16/04/2026
✍🏼....कुछ सलीके,कुछ सलीकों की बातें
कुछ सपने कुछ आँखों में कटती रातें
कुछ वाजिब सी उम्मीदें
कुछ हसरतों पर भारी जज्बात
मुझसे मत पूछ मेरी ज़िंदगी का सफरनामा
लोग आते रहे जाते रहे मेहमान बनकर
मैंने मेहमान को भगवान जाना
दिल किसी का न टूटे कभी मेरे कारण
दिल को अपने मैंने अपना न माना
ज़ुल्म सहता रहा वो भी मेरी तरह
और रौंदा जाता रहा मनमाना
मन्ज़िलों पर पहुंचा दिया कितनो को
पर आज तक तलाशता रहा वो एक ठिकाना
यूँ तो आज भी खड़े है इंतज़ार में कई
पर वो ही न समझा जिसको सब कुछ जाना
चलो अब शामिल हो जाये इस जहां की दौड़ में
लिखे कुछ अलग सा एक अफसाना
दिल निकाल कर लगा दें कुछ बेजान कलपुर्जे हम-तुम
कैसी यादें, कैसे रिश्ते, कौन से वादे, कहाँ का आशियाना
नही जुड़ा है कभी दिल किसी का टूटने के बाद
बेमतलब गढ़ता रहा हर कोई नया बहाना..............🫶🏼