नित्य ध्यान करता है, वह पापों को नहीं देखता; वह स्वयं लोकों को पावन करने वाला देव है — ऐसे हृदयस्थ शिव को नमस्कार।

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महादेवं महायोगं महापापनिवारणम्।
महातेजोमयं देवं नमामि शिवमीश्वरम्॥४१
भावार्थ: जो महादेव, महान योगी, महापापों के निवारक, महान तेज से युक्त हैं — उन शिव ईश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ।

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प्रभुं प्रसन्नवदनं सौम्यं शान्तस्वरूपिणम्।
विश्वाधारं महेशं च नमामि भक्तवत्सलम्॥४२
भावार्थ: प्रसन्न मुख वाले, सौम्य, शान्तस्वरूप, सम्पूर्ण सृष्टि के आधार, भक्तवत्सल महेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।

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नीलकण्ठं विशालाक्षं शीतांशुकृतशेखरम्।
शिवं शाश्वतमव्यक्तं निर्गुणं प्रणमाम्यहम्॥४३
भावार्थ: नीलकण्ठ, विशाल नेत्रों वाले, चन्द्र को शिखा पर धारण करने वाले, शाश्वत, अव्यक्त, निर्गुण शिव को मैं प्रणाम करता हूँ।

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एको देवो महादेवः सर्वव्यापी निरामयः।
एको रुद्रो द्वितीयो नास्ति तस्मै श्रीशिवाय नमः॥४४
भावार्थ: एकमात्र देव महादेव ही हैं, जो सर्वत्र व्यापी, रोगरहित हैं; रुद्र के समान दूसरा कोई नहीं — ऐसे श्री शिव को नमस्कार।

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शिवः सर्वस्य शासनं शिवः सर्वस्य कारणम्।
शिवः संसारबीजस्य नाशको भवभीषणः॥४५
भावार्थ: शिव ही सबके शासक, शिव ही सबके कारण हैं; शिव ही संसार रूपी बीज का नाश करने वाले भव-भय का नाशक हैं।

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शूलहस्तं कृपावृष्टिं त्रिपुरासुर विनाशकम्।
भक्तवत्सलमव्यक्तं नमामि शिवमव्ययम्॥४६
भावार्थ: हाथ में शूल धारण करने वाले, करुणा की वर्षा करने वाले, त्रिपुरासुर विनाशक, भक्तों के प्रिय, अव्यक्त शिव को प्रणाम।

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दीनबन्धुं कृपालुं च कृपया लोकपालकम्।
जटाजूटधरं देवं नमामि हृदि भावितम्॥४७
भावार्थ: जो दीनों के बन्धु, कृपालु और कृपा से लोकों की रक्षा करते हैं, जटाजूट धारण करने वाले देव हैं — उन हृदयस्थ शिव को नमस्कार।

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नमः शिवाय शम्भवे शङ्कराय महात्मने।
नमो हराय नित्याय गिरिशाय नमो नमः॥४८
भावार्थ: शिव, शम्भु, शंकर, महात्मा, हर, नित्य, गिरिश — इन सभी नामों से पूज्य उस प्रभु को नमस्कार।

🍁
वेदान्तवेद्यं यं देवं ज्ञानस्वरूपमक्षरम्।
शिवं सच्चिदरूपं च भजेऽहं भक्तवत्सलम्॥४९
भावार्थ: जो देव वेदान्त से जाने जाते हैं, जो ज्ञानस्वरूप, अक्षर (अविनाशी), सच्चिदानन्दस्वरूप और भक्तवत्सल हैं — ऐसे शिव की मैं भक्ति करता हूँ।

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शिवस्तवं पठेद्यस्तु श्रद्धया पवित्रभावतः।
स मुक्तिं लभते नूनं शिवलोके महीयते॥५०
भावार्थ: जो श्रद्धा और पवित्र भाव से इस शिव स्तोत्र का पाठ करता है, वह निश्चित ही मुक्ति पाता है और शिवलोक में प्रतिष्ठित होता है।

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स्तोत्रराजमिदं दिव्यं शिवाय भक्तिवर्धनम्।
सर्वसौभाग्यदं नॄणां धनधान्ययुतं स्मृतम्॥५१
भावार्थ: यह दिव्य स्तोत्रराज शिवभक्ति को बढ़ाने वाला, सभी सौभाग्य देने वाला, धन और धान्य से युक्त करने वाला माना गया है।🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀
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*🙏जय माँ संतोषी, ॐ नमः शिवाय*🙏आज एकादशी है, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसको "जया एकादशी" के नाम से जाना जाता ह...
13/02/2026

*🙏जय माँ संतोषी, ॐ नमः शिवाय*🙏

आज एकादशी है, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसको "जया एकादशी" के नाम से जाना जाता है *।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।*

विजया एकादशी का महत्त्व:
धर्मराज युधिष्‍ठिर बोले: हे जनार्दन! आपने माघ के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का अत्यन्त सुंदर वर्णन करते हुए सुनाया। अब आप फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? तथा उसकी विधि क्या है? कृपा करके आप मुझे बताइए।

श्री भगवान बोले: हे राजन्, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम विजया एकादशी है। इसके व्रत के प्रभाव से मनुष्‍य को विजय प्राप्त‍ होती है। यह सब व्रतों से उत्तम व्रत है। इस विजया एकादशी के महात्म्य के श्रवण व पठन से समस्त पाप नाश को प्राप्त हो जाते हैं। भयंकर शत्रुओं से जब आप घिरे हों और पराजय सामने खड़ी हो उस विकट स्थिति में विजया नामक एकादशी आपको विजय दिलाने की क्षमता रखती है।

विजया एकादशी व्रत कथा!
एक समय देवर्षि नारदजी ने जगत् पिता ब्रह्माजी से कहा महाराज! आप मुझसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी विधान का कहिए। ब्रह्माजी कहने लगे कि हे नारद! विजया एकादशी का व्रत पुराने तथा नए पापों को नाश करने वाला है। इस विजया एकादशी की विधि मैंने आज तक किसी से भी नहीं कही। यह समस्त मनुष्यों को विजय प्रदान करती है।

त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्रजी जो विष्णु के अंशावतार थे, जब उनको चौदह वर्ष का वनवास हो गया, तब वे श्री लक्ष्मण तथा सीताजी ‍सहित पंचवटी में निवास करने लगे। वहाँ पर दुष्ट रावण ने जब सीताजी का हरण ‍किया तब इस समाचार से श्री रामचंद्रजी तथा लक्ष्मण अत्यंत व्याकुल हुए और सीताजी की खोज में चल दिए।

घूमते-घूमते जब वे मरणासन्न जटायु के पास पहुँचे तो जटायु उन्हें सीताजी का वृत्तांत सुनाकर स्वर्गलोक चला गया। कुछ आगे जाकर उनकी सुग्रीव से मित्रता हुई और बाली का वध किया। हनुमानजी ने लंका में जाकर सीताजी का पता लगाया और उनसे श्री रामचंद्रजी और सुग्रीव की‍ मित्रता का वर्णन किया। वहाँ से लौटकर हनुमानजी ने भगवान राम के पास आकर सब समाचार कहे।

श्री रामचंद्रजी ने वानर सेना सहित सुग्रीव की सम्पत्ति से लंका को प्रस्थान किया। जब श्री रामचंद्रजी समुद्र के किनारे पहुँचे तब उन्होंने मगरमच्छ आदि से युक्त उस अगाध समुद्र को देखकर लक्ष्मणजी से कहा कि इस समुद्र को हम किस प्रकार से पार करेंगे।

श्री लक्ष्मण ने कहा हे पुराण पुरुषोत्तम, आप आदिपुरुष हैं, सब कुछ जानते हैं। यहाँ से आधा योजन दूर पर कुमारी द्वीप में वकदाल्भ्य नाम के मुनि रहते हैं। उन्होंने अनेक ब्रह्मा देखे हैं, आप उनके पास जाकर इसका उपाय पूछिए। लक्ष्मणजी के इस प्रकार के वचन सुनकर श्री रामचंद्रजी वकदाल्भ्य ऋषि के पास गए और उनको प्रमाण करके बैठ गए।

मुनि ने भी उनको मनुष्य रूप धारण किए हुए पुराण पुरुषोत्तम समझकर उनसे पूछा कि हे राम! आपका आना कैसे हुआ? रामचंद्रजी कहने लगे कि हे ऋषे! मैं अपनी सेना ‍सहित यहाँ आया हूँ और राक्षसों को जीतने के लिए लंका जा रहा हूँ। आप कृपा करके समुद्र पार करने का कोई उपाय बतलाइए। मैं इसी कारण आपके पास आया हूँ।

वकदाल्भ्य ऋषि बोले कि हे राम! फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का उत्तम व्रत करने से निश्चय ही आपकी विजय होगी, साथ ही आप समुद्र भी अवश्य पार कर लेंगे। इस व्रत की विधि यह है कि दशमी के दिन स्वर्ण, चाँदी, ताँबा या मिट्‍टी का एक घड़ा बनाएँ। उस घड़े को जल से भरकर तथा पाँच पल्लव रख वेदिका पर स्थापित करें। उस घड़े के नीचे सतनजा और ऊपर जौ रखें। उस पर श्रीनारायण भगवान की स्वर्ण की मूर्ति स्थापित करें। एका‍दशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान की पूजा करें।

तत्पश्चात घड़े के सामने बैठकर दिन व्यतीत करें ‍और रात्रि को भी उसी प्रकार बैठे रहकर जागरण करें। द्वादशी के दिन नित्य नियम से निवृत्त होकर उस घड़े को ब्राह्मण को दे दें। हे राम! यदि तुम भी इस व्रत को सेनापतियों सहित करोगे तो तुम्हारी विजय अवश्य होगी। श्री रामचंद्रजी ने ऋषि के कथनानुसार इस व्रत को किया और इसके प्रभाव से दैत्यों पर विजय पाई।

अत: हे राजन्! जो कोई मनुष्य विधिपूर्वक इस व्रत को करेगा, दोनों लोकों में उसकी अवश्य विजय होगी। श्री ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था कि हे पुत्र! जो कोई इस व्रत के महात्म्य को पढ़ता या सुनता है, उसको वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं। इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है।*🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है। पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ। भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है। एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है।*🙏🏻 *एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें....... अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे।*🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए।*

एकादशी के माहात्म्य को सुनने से राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है *।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।*

*🙏जय माँ संतोषी, ॐ नमः शिवाय*🙏

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