21/12/2025
बांग्लादेश में सनातनी युवक दीपू चंदर दास की घटना पर गहरी चिंता
सनातन उत्कर्ष फाउंडेशन ने भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की
बांग्लादेश में सनातन धर्म से जुड़े युवक दीपू चंदर दास से संबंधित सामने आई गंभीर घटना ने भारत सहित वैश्विक सनातनी समाज में चिंता और आक्रोश उत्पन्न किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपू चंदर दास को उनकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाए जाने का आरोप है, जिससे बांग्लादेश में रह रहे सनातनी हिंदुओं के बीच असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है।
इस संदर्भ में सनातन उत्कर्ष फाउंडेशन ने भारत सरकार से औपचारिक अनुरोध करते हुए कहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सनातनियों की सुरक्षा केवल मानवाधिकारों का विषय नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय नैतिक दायित्वों और वैश्विक मानव मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है।
केंद्र सरकार से प्रमुख मांगें
सनातन उत्कर्ष फाउंडेशन ने भारत सरकार से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है—
भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर बांग्लादेश सरकार से वार्ता करे
दीपू चंदर दास से जुड़ी घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराई जाए
बांग्लादेश में रह रहे सनातनी हिंदुओं, साधु-संतों और मंदिरों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी उपाय किए जाएं
साधु-संतों एवं सनातनी संगठनों से विशेष अपील
फाउंडेशन ने देश-विदेश के साधु-संतों, अखाड़ों, मंदिर समितियों और सनातनी संगठनों से भी आग्रह किया है कि वे इस विषय को अपने-अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों और सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर साझा करें, ताकि—
वैश्विक स्तर पर जागरूकता उत्पन्न हो
पीड़ित को नैतिक और सामाजिक समर्थन प्राप्त हो
अंतरराष्ट्रीय दबाव के माध्यम से न्याय सुनिश्चित किया जा सके
“यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं”
सनातन उत्कर्ष फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश में सनातनी समाज की वर्तमान स्थिति को दर्शाती है। यदि समय रहते इस विषय पर प्रभावी ढंग से आवाज़ नहीं उठाई गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी राष्ट्र या समुदाय के विरुद्ध विद्वेष फैलाना नहीं, बल्कि धर्म, मानवता और न्याय की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मार्ग से अपनी बात रखना है।